स्वास्थ्य

Bacteria Behind Noma Disease Identified

Noma पर बड़ी वैज्ञानिक खोज: जानलेवा बीमारी के पीछे बैक्टीरिया की पहचान

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
Microscopic view of bacteria linked to Noma disease affecting oral tissues in children.
Noma Disease Bacteria Discovery Study 2026

एक नई रिसर्च ने बच्चों में होने वाली खतरनाक बीमारी Noma को लेकर बड़ा खुलासा किया है। यह बीमारी बेहद तेजी से फैलती है और कुछ ही दिनों में चेहरे और मुंह के ऊतकों को नष्ट कर सकती है। खासकर गरीबी में रहने वाले बच्चों के लिए यह जानलेवा साबित होती है।

हालांकि World Health Organization ने 2023 में इसे Neglected Tropical Disease घोषित किया था, लेकिन अब तक इसके पीछे के असली माइक्रोबियल कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं थे।

 

क्या कहती है नई स्टडी?

नाइजीरिया के Sokoto स्थित Noma अस्पताल में बच्चों के सैंपल्स पर की गई स्टडी में आधुनिक metagenomic sequencing तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

 इसमें पाया गया कि Noma से पीड़ित बच्चों के मुंह में बैक्टीरिया का संतुलन पूरी तरह बिगड़ा हुआ था।

 ज्यादा पाए गए खतरनाक बैक्टीरिया:

  • Treponema
  • Porphyromonas
  • Bacteroides

 कम पाए गए “अच्छे” बैक्टीरिया:

  • Streptococcus
  • Rothia

नई बैक्टीरिया प्रजाति की खोज

स्टडी में एक नई प्रजाति Treponema sp. A की पहचान हुई, जो:

  • 19 में से 15 बच्चों में पाई गई
  • स्वस्थ बच्चों में नहीं मिली

इससे संकेत मिलता है कि यह बैक्टीरिया बीमारी का कारण भी हो सकता है या एक अहम “बायोमार्कर” बन सकता है।

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस भी चिंता का कारण

रिसर्च में यह भी सामने आया कि:

  • कई बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोध (resistance) दिखा रहे हैं
  • खासकर beta-lactam और metronidazole जैसी दवाओं के खिलाफ

 इससे इलाज और मुश्किल हो सकता है।

क्यों है यह खोज महत्वपूर्ण?

  • Noma की शुरुआती पहचान (early diagnosis) आसान हो सकती है
  • नए ट्रीटमेंट और दवाओं के रास्ते खुल सकते हैं
  • गरीब और संसाधन-सीमित क्षेत्रों में बच्चों की जान बचाने में मदद मिलेगी
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

स्वास्थ्य

View more
chia seed
जानें गर्मियों में चिया सीड्स का पानी क्यों है जरूरी

नई दिल्ली, एजेंसियां। भीषण गर्मी और बढ़ते पारे के बीच शरीर को अंदर से ठंडा और हाइड्रेटेड रखना एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में चिया सीड्स (Chia Seeds) का पानी एक "सुपरड्रिंक" की तरह काम करता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर ये छोटे-छोटे बीज न केवल आपकी प्यास बुझाते हैं, बल्कि सेहत को कई अनगिनत लाभ भी पहुँचाते हैं।   1. शरीर को रखता है कूल और हाइड्रेटेड चिया सीड्स की सबसे बड़ी खासियत इसकी जल-शोषण क्षमता है। भिगोने पर ये अपने वजन से कई गुना ज्यादा पानी सोख लेते हैं और जेली जैसा स्वरूप ले लेते हैं। गर्मियों में इसका सेवन शरीर में पानी की कमी (Dehydration) को रोकता है और शरीर के तापमान को नियंत्रित कर ठंडक प्रदान करता है।   2. पाचन तंत्र के लिए रामबाण गर्मियों में अक्सर पेट फूलना, गैस और एसिडिटी की समस्या बढ़ जाती है। चिया सीड्स में मौजूद घुलनशील फाइबर प्रीबायोटिक के रूप में काम करते हैं। यह पेट में जाकर एक चिकनी परत बनाता है, जिससे पाचन सुचारू रहता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।   3. वजन घटाने में मददगार अगर आप बढ़ते वजन से परेशान हैं, तो चिया सीड्स आपके लिए बेहतरीन साथी हैं। इसमें हाई फाइबर और प्रोटीन होता है, जिससे इसे पीने के बाद काफी देर तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। यह बेवजह की भूख (Cravings) को रोकता है, जिससे आप अतिरिक्त कैलोरी लेने से बच जाते हैं।   4. एनर्जी बूस्टर और दिल की सेहत चिया सीड्स ऊर्जा का पावरहाउस हैं। इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड (ALA) खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और हृदय की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से ब्लड शुगर लेवल भी स्थिर रहता है, जिससे शुगर स्पाइक्स का खतरा कम हो जाता है।   सेवन का सही तरीका: कैसे बनाएं चिया वॉटर? चिया सीड्स का अधिकतम लाभ उठाने के लिए इसे सही ढंग से तैयार करना जरूरी है: स्टेप 1: रात को सोने से पहले एक गिलास पानी में एक चम्मच चिया सीड्स डालकर भिगो दें। स्टेप 2: सुबह तक ये बीज पूरी तरह फूलकर जेली की तरह हो जाएंगे। स्टेप 3: आप इसे सादा पी सकते हैं या फिर स्वाद और पोषक तत्व बढ़ाने के लिए इसमें नींबू का रस और एक चुटकी काला नमक मिला सकते हैं। स्टेप 4: इसे सुबह खाली पेट पीना सबसे अधिक फायदेमंद माना जाता है।   सावधानी और सुझाव चिया सीड्स का सेवन स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, लेकिन इसकी तासीर और फाइबर की मात्रा को देखते हुए शुरुआत कम मात्रा से करें। किसी भी विशेष स्वास्थ्य स्थिति या एलर्जी के मामले में अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Anjali Kumari अप्रैल 7, 2026 0
Doctor consulting a woman about endometriosis fertility treatment with medical charts and reproductive system diagram.

