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Abhijeet Revisits Rift With SRK

“शाहरुख का अहंकार और मेरा आत्मसम्मान”: अभिजीत भट्टाचार्य का फिर छलका दर्द, बोले– माफी से सुलझ सकती थी बात

surbhi मई 2, 2026 0
Abhijeet Bhattacharya speaks about his fallout with Shah Rukh Khan during a recent podcast interview
Abhijeet Bhattacharya On Shah Rukh Khan Rift

बॉलीवुड के चर्चित सिंगर Abhijeet Bhattacharya ने एक बार फिर सुपरस्टार Shah Rukh Khan के साथ अपने रिश्तों पर खुलकर बात की है। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में उन्होंने दोनों के बीच वर्षों पुराने मनमुटाव की वजह ‘अहंकार’ और ‘आत्मसम्मान’ को बताया और कहा कि एक छोटी सी पहल से यह विवाद खत्म हो सकता था।

“माफी मांग लेते तो सब ठीक हो जाता”

अभिजीत ने कहा कि उनके और शाहरुख के बीच दूरी की सबसे बड़ी वजह यह रही कि अभिनेता ने कभी माफी नहीं मांगी।
उनके शब्दों में, “शाहरुख का अहंकार और मेरा आत्मसम्मान– यही हमारे बीच दरार की वजह बने। अगर उन्होंने एक बार माफी मांग ली होती, तो शायद सब ठीक हो जाता।”

पुराने रिश्तों की मिसाल दी

सिंगर ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि इंडस्ट्री में कई बार लोग आपसी मतभेदों के बावजूद रिश्ते बनाए रखते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए Aamir Khan का जिक्र किया और कहा कि मतभेद होने के बावजूद रिश्ते निभाए जा सकते हैं।

भावनात्मक जुड़ाव की बात

अभिजीत ने बताया कि उन्होंने सिर्फ शाहरुख ही नहीं, बल्कि कई अन्य एक्टर्स के लिए भी गाना गाना कम कर दिया था, क्योंकि उनकी आवाज पर्दे पर शाहरुख की छवि से गहराई से जुड़ गई थी। यह रिश्ता उनके लिए सिर्फ प्रोफेशनल नहीं, बल्कि भावनात्मक भी था।

“छोटी कोशिश से खत्म हो सकता था तनाव”

उन्होंने कहा कि शाहरुख के आसपास होने के बावजूद उन्हें कई बार अलग-थलग महसूस होता था। उनके मुताबिक, “अगर शाहरुख एक छोटी सी कोशिश कर लेते, तो हमारे बीच का तनाव खत्म हो सकता था।”

सुलह की संभावना पर क्या बोले?

हालांकि सिंगर ने पूरी तरह से सुलह की संभावना को खारिज नहीं किया, लेकिन यह भी साफ किया कि अब उनके बीच पहले जैसा रिश्ता नहीं रहा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में कभी-कभार औपचारिक बातचीत के अलावा अब कोई खास संपर्क नहीं है।

शाहरुख की फिल्मों में अभिजीत की पहचान

एक दौर था जब अभिजीत भट्टाचार्य की आवाज Baadshah और Main Hoon Na जैसी फिल्मों में शाहरुख खान की पहचान बन चुकी थी। उनके गाए कई गाने आज भी फैंस के बीच लोकप्रिय हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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सलमान खान ने जेल में बिताए दिनों को किया याद
सलमान खान ने याद किए जेल के दिन, बोले- ‘वहां हर दिन एक सबक जैसा था’

