कंपनी ने यह जानकारी जून तिमाही (Q1) के वित्तीय नतीजों के बाद आयोजित कॉन्फ्रेंस कॉल में दी। इसके साथ ही बीपीसीएल ने कच्चे तेल की खरीद रणनीति में किए गए बदलाव और अपने वित्तीय प्रदर्शन की भी जानकारी साझा की।
बीपीसीएल के मुताबिक, 10 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर का नेटवर्क तेजी से बढ़ाया जा रहा है।
मुख्य बातें:
जून तिमाही के दौरान बीपीसीएल ने कच्चे तेल की खरीद में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए।
वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में बीपीसीएल को 3,962 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा (Net Loss) हुआ। पिछली तिमाही में कंपनी ने 3,919 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था।
हालांकि, यह घाटा बाजार की अपेक्षाओं से काफी कम रहा। ब्लूमबर्ग के अनुमान के अनुसार कंपनी को लगभग 12,632 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता था।
इसके अलावा कंपनी ने बताया कि उसका मोजाम्बिक LNG प्रोजेक्ट वित्त वर्ष 2029 (FY29) में शुरू होने की उम्मीद है।
कमजोर तिमाही नतीजों के बावजूद कई वैश्विक ब्रोकरेज हाउस बीपीसीएल के शेयर को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं।
Citi ने कंपनी पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखते हुए 350 रुपये का लक्ष्य मूल्य दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद कंपनी का संचालन मजबूत बना हुआ है और यह ऑयल मार्केटिंग सेक्टर में उसकी पसंदीदा कंपनियों में शामिल है।
वहीं Macquarie ने भी 'Outperform' रेटिंग कायम रखते हुए 370 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। उसके अनुसार मार्केटिंग कारोबार कमजोर रहा, लेकिन रिफाइनिंग बिजनेस ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। हालांकि, उसने यह भी चेतावनी दी कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव भविष्य में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की कमाई को प्रभावित कर सकता है।
जून तिमाही के नतीजों के बाद कारोबार के दौरान बीपीसीएल का शेयर करीब 0.49% की गिरावट के साथ 312.95 रुपये पर कारोबार करता दिखाई दिया। इसी दौरान बीएसई सेंसेक्स भी लगभग 0.27% कमजोर रहा।
10 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता बढ़ने से उन उपभोक्ताओं को सबसे अधिक फायदा होगा, जिन्हें 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की पूरी क्षमता की जरूरत नहीं पड़ती। इससे गैस पर होने वाला शुरुआती खर्च कम होगा और उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के अनुसार सिलेंडर चुनने की सुविधा मिलेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Petrol Diesel Price 24 July 2026: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत मई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। पिछले 20 दिनों में कच्चे तेल की कीमत में करीब 42 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बावजूद भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। क्यों महंगा हुआ कच्चा तेल? मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। पहले से होर्मुज स्ट्रेट पर बने तनाव के बीच अब लाल सागर के समुद्री मार्ग पर भी खतरा बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड 100.8 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 92.48 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। 59 दिनों से नहीं बदले पेट्रोल-डीजल के दाम कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं। 25 मई 2026 के बाद से तेल कंपनियों ने खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। यानी देशभर में लगातार 59 दिनों से ईंधन की कीमतें समान बनी हुई हैं। इससे पहले मई महीने में सरकारी तेल कंपनियों ने चार चरणों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की थी। मई में कब-कब बढ़े थे दाम? 15 मई: पेट्रोल ₹3.00 और डीजल ₹3.29 प्रति लीटर महंगा। 19 मई: पेट्रोल ₹0.87 और डीजल ₹0.91 प्रति लीटर बढ़ा। 23 मई: फिर पेट्रोल ₹0.87 और डीजल ₹0.91 प्रति लीटर महंगा। 25 मई: पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी। आज आपके शहर में पेट्रोल-डीजल का रेट शहर पेट्रोल (₹/लीटर) डीजल (₹/लीटर) दिल्ली 102.12 95.20 कोलकाता 113.51 99.82 मुंबई 111.21 97.83 चेन्नई 107.77 99.55 नोएडा 102.12 97.56 चंडीगढ़ 101.51 89.47 लखनऊ 101.89 95.36 पटना 113.37 99.36 रांची 105.26 100.49 भोपाल 114.57 99.64 तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर सरकारी तेल कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर भी दिखाई दे रहा है। BPCL और HPCL ने जून तिमाही में भारी घाटा दर्ज किया है, जबकि IOCL के तिमाही नतीजों का इंतजार है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो आने वाले समय में तेल कंपनियों पर लागत का दबाव और बढ़ सकता है। SMS से ऐसे जानें अपने शहर का ताजा रेट अगर आप अपने शहर में पेट्रोल और डीजल की ताजा कीमत जानना चाहते हैं, तो SMS के जरिए भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। Indian Oil: RSP <शहर का कोड> लिखकर 9224992249 पर भेजें। BPCL: RSP <शहर का कोड> लिखकर 9223112222 पर भेजें। HPCL: HPPRICE <शहर का कोड> लिखकर 9222201122 पर SMS करें। तेल कंपनियां रोजाना सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपडेट करती हैं।
