स्वास्थ्य

Gut Bacteria Linked to Heart Risk

डायबिटीज और दिल की बीमारी में गट माइक्रोबायोटा का बड़ा खुलासा, नई स्टडी में मिले संभावित बायोमार्कर

surbhi मई 16, 2026 0
Scientific illustration of gut microbiota linked with diabetes and heart disease research findings
Gut Microbiota Diabetes Heart Disease Study

हाल ही में सामने आई एक पायलट स्टडी में टाइप-2 डायबिटीज मेलिटस (T2DM) और कोरोनरी आर्टेरियोस्क्लेरोटिक हार्ट डिजीज के बीच गट माइक्रोबायोटा और मेटाबोलिक बदलावों को लेकर महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि ये बदलाव कार्डियोमेटाबोलिक बीमारियों के संभावित बायोमार्कर हो सकते हैं।

स्टडी में क्या किया गया अध्ययन?

शोधकर्ताओं ने कुल 30 प्रतिभागियों के फीकल और प्लाज्मा सैंपल का विश्लेषण किया, जिनमें शामिल थे—

  • 10 स्वस्थ व्यक्ति
  • 10 टाइप-2 डायबिटीज मरीज
  • 10 ऐसे मरीज जिनमें डायबिटीज के साथ हार्ट डिजीज भी थी

इस दौरान मेटाजीनोमिक सीक्वेंसिंग और लिक्विड क्रोमैटोग्राफी–मास स्पेक्ट्रोमेट्री (LC-MS) तकनीक का उपयोग किया गया।

गट माइक्रोबायोटा में क्या बदलाव मिले?

स्टडी में कई बैक्टीरियल स्पीशीज में अंतर पाया गया, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • Prevotella disiens
  • Bacteroides sp._CAG_875
  • Sutterella wadsworthensis
  • Paraprevotella clara
  • Anaerobutyricum hallii

शोधकर्ताओं के अनुसार, खासकर Bacteroides sp._CAG_875 एक महत्वपूर्ण संभावित बायोमार्कर के रूप में उभरा, जो स्वस्थ व्यक्तियों और T2DM-CAD मरीजों के बीच स्पष्ट अंतर दिखाने में सक्षम रहा।

हालांकि कुल माइक्रोबायोटा विविधता में बड़ा अंतर नहीं पाया गया, लेकिन विशिष्ट बैक्टीरिया में महत्वपूर्ण बदलाव देखे गए।

मेटाबोलिक बदलाव और संभावित संकेत

शोध में 42 अलग-अलग मेटाबोलाइट्स की पहचान की गई, जिनमें शामिल हैं:

  • फ्रक्टोज
  • गैलिक एसिड
  • पाइरोग्लूटामिक एसिड
  • एडिपिक एसिड
  • सबेरिक एसिड
  • 12-ketolithocholic acid (12-ketoLCA)

इनमें 12-ketoLCA को सबसे अहम संभावित बायोमार्कर माना गया, जो बाइल एसिड मेटाबॉलिज्म और मेटाबोलिक डिसफंक्शन से जुड़ा हो सकता है।

“गट-हार्ट एक्सिस” पर बड़ा संकेत

स्टडी में यह भी पाया गया कि गट माइक्रोब्स और मेटाबोलाइट्स के बीच गहरा संबंध है, जो “gut–heart axis” की ओर संकेत करता है। यह डायबिटीज से जुड़ी हार्ट बीमारियों में एक अहम भूमिका निभा सकता है।

इसके अलावा अमीनो एसिड, लिनोलिक एसिड और ग्लूटामेट मेटाबॉलिज्म जैसे पाथवे में भी बदलाव देखे गए, जो इंसुलिन रेजिस्टेंस और कार्डियोवस्कुलर डिजीज से जुड़े हैं।

सीमाएं और आगे की जरूरत

शोधकर्ताओं ने माना कि यह एक छोटा पायलट अध्ययन था, इसलिए निष्कर्षों को अभी शुरुआती स्तर का माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि:

