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रणबीर कपूर संग फिल्म की अफवाहों पर राजकुमार हिरानी ने तोड़ी चुप्पी, कहा- 'फिलहाल ऐसा कोई प्रोजेक्ट नहीं'

anjali kumari जून 27, 2026 0
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मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड निर्देशक राजकुमार हिरानी ने अभिनेता रणबीर कपूर के साथ नई फिल्म बनाने की चल रही अटकलों पर आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह रणबीर कपूर के साथ किसी नई फिल्म पर काम नहीं कर रहे हैं, हालांकि भविष्य में उनके साथ दोबारा काम करने की इच्छा जरूर है।

 

क्या बोले राजकुमार हिरानी?

 

एक इंटरव्यू में हिरानी ने कहा कि मीडिया में कई बार ऐसी खबरें आ जाती हैं कि वह किसी फिल्म पर काम कर रहे हैं, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं होता। उन्होंने हंसते हुए कहा कि कई बार उन्हें भी अखबारों से पता चलता है कि वह कौन-सी फिल्म बना रहे हैं।

 

उन्होंने कहा,

 

"नहीं, मैं फिलहाल रणबीर कपूर के साथ कोई फिल्म नहीं बना रहा हूं। लेकिन भविष्य में उनके साथ फिर से काम करना जरूर चाहूंगा।"

 

क्यों उड़ी थीं अफवाहें?

 

हाल के दिनों में खबरें सामने आई थीं कि 'संजू' की सफलता के बाद राजकुमार हिरानी और रणबीर कपूर एक नई फिल्म के लिए फिर साथ आने वाले हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया था कि दोनों एक खिलाड़ी की जिंदगी पर आधारित फिल्म की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि हिरानी ने इन सभी अटकलों को खारिज कर दिया।

 

किन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं हिरानी?

 

राजकुमार हिरानी ने बताया कि उनका फिलहाल ध्यान अपनी आगामी OTT परियोजना 'Pritam and Pedro' पर है। इसके अलावा उन्होंने पुष्टि की कि '3 Idiots' का सीक्वल और 'Munna Bhai 3' दोनों की स्क्रिप्ट पर काम चल रहा है, लेकिन अभी दोनों फिल्मों के निर्माण की तारीख तय नहीं हुई है।

 

फैंस को करना होगा इंतजार

 

हिरानी के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल रणबीर कपूर और उनके बीच किसी नई फिल्म की आधिकारिक योजना नहीं है। हालांकि उन्होंने भविष्य में साथ काम करने की संभावना से इनकार नहीं किया, जिससे फैंस को आने वाले समय में इस सुपरहिट जोड़ी की वापसी की उम्मीद लगी हुई है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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'इक्का' से पहले अक्षय खन्ना की दमदार वापसी की चर्चा, निर्देशक सिद्धार्थ बोले- उन्हें और फिल्में मिलनी चाहिए

मुंबई, एजेंसियां। फिल्म 'इक्का' की रिलीज से पहले निर्देशक सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा ने अभिनेता अक्षय खन्ना की अभिनय क्षमता की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि अक्षय बेहद प्रतिभाशाली कलाकार हैं और उन्हें उनकी काबिलियत के अनुरूप ज्यादा से ज्यादा फिल्में मिलनी चाहिए। आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में सिद्धार्थ ने कहा कि वह वर्षों से अक्षय के काम के प्रशंसक रहे हैं और हर किरदार में वह गहराई और प्रभाव छोड़ने की अद्भुत क्षमता रखते हैं।   'रहमान डकैत' के किरदार से बटोरी थी खूब वाहवाही कई वर्षों के ब्रेक के बाद अक्षय खन्ना ने बड़े पर्दे पर दमदार वापसी की। साल 2025 की शुरुआत में उन्होंने फिल्म 'छावा' में मुगल शासक औरंगजेब की भूमिका निभाई, जबकि वर्ष के अंत में फिल्म 'धुरंधर' में उनके निभाए 'रहमान डकैत' के किरदार ने दर्शकों और समीक्षकों का दिल जीत लिया। उनके संवाद, अभिनय, स्क्रीन प्रेजेंस और अलग अंदाज ने सोशल मीडिया पर भी खूब सुर्खियां बटोरीं।   'इक्का' में फिर दिखेगा निगेटिव अवतार अब अक्षय खन्ना निर्देशक सिद्धार्थ पी. मल्होत्रा की फिल्म 'इक्का' में एक बार फिर नकारात्मक भूमिका में नजर आएंगे। यह एक कोर्टरूम ड्रामा है, जिसमें सनी देओल दमदार वकील की भूमिका निभाते दिखाई देंगे। फिल्म में दीया मिर्जा और संजीदा शेख भी अहम किरदार निभा रही हैं। ट्रेलर और स्टारकास्ट को लेकर दर्शकों में पहले से ही उत्साह बना हुआ है।   10 जुलाई को होगी रिलीज निर्माताओं के अनुसार, 'इक्का' 10 जुलाई 2026 को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगी। निर्देशक का मानना है कि अक्षय खन्ना जैसे कलाकारों की मौजूदगी फिल्म को और मजबूत बनाती है। ऐसे में दर्शकों को इस कोर्टरूम ड्रामा में एक बार फिर अभिनेता का प्रभावशाली और गहन अभिनय देखने को मिलेगा।

