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'Mirzapur: The Movie' Trailer में कालीन भैया-गुड्डू आमने-सामने

'Mirzapur: The Movie' Trailer: कौन बनेगा मिर्जापुर का किंग? कालीन भैया और गुड्डू आमने-सामने

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
Mirzapur The Movie के ट्रेलर में कालीन भैया और गुड्डू
Mirzapur The Movie Trailer में गद्दी की जंग

मुंबई, एजेंसियां। बहुप्रतीक्षित फिल्म 'मिर्जापुर: द मूवी' का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज हो गया है। पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु एक बार फिर अपने चर्चित किरदारों में नजर आएंगे। ट्रेलर में मिर्जापुर की गद्दी, सत्ता, बाहुबल और बदले की वही पुरानी जंग एक नए अंदाज में दिखाई गई है। फिल्म 4 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

 

गद्दी के लिए फिर आमने-सामने होंगे किरदार

 

 

ट्रेलर की शुरुआत मिर्जापुर की गद्दी से होती है। बैकग्राउंड में कालीन भैया की दमदार आवाज सुनाई देती है। वह कहते हैं कि गद्दी विरासत या सियासत से नहीं, बल्कि बाहुबल से मिलती है और उस पर बैठने वाले का रिश्ता मौत से जुड़ जाता है।

 

इसके बाद पंकज त्रिपाठी की कालीन भैया के रूप में जोरदार एंट्री होती है। उनके किरदार का वही खौफ और दबदबा ट्रेलर में देखने को मिलता है। कालीन भैया का एक डायलॉग, 'बाहुबली मारते नहीं हैं, मारने का ऑर्डर देते हैं', उनके किरदार की ताकत को फिर सामने लाता है।

 

मुन्ना और गुड्डू की भी दमदार वापसी

 

 

ट्रेलर में दिव्येंदु एक बार फिर मुन्ना के किरदार में नजर आते हैं। मुन्ना खुद को मिर्जापुर का प्रिंस और अपने पिता को वहां का किंग बताता है।

 

वहीं, अली फजल का गुड्डू पंडित सत्ता की दौड़ में और ज्यादा आक्रामक नजर आ रहा है। गद्दी हासिल करने के लिए वह अपराध और हिंसा का रास्ता अपनाता दिखाई देता है। ट्रेलर में गुड्डू की जान पर मंडराता खतरा भी कहानी को और रोमांचक बनाता है।

 

बड़े पर्दे के लिए और भव्य हुआ मिर्जापुर का संसार

 

 

'मिर्जापुर: द मूवी' को वेब सीरीज से अलग बड़े पर्दे के अनुभव को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। फिल्म में एक्शन और विजुअल्स को बड़े स्तर पर पेश किया गया है।

 

कहानी पूर्वांचल की गलियों से आगे बढ़कर राजस्थान के विशाल इलाकों तक जाती है। ऐसे में फिल्म में मिर्जापुर की पुरानी दुनिया के साथ नए लोकेशन और बड़े एक्शन सीक्वेंस देखने को मिलेंगे।

 

रवि किशन और सोनल चौहान भी आएंगे नजर

 

 

फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु के अलावा रवि किशन, जितेंद्र कुमार और सोनल चौहान भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।

 

'मिर्जापुर: द मूवी' का निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया है, जबकि स्क्रीनप्ले पुनीत कृष्णा ने लिखा है। फिल्म को एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर ने प्रोड्यूस किया है।

 

4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी फिल्म

 

 

'मिर्जापुर: द मूवी' 4 सितंबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म हिंदी और तेलुगु भाषाओं में दर्शकों के सामने आएगी।

 

ट्रेलर के बाद अब फैंस की नजर इस बात पर है कि मिर्जापुर की गद्दी की इस नई जंग में कालीन भैया, गुड्डू और मुन्ना में से किसका दबदबा कायम होता है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की ‘उड़ता तीर’ की रिलीज डेट बदली, अब 9 अक्टूबर को आएगी फिल्म

