पटना: बिहार में राजभवन और राज्य सरकार के बीच अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले और नई पोस्टिंग को लेकर मामला सामने आया है। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने लोकभवन में तैनात कर्मचारियों के ट्रांसफर और नई नियुक्तियों को लेकर आपत्ति जताई है। राज्यपाल सचिवालय ने निर्देश दिया है कि लोकभवन में किसी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला करने अथवा नए कर्मचारी की पोस्टिंग से पहले इसकी जानकारी राज्यपाल को दी जाए।
राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ गई है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किन अधिकारियों या कर्मचारियों के तबादले को लेकर यह आपत्ति जताई गई है।
राज्यपाल सचिवालय के मुताबिक, उसके संज्ञान में आया है कि लोकभवन में तैनात कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को दूसरे विभागों में भेजा जा रहा है। वहीं, कुछ नए अधिकारियों और कर्मचारियों को लोकभवन में नियुक्त किया जा रहा है।
सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि लोकभवन से जुड़े ऐसे किसी भी तबादले या नई पोस्टिंग से पहले संबंधित प्रस्ताव उचित माध्यम से राज्यपाल के सामने रखा जाना चाहिए। यानी आगे से लोकभवन में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति या तबादले की प्रक्रिया में राज्यपाल सचिवालय को पहले जानकारी देना जरूरी होगा।
फिलहाल यह तस्वीर साफ नहीं है कि राज्यपाल की नाराजगी किस खास अधिकारी या कर्मचारी के तबादले को लेकर है। हाल के महीनों में लोकभवन में कई अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति और तबादले हुए हैं।
3 अगस्त को बिहार सचिवालय आशुलिपिक सेवा के अधिकारी संजय सिंह को लोकभवन में तैनात करने का आदेश जारी हुआ था। इससे पहले जुलाई में लोकभवन में तैनात प्रधान आप्त सचिव नीरू पाठक को हटाकर मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय में आप्त सचिव बनाया गया था।
इसी दिन आशुलिपिक गोपाल कुमार का भी लोकभवन से तबादला कर मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय में पदस्थापन किया गया था।
लोकभवन में अधिकारियों की तैनाती में बदलाव जून महीने में भी हुआ था। 18 जून को आशुलिपिक सेवा की अधिकारी अंजु कुमारी और सत्यप्रकाश कुमार को मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय से स्थानांतरित कर राज्यपाल सचिवालय में तैनात किया गया था।
वहीं, 17 जून को राज्यपाल सचिवालय में अपर सचिव के पद पर तैनात आईएएस अधिकारी नंदलाल आर्या का तबादला कर उन्हें बक्सर का बंदोबस्त पदाधिकारी बनाया गया था।
इसके अलावा 1 जून को आईएएस अधिकारी संजय कुमार को ग्रामीण कार्य विभाग से स्थानांतरित कर लोकभवन में अपर सचिव के पद पर तैनात किया गया था।
इस पूरे मामले में एक अहम पहलू यह भी है कि सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी कई अधिसूचनाओं में अधिकारियों के तबादले और नियुक्तियां राज्यपाल की अनुमति से किए जाने का उल्लेख है।
ऐसे में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि राज्यपाल सचिवालय की मौजूदा आपत्ति किन तबादलों या नियुक्तियों से जुड़ी है। यही वजह है कि पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सैयद अता हसनैन ने 14 मार्च 2026 को बिहार के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। वह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल हैं और सेना में करीब चार दशक तक अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
