बिहार

बिहार में महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘पुलिस दीदी’ योजना, स्कूल-कॉलेजों के आसपास तैनात होंगी महिला पुलिसकर्मी

abhishek singh अगस्त 16, 2026 0
Police Didi
Police Didi Scheme in Bihar

पटना, एजेंसिया। बिहार सरकार ने महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ‘पुलिस दीदी’ पहल को और प्रभावी बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 15 अगस्त को गांधी मैदान में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान बताया कि स्कूलों और कॉलेजों के आसपास महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। इसका उद्देश्य छात्राओं को सुरक्षित माहौल देना और छेड़खानी व अन्य घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

 

स्कूल-कॉलेज के आसपास रहेगी विशेष निगरानी

 

‘पुलिस दीदी’ के तहत महिला पुलिसकर्मियों को विशेष रूप से उन स्थानों पर गश्त और निगरानी की जिम्मेदारी दी जाएगी, जहां छात्राओं की आवाजाही अधिक रहती है। पुलिस की मौजूदगी से छेड़खानी और महिलाओं से जुड़े अपराधों पर रोक लगाने के साथ-साथ छात्राओं में सुरक्षा की भावना बढ़ाने का लक्ष्य है।

 

5 हजार ‘पुलिस दीदी’ तैनात करने की घोषणा

 

स्वतंत्रता दिवस पर सामने आई जानकारी के अनुसार बिहार में करीब 5,000 ‘पुलिस दीदी’ तैनात करने की योजना है। वहीं, पुलिस मुख्यालय ने इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए 1,500 स्कूटरों का ऑर्डर भी दिया है। इससे महिला पुलिसकर्मियों को स्कूल-कॉलेजों और संवेदनशील इलाकों में तेजी से पहुंचने में मदद मिलेगी।

 

‘अभया ब्रिगेड’ के तहत होगी कार्रवाई

 

यह पहल ‘अभया ब्रिगेड’ से भी जुड़ी है। इसका मुख्य फोकस महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, संवेदनशील इलाकों में गश्त और शिकायत मिलने पर त्वरित प्रतिक्रिया पर है। पुलिस दीदियों की तैनाती को राज्य की महिला सुरक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

पहले से भी की जा रही है कार्रवाई

 

बिहार पुलिस ने महिला एवं छात्राओं की सुरक्षा के लिए पुलिस दीदी टीमों के माध्यम से कार्रवाई शुरू कर रखी है। हाल की रिपोर्ट के अनुसार, इन टीमों ने मनचलों के खिलाफ 612 कार्रवाई की हैं। सरकार अब इस व्यवस्था को अधिक व्यापक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर जोर दे रही है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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CEC ज्ञानेश कुमार का पटना दौरा, मतदाता साक्षरता अभियान और चुनावी तैयारियों पर रहेगा फोकस

पटना, एजेंसियां। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार 16 अगस्त 2026 से बिहार के दो दिवसीय दौरे पर हैं। उनके पटना दौरे का प्रमुख उद्देश्य मतदाता जागरूकता बढ़ाने और चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करने से जुड़ी पहलों की समीक्षा करना है। चुनाव आयोग के अनुसार, पटना से Electoral Literacy Club (ELC) 2.0 की शुरुआत की जाएगी।   पटना से शुरू होगा ELC 2.0   CEC ज्ञानेश कुमार 17 अगस्त को पटना के ज्ञान भवन में आयोजित सम्मेलन के दौरान Electoral Literacy Club 2.0 और ECINET से जुड़ी पहल का शुभारंभ करेंगे। ELC का उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं में चुनावी प्रक्रिया को लेकर जागरूकता बढ़ाना है।   तीन जिलों का भी दौरा   दौरे के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त बिहार के तीन जिलों वैशाली, मधुबनी और सीतामढ़ी में भी जाएंगे और मतदाता जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा अधिकारियों, बूथ लेवल अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों के साथ बातचीत का कार्यक्रम भी है।   चुनावी व्यवस्था और मतदाता जागरूकता पर जोर   पटना दौरे को बिहार में चुनावी प्रक्रिया को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग का फोकस मतदाता साक्षरता, नए मतदाताओं की भागीदारी और चुनावी प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने पर है।

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मुजफ्फरपुर में ब्यूटी पार्लरों पर पुलिस की छापेमारी
मुजफ्फरपुर में दो ब्यूटी पार्लरों पर पुलिस की छापेमारी, 12 महिलाएं और एक पुरुष हिरासत में

