स्वास्थ्य

गर्मियों में बार-बार बीमार होने से बचना है? रोज पिएं बेल का शरबत

Anjali Kumari अप्रैल 30, 2026 0
Bael juice benefits
Bael juice benefits

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों में शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखने के लिए Bael Sharbat एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। स्वाद के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। आयुर्वेद में भी बेल को औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है, जिसकी वजह से इसका शरबत गर्मी के मौसम में खास तौर पर पीने की सलाह दी जाती है।

 

पेट की समस्याओं से राहत


बेल का शरबत गट हेल्थ के लिए काफी लाभकारी होता है। यह ब्लोटिंग, कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है। साथ ही, लू से बचाव में भी यह असरदार माना जाता है। रोजाना एक गिलास बेल का शरबत पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर को ठंडक मिलती है।

 

ब्लड शुगर कंट्रोल में मददगार


विशेषज्ञों के अनुसार, खाली पेट बेल का शरबत पीना ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, डायरिया और दस्त जैसी समस्याओं में भी यह राहत देता है। हालांकि, इसका सेवन सही मात्रा और संतुलन के साथ करना जरूरी है।

 

इम्यूनिटी बढ़ाने में कारगर


कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण लोग जल्दी बीमार पड़ते हैं, लेकिन बेल का शरबत शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को डिटॉक्स करने में भी सहायक होते हैं, जिससे शरीर अंदर से साफ और मजबूत बनता है।

 

डॉक्टर की सलाह जरूरी


हालांकि बेल का शरबत कई फायदों से भरपूर है, लेकिन किसी भी नई डाइट को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। सही मात्रा और नियमित सेवन से यह गर्मियों में आपकी सेहत को “टनाटन” बनाए रखने में मदद कर सकता है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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गर्मियों में बार-बार बीमार होने से बचना है? रोज पिएं बेल का शरबत