लोकभवन में ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर राज्यपाल सचिवालय के नए निर्देश के बाद अब नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि लोकभवन में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति व तबादले की प्रक्रिया में क्या बदलाव किया जाता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पटना। बिहार में करीब 11.04 लाख नए राशन कार्ड जोड़ने का लक्ष्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। बिहार आपूर्ति सेवा संघ ने सरकार के इस लक्ष्य पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पर्याप्त संसाधनों के बिना इसे पूरा करना मुश्किल है। संघ ने 20 से 26 अगस्त तक काला बिल्ला लगाकर विरोध करने का ऐलान किया है। संसाधनों के बिना लक्ष्य पूरा करना मुश्किल आपूर्ति अधिकारियों का कहना है कि राशन कार्ड से जुड़े काम के लिए कंप्यूटर, स्कैनर, इंटरनेट और विभागीय वाहनों जैसी जरूरी सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। दस्तावेजों की जांच, प्रिंटआउट और फील्ड विजिट का खर्च भी कई जगह अधिकारियों को खुद उठाना पड़ रहा है। संघ के अनुसार, यह खर्च करीब 250 से 300 रुपये प्रति कार्ड तक पहुंच रहा है। पुराने आंकड़ों के आधार पर लक्ष्य तय करने का आरोप आपूर्ति सेवा संघ ने 11.04 लाख राशन कार्ड के लक्ष्य के आधार पर भी सवाल उठाए हैं। संघ के मुताबिक यह लक्ष्य किसी नए सर्वे के बजाय उपलब्ध आंकड़ों और एक गणितीय फॉर्मूले के आधार पर तय किया गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, एनएफएसए के तहत 8.71 करोड़ लाभुकों की अधिकतम सीमा है, जिसमें से करीब 8.24 करोड़ लोग पहले से आच्छादित हैं। इसी आधार पर बची हुई सीमा और औसत परिवार के आकार के हिसाब से करीब 11.04 लाख नए राशन कार्ड का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। फोन और जीपीएस को लेकर भी नाराजगी संघ ने अधिकारियों के सीयूजी फोन पर कॉल रिसीव नहीं होने या जीपीएस लाइव लोकेशन नहीं मिलने के आधार पर वेतन काटे जाने का भी विरोध किया है। संघ का कहना है कि ऐसे फैसलों से अधिकारियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। पहले काला बिल्ला, फिर सामूहिक अवकाश की चेतावनी अधिकारियों और कर्मचारियों ने फिलहाल 20 से 26 अगस्त तक काला बिल्ला लगाकर काम करने का फैसला लिया है। इस दौरान सरकारी कामकाज जारी रहेगा। हालांकि, संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर समाधान नहीं निकला तो आगे सामूहिक अवकाश और फिर पूर्ण हड़ताल का कदम उठाया जा सकता है। संघ की ओर से विभाग, मुख्य सचिव और संबंधित मंत्री को आंदोलन की सूचना दी जा चुकी है। अब सरकार और आपूर्ति अधिकारियों के बीच इस विवाद का समाधान कैसे निकलता है, इस पर सभी की नजर है।
पटना: बिहार में राजभवन और राज्य सरकार के बीच अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले और नई पोस्टिंग को लेकर मामला सामने आया है। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने लोकभवन में तैनात कर्मचारियों के ट्रांसफर और नई नियुक्तियों को लेकर आपत्ति जताई है। राज्यपाल सचिवालय ने निर्देश दिया है कि लोकभवन में किसी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला करने अथवा नए कर्मचारी की पोस्टिंग से पहले इसकी जानकारी राज्यपाल को दी जाए। राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ गई है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किन अधिकारियों या कर्मचारियों के तबादले को लेकर यह आपत्ति जताई गई है। बिना जानकारी ट्रांसफर-पोस्टिंग पर राज्यपाल सचिवालय की आपत्ति राज्यपाल सचिवालय