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'मां इंटी बंगारम' का बॉक्स ऑफिस पर जलवा बरकरार, सामंथा रुथ प्रभु की फिल्म ने ₹85 करोड़ का आंकड़ा पार किया

anjali kumari जुलाई 2, 2026 0
Maa Inti Bangaaram Review
Maa Inti Bangaaram Review

हैदराबाद, एजेंसियां। अभिनेत्री Samantha Ruth Prabhu की तेलुगु फिल्म 'Maa Inti Bangaaram' बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। रिलीज के 13वें दिन तक फिल्म ने दुनियाभर में ₹85.27 करोड़ से अधिक की कमाई कर ली है। हालांकि दूसरे सप्ताह में कमाई की रफ्तार कुछ धीमी हुई है, फिर भी फिल्म मजबूत पकड़ बनाए हुए है।

 

दूसरे सप्ताह में भी बनी हुई है पकड़

 

13वें दिन फिल्म ने भारत में करीब ₹1.30 करोड़ का नेट कलेक्शन किया। दैनिक कमाई में गिरावट के बावजूद फिल्म का कुल वर्ल्डवाइड ग्रॉस ₹85 करोड़ के पार पहुंच गया है, जिससे यह 2026 की सफल तेलुगु फिल्मों में शामिल हो गई है।

 

महिला प्रधान फिल्म को दर्शकों का भरपूर समर्थन

 

फिल्म में सामंथा के अभिनय की काफी सराहना हो रही है। ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत वर्ड-ऑफ-माउथ के कारण फिल्म आने वाले दिनों में भी अच्छी कमाई जारी रख सकती है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

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Rohit Shetty arrives in a bright orange GMC Hummer EV at the Laughter Chefs grand finale, attracting attention with the luxury electric SUV.
4.76 करोड़ की GMC Hummer EV में नजर आए रोहित शेट्टी, 'लाफ्टर शेफ्स' ग्रैंड फिनाले में लग्जरी SUV ने खींचा सबका ध्यान

नई दिल्ली: बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक रोहित शेट्टी एक बार फिर अपनी शानदार कार कलेक्शन को लेकर चर्चा में हैं। इस बार वह 'लाफ्टर शेफ्स' के ग्रैंड फिनाले में अपनी नई और बेहद लग्जरी GMC Hummer EV से पहुंचे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ऑरेंज रंग की इस दमदार इलेक्ट्रिक SUV ने सेट पर मौजूद सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। 4.76 करोड़ रुपये की इलेक्ट्रिक SUV रोहित शेट्टी जिस GMC Hummer EV में पहुंचे, उसकी कीमत करीब 4.76 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह इलेक्ट्रिक SUV अपने विशाल आकार, बॉक्सी डिजाइन और दमदार रोड प्रेजेंस के लिए दुनियाभर में मशहूर है। हालांकि GMC Hummer EV को अभी तक भारत में आधिकारिक तौर पर लॉन्च नहीं किया गया है। देश में इसकी कुछ चुनिंदा यूनिट्स ही प्राइवेट इम्पोर्ट के जरिए लाई गई हैं। बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह भी इस लग्जरी इलेक्ट्रिक SUV के मालिक हैं। लग्जरी कारों के शौकीन हैं रोहित शेट्टी रोहित शेट्टी का कारों के प्रति लगाव किसी से छिपा नहीं है। उनकी फिल्मों 'सिंघम', 'गोलमाल' और 'सूर्यवंशी' में दमदार कार स्टंट उनकी पहचान बन चुके हैं। उनके गैराज में पहले से कई महंगी और लग्जरी गाड़ियां मौजूद हैं, जिनमें शामिल हैं: Ford Mustang Range Rover Sport Mercedes-Benz AMG G63 Lamborghini Urus GMC Hummer EV (नई एंट्री) इन सभी कारों की कीमत करोड़ों रुपये में है और यह रोहित शेट्टी के ऑटोमोबाइल प्रेम को बखूबी दर्शाती हैं। अपकमिंग प्रोजेक्ट्स पर भी नजर वर्कफ्रंट की बात करें तो रोहित शेट्टी हाल ही में 'सिंघम अगेन' के निर्देशन के बाद चर्चा में रहे। उन्होंने 'खतरों के खिलाड़ी 15' की शूटिंग भी पूरी कर ली है। इसके अलावा खबरें हैं कि वह मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया के जीवन पर आधारित एक नई एक्शन फिल्म पर काम कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म में जॉन अब्राहम और तमन्ना भाटिया अहम भूमिकाओं में नजर आ सकते हैं। हालांकि मेकर्स की ओर से अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।  

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Diljit Dosanjh
दिलजीत दोसांझ के खुलासे से बढ़ी गॉलब्लैडर स्टोन को लेकर चिंता, जानिए कब बन सकती है गंभीर समस्या