मुंबई, एजेंसियां। आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की आगामी फिल्म ‘उड़ता तीर’ की रिलीज डेट बदल दी गई है। पहले यह फिल्म 11 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में आने वाली थी, लेकिन अब मेकर्स ने इसकी रिलीज को आगे बढ़ाकर 9 अक्टूबर 2026 कर दिया है। नई तारीख की घोषणा 11 अगस्त को की गई।   ‘हैवान’ से टकराव टला   फिल्म की रिलीज डेट बदलने का एक बड़ा असर यह हुआ कि अक्षय कुमार और सैफ अली खान की ‘हैवान’ के साथ इसका सीधा बॉक्स ऑफिस टकराव टल गया। ‘हैवान’ 11 सितंबर को रिलीज होने वाली है, जबकि ‘उड़ता तीर’ अब करीब एक महीने बाद सिनेमाघरों में पहुंचेगी।   स्पाई-कॉमेडी में नजर आएंगे आयुष्मान-सारा   ‘उड़ता तीर’ को स्पाई-कॉमेडी और फैमिली एंटरटेनर के तौर पर बताया जा रहा है। फिल्म में हास्य के साथ एक्शन और जासूसी की कहानी का मेल देखने को मिलेगा। इसका लेखन और निर्देशन आकाश ए कौशिक ने किया है और यह उनके निर्देशन में पहली फिल्म है।   धर्मा और सिख्या एंटरटेनमेंट का सहयोग   फिल्म का निर्माण धर्मा प्रोडक्शंस और सिख्या एंटरटेनमेंट मिलकर कर रहे हैं। निर्माता टीम में करण जौहर, आदर पूनावाला, अपूर्व मेहता, गुनीत मोंगा कपूर और अचिन जैन शामिल हैं।   नवरात्रि से पहले रिलीज का फायदा   9 अक्टूबर की रिलीज फिल्म के लिए कारोबारी लिहाज से भी अहम हो सकती है। रिपोर्टों के अनुसार नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होगी, यानी फिल्म त्योहार से ठीक दो दिन पहले रिलीज होगी। ऐसे में छुट्टियों और त्योहारी माहौल का फायदा बॉक्स ऑफिस पर मिलने की उम्मीद है।

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राम गोपाल वर्मा ने नई फिल्म ‘पुलिस कंपनी’ का किया ऐलान, हर्षवर्धन राणे निभाएंगे दया नायक का किरदार

मुंबई, एजेंसियां। मशहूर फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा एक बार फिर अपराध और पुलिस की दुनिया पर आधारित क  हानी लेकर आ रहे हैं। उन्होंने अपनी नई फिल्म ‘पुलिस कंपनी’ का ऐलान किया है। फिल्म में अभिनेता हर्षवर्धन राणे मुंबई के चर्चित पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट दया नायक की भूमिका निभाएंगे। फिल्म को राम गोपाल वर्मा के पसंदीदा क्राइम जॉनर में बनाया जाएगा।   दया नायक की जिंदगी पर आधारित होगी फिल्म   ‘पुलिस कंपनी’ की कहानी दया नायक के जीवन और मुंबई पुलिस की उस विशेष टीम से प्रेरित होगी, जिसने शहर में संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई के लिए पहचान बनाई थी। दया नायक इसी चर्चित पुलिस दस्ते के प्रमुख सदस्यों में शामिल रहे हैं।   दया नायक का पुलिस करियर और अपराधियों के खिलाफ उनकी कार्रवाई लंबे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय रही है। फिल्म में उनके करियर, संघर्ष और पुलिस सेवा से जुड़े महत्वपूर्ण दौर को सिनेमाई अंदाज में पेश किए जाने की उम्मीद है।   हर्षवर्धन राणे पहली बार निभाएंगे यह चुनौतीपूर्ण किरदार   फिल्म में दया नायक की भूमिका के लिए हर्षवर्धन राणे को चुना गया है। अभिनेता इससे पहले अलग-अलग तरह के किरदार निभा चुके हैं, लेकिन किसी वास्तविक पुलिस अधिकारी के जीवन से प्रेरित इतनी गंभीर भूमिका उनके लिए नई चुनौती होगी।   फिल्म से जुड़े सूत्रों के मुताबिक हर्षवर्धन राणे इस किरदार के लिए पुलिस अधिकारी के हावभाव, बॉडी लैंग्वेज और काम करने के तरीके को समझने पर विशेष ध्यान दे सकते हैं। फिल्म की बाकी स्टारकास्ट के बारे में विस्तृत जानकारी बाद में सामने आने की उम्मीद है।   राम गोपाल वर्मा की क्राइम फिल्मों में वापसी   ‘पुलिस कंपनी’ के जरिए राम गोपाल वर्मा एक बार फिर उस जॉनर में लौट रहे हैं, जिसने उन्हें हिंदी सिनेमा में अलग पहचान दिलाई। ‘सत्या’, ‘कंपनी’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में अपराध की दुनिया और पुलिस तंत्र को अलग अंदाज में दिखाया गया था।   खास बात यह है कि दया नायक की जिंदगी पहले भी हिंदी फिल्मों के लिए प्रेरणा रही है। राम गोपाल वर्मा द्वारा निर्मित ‘अब तक छप्पन’ भी मुंबई के एनकाउंटर दस्ते से प्रेरित थी। अब ‘पुलिस कंपनी’ में दया नायक की कहानी को सीधे केंद्र में रखने की तैयारी है।   फिल्म की बाकी जानकारी का इंतजार   ‘पुलिस कंपनी’ को टी-सीरीज का समर्थन मिलने की जानकारी सामने आई है। हालांकि फिल्म की रिलीज डेट, बाकी कलाकारों और शूटिंग शेड्यूल को लेकर अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।   राम गोपाल वर्मा की इस घोषणा के बाद फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। खासकर दया नायक की वास्तविक जिंदगी से जुड़े घटनाक्रम को निर्देशक किस तरह पर्दे पर पेश करते हैं, इस पर दर्शकों की नजर रहेगी।