  • सैंपल साइज छोटा था
  • मेकैनिज्म की पुष्टि बाकी है
  • बड़े और लंबे समय के अध्ययन की जरूरत है
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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Medical illustration of psoriasis treatment showing IL-17 inhibitors reducing risk of psoriatic arthritis in patients
IL-17 Inhibitors से Psoriatic Arthritis का खतरा कम, नई स्टडी में बड़ा दावा

Psoriatic Arthritis के खतरे को लेकर नई रिसर्च में अहम खुलासा हुआ है। अध्ययन के मुताबिक, सोरायसिस मरीजों में बायोलॉजिक दवाओं के चयन और उनके क्रम (sequencing) का भविष्य में Psoriatic Arthritis विकसित होने के जोखिम पर असर पड़ सकता है। खासतौर पर IL-17 inhibitors लेने वाले मरीजों में बीमारी का खतरा कम पाया गया। बायोलॉजिक थेरेपी के क्रम पर बढ़ी रुचि Psoriasis से पीड़ित मरीजों में Psoriatic Arthritis होने का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है। हालांकि अब तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं था कि अलग-अलग बायोलॉजिक थेरेपी इस जोखिम को कैसे प्रभावित करती हैं। पहले के कुछ अध्ययनों में संकेत मिले थे कि first-line IL-23p19 inhibitors Psoriatic Arthritis के खतरे को कम कर सकते हैं, लेकिन second-line बायोलॉजिक थेरेपी के प्रभाव को लेकर पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इसी को ध्यान में रखते हुए शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया। 20 साल के डेटा का विश्लेषण इस population-based cohort study में 2002 से 2022 के बीच सोरायसिस के लिए बायोलॉजिक थेरेपी शुरू करने वाले 2,819 मरीजों का विश्लेषण किया गया। मरीजों को अलग-अलग दवा समूहों में बांटा गया, जिनमें शामिल थे: Tumour Necrosis Factor (TNF) inhibitors IL-17 inhibitors IL-23p19 inhibitors IL-12/23 inhibitors शोधकर्ताओं ने first-line और second-line दोनों प्रकार की बायोलॉजिक थेरेपी का अलग-अलग विश्लेषण किया। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह देखना था कि कितने मरीजों में बाद में Psoriatic Arthritis विकसित हुआ। IL-17 Inhibitors में सबसे कम जोखिम अध्ययन में first-line biologic therapy लेने वाले 2,819 मरीजों में से 400 मरीजों (14.2%) में Psoriatic Arthritis विकसित हुआ। विश्लेषण में पाया गया कि first-line IL-23p19 inhibitors लेने वाले मरीजों में TNF inhibitors की तुलना में बीमारी का खतरा काफी कम था। वहीं second-line biologic therapy लेने वाले 1,246 मरीजों में से 125 मरीजों (10%) में Psoriatic Arthritis विकसित हुआ। Second-line treatment analysis में IL-17 inhibitors ही एकमात्र दवा वर्ग था, जिसने TNF inhibitors की तुलना में बीमारी के जोखिम को उल्लेखनीय रूप से कम किया। रिसर्च के अनुसार: IL-17 inhibitors से बीमारी का खतरा लगभग 63% तक कम देखा गया IL-12/23 inhibitors और IL-23p19 inhibitors में भी जोखिम कम होने के संकेत मिले, लेकिन परिणाम सांख्यिकीय रूप से पूरी तरह मजबूत नहीं थे इलाज की रणनीति बदल सकती है शोधकर्ताओं का मानना है कि यह अध्ययन भविष्य में सोरायसिस मरीजों के लिए बायोलॉजिक थेरेपी चुनने की रणनीति को प्रभावित कर सकता है। खासतौर पर TNF inhibitor therapy असफल होने के बाद IL-17 inhibitors बेहतर second-line विकल्प बन सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों ने कहा कि इन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए आगे prospective studies की जरूरत होगी, ताकि Psoriatic Arthritis की रोकथाम पर आधारित बेहतर treatment guidelines तैयार की जा सकें।  

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