इस बार कैप्री जींस को पुराने अंदाज में पहनने के बजाय ऊंची एड़ी वाली सैंडल, बैले जूते, स्लिंगबैक जूते और म्यूल सैंडल के साथ आधुनिक रूप दिया जा रहा है। सही जूते और ऊपरी पहनावे के साथ कैप्री जींस को रोजमर्रा से लेकर खास मौकों तक आसानी से पहना जा सकता है।
अगर आप कैप्री जींस को आकर्षक और सलीकेदार रूप देना चाहती हैं, तो फ्लेयर कट वाली कैप्री जींस के साथ नुकीले आकार के ऊंची एड़ी वाले जूते पहनें।
इसके साथ सलीकेदार ब्लेजर और कमर पर बेल्ट पहनने से पूरा पहनावा ज्यादा आधुनिक और आकर्षक दिखाई देगा। यह पहनावा रात्रिभोज, पार्टी या किसी खास मुलाकात के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है।
कैप्री जींस को हर बार ऊंची एड़ी वाले जूतों के साथ पहनना जरूरी नहीं है। अगर आप आरामदायक लेकिन खूबसूरत पहनावा चाहती हैं, तो हल्के रंग की कैप्री जींस के साथ बैले जूते पहन सकती हैं।
इसके साथ ढीली शर्ट या आरामदायक ऊपरी पहनावा अच्छा लगेगा। दोस्तों के साथ कॉफी, खरीदारी या परिवार के साथ बाहर जाने के लिए यह पहनावा बेहद सहज और आकर्षक लग सकता है।
क्लासिक स्लिंगबैक जूते कैप्री जींस को शानदार और सलीकेदार रूप देने में मदद कर सकते हैं। नीली डेनिम कैप्री जींस के साथ सफेद शर्ट और हल्के रंग का ढीला ब्लेजर पहनकर आकर्षक पहनावा तैयार किया जा सकता है।
कम से कम आभूषण और हल्के मेकअप के साथ यह पहनावा और भी सुंदर दिखाई देगा। यह ऐसा रूप है जिसे अलग-अलग उम्र की महिलाएं अपनी पसंद के अनुसार अपना सकती हैं।
अगर आपको थोड़ा अलग और प्रयोगात्मक फैशन पसंद है, तो घिसे हुए किनारों वाली कैप्री जींस आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकती है। इसे म्यूल सैंडल या अलग डिजाइन वाली ऊंची एड़ी की सैंडल के साथ पहना जा सकता है।
इस पहनावे को ज्यादा सलीकेदार बनाने के लिए इसके साथ सुंदर ब्लेजर पहनें। चमकदार सजावट वाले जूते इस पुराने दौर से प्रेरित पहनावे को आधुनिक और आकर्षक रूप दे सकते हैं।
कैप्री जींस की वापसी यह दिखाती है कि 2000 के दशक का फैशन केवल पुरानी यादों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे नए दौर के हिसाब से दोबारा तैयार किया जा रहा है।
2026 में कैप्री जींस को पुराने तरीके से दोहराने के बजाय इसे आधुनिक कट, आकर्षक जूतों और सादगी भरे पहनावे के साथ अपनाया जा रहा है।
इस फैशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहुमुखी प्रतिभा है। एक ही कैप्री जींस को अलग-अलग जूतों और ऊपरी पहनावे के साथ बिल्कुल अलग रूप दिया जा सकता है।
अगर आपकी अलमारी में कैप्री जींस लंबे समय से रखी हुई है, तो उसे फिर से बाहर निकालने का समय आ गया है। सही जूते, ब्लेजर और शर्ट के साथ यह पुराना फैशन 2026 के सबसे आकर्षक पहनावों में शामिल हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
