मुंबई, एजेंसियां। Ardee Industries ने अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) से पहले एंकर निवेशकों से ₹127.75 करोड़ जुटाए हैं। कंपनी ने एंकर निवेशकों को ₹53 प्रति शेयर की कीमत पर कुल 2,41,05,584 इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। इसके बाद कंपनी का करीब ₹426 करोड़ का IPO आज, 5 अगस्त 2026 से आम निवेशकों के लिए खुल गया है।
एंकर बुक में Bank of India Small Cap Fund, Bengal Finance & Investment Pvt Ltd, Winro Commercial (India) Limited, Bharat Value Fund और India Max Investment Fund Limited समेत कई संस्थागत निवेशकों ने हिस्सा लिया। एंकर निवेशकों से मिली मजबूत प्रतिक्रिया को कंपनी के IPO से पहले संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
Ardee Industries का IPO करीब ₹425.87 करोड़ का है। इसमें ₹320 करोड़ का फ्रेश इश्यू और प्रमोटर शेयरधारकों की ओर से करीब ₹105.87 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। IPO का प्राइस बैंड ₹50 से ₹53 प्रति शेयर तय किया गया है और निवेशकों के लिए न्यूनतम लॉट साइज 281 शेयर है। पब्लिक इश्यू 5 अगस्त से 7 अगस्त तक खुला रहेगा।
फ्रेश इश्यू से मिलने वाली रकम में से ₹220 करोड़ कंपनी की अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल जरूरतों के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। वहीं करीब ₹20 करोड़ कर्ज चुकाने में लगाए जाएंगे। शेष रकम सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए इस्तेमाल की जाएगी।
Ardee Industries एंड-ऑफ-लाइफ एनर्जी स्टोरेज उत्पादों और नॉन-फेरस स्क्रैप की रिसाइक्लिंग तथा संसाधन रिकवरी के कारोबार में सक्रिय है। कंपनी से मिलने वाली एंकर बुक की मजबूत प्रतिक्रिया के बाद अब बाजार की नजर IPO के वास्तविक सब्सक्रिप्शन आंकड़ों पर रहेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार, 5 अगस्त 2026 को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। RBI ने इसे 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा है। छह सदस्यीय MPC ने यह फैसला सर्वसम्मति से लिया। केंद्रीय बैंक ने नीतिगत रुख भी ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है। रेपो रेट में लगातार तीसरी बार बदलाव नहीं RBI का ताजा फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा। केंद्रीय बैंक ने लगातार तीसरी नीति बैठक में रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा है। RBI का यह रुख महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति को दर्शाता है। रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक अवधि के लिए पैसा देता है। इसमें बदलाव होने पर बैंकों की कर्ज दरों और कुछ मामलों में होम लोन समेत फ्लोटिंग रेट वाले ऋण की EMI पर असर पड़ सकता है। महंगाई और कच्चे तेल पर RBI की नजर RBI ने ऐसे समय में दरों को स्थिर रखा है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। जून में खुदरा महंगाई 17 महीनों में पहली बार RBI के 4 फीसदी लक्ष्य से ऊपर गई थी, हालांकि महंगाई अभी भी केंद्रीय बैंक की निर्धारित 2-6 फीसदी सहनशीलता सीमा के भीतर है। लोन और EMI लेने वालों पर क्या असर? रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बनाए रखने का मतलब है कि RBI की ओर से तत्काल कोई ब्याज दर कटौती नहीं हुई है। इसलिए रेपो-लिंक्ड फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और अन्य कर्ज की EMI पर RBI के फैसले से सीधे तौर पर तत्काल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। आगे ब्याज दरों की दिशा महंगाई, आर्थिक विकास, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों से मिलने वाले संकेतों पर निर्भर करेगी।
नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 5 अगस्त को शुरुआती कारोबार में जोरदार तेजी देखने को मिली। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति के फैसले से पहले निवेशकों का रुझान सकारात्मक रहा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 500 अंक चढ़ गया, जबकि निफ्टी 24,600 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। दूसरी ओर, विदेशी मुद्रा बाजार में भी रुपये ने मजबूती दिखाई और डॉलर के मुकाबले यह 95 के स्तर से नीचे खुला। बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब निवेशकों की नजर आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक के फैसले पर थी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा इस बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा करने वाले थे। ब्याज दरों और केंद्रीय बैंक के रुख को लेकर बाजार में पहले से ही काफी उम्मीदें बनी हुई थीं। सेंसेक्स करीब 500 अंक चढ़ा सुबह 9:17 बजे बीएसई सेंसेक्स 483.53 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,912.48 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं एनएसई का निफ्टी 24.90 अंक यानी 0.10 प्रतिशत बढ़कर 24,639.80 अंक पर पहुंच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में बाजार में गिरावट देखने को मिली थी। हालांकि, उससे पहले लगातार चार कारोबारी सत्रों तक शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला जारी रहा था। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के 30 में से 25 शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। इससे बाजार में व्यापक रूप से सकारात्मक माहौल का संकेत मिला। इंडिगो समेत इन शेयरों में तेजी सेंसेक्स के शेयरों में इंडिगो सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयरों में रहा। शुरुआती कारोबार में इसमें करीब 2.94 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, महिंद्रा एंड महिंद्रा, लार्सन एंड टुब्रो, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट, एसबीआई, टेक महिंद्रा, इटरनल, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी जैसे शेयर भी मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए। वहीं दूसरी तरफ टाइटन, सन फार्मा, टीसीएस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और एचडीएफसी बैंक में दबाव देखने को मिला। रुपये में भी मजबूती शेयर बाजार के साथ-साथ रुपये ने भी बुधवार को मजबूत शुरुआत की। