नई दिल्ली, एजेंसियां। व्रत के दौरान मीठा खाने का मन हो तो फल, मखाने या साबूदाने से बनी सामान्य डिश के बजाय इस बार साबूदाना रसमलाई ट्राई कर सकते हैं। दूध, साबूदाना, ड्राई फ्रूट्स और इलायची से तैयार होने वाली यह मिठाई स्वाद में रसमलाई जैसी लगती है और इसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है।
1 कप साबूदाना
1 लीटर फुल क्रीम दूध
4-5 चम्मच चीनी या स्वादानुसार
8-10 बादाम
8-10 काजू
1 चम्मच पिस्ता
3-4 इलायची
1 चुटकी केसर
1-2 चम्मच दूध
1 चम्मच घी
सबसे पहले साबूदाने को अच्छी तरह धोकर 4-5 घंटे के लिए पर्याप्त पानी में भिगो दें। फूलने के बाद अतिरिक्त पानी निकालकर साबूदाने को कुछ देर छलनी में रखें।
इसके बाद इसे हल्के हाथ से मैश करें। साबूदाने को पूरी तरह पेस्ट न बनाएं, बल्कि दानों को थोड़ा टूटने दें।
मैश किए हुए साबूदाने में थोड़ा घी मिलाएं। हाथों पर हल्का घी लगाकर इसकी छोटी-छोटी लोई बनाएं और हथेली से दबाकर चपटा कर दें।
अब नॉनस्टिक पैन में इन टिक्कियों को धीमी आंच पर हल्का सुनहरा होने तक सेंक लें। टिक्कियों को बहुत ज्यादा क्रिस्पी न करें, क्योंकि बाद में इन्हें दूध में पकाना है।
भारी तले वाले बर्तन में फुल क्रीम दूध डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें। उबाल आने के बाद आंच धीमी कर दें और बीच-बीच में चलाते रहें। दूध थोड़ा गाढ़ा और कम होने लगे तो इसमें चीनी, इलायची पाउडर और केसर वाला दूध डालें।
इसके बाद कटे हुए बादाम, काजू और पिस्ता मिलाकर कुछ मिनट और पकाएं।
दूध गाढ़ा होने पर गैस धीमी कर दें और तैयार साबूदाने की टिक्कियों को सावधानी से दूध में डालें। इन्हें ज्यादा चलाने से बचें, वरना टिक्कियां टूट सकती हैं।
करीब 5-7 मिनट तक धीमी आंच पर पकाने से टिक्कियां दूध का स्वाद सोखकर नरम हो जाएंगी।
गैस बंद करने के बाद साबूदाना रसमलाई को कमरे के तापमान पर थोड़ा ठंडा होने दें। इसके बाद इसे 1-2 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें। सर्व करते समय ऊपर से कटे हुए पिस्ता और बादाम डालें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। व्रत के दौरान मीठा खाने का मन हो तो फल, मखाने या साबूदाने से बनी सामान्य डिश के बजाय इस बार साबूदाना रसमलाई ट्राई कर सकते हैं। दूध, साबूदाना, ड्राई फ्रूट्स और इलायची से तैयार होने वाली यह मिठाई स्वाद में रसमलाई जैसी लगती है और इसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है। साबूदाना रसमलाई के लिए सामग्री 1 कप साबूदाना 1 लीटर फुल क्रीम दूध 4-5 चम्मच चीनी या स्वादानुसार 8-10 बादाम 8-10 काजू 1 चम्मच पिस्ता 3-4 इलायची 1 चुटकी केसर 1-2 चम्मच दूध 1 चम्मच घी ऐसे तैयार करें साबूदाना रसमलाई साबूदाना भिगोकर करें तैयार सबसे पहले साबूदाने को अच्छी तरह धोकर 4-5 घंटे के लिए पर्याप्त पानी में भिगो दें। फूलने के बाद अतिरिक्त पानी निकालकर साबूदाने को कुछ देर छलनी में रखें। इसके बाद इसे हल्के हाथ से मैश करें। साबूदाने को पूरी तरह पेस्ट न बनाएं, बल्कि दानों को थोड़ा टूटने दें। बनाएं साबूदाने की टिक्की मैश किए हुए साबूदाने में