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NEET PG 2026: आवेदन में सुधार का अंतिम मौका शुरू, 15 अगस्त तक कर सकेंगे फोटो-सिग्नेचर में सुधार

anjali kumari अगस्त 12, 2026 0
NEET PG Application Correction
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नई दिल्ली, एजेंसियां। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने NEET PG 2026 के उम्मीदवारों के लिए चयनित (Selective) एडिट विंडो फिर से खोल दी है। यह सुविधा खास तौर पर उन उम्मीदवारों के लिए है जिनकी फोटो, हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान में कमी पाई गई है। उम्मीदवार 12 अगस्त दोपहर 1 बजे से 15 अगस्त रात 11:55 बजे तक जरूरी सुधार कर सकते हैं।

 

किन उम्मीदवारों को मिलेगा मौका?

 

यह सामान्य रूप से सभी आवेदकों के लिए खुली एडिट विंडो नहीं है। NBEMS ने जिन उम्मीदवारों के अपलोड किए गए फोटोग्राफ, सिग्नेचर या थंब इंप्रेशन को निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया है, उन्हें अंतिम सुधार का मौका दिया है। ऐसे उम्मीदवारों को NBEMS की ओर से ईमेल के जरिए भी जानकारी दी गई है।

 

उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे अपने आवेदन पोर्टल पर लॉगिन करके इमेज की स्थिति जरूर जांच लें और यदि सुधार जरूरी है तो निर्धारित समय के भीतर नया फोटो, हस्ताक्षर या थंब इंप्रेशन अपलोड करें।

 

15 अगस्त के बाद नहीं मिलेगा मौका

 

NBEMS के अनुसार, यह अंतिम चयनित एडिट विंडो है। निर्धारित समय सीमा के भीतर इमेज में सुधार नहीं करने पर आवेदन रद्द किया जा सकता है। इसलिए उम्मीदवारों को अंतिम तारीख का इंतजार न करने की सलाह दी गई है।

 

30 अगस्त को होगी NEET PG 2026 परीक्षा

 

