अगस्त की सबसे बड़ी सीख यही है कि हर सवाल का जवाब परिस्थितियां बदलने से नहीं मिलता, कई बार अपनी सोच बदलने से भी रास्ता साफ हो जाता है। आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी 12 राशियों के लिए अगस्त 2026 कैसा रहने वाला है।
अगस्त में मेष राशि वालों को किसी काम, रिश्ते या आर्थिक मामले से जुड़ी ऐसी जानकारी मिल सकती है, जो अब तक उनकी नजर से दूर थी। इसके बाद कोई ऐसा फैसला भी स्पष्ट हो सकता है, जो पहले जोखिम भरा लग रहा था। अपनी ऊर्जा हर जिम्मेदारी पर खर्च करने के बजाय जरूरी कामों को प्राथमिकता दें। महीने के अंत तक आपकी रफ्तार बढ़ेगी, लेकिन इस बार सफलता तेजी से ज्यादा सही दिशा पर निर्भर करेगी।
टैरो कार्ड्स: Six of Pentacles, The Moon (Reversed), Knight of Wands
शुभ रंग: सिल्वर ग्रे | शुभ अंक: 18
अगस्त आपको यह समझाने वाला है कि हर रिश्ते और हर जिम्मेदारी में बराबर ऊर्जा लगाना जरूरी नहीं है। अगर किसी रिश्ते या काम में पहल लगातार आपकी तरफ से ही हो रही थी, तो अब स्थिति को नए नजरिए से देखेंगे। महीने के दूसरे हिस्से में किसी नए रिश्ते, साझेदारी या काम की शुरुआत हो सकती है। इस बार भावनाओं के साथ अपनी जरूरतों और सीमाओं को भी महत्व देंगे।
टैरो कार्ड्स: Five of Swords, Queen of Wands, Ace of Cups
शुभ रंग: सुनहरा नारंगी | शुभ अंक: 1
मिथुन राशि वालों के लिए अगस्त पुराने ढर्रे से बाहर निकलने का मौका ला सकता है। काम, रिश्ते या किसी योजना में अचानक बदलाव शुरुआत में असहज कर सकता है, लेकिन बाद में समझ आएगा कि यह बदलाव जरूरी था। पुरानी सोच छोड़कर नई परिस्थितियों को स्वीकार करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। महीने के अंत तक काम में स्थिरता और आपकी निर्णय क्षमता पर लोगों का भरोसा बढ़ सकता है।
टैरो कार्ड्स: The Tower, Eight of Pentacles, King of Cups
शुभ रंग: लाल | शुभ अंक: 16
अगस्त में कर्क राशि वालों को किसी पुरानी आदत, अधूरे फैसले, आर्थिक मामले या रिश्ते पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। कोई बातचीत या घटना आपकी सोच बदल सकती है। अगर आप अतीत की गलती से सीखने के लिए तैयार हैं, तो आगे का रास्ता आसान हो सकता है। इस महीने जरूरी होगा कि जो चीज अब आगे बढ़ने में बाधा बन रही है, उसे पहचानकर उससे बाहर निकलें।
टैरो कार्ड्स: Three of Wands, Justice (Reversed), The Devil
शुभ रंग: इंडिगो | शुभ अंक: 11
सिंह राशि वालों के लिए अगस्त रिश्तों और संवाद पर ध्यान देने वाला महीना रहेगा। परिवार या करीबी व्यक्ति के साथ जल्दबाजी में कही गई बात गलतफहमी बढ़ा सकती है। इसलिए अपनी बात मनवाने के बजाय सामने वाले को समझने की कोशिश करें। महीने के दूसरे हिस्से में तनाव कम होने और निजी जीवन में राहत मिलने के संकेत हैं। ईमानदार संवाद रिश्तों को मजबूत कर सकता है।
टैरो कार्ड्स: Ten of Cups (Reversed), Knight of Swords, The Sun
शुभ रंग: सुनहरा पीला | शुभ अंक: 19
कन्या राशि वालों को अगस्त में अपनी ऊर्जा के सही इस्तेमाल पर ध्यान देना होगा। लगातार जिम्मेदारियां संभालने से थकान महसूस हो सकती है। हर काम अकेले करने की आदत छोड़कर प्राथमिकताएं तय करें। महीने के दूसरे हिस्से में रुके हुए काम में प्रगति के अवसर मिल सकते हैं। पुरानी योजना को बेहतर बनाना इस समय नई योजना शुरू करने से ज्यादा फायदेमंद रहेगा।
टैरो कार्ड्स: King of Pentacles, Nine of Wands, Wheel of Fortune (Reversed)