फैशन की दुनिया में फ्लैट लोफर्स एक बार फिर ट्रेंड में हैं। अगर आप बिना हील्स के स्मार्ट और एलिगेंट दिखना चाहती हैं, तो इन्हें अलग-अलग तरह की पैंट्स के साथ स्टाइल करना बेहतरीन विकल्प हो सकता है। फ्लैट लोफर्स क्यों हैं ट्रेंड में? स्प्रिंग-समर 2026 फैशन ट्रेंड्स में फ्लैट लोफर्स ने खास जगह बनाई है। इन जूतों की खासियत यह है कि ये आराम और स्टाइल दोनों को साथ लेकर चलते हैं। पहले लोफर्स को ज्यादातर फॉर्मल या विंटर आउटफिट का हिस्सा माना जाता था, लेकिन अब इन्हें जींस, कैपरी, स्ट्राइप्ड पैंट्स और कुलॉट्स के साथ भी आसानी से पहना जा रहा है। फैशन रनवे से लेकर स्ट्रीट स्टाइल तक, लोफर्स के कई नए डिजाइन देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में अगर आप अपने रोजमर्रा के लुक को थोड़ा ज्यादा पॉलिश्ड बनाना चाहती हैं, तो यह ट्रेंड आपके लिए काम आ सकता है। 1. स्ट्राइप्ड पैंट्स के साथ नॉटिकल लोफर्स अगर आप अपने लुक में थोड़ा पैटर्न और कॉन्ट्रास्ट जोड़ना चाहती हैं, तो फ्लैट नॉटिकल लोफर्स को स्ट्राइप्ड पैंट्स के साथ पहन सकती हैं। इसके साथ सिंपल टैंक टॉप या बेसिक टी-शर्ट चुनें। एक्सेसरीज को ज्यादा भारी रखने के बजाय मिनिमल रखें। इससे पूरा आउटफिट बैलेंस्ड और स्मार्ट नजर आएगा। यह कॉम्बिनेशन ऑफिस के कैजुअल लुक से लेकर दोस्तों के साथ आउटिंग तक के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। 2. कैपरी पैंट्स के साथ ओपन-बैक लोफर्स अगर आपको थोड़ा ट्रेंडी और 2000s से इंस्पायर्ड फैशन पसंद है, तो ब्लैक ओपन-बैक फ्लैट लोफर्स के साथ उसी रंग की कैपरी पैंट्स ट्राई करें। मोनोक्रोम लुक आपके आउटफिट को ज्यादा स्टाइलिश और स्लीक बना सकता है। ऊपर से आप सिंपल टी-शर्ट पहन सकती हैं या फिर फेमिनिन टच के लिए हल्की डिटेलिंग वाला ब्लाउज चुन सकती हैं। इस लुक में जूतों और पैंट्स को मुख्य आकर्षण बनाए रखने के लिए बाकी एक्सेसरीज को कम रखना बेहतर रहेगा। 3. साबर लोफर्स के साथ कुलॉट्स अगर आप क्लासिक और एलिगेंट स्टाइल पसंद करती हैं, तो हनी या ब्राउन टोन के साबर फ्लैट लोफर्स को कुलॉट्स के साथ पहनें। इस लुक को और बेहतर बनाने के लिए लोफर्स से मैच करता हुआ बेल्ट इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, अगर आप इसे थोड़ा कैजुअल रखना चाहती हैं तो स्ट्रेट-लेग जींस भी अच्छा विकल्प है। साबर लोफर्स की खासियत यह है कि वे साधारण आउटफिट को भी ज्यादा रिफाइंड लुक दे सकते हैं। हील्स के बिना भी दिखेंगी स्टाइलिश फ्लैट लोफर्स उन लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी हैं जो लंबे समय तक आरामदायक फुटवियर पहनना चाहती हैं, लेकिन अपने लुक से स्टाइल से समझौता नहीं करना चाहतीं। सही पैंट और टॉप के साथ इन्हें ऑफिस, कैजुअल आउटिंग या शाम के कार्यक्रम में भी पहना जा सकता है। इस सीजन अपने वॉर्डरोब में एक क्लासिक फ्लैट लोफर शामिल करना आपके फैशन लुक को आसानी से अपडेट कर सकता है।