NEET PG 2026 परीक्षा 30 अगस्त 2026 को कंप्यूटर आधारित परीक्षा के रूप में आयोजित की जाएगी। NBEMS के आधिकारिक नोटिस में परीक्षा की तारीख की पुष्टि की गई है। परीक्षा का परिणाम 30 सितंबर 2026 तक घोषित किए जाने का कार्यक्रम है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में 26,000 शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों की नई भर्ती प्रक्रिया पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को 31 अगस्त 2026 तक पूरा करने की समय सीमा तय की थी, लेकिन स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) के मुताबिक मौजूदा स्थिति में तय समय के भीतर भर्ती पूरी करना संभव नहीं है। अब आयोग सुप्रीम कोर्ट से अतिरिक्त समय मांगने की तैयारी कर रहा है।   31 अगस्त की समय सीमा में भर्ती पूरी करना मुश्किल   स्कूल सर्विस कमीशन के अध्यक्ष दुष्यंत नारियाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 26,000 रिक्तियों पर भर्ती की प्रक्रिया तय समय सीमा के भीतर पूरी नहीं हो पाएगी। उन्होंने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में आगे की प्रक्रिया शुरू करना भी चुनौतीपूर्ण है। SSC अब कानूनी सलाह लेकर सुप्रीम कोर्ट में अतिरिक्त समय मांगने की तैयारी कर रहा है।   सिफारिशी पत्र पाने वाले उम्मीदवार भी असमंजस में   भर्ती प्रक्रिया रुकने से उन उम्मीदवारों की चिंता बढ़ गई है, जिन्हें पहले ही सिफारिशी पत्र मिल चुके हैं। इन उम्मीदवारों की नियुक्ति कब और कैसे होगी, इसे लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। SSC आरक्षण व्यवस्था, विशेष रूप से जातिगत आरक्षण नीति को लागू करने के कानूनी पहलुओं पर भी अपने वकीलों से सलाह ले रहा है।   26,000 नौकरियां रद्द होने के बाद शुरू हुई थी नई प्रक्रिया   शिक्षक भर्ती में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामले में अदालत के आदेश के बाद करीब 26,000 शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों की नियुक्तियां रद्द कर दी गई थीं। इसके बाद नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस नई भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 31 अगस्त की समय सीमा तय की थी। इस दौरान नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों के वेतन को लेकर भी अदालत के निर्देश रहे हैं।   सत्यापन और काउंसलिंग पर लगी रोक   भर्ती प्रक्रिया से जुड़े उम्मीदवारों के अनुसार कक्षा 9वीं और 10वीं के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए सत्यापन प्रक्रिया चल रही थी, जबकि कक्षा 11वीं और 12वीं के लिए काउंसलिंग जारी थी। अब नोटिस जारी कर इन प्रक्रियाओं को रोक दिया गया है। आयोग की ओर से प्रक्रिया रोकने के पीछे नए नियमों को लागू किए जाने से जुड़े मुद्दों का हवाला दिया गया है।   आरक्षण नियमों को लेकर भी पेच   भर्ती प्रक्रिया में OBC आरक्षण से जुड़े नियमों को लेकर भी कानूनी और प्रशासनिक जटिलताएं बनी हुई हैं। SSC इन प्रावधानों को लागू करने के तरीके पर कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रहा है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया के दोबारा शुरू होने की तारीख को लेकर भी उम्मीदवारों में असमंजस बना हुआ है।   हजारों उम्मीदवारों का भविष्य अधर में   भर्ती प्रक्रिया के रुकने से हजारों अभ्यर्थियों के सामने फिर अनिश्चितता खड़ी हो गई है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट की तय समय सीमा नजदीक आ रही है, वहीं दूसरी ओर सत्यापन, काउंसलिंग और आरक्षण संबंधी प्रक्रियाएं अटक गई हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सुप्रीम कोर्ट SSC को अतिरिक्त समय देता है या नहीं, और नई भर्ती प्रक्रिया कब तक दोबारा पटरी पर लौटती है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET PG 2026 की सिटी इंटिमेशन स्लिप जारी होने के बाद कई उम्मीदवारों ने परीक्षा शहर को लेकर शिकायत की। कुछ अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्हें SMS या ईमेल में एक शहर की जानकारी मिली, जबकि NBEMS के पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद दूसरा शहर दिखाई दे रहा था। शिकायतें बढ़ने के बाद National Board of Examinations in Medical Sciences (NBEMS) ने स्थिति स्पष्ट की है।   SMS और पोर्टल पर अलग-अलग शहर दिखने से भ्रम   11 अगस्त को सिटी इंटिमेशन स्लिप जारी होने के बाद उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया पर अलग-अलग शहर मिलने की शिकायतें साझा कीं। कई अभ्यर्थियों के अनुसार SMS/ईमेल में दिखाई गई जानकारी और उनके NBEMS लॉगिन पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी में अंतर था। इससे उम्मीदवारों में यह चिंता पैदा हुई कि आखिर परीक्षा के लिए किस शहर को अंतिम माना जाए।   NBEMS ने बताया किस जानकारी को मानें सही   NBEMS की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उम्मीदवार को अपने NBEMS के आधिकारिक पोर्टल पर लॉगिन करके दिखाई जा रही सिटी इंटिमेशन स्लिप को ही संदर्भ मानना चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार, SMS या ईमेल में तकनीकी समस्या के कारण अलग जानकारी दिखाई देने की शिकायतें सामने आई थीं।   उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे केवल मोबाइल संदेश पर निर्भर न रहें और अपने आवेदन पोर्टल में लॉगिन करके आवंटित परीक्षा शहर की जानकारी दोबारा जांच लें।   परीक्षा 30 अगस्त को होगी   NEET PG 2026 की परीक्षा 30 अगस्त 2026 को कंप्यूटर आधारित परीक्षा के रूप में आयोजित की जाएगी। NBEMS के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा परिणाम 30 सितंबर 2026 तक घोषित किया जाना है।   ध्यान रखें कि सिटी इंटिमेशन स्लिप में केवल परीक्षा शहर की जानकारी होती है। परीक्षा केंद्र का पूरा पता और अन्य जरूरी विवरण एडमिट कार्ड में दिया जाएगा।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में स्कूल नेतृत्व से जुड़े पदों की बड़ी संख्या में रिक्तियां सामने आई हैं। हालिया UPSC भर्ती विज्ञापन के मुताबिक प्रिंसिपल के 124 और वाइस-प्रिंसिपल के 704 पद, यानी कुल 828 पद खाली हैं। दिल्ली शिक्षा निदेशालय करीब 1,090 सरकारी स्कूल संचालित करता है।   124 प्रिंसिपल और 704 वाइस-प्रिंसिपल पद रिक्त     रिक्त पदों में 124 प्रिंसिपल और 704 वाइस-प्रिंसिपल शामिल हैं। इन पदों को सीधी भर्ती के जरिए भरने के लिए UPSC ने आवेदन मांगे हैं। आवेदन प्रक्रिया 25 जुलाई से शुरू हुई थी और 14 अगस्त 2026 तक आवेदन किया जा सकता है।   इन आंकड़ों ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्रशासनिक नेतृत्व की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। प्रिंसिपल और वाइस-प्रिंसिपल स्कूल के प्रशासन, शिक्षकों के समन्वय और शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी में अहम भूमिका निभाते हैं।   स्वीकृत पदों के मुकाबले बड़ी कमी     Principal and Vice-Principal Government School Association के अनुसार दिल्ली में प्रिंसिपल के 950 स्वीकृत पद और वाइस-प्रिंसिपल के 1,670 स्वीकृत पद हैं। दोनों श्रेणियों में 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती और बाकी पद पदोन्नति के माध्यम से भरे जाने का प्रावधान बताया गया है। इस व्यवस्था में लंबे समय तक पद खाली रहने से स्कूलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अतिरिक्त बोझ दूसरे अधिकारियों या शिक्षकों पर पड़ सकता है।     UPSC के जरिए हो रही भर्ती     दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी रिक्तियों के आधार पर UPSC ने 124 प्रिंसिपल और 704 वाइस-प्रिंसिपल पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इससे बड़ी संख्या में शिक्षा क्षेत्र के योग्य उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी का अवसर भी मिलेगा।   हालांकि, भर्ती प्रक्रिया पूरी होने और नए अधिकारियों की नियुक्ति में समय लग सकता है। ऐसे में फिलहाल खाली पदों का मुद्दा दिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्रशासनिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।   शिक्षा व्यवस्था पर क्यों महत्वपूर्ण है मामला     स्कूल के प्रधानाचार्य और उप-प्रधानाचार्य केवल प्रशासनिक पद नहीं हैं। स्कूल की शैक्षणिक योजना, अनुशासन, शिक्षक प्रबंधन, अभिभावकों के साथ समन्वय और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी उनकी भूमिका होती है।   ऐसे में 828 नेतृत्व पदों का रिक्त होना दिल्ली के सरकारी स्कूलों की प्रशासनिक क्षमता के लिहाज से बड़ी चुनौती माना जा रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि UPSC भर्ती प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है और इन पदों पर नियुक्तियां कब तक की जाती हैं।

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