मुजफ्फरपुर, एजेंसियां। बिहार के मुजफ्फरपुर में पुलिस ने ब्यूटी पार्लरों और मसाज सेंटरों की आड़ में कथित अवैध गतिविधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। नगर और काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्रों में पुलिस टीम ने संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर 12 महिलाओं और एक पुरुष को हिरासत में लिया है। पुलिस ने मौके से कुछ आपत्तिजनक सामान भी बरामद किए हैं।   गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई     पुलिस के अनुसार, शहर के कुछ ब्यूटी पार्लरों और मसाज सेंटरों में संदिग्ध गतिविधियां संचालित होने की सूचना मिल रही थी। इसके बाद विशेष पुलिस टीम ने नगर और काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र में एक साथ कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान संचालिका समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया।     12 महिलाओं समेत 13 लोग हिरासत में     कार्रवाई में कुल 13 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है, जिनमें 12 महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं। पुलिस सभी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इन प्रतिष्ठानों का संचालन किस तरह किया जा रहा था।     लापता बच्चियों के रेस्क्यू की भी जानकारी     पुलिस कार्रवाई के दौरान कुछ लापता बच्चियों को रेस्क्यू किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि इन बच्चियों और महिलाओं को इन ठिकानों तक कैसे लाया गया और क्या इनके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था।     पुराने मामलों से भी जुड़ सकते हैं तार     पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान इस कार्रवाई के तार कांटी थाना क्षेत्र में दर्ज कुछ पुराने अपहरण के मामलों से जुड़े होने की आशंका भी सामने आई है। हालांकि, इन मामलों के बीच संबंध की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटी है।  

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बिहार की 8,053 पंचायतों में पंचायत भवन पर ही बनेगा आधार कार्ड, 64 तरह की सुविधाएं भी मिलेंगी

पटना, एजेंसियां। बिहार के ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य की सभी 8,053 पंचायतों में पंचायत सरकार भवन के जरिए आधार सेवा केंद्र शुरू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ग्रामीणों को आधार बनवाने या उसमें बदलाव कराने के लिए प्रखंड या जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।   पंचायत भवन में ही आधार का काम     प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पंचायत सरकार भवन में आधार सेवा केंद्र खोले जाएंगे। यहां नया आधार बनवाने के साथ आधार में जरूरी अपडेट भी कराया जा सकेगा। पंचायती राज विभाग और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के बीच इसके संचालन को लेकर करार की प्रक्रिया चल रही है।   केंद्र के लिए जरूरी कंप्यूटर और अन्य उपकरण पंचायती राज विभाग उपलब्ध कराएगा, जबकि संचालन CSC के कर्मचारी करेंगे। आधार सेवा केंद्र चलाने के लिए आवश्यक अनुमति भी मिल चुकी है।   आधार के अलावा 64 नागरिक सेवाओं का लाभ     इन केंद्रों पर सिर्फ आधार से जुड़े काम नहीं होंगे। ग्रामीणों को करीब 64 तरह की सरकारी और नागरिक सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध कराने की योजना है। इनमें जाति, आय और आवास प्रमाण पत्र, पेंशन, राशन कार्ड, दाखिल-खारिज, जमाबंदी, एलपीसी और ऑनलाइन लगान भुगतान जैसी सेवाएं शामिल हैं।   इसके अलावा छात्रवृत्ति, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदन और कृषि से जुड़ी सेवाओं का लाभ भी पंचायत स्तर पर मिलने की व्यवस्था की जाएगी।   पैन कार्ड से लेकर टिकट बुकिंग तक सुविधा     पंचायत भवन में प्रस्तावित केंद्रों पर पैन कार्ड, पासबुक अपडेट और बिजली-पानी जैसे यूटिलिटी बिलों के भुगतान की सुविधा भी मिलेगी। बैंकिंग और बीमा से जुड़ी सेवाओं में लोन तथा माइक्रो क्रेडिट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।   यात्रियों के लिए रेल, बस और हवाई टिकट बुकिंग की सुविधा भी प्रस्तावित है। इससे ग्रामीणों को छोटे-छोटे सरकारी और डिजिटल कामों के लिए प्रखंड मुख्यालय जाने की जरूरत कम होगी।   आधार बनाने के लिए 75 रुपये शुल्क     नई व्यवस्था में नया आधार बनवाने के लिए 75 रुपये शुल्क निर्धारित होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, जाति, आय, आवास और कुछ अन्य प्रमाण पत्रों से जुड़ी करीब 21 सेवाओं के लिए शुल्क नहीं लिया जाएगा। निर्धारित शुल्क से अधिक राशि मांगने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही गई है।   फिलहाल यह योजना शुरू करने की तैयारी चल रही है। पंचायती राज विभाग और CSC के बीच समझौते के बाद पंचायत सरकार भवनों में इन केंद्रों के संचालन का रास्ता साफ होगा।

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