शुभ रंग: ऑलिव ग्रीन | शुभ अंक: 10
अगस्त में तुला राशि वालों के सामने मौजूद कई विकल्पों में से सही रास्ता चुनना आसान हो सकता है। आपको महसूस होगा कि हर अवसर आपके लिए जरूरी नहीं है। लंबे समय की स्थिरता देने वाले विकल्प को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा। महीने के दूसरे हिस्से में परिवार, करियर या आर्थिक मामलों से जुड़ी अच्छी खबर मिल सकती है। अनुभवी व्यक्ति की सलाह भी उपयोगी साबित हो सकती है।
टैरो कार्ड्स: Seven of Cups, The Hermit, Ten of Pentacles
शुभ रंग: मिट्टी जैसा भूरा | शुभ अंक: 9
वृश्चिक राशि वालों के लिए अगस्त रिश्तों और साझेदारी के मामले में सतर्क रहने का संकेत दे रहा है। नया प्रस्ताव, दोस्ती या साझेदारी सामने आ सकती है, लेकिन केवल उत्साह में फैसला लेने से बचें। पहले सामने वाले को समझें, फिर भरोसा करें। महीने के दूसरे हिस्से में किसी रिश्ते में भरोसा मजबूत हो सकता है और पुराने मतभेद बातचीत से दूर हो सकते हैं।
टैरो कार्ड्स: The Fool (Reversed), Strength, Two of Cups
शुभ रंग: मैरून | शुभ अंक: 8
धनु राशि वालों के लिए अगस्त पुराने अध्याय को बंद करके नई शुरुआत करने का संकेत दे रहा है। करियर, रिश्ते, कारोबार या निजी लक्ष्य से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण फैसला लेना पड़ सकता है। शुरुआत में बदलाव कठिन लग सकता है, लेकिन आगे बढ़ने के लिए यह जरूरी साबित होगा। महीने के दूसरे हिस्से में आपकी मेहनत और फैसलों का असर दिखाई दे सकता है।
टैरो कार्ड्स: Queen of Swords, Death, Six of Wands
शुभ रंग: गहरा नीला | शुभ अंक: 13
मकर राशि वालों को अगस्त में यह समझ आएगा कि हर काम अकेले करना जरूरी नहीं है। सही टीम, अनुभवी व्यक्ति की सलाह या साझेदारी आपकी प्रगति को तेज कर सकती है। कोई पुराना तरीका या प्रोजेक्ट आगे बढ़ने में बाधा बन रहा है तो उसे छोड़ने पर विचार करें। नई सोच अपनाने से काम की पहचान बढ़ सकती है और भविष्य के लिए मजबूत नींव तैयार होगी।
टैरो कार्ड्स: Three of Pentacles, The Sun, Eight of Cups (Reversed)
शुभ रंग: सुनहरा पीला | शुभ अंक: 19
कुंभ राशि वालों के लिए अगस्त धैर्य और रणनीति का महीना रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी योजना पर सवाल उठ सकते हैं या कुछ लोग आपकी राय से सहमत नहीं होंगे। ऐसे समय में अनावश्यक बहस से बचकर अपनी रणनीति पर टिके रहना बेहतर होगा। महीने के दूसरे हिस्से में आपकी तैयारी और अनुभव को सामने लाने वाला अवसर मिल सकता है।
टैरो कार्ड्स: Knight of Pentacles, The High Priestess, Five of Wands
शुभ रंग: बैंगनी | शुभ अंक: 2
मीन राशि वालों के लिए अगस्त आत्मविश्वास वापस पाने का महीना बन सकता है। किसी फैसले या अवसर को लेकर जो असमंजस था, वह धीरे-धीरे दूर होगा। महीने के मध्य से करियर, कारोबार, पढ़ाई या रचनात्मक क्षेत्र में आपकी प्रतिभा लोगों का ध्यान आकर्षित कर सकती है। जिस अवसर का इंतजार था, वह मिल सकता है या आप खुद उसके लिए रास्ता बना सकते हैं।
टैरो कार्ड्स: Judgment (Reversed), The Magician, Nine of Cups
