टेक्नोलॉजी

Moto G37 Series Launched

Motorola ने लॉन्च किए Moto G37 और G37 Power, 7000mAh बैटरी के साथ मिड-रेंज में बढ़ी टक्कर

surbhi मई 1, 2026 0
Motorola Moto G37 and G37 Power smartphones featuring large batteries and modern display design
Motorola Moto G37 G37 Power Launch

स्मार्टफोन बाजार में एक बार फिर हलचल मचाते हुए Motorola ने अपनी G-सीरीज के तहत दो नए स्मार्टफोन Moto G37 और Moto G37 Power को लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इन डिवाइस को खासतौर पर उन यूजर्स को ध्यान में रखकर पेश किया है, जो लंबी बैटरी लाइफ और स्थिर परफॉर्मेंस वाले फोन की तलाश में हैं।

बैटरी बना सबसे बड़ा हाइलाइट

दोनों स्मार्टफोन के बीच सबसे बड़ा अंतर बैटरी का है। Moto G37 में 5200mAh की बैटरी दी गई है, जबकि Moto G37 Power में 7000mAh की बड़ी बैटरी मिलती है। कंपनी का दावा है कि पावर वेरिएंट एक बार चार्ज करने पर करीब 78 घंटे तक चल सकता है। इसके साथ 30W फास्ट चार्जिंग और रिवर्स चार्जिंग का भी सपोर्ट दिया गया है।

परफॉर्मेंस और डिस्प्ले

दोनों डिवाइस में 6nm आधारित MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर दिया गया है, जो डेली यूज और हल्की गेमिंग के लिए उपयुक्त माना जाता है। स्मार्टफोन में 6.67 इंच का HD+ LCD डिस्प्ले मिलता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 1050 निट्स तक की ब्राइटनेस के साथ आता है। स्क्रीन की सुरक्षा के लिए Corning Gorilla Glass 7i का इस्तेमाल किया गया है।

कैमरा और मजबूती

फोटोग्राफी के लिए दोनों फोन में 50MP का प्राइमरी कैमरा दिया गया है। वहीं, फोन को धूल और पानी के छींटों से बचाने के लिए IP64 रेटिंग दी गई है। इसके अलावा MIL-STD-810H सर्टिफिकेशन फोन की मजबूती को और बढ़ाता है। ये स्मार्टफोन लेटेस्ट Android 16 पर चलते हैं।

कीमत और उपलब्धता

Moto G37 की कीमत 249 यूरो (करीब 27,000 रुपये) रखी गई है, जबकि Moto G37 Power की कीमत 279 यूरो (करीब 31,000 रुपये) है। फिलहाल इन स्मार्टफोन्स को जर्मनी में लॉन्च किया गया है और उम्मीद है कि जल्द ही अन्य बाजारों में भी इन्हें पेश किया जाएगा।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

टेक्नोलॉजी

View more
Motorola Moto G37 and G37 Power smartphones featuring large batteries and modern display design
Motorola ने लॉन्च किए Moto G37 और G37 Power, 7000mAh बैटरी के साथ मिड-रेंज में बढ़ी टक्कर

स्मार्टफोन बाजार में एक बार फिर हलचल मचाते हुए Motorola ने अपनी G-सीरीज के तहत दो नए स्मार्टफोन Moto G37 और Moto G37 Power को लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इन डिवाइस को खासतौर पर उन यूजर्स को ध्यान में रखकर पेश किया है, जो लंबी बैटरी लाइफ और स्थिर परफॉर्मेंस वाले फोन की तलाश में हैं। बैटरी बना सबसे बड़ा हाइलाइट दोनों स्मार्टफोन के बीच सबसे बड़ा अंतर बैटरी का है। Moto G37 में 5200mAh की बैटरी दी गई है, जबकि Moto G37 Power में 7000mAh की बड़ी बैटरी मिलती है। कंपनी का दावा है कि पावर वेरिएंट एक बार चार्ज करने पर करीब 78 घंटे तक चल सकता है। इसके साथ 30W फास्ट चार्जिंग और रिवर्स चार्जिंग का भी सपोर्ट दिया गया है। परफॉर्मेंस और डिस्प्ले दोनों डिवाइस में 6nm आधारित MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर दिया गया है, जो डेली यूज और हल्की गेमिंग के लिए उपयुक्त माना जाता है। स्मार्टफोन में 6.67 इंच का HD+ LCD डिस्प्ले मिलता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 1050 निट्स तक की ब्राइटनेस के साथ आता है। स्क्रीन की सुरक्षा के लिए Corning Gorilla Glass 7i का इस्तेमाल किया गया है। कैमरा और मजबूती फोटोग्राफी के लिए दोनों फोन में 50MP का प्राइमरी कैमरा दिया गया है। वहीं, फोन को धूल और पानी के छींटों से बचाने के लिए IP64 रेटिंग दी गई है। इसके अलावा MIL-STD-810H सर्टिफिकेशन फोन की मजबूती को और बढ़ाता है। ये स्मार्टफोन लेटेस्ट Android 16 पर चलते हैं। कीमत और उपलब्धता Moto G37 की कीमत 249 यूरो (करीब 27,000 रुपये) रखी गई है, जबकि Moto G37 Power की कीमत 279 यूरो (करीब 31,000 रुपये) है। फिलहाल इन स्मार्टफोन्स को जर्मनी में लॉन्च किया गया है और उम्मीद है कि जल्द ही अन्य बाजारों में भी इन्हें पेश किया जाएगा।  