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने अपने जीवन के उस दौर को याद किया है, जब उन्हें जेल में समय बिताना पड़ा था। अभिनेता ने जेल में बिताए दिनों और वहां मिले अनुभवों को याद करते हुए बताया कि वह समय उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उस दौर ने उन्हें कई चीजें समझने और सीखने का मौका दिया।   जेल में बिताया वक्त रहा चुनौतीपूर्ण     सलमान खान के जीवन में जेल से जुड़ा अध्याय काफी चर्चा में रहा है। अभिनेता को 1998 के काले हिरण शिकार मामले में जेल जाना पड़ा था। उस दौरान उन्हें जेल में समय बिताना पड़ा और यह अनुभव उनके लिए बेहद मुश्किल रहा।   अभिनेता ने अलग-अलग मौकों पर अपने जेल के अनुभवों का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि जेल की जिंदगी फिल्मों में दिखाई जाने वाली सामान्य जिंदगी से बिल्कुल अलग होती है। वहां व्यक्ति को सीमित सुविधाओं के बीच समय बिताना पड़ता है और अपने विचारों के साथ रहने का काफी समय मिलता है।   मुश्किल दौर ने सिखाई कई बातें     सलमान खान ने अपने जेल के दिनों को याद करते हुए संकेत दिया कि उस समय ने उन्हें जिंदगी को एक अलग नजरिए से देखने का मौका दिया। जेल में बिताया समय उनके लिए मानसिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन इसी दौरान उन्हें धैर्य और परिस्थितियों का सामना करने की सीख मिली।   अभिनेता के मुताबिक, मुश्किल परिस्थितियां इंसान को अपने जीवन और फैसलों के बारे में सोचने का मौका देती हैं। उनके जेल के अनुभव भी उनके जीवन के ऐसे ही अध्यायों में शामिल रहे हैं, जिन्हें वह आज पीछे मुड़कर देखते हैं।   सलमान के करियर पर भी पड़ा असर     जेल से जुड़े विवादों के बावजूद सलमान खान ने बॉलीवुड में अपना दबदबा कायम रखा। उनकी फिल्मों और स्टारडम ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में शामिल रखा है।   पिछले कई वर्षों में सलमान खान ने अपने निजी जीवन से जुड़े मुश्किल दौर पर कई बार खुलकर बात की है। उनके प्रशंसक भी उनकी जिंदगी के इन अनुभवों में काफी दिलचस्पी दिखाते रहे हैं। जेल के दिनों की उनकी बातें सामने आने पर एक बार फिर अभिनेता के पुराने दौर और उससे जुड़े विवाद चर्चा में आ जाते हैं।

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‘लॉक अप 2’ से हर्षद चोपड़ा हुए बाहर, शिवांगी जोशी के साथ दोस्ती ने बटोरी खूब सुर्खियां

मुंबई, एजेंसियां। रियलिटी शो ‘लॉक अप: सच या सज़ा’ के दूसरे सीजन में टीवी अभिनेता हर्षद चोपड़ा का सफर खत्म हो गया। उनके बाहर होने की खबर ने शो के दर्शकों को चौंका दिया। हर्षद को शो में मजबूत और शांत स्वभाव वाले प्रतियोगियों में गिना जा रहा था, ऐसे में उनका एविक्शन कई प्रशंसकों के लिए निराशाजनक रहा।   शिवांगी जोशी के साथ रिश्ते ने खींचा ध्यान   ‘लॉक अप 2’ में हर्षद चोपड़ा और शिवांगी जोशी की दोस्ती लगातार चर्चा में रही। दोनों की नजदीकियों को लेकर शो के अंदर और बाहर कई तरह की बातें हुईं। शिल्पा शिंदे ने दोनों को कई बार ‘लवबर्ड्स’ तक कहा, जिसके बाद हर्षद और शिवांगी ने इस तरह की बातों पर आपत्ति जताई थी। दोनों ने अपने रिश्ते को दोस्ती बताया।   शो में एक मौके पर शिवांगी और हर्षद के बीच मुकाबला भी देखने को मिला। शिवांगी ने हर्षद को हराकर खुद को सुरक्षित किया, लेकिन इसके बाद वह भावुक हो गईं और हर्षद से माफी मांगती नजर आईं। इस घटना ने दोनों की बॉन्डिंग को एक बार फिर चर्चा में ला दिया।   हर्षद के बाहर होने से फैंस निराश   हर्षद चोपड़ा के एविक्शन के बाद सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने निराशा जाहिर की। कई दर्शकों को उम्मीद थी कि वह शो में आगे तक जाएंगे। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ प्रशंसकों ने उनके निष्कासन को अनुचित भी बताया और माना कि अभिनेता को प्रतियोगिता में और समय मिलना चाहिए था।   हर्षद के बाहर होने के बाद शिवांगी जोशी भी भावुक नजर आईं। बाद की रिपोर्टों में बताया गया कि हर्षद के जाने के बाद शिवांगी को उनकी कमी महसूस हुई और वह उनके बिस्तर की चादर का इस्तेमाल करती दिखाई दीं। इस घटना पर सोशल मीडिया पर दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं।   हर्षद-शिवांगी की जोड़ी बनी शो की चर्चा   ‘लॉक अप 2’ में हर्षद और शिवांगी की जोड़ी शो की चर्चित जोड़ियों में शामिल रही। दोनों इससे पहले ‘बड़े अच्छे लगते हैं 4’ में भी साथ काम कर चुके हैं। शो के दौरान उनकी दोस्ती और एक-दूसरे के प्रति समर्थन ने दर्शकों का ध्यान खींचा।   हर्षद के एविक्शन के बाद भी दोनों के रिश्ते को लेकर चर्चा थमी नहीं। डांस रियलिटी और टेलीविजन जगत से जुड़े कई लोगों की टिप्पणियों के बीच उनकी दोस्ती को लेकर सोशल मीडिया पर अटकलें भी चलती रहीं। हालांकि, दोनों कलाकारों ने अपने रिश्ते को लेकर सार्वजनिक तौर पर किसी रोमांटिक रिश्ते की पुष्टि नहीं की है।