के मुताबिक, उसके संज्ञान में आया है कि लोकभवन में तैनात कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को दूसरे विभागों में भेजा जा रहा है। वहीं, कुछ नए अधिकारियों और कर्मचारियों को लोकभवन में नियुक्त किया जा रहा है। सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि लोकभवन से जुड़े ऐसे किसी भी तबादले या नई पोस्टिंग से पहले संबंधित प्रस्ताव उचित माध्यम से राज्यपाल के सामने रखा जाना चाहिए। यानी आगे से लोकभवन में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति या तबादले की प्रक्रिया में राज्यपाल सचिवालय को पहले जानकारी देना जरूरी होगा। किन अधिकारियों के तबादले से जुड़ा है मामला? फिलहाल यह तस्वीर साफ नहीं है कि राज्यपाल की नाराजगी किस खास अधिकारी या कर्मचारी के तबादले को लेकर है। हाल के महीनों में लोकभवन में कई अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति और तबादले हुए हैं। 3 अगस्त को बिहार सचिवालय आशुलिपिक सेवा के अधिकारी संजय सिंह को लोकभवन में तैनात करने का आदेश जारी हुआ था। इससे पहले जुलाई में लोकभवन में तैनात प्रधान आप्त सचिव नीरू पाठक को हटाकर मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय में आप्त सचिव बनाया गया था। इसी दिन आशुलिपिक गोपाल कुमार का भी लोकभवन से तबादला कर मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय में पदस्थापन किया गया था। जून में भी हुआ था अधिकारियों का फेरबदल लोकभवन में अधिकारियों की तैनाती में बदलाव जून महीने में भी हुआ था। 18 जून को आशुलिपिक सेवा की अधिकारी अंजु कुमारी और सत्यप्रकाश कुमार को मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय से स्थानांतरित कर राज्यपाल सचिवालय में तैनात किया गया था। वहीं, 17 जून को राज्यपाल सचिवालय में अपर सचिव के पद पर तैनात आईएएस अधिकारी नंदलाल आर्या का तबादला कर उन्हें बक्सर का बंदोबस्त पदाधिकारी बनाया गया था। इसके अलावा 1 जून को आईएएस अधिकारी संजय कुमार को ग्रामीण कार्य विभाग से स्थानांतरित कर लोकभवन में अपर सचिव के पद पर तैनात किया गया था। कई नियुक्तियों में राज्यपाल की अनुमति का भी जिक्र इस पूरे मामले में एक अहम पहलू यह भी है कि सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी कई अधिसूचनाओं में अधिकारियों के तबादले और नियुक्तियां राज्यपाल की अनुमति से किए जाने का उल्लेख है। ऐसे में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि राज्यपाल सचिवालय की मौजूदा आपत्ति किन तबादलों या नियुक्तियों से जुड़ी है। यही वजह है कि पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मार्च में बिहार के राज्यपाल बने थे सैयद अता हसनैन सैयद अता हसनैन ने 14 मार्च 2026 को बिहार के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। वह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल हैं और सेना में करीब चार दशक तक अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। लोकभवन में ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर राज्यपाल सचिवालय के नए निर्देश के बाद अब नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि लोकभवन में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति व तबादले की प्रक्रिया में क्या बदलाव किया जाता है।
