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Bihar Board 10th Result Coming Soon

Bihar Board 10th Result 2026: टॉपर्स वेरिफिकेशन शुरू, कभी भी जारी हो सकता है मैट्रिक रिजल्ट

surbhi मार्च 25, 2026 0
Students checking Bihar Board 10th result online as topper verification process begins in Patna
Bihar Board 10th Result 2026 Update

बिहार में मैट्रिक परीक्षा 2026 के परिणाम का इंतजार कर रहे लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर है। Bihar School Examination Board ने रिजल्ट जारी करने की अंतिम तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। ताजा अपडेट के मुताबिक, बोर्ड ने संभावित टॉपर्स को वेरिफिकेशन के लिए पटना कार्यालय बुलाना शुरू कर दिया है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि परिणाम जल्द ही घोषित किया जा सकता है।

30-31 मार्च तक रिजल्ट की उम्मीद

सूत्रों के अनुसार, बिहार बोर्ड 10वीं का रिजल्ट 30 या 31 मार्च 2026 को जारी किया जा सकता है। हालांकि बोर्ड की ओर से अभी आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू होने के बाद रिजल्ट में ज्यादा देर नहीं होती।

टॉपर्स का वेरिफिकेशन क्यों जरूरी

हर साल की तरह इस बार भी Bihar School Examination Board टॉपर्स का वेरिफिकेशन कर रहा है। टॉप 20 छात्रों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है, जहां उनकी कॉपियों, लिखावट और ज्ञान का मिलान किया जाता है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य रिजल्ट में पारदर्शिता बनाए रखना और किसी भी तरह की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े को रोकना है।

15 लाख से ज्यादा छात्रों ने दी परीक्षा

इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा में करीब 15.12 लाख छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। परीक्षाएं 17 फरवरी से 25 फरवरी 2026 के बीच आयोजित की गई थीं। अब सभी छात्रों को अपने परिणाम का बेसब्री से इंतजार है।

कहां और कैसे देखें रिजल्ट

रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र इन आधिकारिक वेबसाइट्स पर जाकर अपना परिणाम देख सकेंगे:

  • bseexam.com
  • biharboardonline.bihar.gov.in
  • secondary.biharboardonline.com
  • results.biharboardonline.com
  • matricbiharboard.com

रिजल्ट चेक करने के आसान स्टेप्स:

  1. किसी भी आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं
  2. “BSEB 10th Result 2026” लिंक पर क्लिक करें
  3. रोल नंबर और रोल कोड दर्ज करें
  4. सबमिट बटन दबाएं
  5. स्क्रीन पर रिजल्ट देखें और डाउनलोड करें

छात्रों के लिए अहम सलाह

रिजल्ट जारी होने के समय वेबसाइट पर ट्रैफिक अधिक होने की वजह से साइट स्लो हो सकती है। ऐसे में छात्र धैर्य बनाए रखें और केवल आधिकारिक वेबसाइट्स पर ही भरोसा करें।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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भोजपुरी-मगही को लेकर बनी कमेटी में ही विवाद

रांची। जेटेट भाषा विवाद सुलझाने के लिए बनी पांच मंत्रियों की उच्चस्तरीय समिति की बैठक में सहमति नहीं बन पाई। सत्ता पक्ष दो भागों में बंट गया। कांग्रेस और राजद का विचार झामुमो के विपरीत रहा। कमेटी में तीन मंत्री मगही भोजपुरी एवं अंगिका को जेटेट परीक्षा में शामिल करने के पक्ष में रहे, जबकि दो मंत्री इसके विरोध में थे। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, ग्रामीण मंत्री दीपिका पांडेय और उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा, जेटेट में भोजपुरी, मगही और अंगिका जरूरी है। जबकि, नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार और पेयजल-स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। कमेटी के संयोजक राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मंत्रियों के विचार से मुख्यमंत्री को अवगत करा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ही इस विषय पर अंतिम निर्णय लेंगे। नहीं बन सकी सहमति कमेटी की बैठक वैचारिक मतभिन्नता पर ही समाप्त हुई। कैबिनेट की बैठक में भी राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय ने साफ कहा था कि झारखंड के कई जिलों में ये भाषाएं गांव-गांव में बोली जाती हैं, ऐसे में इसे जेटेट से अलग रखना न्यायोचित नहीं, जबकि झामुमो ने इस विचार को खारिज कर दिया। उच्च स्तरीय कमेटी में भी झामुमो एक ओर और कांग्रेस-राजद दूसरी ओर खड़े रहे, फलत: सहमति नहीं बन पाई।   50 लाख से अधिक लोग बोलते हैं भोजपुरी-मगही। भोजपुरी-मगही बोलनेवालों की संख्या बांग्ला और ओड़िया भाषियों से अधिक। 1928 में जॉर्ज ग्रियर्सन लिखित “लैग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया” के अनुसार मैथिली भाषा देवघर, दुमका, साहेबगंज, पाकुड़ एवं गोड्डा जिले में बोली जाती है। संथाल में कुरमाली बोलने वालों की संख्या दो लाख से अधिक है। जेटेट में वर्ष 2012 तक भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाएं शामिल थीं। करीब 40 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने वर्ष 2012 में इन भाषाओं की दी थी परीक्षा।   कांग्रेस और राजद के मंत्रियों की अनुशंसा 1 पलामू, गढ़वा, चतरा, गिरिडीह, हजारीबाग, कोडरमा, धनबाद बोकारो, गोड्डा, देवघर में भोजपुरी, मगही भाषा को शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 में शामिल किया जाए। 2 रांची, जमशेदपुर, बोकारो, गोड्डा, साहेबगंज, धनबाद, सरायकेला-खरसावां जिले में मैथिली एवं अंगिका भाषा को शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली, 2026 के अंतर्गत जोड़ा जाए। 3 जुलाई, 2026 मे संभावित शिक्षक पात्रता की परीक्षा में इन भाषाओं को शामिल करने के बाद ही परीक्षा आयोजित हो। 4 राज्य में प्रशासनिक स्तर पर भाषायी संतुलन बनना आवश्यक है, ताकि झारखंड में रहने वाले जनजातीय और गैर जनजातीय वर्ग के हितों की रक्षा हो सके। विवाद सलटाने के लिए बनी कमेटी में ही विवाद बैठक में सुदिव्य कुमार ने कमेटी में नए सदस्यों की मांग उठाई। कहा, समिति में अल्पसंख्यक और जनजातीय मंत्री को भी शामिल किया जाए। भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मसलों पर व्यापक प्रतिनिधित्व जरूरी है, ताकि सभी वर्गों की राय को महत्व मिल सके। इस पर राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि यह उच्च स्तरीय समिति भाषा और जाति के नाम पर नहीं बनाई गई है। यदि सीएम कोई एक्सटेंशन करेंगे तो देखा जाएगा, फिलहाल यह अंतिम बैठक में है। इसे यहीं समाप्त किया जाए।