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‘रामायण’ के कॉस्ट्यूम पर विवाद, डिजाइनरों ने आलोचना पर दी सफाई

मुंबई, एजेंसियां। नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ अपने भव्य सेट और कलाकारों के लुक के साथ-साथ कॉस्ट्यूम डिजाइन को लेकर भी चर्चा में है। फिल्म से जुड़े कुछ लुक सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दर्शकों के एक वर्ग ने वेशभूषा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रामाणिकता को लेकर सवाल उठाए हैं।   कॉस्ट्यूम को लेकर सोशल मीडिया पर उठे सवाल   फिल्म में रणबीर कपूर, साई पल्लवी, यश और अन्य कलाकारों के किरदारों के लुक को लेकर पहले से ही काफी उत्सुकता है। हालांकि, कुछ तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कॉस्ट्यूम की डिजाइन और उसके प्राचीन भारतीय संदर्भ से मेल को लेकर अपनी राय रखी। आलोचनाओं में खास तौर पर यह सवाल उठाया गया कि फिल्म की वेशभूषा को रामायण काल की कल्पना और उपलब्ध ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संदर्भों के कितना करीब रखा गया है।   डिजाइनरों ने बताई अपनी सोच   कॉस्ट्यूम डिजाइन से जुड़े लोगों ने आलोचनाओं पर सफाई देते हुए बताया कि फिल्म की वेशभूषा तैयार करते समय केवल किसी एक ऐतिहासिक स्रोत की हूबहू नकल करने के बजाय कहानी, किरदारों और फिल्म के दृश्य संसार को ध्यान में रखा गया है। डिजाइन टीम का जोर ऐसे परिधानों पर रहा है जो फिल्म की भव्यता के साथ-साथ अलग-अलग पात्रों की पहचान और व्यक्तित्व को भी दर्शा सकें।   फिल्म की भव्यता पर खास जोर   ‘रामायण’ को बड़े पैमाने पर तैयार किया जा रहा है और फिल्म के निर्माण में अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी टीम भी जुड़ी है। ऐसे में कॉस्ट्यूम, आभूषण, सेट और विजुअल इफेक्ट्स को फिल्म की दुनिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। निर्माताओं की कोशिश है कि कहानी को आधुनिक सिनेमाई तकनीक के साथ बड़े और भव्य स्तर पर प्रस्तुत किया जाए।   दर्शकों को फिल्म के रिलीज का इंतजार   कॉस्ट्यूम को लेकर चर्चा के बावजूद ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बनी हुई है। रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता की भूमिका में नजर आएंगी, जबकि यश रावण का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म से जुड़े आने वाले पोस्टर, टीजर और अन्य आधिकारिक सामग्री के सामने आने के बाद किरदारों की वेशभूषा और फिल्म की दृश्य शैली को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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