surbhi मई 1, 2026 0
Driver using sunshade and checking car during extreme summer heat on a sunny day

तपती धूप में ड्राइविंग कर रहे हैं? इन 10 स्मार्ट टिप्स से बचाएं अपनी कार और खुद को नुकसान से

AWS launches AI tools for automated job interviews and intelligent supply chain management

AWS ने लॉन्च किए नए AI टूल, अब इंटरव्यू लेगा और सप्लाई चेन संभालेगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

AI agent accidentally deletes startup production database in seconds, exposing major enterprise security risks

9 सेकंड में तबाही! AI एजेंट ने स्टार्टअप का पूरा डेटाबेस किया डिलीट

OpenAI and Microsoft logos with Amazon AWS and Google Cloud symbols in background
Microsoft-OpenAI की राहें अलग? अब ChatGPT चलेगा Amazon और Google Cloud पर भी

Microsoft और OpenAI के बीच साझेदारी में बड़ा बदलाव हुआ है। अब माइक्रोसॉफ्ट के पास OpenAI की तकनीक पर एक्सक्लूसिव अधिकार नहीं रहेगा, जिससे ChatGPT और अन्य OpenAI सेवाएं प्रतिद्वंद्वी क्लाउड प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध हो सकेंगी। क्या बदला है? नई व्यवस्था के तहत: माइक्रोसॉफ्ट OpenAI का प्राथमिक क्लाउड पार्टनर बना रहेगा। उसे 2032 तक OpenAI की बौद्धिक संपदा का लाइसेंस मिलेगा। लेकिन अब OpenAI अपने उत्पाद अन्य क्लाउड कंपनियों के जरिए भी बेच सकेगा। यह OpenAI के लिए बड़ी रणनीतिक आजादी है। Amazon और Google को मिलेगा फायदा इस बदलाव से Amazon Web Services और Google Cloud के ग्राहकों के लिए OpenAI सेवाओं को अपनाना आसान हो जाएगा। पहले Microsoft की एक्सक्लूसिविटी के कारण यह प्रक्रिया जटिल थी। Microsoft क्यों पीछे हट रहा है? माइक्रोसॉफ्ट अब OpenAI पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। कंपनी: अपने AI मॉडल विकसित कर रही है Anthropic जैसे अन्य AI पार्टनर्स के मॉडल भी अपना रही है AI डेटा सेंटर पर होने वाले भारी खर्च को नियंत्रित करना चाहती है OpenAI को क्या मिलेगा? अधिक एंटरप्राइज ग्राहक बेहतर स्केलेबिलिटी IPO से पहले मजबूत बाजार स्थिति क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के अधिक विकल्प एंटीट्रस्ट जांच से राहत यह कदम अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में चल रही नियामकीय जांच के बीच भी अहम माना जा रहा है। एक्सक्लूसिविटी खत्म होने से माइक्रोसॉफ्ट पर प्रतिस्पर्धा-विरोधी आरोप कमजोर पड़ सकते हैं। AI इंडस्ट्री में नया मोड़ यह बदलाव AI बाजार में प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा। अब OpenAI केवल Microsoft के इकोसिस्टम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक क्लाउड बाजार में सीधी प्रतिस्पर्धा करेगा।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
Latest smartphones under ₹40000 showcasing premium design, cameras and high performance features