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Emraan Hashmi Statement
इमरान हाशमी ने RD बर्मन बायोपिक में महमूद का किरदार निभाने की खबरों को बताया गलत, बोले- मुझे अप्रोच नहीं किया गया

मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता इमरान हाशमी ने मशहूर संगीतकार आर.डी. बर्मन की प्रस्तावित बायोपिक में दिग्गज अभिनेता और कॉमेडियन महमूद का किरदार निभाने की खबरों को खारिज कर दिया है। पिछले कुछ समय से खबरें चल रही थीं कि इमरान हाशमी इस फिल्म में महमूद की भूमिका निभा सकते हैं। अब अभिनेता ने खुद स्पष्ट कर दिया है कि न तो उन्हें इस फिल्म के लिए अप्रोच किया गया है और न ही वह इसका हिस्सा हैं।   सोशल मीडिया पर इमरान ने साफ की तस्वीर   इमरान हाशमी ने 10 अगस्त को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इन खबरों पर सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बायोपिक में महमूद साहब का किरदार निभाने को लेकर सामने आ रही रिपोर्टें सही नहीं हैं।   अभिनेता ने कहा कि उन्हें इस फिल्म के लिए संपर्क तक नहीं किया गया है और वह फिल्म में काम नहीं कर रहे हैं। उनके इस स्पष्टीकरण के बाद महमूद की भूमिका को लेकर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है।   आर.डी. बर्मन और महमूद की थी खास दोस्ती   आर.डी. बर्मन और महमूद का रिश्ता हिंदी सिनेमा के इतिहास में खास माना जाता है। महमूद ने आर.डी. बर्मन को फिल्म ‘छोटे नवाब’ में संगीतकार के तौर पर बड़ा मौका दिया था। इसके बाद दोनों ने कई चर्चित फिल्मों में साथ काम किया।   महमूद और आर.डी. बर्मन की दोस्ती सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थी। दोनों के बीच व्यक्तिगत संबंध भी काफी मजबूत थे। यही वजह है कि प्रस्तावित बायोपिक में महमूद के किरदार को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   फरहान अख्तर निभा सकते हैं पंचम दा का किरदार   आर.डी. बर्मन की जिंदगी पर बनने वाली इस बायोपिक को लेकर रिपोर्टों में फरहान अख्तर का नाम मुख्य भूमिका के लिए सामने आया है। फिल्म का निर्देशन नीरज पांडे कर सकते हैं और इसे एक्सेल एंटरटेनमेंट से जुड़े प्रोडक्शन के तहत बनाए जाने की खबर है। हालांकि फिल्म की पूरी स्टारकास्ट को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।   रिपोर्टों में अक्षय कुमार के भी फिल्म से जुड़ने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि वह अपने दिवंगत ससुर और अभिनेता राजेश खन्ना की भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन इस संबंध में भी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।   ‘आवारापन 2’ को लेकर चर्चा में हैं इमरान   वहीं इमरान हाशमी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘आवारापन 2’ को लेकर सुर्खियों में हैं। फिल्म 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म में इमरान के साथ शबाना आजमी और दिशा पाटनी भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगी।   ऐसे में आर.डी. बर्मन की बायोपिक में उनके शामिल होने की खबरें सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई थी। लेकिन अब अभिनेता की सफाई के बाद यह साफ हो गया है कि वह इस प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं हैं।

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