अभिनेता Bobby Deol और निर्देशक Anurag Kashyap की बहुचर्चित फिल्म Bandar ने अपने पहले वीकेंड में भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 2.10 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया है। सकारात्मक समीक्षाओं और दर्शकों की सराहना मिलने के बावजूद फिल्म की शुरुआती कमाई उम्मीदों से कम रही है।
फिल्म ने रिलीज के पहले दिन 50 लाख रुपये की कमाई की थी। दूसरे दिन कमाई में सुधार देखने को मिला और फिल्म ने 80 लाख रुपये जुटाए। रविवार यानी तीसरे दिन भी फिल्म ने लगभग 80 लाख रुपये का कारोबार किया।
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हालांकि वीकेंड पर फिल्म की कमाई में बड़ी छलांग देखने को नहीं मिली, लेकिन इंडस्ट्री विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत वर्ड-ऑफ-माउथ के दम पर फिल्म सप्ताह के दिनों में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
'बंदर' को रिलीज के समय सीमित स्क्रीन मिली हैं। इसकी एक बड़ी वजह Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai और Peddi जैसी बड़ी फिल्मों के साथ सीधा बॉक्स ऑफिस मुकाबला है।
कम स्क्रीन काउंट और मजबूत प्रतिस्पर्धा के कारण फिल्म की पहुंच सीमित रही, जिसका असर शुरुआती कमाई पर साफ दिखाई दिया।
फिल्म में बॉबी देओल के अलावा कई प्रतिभाशाली कलाकार नजर आ रहे हैं, जिनमें Sanya Malhotra, Sapna Pabbi, Saba Azad, Jitendra Joshi और Raj B Shetty शामिल हैं।
फिल्म में बॉबी देओल ने समीर मेहरा नाम के एक ऐसे अभिनेता का किरदार निभाया है, जो अपने ढलते करियर और खोई हुई लोकप्रियता से जूझ रहा है। जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिशों के बीच उस पर एक पूर्व प्रेमिका गंभीर आरोप लगा देती है, जिसके बाद वह एक हाई-प्रोफाइल कानूनी लड़ाई में फंस जाता है।
लेखक Sudip Sharma और Abhishek Banerjee ने कहानी को पारंपरिक कोर्टरूम ड्रामा से अलग रखते हुए सोशल मीडिया ट्रायल, जनमत और न्याय व्यवस्था की जटिलताओं के इर्द-गिर्द बुना है।
फिल्म को समीक्षकों और दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए इसे सोमवार से शुरू होने वाले वीकडेज़ में स्थिर प्रदर्शन करना होगा। आने वाले दिनों की कमाई ही तय करेगी कि 'बंदर' लंबी रेस की खिलाड़ी साबित होगी या नहीं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मोहनलाल स्टारर क्राइम थ्रिलर 'Drishyam 3' बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन जारी रखे हुए है। निर्देशक जीतू जोसेफ की इस फिल्म ने केरल बॉक्स ऑफिस पर एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। फिल्म ने 19 दिनों में लगभग 86.85 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर लिया है और इसके साथ ही मोहनलाल की ही फिल्म 'L2 Empuraan' के लाइफटाइम कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया है। इसके साथ 'Drishyam 3' अब केरल बॉक्स ऑफिस इतिहास की पांचवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली मलयालम फिल्म बन गई है। तीसरे सोमवार को भी बनाए रखा दम फिल्म ने तीसरे सोमवार को लगभग 90 लाख रुपये का कारोबार किया। तीसरे सप्ताह के शुरुआती चार दिनों में फिल्म की कमाई करीब 5 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार, तीसरे सप्ताह के अंत तक फिल्म का कुल कलेक्शन लगभग 89 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। जल्द पीछे छूट सकती है '2018' 'L2 Empuraan' का केरल में लाइफटाइम कलेक्शन 86.25 करोड़ रुपये था, जिसे 'Drishyam 3' ने पार कर लिया है। अब फिल्म की नजर मलयालम इंडस्ट्री की एक और बड़ी ब्लॉकबस्टर '2018' पर है। मौजूदा ट्रेंड को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि फिल्म का अंतिम कलेक्शन करीब 95 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। क्या 100 करोड़ क्लब में होगी एंट्री? हालांकि 100 करोड़ रुपये के आंकड़े तक पहुंचना अब भी थोड़ा मुश्किल माना जा रहा है, लेकिन फिल्म की मजबूत पकड़ को देखते हुए ट्रेड एक्सपर्ट्स किसी बड़े सरप्राइज से इनकार नहीं कर रहे हैं। फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि 'Drishyam 3' साल की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हो चुकी है। 'Drishyam 3' का दिनवार केरल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन दिन कलेक्शन Day 1 ₹11.00 करोड़ Day 2 ₹8.80 करोड़ Day 3 ₹9.20 करोड़ Day 4 ₹9.60 करोड़ Day 5 ₹6.60 करोड़ Day 6 ₹5.80 करोड़ Day 7 ₹6.00 करोड़ Day 8 ₹5.70 करोड़ Day 9 ₹4.25 करोड़ Day 10 ₹4.50 करोड़ Day 11 ₹4.85 करोड़ Day 12 ₹2.00 करोड़ Day 13 ₹1.40 करोड़ Day 14 ₹1.15 करोड़ Day 15 ₹1.00 करोड़ Day 16 ₹0.90 करोड़ Day 17 ₹1.40 करोड़ Day 18 ₹1.80 करोड़ Day 19 ₹0.90 करोड़ (अनुमानित) कुल कलेक्शन ₹86.85 करोड़
