झारखंड

रामगढ़ में साइबर गिरोह का भंडाफोड़, चार आरोपी गिरफ्तार

Anjali Kumari अप्रैल 30, 2026 0
Cyber ​​gang busted in Ramgarh
Cyber ​​gang busted in Ramgarh

रामगढ़। रामगढ़ में साइबर अपराध थाना पुलिस ने एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह फर्जी बैंक खातों के माध्यम से देश के अलग-अलग राज्यों में लोगों को ठगी का शिकार बना रहा था। पुलिस को इस मामले का सुराग गृह मंत्रालय के ‘प्रतिबिंब’ प्लेटफॉर्म से मिला, जहां एक संदिग्ध बैंक खाते की जानकारी साझा की गई थी।

 

जांच में क्या आया सामने?


जांच में पता चला कि यह खाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में ‘श्री गणेश इंटरप्राइजेज’ के नाम पर MSME योजना के तहत खोला गया था। हालांकि, इसका उपयोग अवैध साइबर लेनदेन के लिए किया जा रहा था। इस एक खाते से देशभर में कुल 274 शिकायतें जुड़ी पाई गईं, जिनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं।

 

“म्यूल अकाउंट” के रूप में इस्तेमाल होते थे खाते


पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सरगना रितेश अग्रवाल उर्फ मुन्ना और सोनू कुमार झा लोगों को पैसे का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। बदले में खाताधारकों को मोटी रकम दी जाती थी और फिर उनसे OTP तथा बैंकिंग एक्सेस ले लिया जाता था। इन खातों को बाद में व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए अन्य साइबर अपराधियों को सौंप दिया जाता था, जिससे ये “म्यूल अकाउंट” बन जाते थे।


गिरफ्तार आरोपियों के पास से 6 मोबाइल फोन, 11 सिम कार्ड, बैंक दस्तावेज, एटीएम कार्ड और डिजिटल चैट जैसे अहम सबूत बरामद किए गए हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी स्थिति में अपनी बैंकिंग जानकारी, OTP या खाता एक्सेस किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें, अन्यथा वे अनजाने में साइबर अपराध का हिस्सा बन सकते हैं।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

झारखंड

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Rajya Sabha Election: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर JMM-कांग्रेस आमने-सामने

रांची। झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव की आहट के साथ ही 'इंडी' गठबंधन के भीतर रार शुरू हो गई हैं। राज्य की दो सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस को आमने-सामने खड़ा कर दिया है। वर्तमान में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल है, जिससे दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित मानी जा रही है। हालांकि, विवाद इस बात पर है कि इन सीटों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा? कांग्रेस जहां पिछले 'त्यागों' का हवाला देकर अपनी हिस्सेदारी मांग रही है, वहीं झामुमो सबसे बड़े दल के रूप में अपना दबदबा बनाए रखना चाहता है।   कम से कम एक सीट चाहए कांग्रेस को कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू के अनुसार पार्टी इस बार पीछे हटने के मूड में नहीं है। उन्होंने तर्क दिया है कि पिछले तीन चुनावों में गठबंधन को केवल एक-एक सीट मिली थी और हर बार कांग्रेस ने झामुमो का समर्थन किया। अब जबकि गठबंधन की स्थिति मजबूत है, कांग्रेस उच्च सदन में अपनी संख्या बढ़ाना चाहती है। इस मसले पर पांच राज्यों के चुनावों के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच निर्णायक बातचीत होने की उम्मीद है। झारखंड में राज्यसभा जीत का गणित झारखंड में खाली हो रही दो सीटों का समीकरण काफी दिलचस्प है। इनमें से एक सीट झामुमो के दिग्गज नेता शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई है, जबकि दूसरी सीट भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने से खाली हो रही है। 81 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन की ताकत और सीटों के बंटवारे फॉर्मूला जबर्दस्त है। सत्ताधारी गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थनः वर्तमान में सत्ताधारी गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन प्राप्त है।  झामुमो के पास 34 विधायक हैं। कांग्रेस 16 विधायकों के साथ दूसरी बड़ी ताकत है। RJD के 4 और वामपंथी दलों के 2 विधायक भी इस समीकरण का हिस्सा हैं। संख्या बल के आधार पर गठबंधन आसानी से दोनों सीटें जीत सकता है, बशर्ते आपसी सहमति बने। कांग्रेस पीछे हटने के मूड में नही कांग्रेस इस बार पीछे हटने के मूड में नहीं है। पिछले तीन चुनावों में गठबंधन को केवल एक-एक सीट मिली थी और हर बार कांग्रेस ने झामुमो का समर्थन किया। अब जबकि गठबंधन की स्थिति मजबूत है, कांग्रेस उच्च सदन में अपनी संख्या बढ़ाना चाहती है। कांग्रेस पभारी के. राजू ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिये हैं।  JMM की रणनीति से दबाव में बड़े दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) 34 विधायकों के साथ सदन का सबसे बड़ा दल है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि क्षेत्रीय राजनीति में उनकी भूमिका सर्वोपरि है, इसलिए वे दोनों सीटों पर अपने ही प्रत्याशी उतारना चाहते हैं। झामुमो के रणनीतिकारों का तर्क है कि रिक्त हुई एक सीट उनके दिवंगत नेता की है, जिसे वे किसी भी हाल में छोड़ना नहीं चाहेंगे। दूसरी सीट पर भी वे अपने जनाधार को देखते हुए दावा मजबूत कर रहे हैं।   गठबंधन के भीतर बढ़ती असहजता राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस विवाद को समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो इसका असर भविष्य के चुनावों और गठबंधन की स्थिरता पर पड़ सकता है। हालांकि, कांग्रेस ने बातचीत के रास्ते खुले रखे हैं, लेकिन झामुमो का अड़ियल रुख खींचतान को और बढ़ा सकता है। अब सभी की निगाहें दिल्ली में होने वाली 'इंडिया' गठबंधन की समन्वय बैठक पर टिकी हैं, जहां इस शक्ति प्रदर्शन का अंतिम फैसला होगा।