अगस्त 2026 का महीना यह संकेत देता है कि बदलाव हमेशा नुकसान नहीं होता। कई बार पुरानी सोच, आदत या परिस्थिति से बाहर निकलना ही आगे बढ़ने की पहली सीढ़ी बनता है। इस महीने जल्दबाजी के बजाय सही समय, सही लोगों और सही फैसलों पर भरोसा करना ज्यादा महत्वपूर्ण रहेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर देशभर के मंदिरों, मठों और आश्रमों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही लोग अपने गुरुजनों का आशीर्वाद लेने और पूजा-अर्चना करने के लिए धार्मिक स्थलों पर पहुंचे। कई स्थानों पर विशेष भजन-कीर्तन, हवन और आध्यात्मिक प्रवचनों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने गुरु को ज्ञान और जीवन का मार्गदर्शक बताते हुए उनका सम्मान किया। प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष आयोजन वाराणसी, हरिद्वार, उज्जैन, प्रयागराज, नासिक और अन्य प्रमुख धार्मिक शहरों के मंदिरों और आश्रमों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। कई आध्यात्मिक संस्थाओं ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सामूहिक पूजा, सत्संग और सेवा कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। गुरु-शिष्य परंपरा का पर्व भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा को गुरु-शिष्य परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती भी मनाई जाती है। श्रद्धालु अपने गुरुओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और आध्यात्मिक उन्नति का संकल्प लेते हैं।
Aaj Ka Ank Jyotish, 29 July 2026: 29 जुलाई का दिन अंक ज्योतिष के लिहाज से संतुलन, सहयोग और समझदारी से फैसले लेने का संदेश दे रहा है। आज मूलांक 2 की शांत, संवेदनशील और भावनात्मक ऊर्जा के साथ साल 2026 का मूलांक 1 आत्मविश्वास और नई शुरुआत की प्रेरणा देता है। ऐसे में आज आगे बढ़ने के लिए अपनी बात पर अड़े रहने के बजाय दूसरों की राय सुनना और मिलकर काम करना अधिक फायदेमंद हो सकता है। आज की अंक ऊर्जा यह संकेत देती है कि करियर और व्यक्तिगत जीवन में सफलता पाने के लिए आत्मविश्वास के साथ धैर्य और समझदारी भी जरूरी है। किसी बड़े निर्णय पर पहुंचने से पहले परिस्थितियों को अच्छी तरह समझें और भावनाओं के बजाय संतुलित सोच से कदम उठाएं। मूलांक 1: काम के साथ आराम भी जरूरी मूलांक 1 वालों के लिए आज का दिन नई शुरुआत और आगे बढ़ने के अवसर लेकर आ सकता है। आत्मविश्वास मजबूत रहेगा और आप अपने काम को लेकर उत्साहित रहेंगे। हालांकि, हर जिम्मेदारी अकेले उठाने के बजाय टीम और सहयोगियों की मदद लेना आपके लिए बेहतर रहेगा। काम के दबाव के बीच आराम और स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें। रिश्तों में अपनी बात रखने के साथ सामने वाले की भावनाओं को भी समझें। लकी नंबर: 1, 2 लकी रंग: गोल्ड, व्हाइट मूलांक 2: टीमवर्क से मिलेगा बेहतर परिणाम आज आपकी अंतर्ज्ञान और भावनात्मक समझ किसी उलझी हुई स्थिति को सुलझाने में मदद कर सकती है। कार्यस्थल पर प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग की भावना से काम करना आपके लिए अधिक लाभदायक रहेगा। कोई पुराना मामला दोबारा सामने आ सकता है, लेकिन इस बार आप उसे बेहतर तरीके से संभाल पाएंगे। जरूरत से ज्यादा सोचने के बजाय अपनी समझ और अंतरात्मा पर भरोसा रखें। लकी नंबर: 2, 1 लकी रंग: व्हाइट, पर्ल व्हाइट मूलांक 3: रचनात्मक काम में सफलता के संकेत आज आपके विचार और संवाद करने का तरीका लोगों को प्रभावित कर सकता है। लेखन, अध्यापन, कला और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए दिन अच्छा रह सकता है। किसी नए काम की शुरुआत से पहले सही लोगों का सहयोग लेना फायदेमंद होगा। व्यस्तता के बीच खान-पान और आराम