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल और प्रीति जिंटा की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बंटवारा 1947’ की पहली झलक आखिरकार दर्शकों के सामने आ गई है। लंबे समय से इस फिल्म को ‘लाहौर 1947’ नाम से जाना जा रहा था, लेकिन निर्माताओं ने अब इसके आधिकारिक शीर्षक ‘बंटवारा 1947’ की घोषणा कर दी है। साथ ही फिल्म की रिलीज डेट का भी खुलासा किया गया है। यह फिल्म 14 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म के निर्माता आमिर खान प्रोडक्शंस ने सोशल मीडिया पर एक खास टीजर जारी करते हुए रिलीज डेट का एलान किया। पोस्ट के साथ लिखा गया, “नफरत और डर के माहौल में, उन्होंने हिम्मत का रास्ता चुना। 14 अगस्त 2026 से सिनेमाघरों में ‘बंटवारा’ देखें।” विभाजन की त्रासदी को दिखाएगी फिल्म फिल्म भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है और उस दौर के दर्द, बिछड़न और संघर्ष को बड़े पर्दे पर दिखाएगी। जारी टीजर में सनी देओल हाथ में मशाल लिए नजर आते हैं, जबकि प्रीति जिंटा समेत अन्य कलाकारों के चेहरों पर भय और असुरक्षा की झलक दिखाई देती है। कुछ ही सेकंड की इस झलक ने संकेत दे दिया है कि फिल्म भावनाओं, इतिहास और मानवीय संघर्षों से भरपूर होगी। मजबूत टीम से बढ़ी उम्मीदें फिल्म का निर्देशन मशहूर निर्देशक राजकुमार संतोषी कर रहे हैं, जबकि इसके निर्माता आमिर खान हैं। फिल्म में सनी देओल और प्रीति जिंटा मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। वहीं, संगीत की जिम्मेदारी ए.आर. रहमान के पास है, जिससे दर्शकों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। दर्शकों में दिखा उत्साह फिल्म की पहली झलक सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रशंसकों की प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। कई यूजर्स ने सनी देओल, राजकुमार संतोषी, आमिर खान और ए.आर. रहमान की टीम को "सुपरहिट कॉम्बिनेशन" बताया है। दर्शकों को उम्मीद है कि यह फिल्म विभाजन की त्रासदी को एक नए और भावनात्मक अंदाज में प्रस्तुत करेगी।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेत्री और फिटनेस आइकन शिल्पा शेट्टी आज 8 जून को अपना 51वां जन्मदिन मना रही हैं। इस खास अवसर पर उन्हें परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों की ओर से ढेरों शुभकामनाएं मिल रही हैं। उनके पति और व्यवसायी राज कुंद्रा ने भी सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा कर उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। राज कुंद्रा ने आधी रात को इंस्टाग्राम पर शिल्पा की तस्वीरों का एक वीडियो मॉन्टाज शेयर किया, जिसमें उन्हें एक मजबूत, प्रेरणादायक और परिवार का सहारा बनने वाली महिला के रूप में दिखाया गया। वीडियो के साथ लिखे गए लंबे संदेश में राज ने कहा कि यह पोस्ट सिर्फ जन्मदिन का जश्न मनाने के लिए नहीं, बल्कि यह बताने के लिए है कि शिल्पा उनकी जिंदगी में कितनी अहमियत रखती हैं। “आप मेरी ताकत और उम्मीद हैं” राज ने अपने संदेश में लिखा कि जब जिंदगी मुश्किल होती है तो शिल्पा उनकी हिम्मत बनती हैं, भावनात्मक परिस्थितियों में उन्हें संभालती हैं और अनिश्चित समय में विश्वास जगाती हैं। उन्होंने कहा कि शिल्पा में हमेशा एक “देवी” जैसी ऊर्जा रही है, जो अपने परिवार का ख्याल रखती है, रक्षा करती है, माफ करती है और हर परिस्थिति में मजबूत बनी रहती है। पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, “जन्मदिन मुबारक हो मेरी जान। मां आपको वह सब कुछ दें जिसकी आपकी प्यारी आत्मा हकदार है।” इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए शिल्पा ने दिल वाले इमोजी के साथ लिखा, “अरे वाह कुकी, बहुत-बहुत प्यार तुम्हें।” बहन शमिता ने भी दी शुभकामनाएं शिल्पा की बहन और अभिनेत्री शमिता शेट्टी ने भी सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शिल्पा को अपनी प्रेरणा, ताकत और जीवन की राह दिखाने वाली रोशनी बताया। तीन दशक से बॉलीवुड में सक्रिय शिल्पा शेट्टी ने 1993 में बाजीगर से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने Dhadkan, Rishtey, Phir Milenge और Life in a... Metro जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। हाल के वर्षों में वह फिल्मों के साथ-साथ टीवी रियलिटी और डांस शो में जज के रूप में भी लोकप्रिय रही हैं।