थोड़ा घी मिलाएं। हाथों पर हल्का घी लगाकर इसकी छोटी-छोटी लोई बनाएं और हथेली से दबाकर चपटा कर दें। अब नॉनस्टिक पैन में इन टिक्कियों को धीमी आंच पर हल्का सुनहरा होने तक सेंक लें। टिक्कियों को बहुत ज्यादा क्रिस्पी न करें, क्योंकि बाद में इन्हें दूध में पकाना है। दूध को अच्छी तरह पकाएं भारी तले वाले बर्तन में फुल क्रीम दूध डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें। उबाल आने के बाद आंच धीमी कर दें और बीच-बीच में चलाते रहें। दूध थोड़ा गाढ़ा और कम होने लगे तो इसमें चीनी, इलायची पाउडर और केसर वाला दूध डालें। इसके बाद कटे हुए बादाम, काजू और पिस्ता मिलाकर कुछ मिनट और पकाएं। दूध में डालें साबूदाने की टिक्कियां दूध गाढ़ा होने पर गैस धीमी कर दें और तैयार साबूदाने की टिक्कियों को सावधानी से दूध में डालें। इन्हें ज्यादा चलाने से बचें, वरना टिक्कियां टूट सकती हैं। करीब 5-7 मिनट तक धीमी आंच पर पकाने से टिक्कियां दूध का स्वाद सोखकर नरम हो जाएंगी। ठंडी करके करें सर्व गैस बंद करने के बाद साबूदाना रसमलाई को कमरे के तापमान पर थोड़ा ठंडा होने दें। इसके बाद इसे 1-2 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें। सर्व करते समय ऊपर से कटे हुए पिस्ता और बादाम डालें।
15 August Breakfast Recipes: स्वतंत्रता दिवस पर अगर आप रोज के नाश्ते में थोड़ा देशभक्ति का रंग जोड़ना चाहते हैं, तो तिरंगे से प्रेरित ये रेसिपीज ट्राई कर सकते हैं। गाजर, पालक, मटर, पनीर और बेसन जैसी आसानी से मिलने वाली चीजों से केसरिया, सफेद और हरे रंग का नाश्ता तैयार किया जा सकता है। ये रेसिपीज देखने में आकर्षक होने के साथ बच्चों और बड़ों को भी पसंद आ सकती हैं। 1. तिरंगा इडली इडली के बैटर को तीन हिस्सों में बांट लें। पहले हिस्से में गाजर की प्यूरी, दूसरे हिस्से को सादा और तीसरे हिस्से में पालक की प्यूरी मिलाएं। अब तीनों बैटर को अलग-अलग स्टीम करके रंग-बिरंगी इडली तैयार करें। इन्हें एक प्लेट में तिरंगे के तीन रंगों के क्रम में सजाकर परोस सकते हैं। 2. तिरंगा सैंडविच ब्रेड की एक स्लाइस पर गाजर या टमाटर से तैयार स्प्रेड लगाएं। इसके ऊपर पनीर या चीज की सफेद परत रखें और सबसे ऊपर हरी चटनी की लेयर लगाएं। सैंडविच को तिरंगे के रंग में सजाकर बच्चों के नाश्ते में शामिल किया जा सकता है। 3. तिरंगा चीला बेसन के बैटर को तीन हिस्सों में बांट लें। एक हिस्से में गाजर की प्यूरी, दूसरे को सादा और तीसरे में पालक या धनिया मिलाएं। अब तीनों बैटर से छोटे-छोटे चीले बनाकर एक प्लेट में तीन रंगों के साथ सर्व करें। 4. तिरंगा पराठा आटे को तीन हिस्सों में बांटें। एक हिस्से में गाजर का पेस्ट, दूसरे में कुछ न मिलाएं और तीसरे हिस्से में पालक का पेस्ट मिलाएं। तीनों हिस्सों से अलग-अलग रंग के पराठे तैयार करें और प्लेट में एक साथ सजाकर परोसें। 5. तिरंगा उपमा उपमा तैयार करने के बाद उसे तीन हिस्सों में बांट लें। एक हिस्से में गाजर, दूसरे को सादा और तीसरे में मटर या पालक मिला सकते हैं। अब तीनों हिस्सों को प्लेट में साथ-साथ रखकर तिरंगे जैसा लुक दें। 