Independence Day Home Decoration: 15 अगस्त पर घर को तिरंगे के रंगों से सजाने से देशभक्ति का माहौल बन जाता है। केसरिया, सफेद और हरे रंग की सजावट घर को खास लुक देती है। हालांकि, सजावट करते समय तिरंगे के सम्मान के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा, बारिश और बिजली के सामान जैसी जरूरी बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं घर सजाते समय किन बातों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तिरंगे को सही तरीके से लगाएं अगर आप घर में राष्ट्रीय ध्वज लगा रहे हैं, तो उसे सही तरीके से लगाना जरूरी है। तिरंगे में केसरिया रंग हमेशा ऊपर और हरा रंग नीचे होना चाहिए। इसे जमीन पर न गिरने दें और न ही ऐसी जगह लगाएं जहां उसके पैरों के नीचे आने या गंदा होने का खतरा हो। गंदे, फटे या खराब हो चुके तिरंगे का इस्तेमाल करने से बचें। ध्वज को ऐसी सुरक्षित जगह पर लगाएं जहां वह बारिश या दूसरी वजहों से खराब न हो। प्लास्टिक की सजावट से बचें 15 अगस्त के आसपास बाजार में प्लास्टिक के झंडे और सजावट का सामान आसानी से मिल जाता है। घर की सजावट के लिए आप इसके बजाय कागज या कपड़े का इस्तेमाल कर सकते हैं। पुराने कपड़ों से तिरंगे रंग की लड़ियां बनाई जा सकती हैं। इसी तरह रंगीन कागज से फूल, झालर और दूसरी सजावटी चीजें तैयार की जा सकती हैं। इससे घर भी सुंदर लगेगा और प्लास्टिक का इस्तेमाल भी कम होगा। बच्चों की सुरक्षा का रखें ध्यान अगर घर में छोटे बच्चे हैं, तो सजावट का सामान उनकी पहुंच से दूर रखें। कैंची, पिन, कांच की चीजें और बिजली के तार बच्चों के आसपास न छोड़ें। अगर दीये या मोमबत्ती से सजावट कर रहे हैं, तो इन्हें बच्चों से दूर रखें। जलती हुई मोमबत्ती या दीये को कभी भी बिना निगरानी के न छोड़ें। बारिश में सजावट करते समय सावधानी बरतें 15 अगस्त बारिश के मौसम में आता है। ऐसे में घर के बाहर सजावट करते समय ऐसी चीजों का इस्तेमाल करें जो पानी के संपर्क में आने पर जल्दी खराब न हों। बालकनी, छत या घर के बाहर बिजली की लाइट लगाते समय तारों को पानी से सुरक्षित रखें। गीली जगह पर बिजली के उपकरण या खुले तारों का इस्तेमाल न करें। कम खर्च में ऐसे सजाएं घर 15 अगस्त पर घर को सुंदर बनाने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है। घर में मौजूद पुराने कपड़े, रंगीन कागज और दूसरी चीजों से भी अच्छी सजावट की जा सकती है। केसरिया, सफेद और हरे रंग के कागज से फूल और झालर बनाकर दीवारों को सजाएं। इन रंगों से गमलों या घर के छोटे सजावटी सामान को भी नया लुक दिया जा सकता है। इस तरह थोड़ी सी रचनात्मकता और सावधानी के साथ आप 15 अगस्त पर अपने घर को खूबसूरत और देशभक्ति के रंगों से सजा सकते हैं, साथ ही तिरंगे का सम्मान और घर की सुरक्षा भी बनाए रख सकते हैं।
साउथ सिनेमा की अभिनेत्री अनपमा परमेश्वरन ने एक बार फिर अपने ट्रेडिशनल फैशन लुक से सबका ध्यान खींचा है। अभिनेत्री ने डिजाइनर ब्रांड Torani की मरून जॉर्जेट साड़ी पहनी, जिसमें चिंट्ज प्रिंट, स्ट्राइप्ड पैनल और एम्ब्रॉयडर्ड बॉर्डर का ऐसा मेल देखने को मिला, जिसने पूरे लुक को फेस्टिव और मॉडर्न दोनों बना दिया। यह साड़ी Torani के Taal कलेक्शन का हिस्सा है और इसका नाम Laalima Pravya sari बताया गया है। खास बात यह है कि इसमें प्रिंट सिर्फ साड़ी के बॉडी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मैचिंग हॉल्टर ब्लाउज के जरिए नेकलाइन तक पहुंचता है। यही डिटेल इस पूरे लुक को सामान्य प्रिंटेड