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JTET की आवेदन तिथि बढ़ी, अब 2 जून तक भरे जायेंगे फॉर्म

रांची। झारखंड अधिविद्य परिषद यानी JAC ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा JTET 2026 की आवेदन की तिथि बढ़ा दी है। इससे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। जैक ने अभ्यर्थियों की मांग और प्राप्त सुझावों को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 2 जून तक बढ़ा दी है। इससे उन उम्मीदवारों को अतिरिक्त समय मिलेगा, जो किसी कारणवश निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन नहीं कर सके थे। इससे पहले आवेदन प्रक्रिया 21 अप्रैल 2026 से शुरू की गई थी। जैक ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापन संख्या 24/2026 की अन्य सभी शर्तें पूर्ववत लागू रहेंगी। वेबसाइट पर पूरी जानकारी परिषद ने अभ्यर्थियों से कहा है कि परीक्षा से संबंधित विस्तृत जानकारी, आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दिशा-निर्देश JAC की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। उम्मीदवार आवेदन करने से पहले सभी निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ लें, ताकि किसी प्रकार की त्रुटि से बचा जा सके। परिषद की ओर से समय-समय पर जारी अपडेट पर नजर रखने की भी सलाह दी गई है। शिक्षा के साथ सह-शैक्षिक गतिविधियों पर भी जोर जारी सूचना में यह भी उल्लेख किया गया है कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए खेल एवं सह-शैक्षिक गतिविधियों के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा रही है। शिक्षकों को भी विद्यार्थियों को इन गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया जा रहा है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने संयुक्त चिकित्सा सेवा परीक्षा (Combined Medical Services Examination 2026) का पूरा परीक्षा कार्यक्रम जारी कर दिया है। मेडिकल क्षेत्र में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह अहम अपडेट है। आयोग के अनुसार, UPSC CMS Exam 2026 अगस्त महीने में आयोजित किया जाएगा। परीक्षा दो अलग-अलग प्रश्नपत्रों में होगी, जिनमें मेडिकल साइंस से जुड़े विभिन्न विषय शामिल किए गए हैं।   सुबह और दोपहर की शिफ्ट में होंगे पेपर UPSC द्वारा जारी शेड्यूल के मुताबिक पहला प्रश्नपत्र (Paper-1) सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक आयोजित होगा। इस पेपर में जनरल मेडिसिन (General Medicine) और पीडियाट्रिक्स (Pediatrics) से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा के इस भाग में उम्मीदवारों की बेसिक मेडिकल नॉलेज और बाल रोग विषय की समझ का मूल्यांकन किया जाएगा। वहीं दूसरा प्रश्नपत्र (Paper-2) दोपहर 2:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक आयोजित किया जाएगा। इसमें सर्जरी (Surgery), गायनेकोलॉजी एवं ऑब्स्टेट्रिक्स (Gynecology & Obstetrics) और प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन (Preventive & Social Medicine) से प्रश्न शामिल होंगे। आयोग ने उम्मीदवारों को समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने और जरूरी दस्तावेज साथ रखने की सलाह दी है।   मार्च में शुरू हुई थी आवेदन प्रक्रिया UPSC CMS 2026 भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन 11 मार्च 2026 को जारी किया गया था। उसी दिन से आवेदन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी। इच्छुक उम्मीदवारों को आवेदन के लिए 31 मार्च 2026 तक का समय दिया गया था। अब परीक्षा तिथि घोषित होने के बाद अभ्यर्थियों ने अपनी तैयारी तेज कर दी है।   दो चरणों में होगी चयन प्रक्रिया संयुक्त चिकित्सा सेवा परीक्षा के जरिए उम्मीदवारों का चयन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा (CBT) होगी। इसमें सफल होने वाले अभ्यर्थियों को दूसरे चरण यानी पर्सनैलिटी टेस्ट या इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। दोनों चरणों में प्रदर्शन के आधार पर अंतिम मेरिट सूची तैयार की जाएगी। किन पदों पर होगी भर्ती? इस परीक्षा के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में मेडिकल पदों पर नियुक्ति की जाती है। इनमें प्रमुख रूप से निम्न पद शामिल हैं। •    भारतीय रेलवे में असिस्टेंट डिविजनल मेडिकल ऑफिसर •    केंद्रीय स्वास्थ्य सेवा में जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर •    नगर निकायों और सरकारी स्वास्थ्य विभागों में मेडिकल ऑफिसर •    इन पदों पर नियुक्ति मिलने के बाद उम्मीदवारों को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रशासन में स्थायी सरकारी सेवा का अवसर मिलता है।

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