6. तिरंगा ढोकला ढोकले के बैटर को तीन भागों में बांटकर एक में गाजर की प्यूरी और दूसरे में पालक की प्यूरी मिलाएं। तीसरे हिस्से को सादा रखें। अब तीनों बैटर की परत बनाकर स्टीम करें। तैयार ढोकले को टुकड़ों में काटकर धनिया से सजाएं। 7. तिरंगा पोहा कटलेट पोहा, आलू और सब्जियों से कटलेट का मिश्रण तैयार करें। इसे तीन हिस्सों में बांटकर एक हिस्से में गाजर और दूसरे में पालक मिलाएं, जबकि तीसरे हिस्से को सादा रखें। तीनों मिश्रण से छोटे कटलेट बनाकर हल्के तेल में सेंक लें और प्लेट में तीन रंगों में सजाकर सर्व करें। इस 15 अगस्त नाश्ते को बनाएं खास इन रेसिपीज में प्राकृतिक रंग देने के लिए गाजर, पालक, मटर और धनिया जैसी सब्जियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे नाश्ता देखने में आकर्षक बनाने के साथ उसमें सब्जियों और दूसरे पोषक खाद्य पदार्थों को शामिल करना भी आसान हो जाता है। स्वतंत्रता दिवस की सुबह परिवार के साथ इन आसान रेसिपीज को बनाकर दिन की शुरुआत खास अंदाज में की जा सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। ब्रेड, पराठे, रोटी या गर्मागर्म सब्जी के साथ ताजा मक्खन खाने का स्वाद ही अलग होता है। अगर आप बाजार के मक्खन की जगह घर का शुद्ध और फ्रेश मक्खन बनाना चाहते हैं, तो गाढ़े दही की मदद से इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसके लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत भी नहीं पड़ती। मक्खन बनाने के लिए चाहिए ये चीजें घर पर मक्खन बनाने के लिए करीब 1 किलो गाढ़ा जमा हुआ दही, थोड़ा ठंडा पानी, एक गहरा बर्तन और मथनी या हैंड ब्लेंडर की जरूरत होगी। स्वाद के अनुसार नमक भी मिलाया जा सकता है। दही को अच्छी तरह मथें सबसे पहले जमा हुआ दही एक बड़े बर्तन में निकालें और मथनी या हैंड ब्लेंडर से अच्छी तरह फेंटें। कुछ देर लगातार मथने पर दही में मौजूद मलाई और फैट अलग होने लगेंगे। इसके बाद सतह पर मक्खन के छोटे-छोटे दाने दिखाई देने लगेंगे। ठंडा पानी डालने से ऐसे बनेगा मक्खन जब मक्खन के कण अलग नजर आने लगें, तो इसमें थोड़ा-थोड़ा करके ठंडा पानी डालें और फिर से मथें। ठंडा पानी मक्खन के कणों को एक साथ इकट्ठा करने में मदद करता है। कुछ देर बाद मक्खन एक जगह जमा हो जाएगा और नीचे छाछ जैसा तरल बच जाएगा। मक्खन को साफ करना जरूरी अब मक्खन को हाथ या चम्मच की मदद से अलग बर्तन में निकाल लें। इसे 2-3 बार ठंडे पानी से हल्के हाथों से धोएं, ताकि उसमें बची छाछ निकल जाए। इसके बाद हाथ से हल्का दबाकर अतिरिक्त पानी निकाल दें। नमकीन या सादा, जैसा पसंद हो अगर आपको नमकीन मक्खन पसंद है तो इसमें स्वाद के अनुसार थोड़ा नमक मिला सकते हैं। वहीं मीठे या सादे स्वाद के लिए इसे बिना नमक के भी रखा जा सकता है। घर का ताजा मक्खन रोटी, पराठे, टोस्ट और सब्जियों के साथ स्वादिष्ट लगता है। फ्रेश रखने के लिए अपनाएं ये तरीका तैयार मक्खन को साफ और सूखे एयरटाइट डिब्बे में रखें और फ्रिज में स्टोर करें। मक्खन निकालने के लिए हमेशा साफ और सूखे चम्मच का इस्तेमाल करें। इससे मक्खन को बेहतर तरीके से सुरक्षित रखा जा सकता है।