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मियों में शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखने के लिए Bael Sharbat एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। स्वाद के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। आयुर्वेद में भी बेल को औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है, जिसकी वजह से इसका शरबत गर्मी के मौसम में खास तौर पर पीने की सलाह दी जाती है।   पेट की समस्याओं से राहत बेल का शरबत गट हेल्थ के लिए काफी लाभकारी होता है। यह ब्लोटिंग, कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है। साथ ही, लू से बचाव में भी यह असरदार माना जाता है। रोजाना एक गिलास बेल का शरबत पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर को ठंडक मिलती है।   ब्लड शुगर कंट्रोल में मददगार विशेषज्ञों के अनुसार, खाली पेट बेल का शरबत पीना ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, डायरिया और दस्त जैसी समस्याओं में भी यह राहत देता है। हालांकि, इसका सेवन सही मात्रा और संतुलन के साथ करना जरूरी है।   इम्यूनिटी बढ़ाने में कारगर कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण लोग जल्दी बीमार पड़ते हैं, लेकिन बेल का शरबत शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को डिटॉक्स करने में भी सहायक होते हैं, जिससे शरीर अंदर से साफ और मजबूत बनता है।   डॉक्टर की सलाह जरूरी हालांकि बेल का शरबत कई फायदों से भरपूर है, लेकिन किसी भी नई डाइट को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। सही मात्रा और नियमित सेवन से यह गर्मियों में आपकी सेहत को “टनाटन” बनाए रखने में मदद कर सकता है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। पूड़ी भारतीय खाने का एक अहम हिस्सा है, जिसे नाश्ते से लेकर त्योहारों तक बड़े चाव से खाया जाता है। गर्मागर्म, फूली हुई और कुरकुरी पूड़ी का स्वाद हर किसी को पसंद आता है। लेकिन कई बार घर पर बनाई गई पूड़ी ज्यादा तेल सोख लेती है, जिससे वह भारी और कम स्वादिष्ट लगती है।अगर आपकी पूड़ियां भी जरूरत से ज्यादा तेल पीती हैं, तो इसकी वजह कुछ आम गलतियां हो सकती हैं। सही तरीके अपनाकर आप कम तेल में हल्की, क्रिस्पी और परफेक्ट पूड़ी बना सकते हैं।   1. आटे को सही तरीके से गूंधना जरूरी पूड़ी बनाने की शुरुआत आटे से होती है। अगर आटा बहुत नरम होगा, तो पूड़ी तेल ज्यादा सोखेगी। इसलिए आटे को हमेशा सख्त गूंधें। इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए टाइट डो तैयार करें। चाहें तो इसमें एक चम्मच सूजी मिलाने से पूड़ी और ज्यादा कुरकुरी बनती है।   2. आटे को ज्यादा देर तक न रखें गूंधे हुए आटे को लंबे समय तक ढककर रखने से वह ढीला हो जाता है और तेल ज्यादा सोखने लगता है। पूड़ी बनाने के लिए आटा गूंधने के 10–15 मिनट के भीतर ही इस्तेमाल करना सबसे सही होता है।   3. तेल का सही तापमान बेहद जरूरी अगर तेल सही से गर्म नहीं होगा, तो पूड़ी तेल सोख लेगी। तेल ज्यादा ठंडा या बहुत ज्यादा गर्म नहीं होना चाहिए। सही जांच के लिए आटे का छोटा टुकड़ा तेल में डालें अगर वह तुरंत ऊपर आ जाए, तो तेल सही तापमान पर है। 4. पूड़ी की मोटाई का रखें ध्यान पूड़ी बहुत पतली होने पर तेल ज्यादा पीती है और बहुत मोटी होने पर अंदर से कच्ची रह सकती है। इसलिए हमेशा मध्यम मोटाई में पूड़ी बेलें, ताकि वह अच्छे से फूल भी जाए और कम तेल सोखे।   5. तलते समय हल्का दबाव दें जब पूड़ी तेल में डाली जाए, तो उसे हल्के से कलछी से दबाएं। इससे वह जल्दी फूलती है और कम समय में पक जाती है। जितनी जल्दी पूड़ी तलेगी, उतना ही कम तेल सोखेगी।   अतिरिक्त टिप: टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें तली हुई पूड़ी को सीधे प्लेट में रखने के बजाय टिश्यू पेपर पर रखें। इससे अतिरिक्त तेल सोख लिया जाएगा और पूड़ी हल्की व क्रिस्पी बनी रहेगी। अगर आप इन आसान टिप्स को अपनाते हैं और बताई गई गलतियों से बचते हैं, तो आप घर पर ही होटल जैसी हल्की, फूली और कम तेल वाली स्वादिष्ट पूड़ियां बना सकते हैं।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी का मौसम आते ही शरीर को हाइड्रेट और ठंडा रखने वाले पेय पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में तरबूज मोहितो एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आता है। यह न सिर्फ स्वाद में रिफ्रेशिंग होता है, बल्कि शरीर को तुरंत ऊर्जा और ठंडक भी देता है। तरबूज में पानी की भरपूर मात्रा होती है, जो डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करती है।   तरबूज मोहितो क्यों है खास? तरबूज मोहितो एक ऐसा समर ड्रिंक है जिसे आसानी से घर पर बनाया जा सकता है। इसमें तरबूज, पुदीना, नींबू और सोडा जैसे साधारण लेकिन प्रभावी सामग्री का उपयोग होता है। यह कॉम्बिनेशन शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ पाचन को भी बेहतर करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में ऐसे प्राकृतिक और हल्के पेय शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं।   किन सामग्रियों से बनता है यह रिफ्रेशिंग ड्रिंक? तरबूज मोहितो बनाने के लिए कुछ आसान सामग्री की जरूरत होती है। इसमें तरबूज के टुकड़े, ताजे पुदीना पत्ते, नींबू का रस, चीनी या शहद, बर्फ और सोडा या स्पार्कलिंग वाटर शामिल होते हैं। ये सभी चीजें मिलकर इसे एक हेल्दी और टेस्टी समर ड्रिंक बनाती हैं।   घर पर कैसे बनाएं तरबूज मोहितो? सबसे पहले एक गिलास में तरबूज के टुकड़े डालकर उन्हें हल्का मसल लें ताकि उसका ताजा जूस निकल आए। इसके बाद इसमें पुदीना पत्ते और नींबू का रस डालें और हल्के हाथ से मिलाएं ताकि स्वाद और खुशबू अच्छे से घुल जाए। फिर इसमें थोड़ी चीनी या शहद मिलाकर बर्फ के टुकड़े डाल दें। इसके बाद मिश्रण में सोडा या स्पार्कलिंग वाटर डालें और हल्का सा चला दें। आखिर में पुदीना पत्तों से गार्निश करके इसे तुरंत सर्व करें ताकि इसका ताजगी भरा स्वाद बरकरार रहे।   स्वाद के साथ सेहत का भी फायदा तरबूज मोहितो न केवल स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि यह सेहत के लिए भी फायदेमंद है। इसमें मौजूद तरबूज शरीर को हाइड्रेट रखता है, जबकि पुदीना और नींबू पाचन को सुधारते हैं और शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं। यह ड्रिंक गर्मियों में थकान और कमजोरी को दूर करने में भी मददगार है।   ध्यान रखने योग्य बातें इस ड्रिंक को बनाते समय ज्यादा चीनी का उपयोग न करें क्योंकि तरबूज पहले से ही मीठा होता है। हमेशा ताजे पुदीना पत्तों का इस्तेमाल करें और इसे तुरंत सर्व करें ताकि इसका असली स्वाद और फ्रेशनेस बनी रहे।

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