का भी ध्यान रखें। जरूरी मुद्दों पर खुलकर बातचीत करने से पीछे न हटें। लकी नंबर: 3, 2 लकी रंग: येलो, व्हाइट मूलांक 4: सहकर्मियों की सलाह को नजरअंदाज न करें आज आपको अपनी पुरानी कार्यशैली और योजनाओं पर दोबारा विचार करने की जरूरत पड़ सकती है। हर चीज को अपने तरीके से करने की जिद के बजाय सहकर्मियों और भरोसेमंद लोगों की सलाह पर भी ध्यान दें। निजी रिश्तों में सिर्फ काम और जिम्मेदारियों की बात न करें, बल्कि अपनों की भावनाओं को भी समझने की कोशिश करें। लकी नंबर: 4, 2 लकी रंग: ग्रे, व्हाइट मूलांक 5: बड़े फैसले सोच-समझकर लें आज आपके सामने कोई नया अवसर या काम आ सकता है, लेकिन तुरंत फैसला लेने से बचना बेहतर होगा। अपनी स्वतंत्रता का आनंद लें, मगर किसी भी बड़े निर्णय को केवल उत्साह या रोमांच के आधार पर न लें। करीबियों के साथ संवाद बनाए रखें और अनावश्यक भागदौड़ से बचकर खुद को मानसिक रूप से शांत रखने की कोशिश करें। लकी नंबर: 5, 2 लकी रंग: हरा, व्हाइट मूलांक 6: रिश्तों की उलझन दूर हो सकती है कला, सेवा और लोगों से जुड़े कार्यों में आज सकारात्मक परिणाम मिलने के संकेत हैं। लगातार दूसरों की मदद और देखभाल करते रहने से मानसिक थकान महसूस हो सकती है, इसलिए अपने लिए भी समय निकालें। पुराने रिश्ते या किसी लंबित मामले को लेकर बनी उलझन दूर होने की संभावना है। भावनाओं में बहकर कोई बड़ा वादा करने से बचें और अपने आत्मसम्मान को प्राथमिकता दें। लकी नंबर: 6, 2 लकी रंग: पिंक, व्हाइट मूलांक 7: मेहनत का मिल सकता है परिणाम आज आपकी गहरी सोच और छिपी प्रतिभा को सामने आने का अवसर मिल सकता है। शोध, शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए दिन महत्वपूर्ण रह सकता है। मानसिक शांति के लिए कुछ समय खुद के साथ बिताएं। पुरानी बातों को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचने के बजाय उनसे मिली सीख को साथ लेकर आगे बढ़ें। अपनी चुप्पी को रिश्तों में गलतफहमी का कारण न बनने दें। लकी नंबर: 7, 2 लकी रंग: इंडिगो, व्हाइट मूलांक 8: सेहत और काम के बीच बनाएं संतुलन आज करियर और आर्थिक मामलों पर आपका ध्यान अधिक रह सकता है। किसी वरिष्ठ अधिकारी या सहकर्मी से बातचीत करते समय धैर्य और विनम्रता बनाए रखें। काम के दबाव में स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें। सिर्फ परिणाम हासिल करने की जल्दबाजी के बजाय काम की गुणवत्ता पर ध्यान देना बेहतर रहेगा। परिवार और प्रियजनों के लिए भी समय निकालें। लकी नंबर: 8, 2 लकी रंग: नेवी ब्लू, व्हाइट मूलांक 9: रिश्तों में धैर्य रखना होगा जरूरी आज ऊर्जा और उत्साह भरपूर रह सकता है। किसी पुराने या लंबे समय से अटके हुए मामले को सुलझाने में सफलता मिल सकती है। हालांकि, गुस्से या जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने से बचें। बातचीत और समझदारी के जरिए परिस्थितियों को संभालना बेहतर होगा। रिश्तों में पुरानी बातों को बार-बार उठाने के बजाय शांत मन से अपनी बात रखें। लकी नंबर: 9, 2 लकी रंग: रेड, व्हाइट आज का अंक ज्योतिष संदेश 29 जुलाई की अंक ऊर्जा बताती है कि आत्मविश्वास के साथ सहयोग और धैर्य का संतुलन बनाना जरूरी है। आज जल्दबाजी के बजाय सोच-समझकर उठाया गया कदम आपको बेहतर परिणाम की ओर ले जा सकता है।