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 94.92 के स्तर पर खुला। यह 8 जुलाई के बाद पहली बार था जब रुपया 95 के स्तर से नीचे खुला। रुपये में मजबूती को भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि, आगे की दिशा वैश्विक बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश के रुझान से प्रभावित हो सकती है। ब्रॉडर मार्केट में भी खरीदारी बड़े शेयरों के अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी दिखाई दी। शुरुआती कारोबार में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 0.32 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 0.72 प्रतिशत ऊपर रहा। सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी रियल्टी में करीब 2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। ऑटो और पीएसयू बैंक इंडेक्स ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। दूसरी ओर, एफएमसीजी और फार्मा क्षेत्र अपेक्षाकृत कमजोर रहे। RBI की पॉलिसी पर टिकी बाजार की नजर बाजार में बुधवार की तेजी का सबसे बड़ा कारण आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक को माना जा रहा था। निवेशक यह जानना चाहते थे कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर आगे किस दिशा में बढ़ेगा। बाजार में पहले से उम्मीद थी कि आरबीआई रेपो रेट में तत्काल कोई बदलाव नहीं करेगा। ऐसे में निवेशकों का ध्यान केवल दरों पर ही नहीं, बल्कि केंद्रीय बैंक के भविष्य के रुख और अर्थव्यवस्था को लेकर उसकी टिप्पणियों पर भी था। ब्याज दरों में स्थिरता बाजार के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कंपनियों और कारोबारों की उधारी लागत पर अचानक दबाव बढ़ने की संभावना कम रहती है। साथ ही होम लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्जदारों के लिए भी यह राहत का संकेत हो सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भी बाजार को सहारा जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी शेयर बाजार में रिकॉर्ड क्लोजिंग भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी से भारत के आयात बिल और व्यापक अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। FIIs की खरीदारी भी बनी सकारात्मक खबर बाजार के लिए विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की गतिविधियां भी अहम हैं। लगातार छठे कारोबारी दिन विदेशी निवेशकों की खरीदारी को बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना गया। इसके अलावा अर्थव्यवस्था में मजबूत ग्रोथ और कॉरपोरेट मुनाफे में सुधार की उम्मीद भी निवेशकों के भरोसे को मजबूत कर रही है। आगे बाजार की दिशा किन चीजों से तय होगी? बुधवार की शुरुआती तेजी के बाद बाजार की आगे की दिशा कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें आरबीआई की मौद्रिक नीति का रुख, वैश्विक बाजारों की चाल, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और कंपनियों के तिमाही नतीजे प्रमुख हैं। फिलहाल शुरुआती संकेत बाजार के पक्ष में नजर आ रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक तेज उछाल के बाद निवेशकों को सावधानी बरतना जरूरी है। केवल बाजार की तेजी देखकर जल्दबाजी में निवेश करने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और अपने जोखिम स्तर को ध्यान में रखना अधिक महत्वपूर्ण है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 5 अगस्त 2026 को कारोबार की शुरुआत तेजी के साथ हुई, लेकिन बाद में प्रमुख सूचकांकों में नरमी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में Sensex करीब 450 अंक चढ़ा, जबकि Nifty 50 ने 24,600 का स्तर पार किया। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की नजर आज होने वाली RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के फैसले पर टिकी हुई है। शुरुआत में Sensex और Nifty में तेजी सुबह के शुरुआती कारोबार में Sensex करीब 0.8 फीसदी बढ़कर 79,055 के आसपास पहुंच गया था। वहीं Nifty 50 करीब 0.22 फीसदी की बढ़त के साथ 24,669 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। हालांकि बाद के अपडेट में Nifty करीब 24,606 के आसपास आ गया, जिससे शुरुआती तेजी कुछ कम हुई। RBI के फैसले से पहले निवेशक सतर्क आज बाजार के लिए सबसे बड़ा घरेलू ट्रिगर RBI की MPC बैठक का फैसला है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा मौद्रिक नीति का ऐलान करेंगे। बाजार में फिलहाल रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने की उम्मीद है, लेकिन निवेशक गवर्नर के रुख और आगे की ब्याज दरों को लेकर संकेतों पर खास नजर रखेंगे। कच्चे तेल और वैश्विक संकेतों का भी असर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भी भारतीय बाजार की धारणा को कुछ सहारा दिया है। शुरुआती कारोबार के दौरान Brent crude करीब 1.1 फीसदी गिरकर 78.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। इसके अलावा वैश्विक बाजारों के सकारात्मक संकेतों का भी घरेलू शेयर बाजार पर असर देखने को मिला। आगे बाजार की दिशा RBI के फैसले से तय होगी निवेशकों की नजर अब RBI के फैसले के साथ-साथ महंगाई, आर्थिक विकास और मौद्रिक नीति के भविष्य के रुख पर रहेगी। आज के कारोबार में Sensex और Nifty में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। इसलिए फिलहाल बाजार में शुरुआती तेजी के बाद सावधानीपूर्ण कारोबार देखने को मिल रहा है।