पटना: राजधानी पटना में गुरुवार यानी 20 अगस्त को घर से निकलने से पहले ट्रैफिक और बिजली से जुड़ी जरूरी जानकारी जान लेना बेहतर होगा। गांधी मैदान और आसपास के इलाकों में एक बड़े सरकारी कार्यक्रम को देखते हुए ऑटो, ई-रिक्शा और व्यावसायिक वाहनों के परिचालन पर अस्थायी रोक रहेगी। वहीं, शहर के कई हिस्सों में बिजली के प्रोजेक्ट कार्य के चलते अलग-अलग समय पर बिजली आपूर्ति भी बाधित हो सकती है। बापू सभागार में ग्रामीण विकास मंत्रालय के कार्यक्रम को देखते हुए सुबह से ही गांधी मैदान इलाके में ट्रैफिक व्यवस्था बदली रहेगी। कार्यक्रम सुबह 11 बजे शुरू होना है और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर सुबह 9 बजे से कार्यक्रम खत्म होने तक कुछ वाहनों को प्रतिबंधित किया गया है। गांधी मैदान के आसपास इन वाहनों पर रहेगी रोक गांधी मैदान के चारों तरफ ऑटो, ई-रिक्शा और व्यावसायिक वाहनों के परिचालन पर रोक रहेगी। इसके अलावा बुद्धमार्ग-छज्जूबाग से टीएन बनर्जी पथ तक भी इन वाहनों को जाने की अनुमति नहीं होगी। पुलिस लाइन गेट नंबर-1 से बैंक रोड और बुद्धमार्ग में पुलिस लाइन तिराहा से कोतवाली टी तक भी ऑटो और ई-रिक्शा का परिचालन प्रतिबंधित रहेगा। इसलिए अगर आपका काम गांधी मैदान, बापू सभागार, बुद्धमार्ग या आसपास के इलाके में है तो यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलना बेहतर होगा। इन रूटों पर बदलेगा ऑटो-ई-रिक्शा का रास्ता ट्रैफिक पुलिस ने कई प्रमुख रास्तों पर वाहनों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की है। दानापुर से राजापुर पुल की ओर आने वाले ऑटो-ई-रिक्शा पुलिस लाइन तिराहा से वापस दानापुर की तरफ भेजे जाएंगे। अशोक राजपथ और गायघाट की ओर से आने वाले वाहन करगिल चौक से पश्चिम डबल डेकर के पश्चिमी छोर के पास यू-टर्न लेकर वापस गायघाट की ओर जाएंगे। भट्टाचार्य चौराहा से गांधी मैदान की तरफ ऑटो और ई-रिक्शा का परिचालन बंद रहेगा। गांधी मैदान और बाकरगंज की दिशा में भी इन वाहनों को प्रवेश नहीं मिलेगा। ऐसे में यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक साधनों या रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। पटना के 35 इलाकों में बिजली कटौती ट्रैफिक बदलाव के साथ गुरुवार को पटना के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित होगी। प्रोजेक्ट कार्य के कारण 11 केवी के सात फीडरों को अलग-अलग समय पर बंद रखा जाएगा। सुबह 8 से 9 बजे तक यूनिवर्सिटी फीडर बंद रहने के कारण माखनियां कुआं, खुदा बख्श लाइब्रेरी और अशोक राजपथ से जुड़े इलाकों में बिजली प्रभावित हो सकती है। सुबह 8 से 10 बजे तक ईस्ट फीडर बंद रहेगा। इस दौरान संबंधित इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित रहने की संभावना है। सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक लोहियापथ और उत्तरी जयप्रकाश नगर फीडर बंद रहने से लोहियापथ, शर्मा पथ, रूपसपुर भट्टा, चमरटोली, महुआ बाग, झंडी रोड और उत्तरी जयप्रकाश नगर के रोड नंबर 1 से 4 तक बिजली प्रभावित रहेगी। सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक रेडिएंट और त्रिभुवन फीडर से जुड़े इलाकों में बिजली कटौती होगी। इनमें कश्यप ग्रीन सिटी, कोथवां गांव, राजदेव इनक्लेव, त्रिभुवन स्कूल, विजय यादव पथ, यशोदा कॉलोनी और विद्युत नगर समेत आसपास के इलाके शामिल हैं। घर से निकलने से पहले यह जरूर देख लें गुरुवार को पटना में एक साथ ट्रैफिक डायवर्जन और बिजली कटौती के कारण लोगों को परेशानी हो सकती है। खासकर गांधी मैदान और आसपास जाने वाले लोगों को बदले हुए रूट का ध्यान रखना चाहिए। वहीं, जिन इलाकों में बिजली कटौती का समय तय है, वहां लोग मोबाइल चार्जिंग, पानी की मोटर और दूसरे जरूरी काम पहले ही निपटा लें। ट्रैफिक वाले इलाकों में जाने वालों के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलना भी बेहतर रहेगा।