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झारखंड में मौसम ने करवट ले ली है। हालिया बारिश के बाद जहां लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, वहीं अब India Meteorological Department (IMD) ने राज्य में 2 से 7 मई तक खराब मौसम का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कई इलाकों में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। किन इलाकों में कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग के अनुसार, 2 मई को राज्य के अधिकांश हिस्सों में आंशिक बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश या गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं। हालांकि पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार जैसे उत्तर-पश्चिमी जिलों में बारिश की संभावना कम है। 3 मई को भी लगभग यही स्थिति बनी रहेगी, जबकि पश्चिमी हिस्सों को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में बारिश हो सकती है। 4 से 7 मई के बीच मौसम और सक्रिय रहने की संभावना है। इस दौरान कई जगहों पर तेज हवाओं (40 से 50 किमी/घंटा) के साथ बारिश और वज्रपात की चेतावनी दी गई है। तापमान में मामूली बदलाव राजधानी Ranchi और आसपास के क्षेत्रों में 2 से 5 मई के बीच अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। मौसम में हल्की ठंडक महसूस की जा सकती है। क्या सावधानियां बरतें? मौसम विभाग ने खराब मौसम के दौरान लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है: आंधी-तूफान और बिजली गिरने के समय घर के अंदर ही रहें खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें अनावश्यक यात्रा न करें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अनप्लग कर दें यह मौसम बदलाव जहां गर्मी से राहत लेकर आया है, वहीं सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके।  

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रांची के 7 वर्षीय ईशांक ने पाक जलडमरूमध्य पार कर रचा इतिहास बनाया विश्व रिकॉर्ड

रांची। राजधानी रांची के लिए यह अत्यंत गर्व का क्षण है। कक्षा 3 के छात्र मास्टर ईशांक सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है। मात्र 7 वर्ष की आयु में ईशांक ने समुद्र की लहरों को मात देते हुए वह कारनामा कर दिखाया है जिसे बड़े-बड़े तैराक भी चुनौती मानते हैं। समुद्र में 30 किमी की तैराकी ईशांक सिंह ने श्रीलंका के तलाइमन्नार से भारत के धनुषकोडी तक पाक जलडमरूमध्य की लगभग 30 किलोमीटर की दूरी को सफलतापूर्वक पार किया। इस चुनौतीपूर्ण सफर को उन्होंने लगातार 9 घंटे 50 मिनट तक तैरकर पूरा किया। उनकी इस असाधारण उपलब्धि के लिए यूनिवर्सल रिकॉर्ड्स फोरम द्वारा उन्हें सबसे कम उम्र के सबसे तेज तैराक के रूप में विश्व रिकॉर्ड प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है। साथ ही ओपन वाटर स्विमिंग एकेडमी ने भी उन्हें वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किया है। सीएम हेमंत ने दी बधाई ईशांक की इस सफलता पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी उन्हें हार्दिक बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी कम उम्र में ईशांक ने अपनी प्रतिभा और साहस से पूरे राज्य का मान बढ़ाया है। उन्होंने ईशांक के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए इसे झारखंड की उभरती युवा खेल प्रतिभा का एक सशक्त उदाहरण बताया। चहुओर इशांक की चर्चा इस सफलता के पीछे ईशांक का कठोर प्रशिक्षण और अनुशासन रहा है। उन्होंने अपने प्रशिक्षकों अमन कुमार जायसवाल और बजरंग कुमार के मार्गदर्शन में समुद्र की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की तैयारी की थी। विद्यालय परिवार और खेल जगत के दिग्गजों ने भी ईशांक को बधाई देते हुए कहा है कि उनकी यह जीत न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि दृढ़ संकल्प हो तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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