₹40,000 से कम में फ्लैगशिप जैसा एक्सपीरियंस: ये 4 स्मार्टफोन्स बन रहे हैं गेमचेंजर

GPT-5.5

GPT-5.5: अब AI खुद बनाएगा प्रोजेक्ट प्लान OpenAI ने सबसे स्मार्ट AI मॉडल किया लांच

User saving car parking location on Google Maps in a large mall parking area

एयरपोर्ट या मॉल की पार्किंग में भूल जाते हैं कार? Google Maps का यह फीचर मिनटों में ढूंढ देगा लोकेशन

Finance Minister Nirmala Sitharaman meeting bank officials on AI cyber threat Claude Mythos security concerns
Claude Mythos पर सरकार अलर्ट: निर्मला सीतारमण ने बैंकों को साइबर हमलों से बचने के दिए निर्देश

देश के बैंकिंग सेक्टर की साइबर सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने गुरुवार को बैंकों के प्रमुखों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर Anthropic के अत्याधुनिक AI मॉडल Claude Mythos से उत्पन्न संभावित खतरों पर चर्चा की। क्या है Claude Mythos? Anthropic द्वारा विकसित Claude Mythos को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बेहद शक्तिशाली AI मॉडल माना जा रहा है। दावा है कि यह हजारों ऐसी सुरक्षा खामियों का पता लगा सकता है, जिन्हें मानव विशेषज्ञ भी नहीं खोज पाए। इसकी क्षमताओं को देखते हुए कंपनी ने इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं कराया है। क्यों बढ़ी चिंता? रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ अनधिकृत यूजर्स Claude Mythos तक पहुंच बनाने में सफल रहे। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इसका दुरुपयोग कर साइबर अपराधी बैंकिंग नेटवर्क, वित्तीय संस्थानों और अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम को निशाना बना सकते हैं। वित्त मंत्री ने क्या कहा? बैठक में निर्मला सीतारमण ने कहा कि Claude Mythos से उत्पन्न खतरा अभूतपूर्व है और इससे निपटने के लिए उच्च स्तर की सतर्कता, तैयारी और समन्वय आवश्यक है। उन्होंने बैंकों को अपने आईटी सिस्टम मजबूत करने और ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। रियल-टाइम थ्रेट इंटेलिजेंस पर जोर वित्त मंत्रालय ने बैंकों, Indian Computer Emergency Response Team और अन्य एजेंसियों के बीच रियल-टाइम थ्रेट इंटेलिजेंस साझा करने के लिए मजबूत तंत्र विकसित करने की सलाह दी है। इससे किसी भी संभावित साइबर हमले का तेजी से पता लगाया जा सकेगा। RBI और IBA भी सक्रिय भारतीय रिजर्व बैंक और Indian Banks' Association को भी इस जोखिम का आकलन करने को कहा गया है। साथ ही, IBA को सभी बैंकों के लिए एक समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। वैश्विक स्तर पर भी चिंता Claude Mythos को लेकर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका समेत कई देशों में भी चिंता बढ़ी है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन और वॉल स्ट्रीट के बड़े बैंक भी इस AI मॉडल से जुड़े जोखिमों का आकलन कर रहे हैं।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
iPhone 18 Pro showcasing advanced camera with variable aperture and improved low light photography features

iPhone 18 Pro में मिल सकते हैं कैमरे के दो बड़े अपग्रेड, फोटोग्राफी होगी और शानदार

Apple leadership transition concept showing Tim Cook and John Ternus with futuristic AI and product innovation background

Apple में नया दौर? ‘प्रोडक्ट एक्सपर्ट’ जॉन टर्नस के हाथों कैसी बदलेगी कंपनी की दिशा

Cybersecurity dashboard showing AI tool breach warning and unauthorized access alert on advanced system

AI सुरक्षा पर सवाल: Anthropic के ‘Mythos’ टूल तक अनधिकृत पहुंच के दावे की जांच शुरू

0 Comments

Top week

Donald Trump and Iranian leader amid rising tensions over nuclear talks and Strait of Hormuz
दुनिया

युद्ध रोकने को ईरान का नया प्रस्ताव, लेकिन ट्रंप खुश नहीं; परमाणु मुद्दे पर अड़ा अमेरिका

surbhi अप्रैल 28, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?