Brent Crude Oil Price Today: मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई, जिससे निवेशकों और वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। 100 डॉलर के पार क्यों पहुंचा ब्रेंट क्रूड? कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता सैन्य तनाव है। रिपोर्टों के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने रेड सी में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इस घटना के बाद वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ गई। इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने भी निवेशकों की चिंताओं को गहरा कर दिया है। लगातार सैन्य कार्रवाई और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण ट्रेडर्स ने तेल की कीमतों में भू-राजनीतिक जोखिम को शामिल करना शुरू कर दिया है। क्यों अहम हैं रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज? वैश्विक तेल व्यापार के लिए दो समुद्री मार्ग सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले करीब 25% कच्चे तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है। बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट: यह रेड सी को गल्फ ऑफ एडन से जोड़ता है। दुनिया के लगभग 12% वैश्विक व्यापार और हर साल करीब 4.1 अरब बैरल तेल एवं पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही इसी मार्ग से होती है। यदि इन दोनों समुद्री मार्गों पर किसी भी तरह की रुकावट आती है, तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। भारत पर क्या होगा असर? भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अगर ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो इसके संभावित प्रभाव हो सकते हैं— पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना। परिवहन लागत बढ़ने से महंगाई पर दबाव। हवाई यात्रा और लॉजिस्टिक्स खर्च में इजाफा। सरकार पर ईंधन कर और सब्सिडी को लेकर अतिरिक्त दबाव। आयात बिल बढ़ने से चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) पर असर। वैश्विक बाजारों की बढ़ी चिंता तेल की कीमतों में उछाल का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। महंगा कच्चा तेल दुनियाभर में महंगाई बढ़ा सकता है, जिससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों को लेकर फैसले लेना और चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा शेयर बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ने की आशंका रहती है। आगे किस पर रहेगी बाजार की नजर? फिलहाल निवेशकों की निगाहें मिडिल ईस्ट की स्थिति पर टिकी हैं। खासकर यह देखा जाएगा कि रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल की सप्लाई सामान्य बनी रहती है या नहीं। यदि तनाव और बढ़ता है या समुद्री मार्गों पर बाधा आती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रम ही तय करेंगे कि ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के ऊपर टिकता है या कीमतों में कुछ राहत देखने को मिलती है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 700 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 भी 23,700 के स्तर से नीचे फिसल गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा। आईटी और एविएशन शेयरों में दबाव, सभी सेक्टर लाल निशान में शुक्रवार के कारोबार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में गिरावट दर्ज की गई। आईटी कंपनी इन्फोसिस और एविएशन कंपनी इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) के कमजोर तिमाही नतीजों के बाद उनके शेयरों में गिरावट आई, जिसका असर पूरे बाजार पर पड़ा। बैंकिंग, ऑटो, मेटल और फार्मा सेक्टर में भी बिकवाली हावी रही, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी नुकसान के साथ कारोबार करते रहे। कच्चे तेल और वैश्विक तनाव से बढ़ी चिंता विशेषज्ञों के अनुसार ईरान-अमेरिका तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली, रुपये में कमजोरी और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी घरेलू बाजार की धारणा को प्रभावित किया। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक हालात सामान्य नहीं होते और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।