नई दिल्ली, एजेंसियां। पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ के हालिया खुलासे के बाद गॉलब्लैडर स्टोन (पित्ताशय की पथरी) एक बार फिर चर्चा में है। दिलजीत ने बताया कि करीब 10 साल पहले जांच के दौरान उनके गॉलब्लैडर में 11-12 मिमी की पथरी का पता चला था, लेकिन उन्होंने अब तक इसकी सर्जरी नहीं कराई है। इसके बाद लोगों के मन में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या लंबे समय तक गॉलब्लैडर स्टोन के साथ रहना सुरक्षित है और इसका इलाज टालने से क्या खतरे हो सकते हैं।   गॉलब्लैडर और किडनी स्टोन में होता है अंतर गॉलब्लैडर स्टोन पित्ताशय में कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन के जमा होने से बनती है, जबकि किडनी स्टोन मूत्र में मौजूद कैल्शियम ऑक्सलेट, यूरिक एसिड और अन्य खनिजों के क्रिस्टल से बनती है। कई लोगों में पथरी वर्षों तक बिना किसी लक्षण के रहती है, लेकिन कुछ मामलों में छोटी पथरी भी असहनीय दर्द का कारण बन सकती है।   इलाज में देरी से बढ़ सकती हैं जटिलताएं गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. विपिन राय के अनुसार, गॉलब्लैडर स्टोन का समय पर इलाज जरूरी है। यदि पथरी पित्त नली को अवरुद्ध कर दे तो बार-बार पित्ताशय में सूजन, संक्रमण, पीलिया, अग्न्याशय (पैंक्रियास) में सूजन और गंभीर जटिलताएं विकसित हो सकती हैं। लंबे समय तक इलाज न होने पर गॉलब्लैडर कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है, हालांकि यह स्थिति दुर्लभ मानी जाती है।   इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें विशेषज्ञों का कहना है कि पेट के दाहिने हिस्से में तेज दर्द, तैलीय भोजन के बाद दर्द बढ़ना, मतली, उल्टी, पीलिया, पेशाब में परेशानी या कमर में लगातार दर्द जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। अल्ट्रासाउंड से गॉलब्लैडर स्टोन की पहचान की जाती है और जरूरत पड़ने पर कोलेसिस्टेक्टॉमी (गॉलब्लैडर हटाने की सर्जरी) की जाती है। पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ वजन बनाए रखना पथरी के खतरे को कम करने में मददगार माना जाता है।

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Lock Upp 2: कंगना रनौत ने राम कपूर की लगाई क्लास, बोलीं— 'अगर इतने बड़े हैं तो शो में आए क्यों?'

नई दिल्ली: रियलिटी शो 'लॉक अप 2' में इस बार हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिलने वाला है। शो के नए प्रोमो में अभिनेत्री कंगना रनौत कंटेस्टेंट्स को उनकी परफॉर्मेंस और रवैये पर कड़ी फटकार लगाती नजर आ रही हैं। सबसे ज्यादा निशाने पर अभिनेता राम कपूर रहे, जिनसे कंगना ने तीखे सवाल पूछते हुए उनके व्यवहार पर नाराजगी जताई। प्रोमो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस एपिसोड को लेकर चर्चा तेज हो गई है और दर्शक पूरे एपिसोड का इंतजार कर रहे हैं। राम कपूर से कंगना का सीधा सवाल प्रोमो में कंगना रनौत, राम कपूर से कहती हैं कि अगर उन्हें लगता है कि वह इस शो से बड़े हैं और गेम को गंभीरता से नहीं लेना चाहते, तो फिर शो का हिस्सा बनने की जरूरत ही क्या थी। कंगना कहती हैं— "अगर आपको लगता है कि आप इस जेल के लिए बहुत बड़े हैं, तो फिर यहां आए क्यों? क्या सिर्फ अपना फूहड़पन दिखाने के लिए?" उनके इस सवाल के बाद माहौल और भी गर्म हो जाता है। राम कपूर ने क्या दिया जवाब? कंगना की बात का जवाब देते हुए राम कपूर कहते हैं— "जब सही समय आएगा, तब मैं भी अपना सच स्वीकार करूंगा और यहां मौजूद किसी भी व्यक्ति से बेहतर तरीके से करूंगा।" हालांकि, राम के इस जवाब से कंगना संतुष्ट नजर नहीं आतीं। कंगना ने दी नसीहत राम कपूर के जवाब के बाद कंगना उन्हें समझाते हुए कहती हैं— "अगर आप खुद में सुधार करना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपना बचाव करना बंद कीजिए।" इस बातचीत ने प्रोमो को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। आकांक्षा चमोला और श्रेया कालरा के बीच भी बढ़ा विवाद प्रोमो में एक और बड़ा मोड़ तब आता है, जब शो के होस्ट रितेश देशमुख कंटेस्टेंट आकांक्षा चमोला को बताते हैं कि उनकी दो लाइफलाइन खत्म हो चुकी हैं। इसके बाद उन्हें दिखाया जाता है कि कंटेस्टेंट श्रेया कालरा ने बातचीत के दौरान आकांक्षा का एक निजी राज सार्वजनिक कर दिया, जिससे शो में नया विवाद खड़ा हो जाता है। पहले भी विवादों में रहे हैं राम कपूर 'लॉक अप 2' की शुरुआत से ही राम कपूर अपने बयानों और व्यवहार को लेकर लगातार चर्चा में रहे हैं। हाल ही के एक एपिसोड में उन्होंने शादी और रिश्तों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि किसी रिश्ते में सच्चा प्यार हो, तो मुश्किल हालात में हुई गलतियों के बावजूद रिश्ता बचाया जा सकता है। उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिलीं। कई दर्शकों और कुछ कंटेस्टेंट्स ने भी इस पर आपत्ति जताई थी। इसके अलावा, शो के एक अन्य एपिसोड में होस्ट रितेश देशमुख के साथ उनकी बातचीत को लेकर भी सोशल मीडिया पर बहस देखने को मिली थी। क्या बढ़ेगी शो की टीआरपी? कंगना रनौत की एंट्री और उनके बेबाक अंदाज ने 'लॉक अप 2' को नई चर्चा दे दी है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर है कि पूरे एपिसोड में राम कपूर और कंगना रनौत के बीच बातचीत किस मोड़ तक पहुंचती है और इसका शो की आगे की कहानी पर क्या असर पड़ता है।  

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