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'मां इंटी बंगारम' के  सक्सेस पार्टी में राज निदिमोरू ने किया सीक्वल का बड़ा ऐलान

हैदराबाद, एजेंसियां। अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु की हालिया सुपरहिट फिल्म 'मां इंटी बंगारम' को लेकर प्रशंसकों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। फिल्म की शानदार सफलता के बाद इसके निर्माताओं ने आधिकारिक तौर पर इसके सीक्वल की घोषणा कर दी है। विशाखापत्तनम में आयोजित सक्सेस सेलिब्रेशन के दौरान लेखक, निर्माता और सामंथा के पति राज निदिमोरू ने मंच से फिल्म के दूसरे भाग का ऐलान किया। इस घोषणा के बाद कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से अपनी खुशी जाहिर की।   दर्शकों की प्रतिक्रिया के बाद लिया फैसला राज निदिमोरू ने कार्यक्रम के दौरान सबसे पहले दर्शकों से पूछा कि क्या वे फिल्म की कहानी को आगे बढ़ते देखना चाहते हैं। सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने पर उन्होंने बताया कि उनके पास पहले से ही सीक्वल का विचार तैयार है और वही टीम इस नए प्रोजेक्ट पर भी काम करेगी। उन्होंने कहा कि पहली बार किसी फिल्म का दूसरा भाग बनाने की प्रेरणा मिली है और अगली कहानी पहले से कहीं ज्यादा रोमांचक और मनोरंजक होगी।   फिल्म को मिला शानदार बॉक्स ऑफिस रिस्पॉन्स निर्देशक नंदिनी रेड्डी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सामंथा रुथ प्रभु के साथ गुलशन देवैया, श्रीमुखी और दिगंथ मंचले अहम भूमिकाओं में नजर आए। फिल्म ने रिलीज के पहले सप्ताह में घरेलू बॉक्स ऑफिस पर करीब 35 करोड़ रुपये की कमाई की, जबकि दुनियाभर में 50 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया। यह महिलाओं के नेतृत्व वाली सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हो गई है।   लंबे अंतराल के बाद सामंथा की दमदार वापसी 'मां इंटी बंगारम' सामंथा रुथ प्रभु की लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर वापसी वाली फिल्म रही। हाल ही में अभिनेत्री ने अपनी प्रेग्नेंसी की जानकारी साझा करते हुए मैटरनिटी लीव लेने की घोषणा भी की थी। सामंथा और राज निदिमोरू इससे पहले 'द फैमिली मैन 2', 'सिटाडेल: हनी बनी' और 'शुभम' जैसे प्रोजेक्ट्स में साथ काम कर चुके हैं। अब 'मां इंटी बंगारम 2' के ऐलान ने उनके प्रशंसकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है।

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गोवा,एजेंसियां। अभिनेत्री और राजनेता खुशबू सुंदर तथा फिल्म निर्माता सुंदर सी की बड़ी बेटी अवंतिका सुंदर ने 25 जून को गोवा के एक लग्जरी रिजॉर्ट में श्रवण श्रीनिवासन के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच शादी रचा ली। इस भव्य समारोह में दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग और बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियों ने शिरकत कर नवदंपती को शुभकामनाएं दीं। शादी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।   फिल्मी सितारों से सजा समारोह अवंतिका की शादी में दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार चिरंजीवी, नागार्जुन अक्किनेनी, तृषा कृष्णन और वेंकटेश के अलावा बॉलीवुड अभिनेता अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ भी शामिल हुए। समारोह के दौरान सभी सितारे पारंपरिक परिधानों में नजर आए और एक-दूसरे के साथ बातचीत करते, तस्वीरें खिंचवाते और इस खास मौके का आनंद लेते दिखाई दिए।   तृषा कृष्णन के लुक की रही चर्चा शादी समारोह में अभिनेत्री तृषा कृष्णन का ट्रेडिशनल लुक खास आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने सुनहरे रंग की खूबसूरत साड़ी के साथ डायमंड नेकलेस पहना था। वायरल वीडियो में वह चिरंजीवी और उनके परिवार के साथ बातचीत करती नजर आईं। उनके सादगी भरे लेकिन आकर्षक अंदाज की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है।   सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो शादी से जुड़े कई वीडियो और तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल हो रहे हैं। एक वीडियो में चिरंजीवी, नागार्जुन, जैकी श्रॉफ, वेंकटेश और अनिल कपूर आपस में हंसी-मजाक करते और यादगार तस्वीरें खिंचवाते दिखाई दे रहे हैं। समारोह का पारंपरिक ड्रेस कोड भी लोगों को काफी पसंद आया।   सीएम विजय की गैरमौजूदगी चर्चा में हालांकि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय इस शादी में शामिल नहीं हुए। बताया जाता है कि खुशबू सुंदर ने कुछ दिन पहले परिवार के साथ जाकर उन्हें शादी का निमंत्रण दिया था, लेकिन व्यस्त कार्यक्रमों के चलते वे समारोह में शामिल नहीं हो सके। उनकी गैरमौजूदगी भी इस हाई-प्रोफाइल शादी के दौरान चर्चा का विषय बनी रही।

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