साड़ी से अलग बनाती है। मरून साड़ी में फ्लोरल और ज्योमेट्रिक प्रिंट का मेल साड़ी के गहरे मरून बेस पर शुरुआत में छोटे-छोटे फ्लोरल मोटिफ नजर आते हैं। जैसे-जैसे साड़ी का फैब्रिक हेम और पल्लू की ओर बढ़ता है, इन बोटैनिकल पैटर्न का आकार भी बड़ा होता जाता है। डीप रेड टोन के बीच मस्टर्ड कलर के पैनल साड़ी को विजुअल ब्रेक देते हैं। वहीं डबल-लेयर्ड स्कैलप्ड बॉर्डर पर ज्योमेट्रिक एम्ब्रॉयडरी इसे और आकर्षक बनाती है। साड़ी की खासियत यह है कि अलग-अलग प्रिंट और बॉर्डर मिलकर ऐसा प्रभाव पैदा करते हैं, मानो कई प्रिंटेड टेक्सटाइल्स को एक साथ जोड़कर एक नया डिजाइन तैयार किया गया हो। हल्के जॉर्जेट फैब्रिक की वजह से इतने सारे पैटर्न के बावजूद आउटफिट भारी या बोझिल नजर नहीं आता। हॉल्टर ब्लाउज ने बढ़ाया मॉडर्न टच अनपमा ने साड़ी के साथ मैचिंग हॉल्टर ब्लाउज पहना। हाई हॉल्टर नेकलाइन, प्लीटेड फ्रंट और रफल्ड कॉलर ब्लाउज की सबसे खास डिटेल्स हैं। ब्लाउज का प्रिंट नेकलाइन तक फैला हुआ है, जिससे साड़ी और ब्लाउज के बीच एक लगातार पैटर्न का प्रभाव बनता है। वहीं ओपन बैक और शोल्डर एक्सपोजर इस ट्रेडिशनल लुक में आधुनिकता जोड़ते हैं। हाई नेकलाइन जहां आउटफिट को एलिगेंट और स्ट्रक्चर्ड बनाती है, वहीं खुली पीठ और फिटेड सिल्हूट इसे ज्यादा contemporary बनाते हैं। ज्वेलरी ने साड़ी के रंगों को किया कॉम्प्लीमेंट अनपमा ने अपने लुक को Uncut Jewelry के क्रिसेंट ईयररिंग्स और मैचिंग कॉकटेल रिंग के साथ स्टाइल किया। ज्वेलरी में इस्तेमाल किए गए पिंक स्टोन्स और ग्रीन ड्रॉप्स साड़ी के रंगों से खूबसूरती से मेल खाते दिखाई दिए। इसके साथ Earthaments की गोल्ड-टोन बैंगल्स और एक फाइन वेस्ट चेन ने लुक को पूरा किया। ज्वेलरी को इस तरह चुना गया कि वह साड़ी के हर रंग से मैच करने के बजाय उसके ज्योमेट्रिक और कर्व्ड पैटर्न को कॉम्प्लीमेंट करे। खुले कर्ल्स और सॉफ्ट मेकअप ने पूरा किया लुक हेयरस्टाइलिस्ट Sarika Koli ने अनपमा के कर्ल्स को खुला रखा। उनके वॉल्यूमिनस कर्ल्स चेहरे और हॉल्टर नेकलाइन के आसपास फैलते हुए नजर आए, जिससे लुक को एक नेचुरल और ग्लैमरस फिनिश मिली। मेकअप में विंग्ड ब्लैक आईलाइनर, फुल लैशेज और एक छोटा बिंदी लुक की खासियत रहे। आंखों, गालों और होंठों पर सॉफ्ट टेराकोटा टोन इस्तेमाल किए गए, जो साड़ी के रेड-ब्राउन कलर पैलेट के साथ अच्छी तरह घुल गए। वहीं ग्रीन ईयररिंग्स ने पूरे लुक में एक मजबूत कलर कॉन्ट्रास्ट जोड़ा। फेस्टिव सीजन के लिए क्यों खास है यह लुक? अनपमा परमेश्वरन का यह लुक उन लोगों के लिए खास फैशन इंस्पिरेशन है जो पारंपरिक साड़ी को बिना हैवी एम्ब्रॉयडरी के मॉडर्न अंदाज में पहनना चाहते हैं। यहां आउटफिट की खूबसूरती भारी सजावट के बजाय प्रिंट, कलर कॉम्बिनेशन, बॉर्डर और सिल्हूट से आती है। फेस्टिव लंच, डिनर, फैमिली फंक्शन या किसी खास सेलिब्रेशन के लिए इस तरह की प्रिंटेड जॉर्जेट साड़ी एक एलिगेंट विकल्प बन सकती है। खासकर हॉल्टर नेक ब्लाउज और मिनिमल लेकिन कलरफुल ज्वेलरी इसे ट्रेडिशनल और contemporary फैशन के बीच संतुलित लुक देती है।