नई दिल्ली: वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है। इनका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है, फिर भी ज्योतिष में इन्हें बेहद प्रभावशाली माना जाता है। मान्यता है कि इनकी दशा, महादशा और गोचर व्यक्ति के जीवन में अचानक बदलाव, सफलता, चुनौतियां और आध्यात्मिक अनुभव ला सकते हैं। यही वजह है कि जन्म कुंडली के विश्लेषण में राहु और केतु की स्थिति को विशेष महत्व दिया जाता है। राहु और केतु क्यों माने जाते हैं प्रभावशाली? ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहु और केतु कर्म, भाग्य, भ्रम, आध्यात्मिकता और अप्रत्याशित घटनाओं के कारक माने जाते हैं। इनका प्रभाव कई बार अचानक दिखाई देता है और व्यक्ति के जीवन की दिशा बदलने वाला माना जाता है। हालांकि इनके प्रभाव का आकलन पूरी जन्म कुंडली, ग्रहों की स्थिति और योगों के साथ मिलाकर ही किया जाता है। समुद्र मंथन से जुड़ी है राहु-केतु की कथा पुराणों में वर्णित समुद्र मंथन की कथा के अनुसार, अमृत वितरण के समय एक दैत्य देवताओं का रूप धारण कर अमृत पीने लगा। सूर्य और चंद्रमा ने उसकी पहचान भगवान विष्णु को बताई। इसके बाद भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। चूंकि वह अमृत पी चुका था, इसलिए उसके दोनों भाग जीवित रहे। सिर वाला भाग राहु और धड़ वाला भाग केतु कहलाया। इसी कारण इन दोनों का संबंध रहस्य, कर्मफल, नियति और अप्रत्याशित घटनाओं से जोड़ा जाता है। छाया ग्रह होने का क्या अर्थ है? खगोल और ज्योतिष के अनुसार राहु और केतु का कोई भौतिक ग्रह स्वरूप नहीं है। इन्हें चंद्रमा और पृथ्वी की कक्षाओं के प्रतिच्छेदन बिंदु (लूनर नोड्स) माना जाता है। इसी वजह से इन्हें छाया ग्रह कहा जाता है। इनकी प्रमुख विशेषताएं— हमेशा वक्री (Retrograde) गति से चलते हैं। दोनों एक-दूसरे से 180 डिग्री की दूरी पर स्थित रहते हैं। लगभग 18 महीने में एक राशि बदलते हैं। करीब 18 वर्षों में पूरा राशि चक्र पूरा करते हैं। कुंडली में कैसे देते हैं फल? राहु और केतु की अपनी कोई राशि नहीं मानी जाती। इसलिए ये जिस राशि, भाव या ग्रह के साथ स्थित होते हैं, उसी के अनुसार फल देने की मान्यता है। शुभ ग्रहों के साथ होने पर सफलता, प्रतिष्ठा, धन और अप्रत्याशित लाभ मिल सकते हैं। अशुभ प्रभाव में होने पर भ्रम, मानसिक तनाव, बाधाएं और चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इन परिणामों को धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के रूप में देखा जाता है। राहु और केतु की प्रकृति ज्योतिष में राहु को शनि के समान प्रभाव वाला और केतु को मंगल के समान प्रभाव वाला माना जाता है। राहु भौतिक इच्छाएं, महत्वाकांक्षा, राजनीति, विदेश, तकनीक और आधुनिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करता है। केतु आध्यात्मिकता, वैराग्य, शोध, आत्मचिंतन और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है। इनका स्वभाव अनिश्चित माना जाता है, इसलिए अचानक लाभ या कठिन परिस्थितियां दोनों उत्पन्न होने की मान्यता है। किन भावों में शुभ और किनमें चुनौतीपूर्ण? ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार— लग्न, पंचम और नवम भाव में राहु-केतु अपेक्षाकृत शुभ परिणाम दे सकते हैं। द्वितीय और द्वादश भाव में सामान्य प्रभाव माने जाते हैं। तृतीय, षष्ठम और एकादश भाव में मिश्रित परिणाम मिल सकते हैं। अष्टम भाव में इनकी स्थिति चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। हालांकि अंतिम फल पूरी जन्म कुंडली, ग्रहों की दृष्टि, दशा और योगों पर निर्भर करता है।