एंडोमेट्रियोसिस मरीजों के लिए नई फर्टिलिटी गाइडलाइन: अब इलाज होगा ज्यादा पर्सनलाइज्ड और वैज्ञानिक

Microscopic view of bacteria linked to Noma disease affecting oral tissues in children.

Noma पर बड़ी वैज्ञानिक खोज: जानलेवा बीमारी के पीछे बैक्टीरिया की पहचान

Microscopic view of gastric cancer cells highlighting biomarkers CXCL12 and eotaxin in medical research

गैस्ट्रिक कैंसर में बड़ी खोज: CXCL12 और Eotaxin बने सर्वाइवल के नए संकेतक

Child sleeping with breathing difficulty, highlighting impact of sleep disorder on brain development
बच्चों में स्लीप ब्रीदिंग डिसऑर्डर का खतरा: दिमागी विकास पर पड़ सकता है गहरा असर

नई रिसर्च में एक गंभीर खुलासा हुआ है-बच्चों में नींद के दौरान सांस लेने से जुड़ी समस्याएं, यानी Sleep Breathing Disorders, उनके मानसिक और बौद्धिक विकास को प्रभावित कर सकती हैं। यह अध्ययन एक व्यापक सिस्टमैटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस पर आधारित है, जिसमें 1,137 बच्चों के डेटा का विश्लेषण किया गया। क्या कहती है रिसर्च? इस शोध में 15 केस-कंट्रोल स्टडीज़ को शामिल किया गया, जिनमें 659 बच्चों को स्लीप ब्रीदिंग डिसऑर्डर की पुष्टि हुई थी। बच्चों की मानसिक क्षमता को मापने के लिए Wechsler Intelligence Scale for Children (WISC) का उपयोग किया गया। नतीजों में पाया गया कि जिन बच्चों को यह समस्या थी, उनका प्रदर्शन लगभग हर कॉग्निटिव क्षेत्र जैसे ध्यान, याददाश्त और निर्णय क्षमत में सामान्य बच्चों की तुलना में कमजोर रहा। दिमाग पर कैसे पड़ता है असर? शोधकर्ताओं के अनुसार, इन समस्याओं का असर सीधे दिमाग के उस हिस्से पर पड़ता है जिसे Prefrontal Cortex कहा जाता है। यही हिस्सा निर्णय लेने, सीखने और व्यवहार को नियंत्रित करता है। हालांकि, ‘Vocabulary’ (शब्द ज्ञान) में कोई खास अंतर नहीं पाया गया, लेकिन बाकी सभी क्षेत्रों में स्पष्ट गिरावट देखी गई। क्या हैं इसके पीछे के कारण? विशेषज्ञों ने इसके दो प्रमुख कारण बताए: रात में ऑक्सीजन की कमी (Hypoxia): बार-बार सांस रुकने से दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती नींद में बार-बार रुकावट (Sleep Fragmentation): बार-बार जागने से नींद पूरी नहीं हो पाती इन दोनों वजहों से बच्चों की एकाग्रता, याददाश्त और स्कूल परफॉर्मेंस पर सीधा असर पड़ता है। लंबे समय में कितना खतरनाक? अगर समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह समस्या बच्चों के बौद्धिक विकास पर स्थायी असर डाल सकती है। खासतौर पर Obstructive Sleep Apnea और मुंह से सांस लेने जैसी आदतों को नजरअंदाज करना आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकता है। क्या करें माता-पिता? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बच्चे में ये लक्षण दिखें, तो तुरंत जांच करानी चाहिए: सोते समय खर्राटे लेना बार-बार जागना दिन में थकान या ध्यान की कमी पढ़ाई में गिरावट समय पर पहचान और इलाज से बच्चों के मानसिक विकास को बेहतर किया जा सकता है।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
kidney stone blood in urine

किडनी स्टोन में यूरिन से खून आना क्यों होता है? जानें एक्सपर्ट की राय

Person applying sunscreen with skin rash indicating photoallergic reaction caused by sunlight and medication

नई स्टडी में खुलासा: सनस्क्रीन और दर्द निवारक दवाओं से फोटोएलर्जी का खतरा अपेक्षा से ज्यादा, टेस्टिंग तरीके में बदलाव की जरूरत

Doctor consulting patient via telemedicine app discussing diet plan for fatty liver and diabetes management

नई स्टडी में खुलासा: टेलीमेडिसिन से कम हो सकता है फैटी लिवर का खतरा, डायबिटीज मरीजों के लिए उम्मीद की किरण

Sugar free diet benefits
30 दिन चीनी छोड़ने पर शरीर में दिख सकते हैं ये बड़े बदलाव

नई दिल्ली, एजेंसियां। आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में मीठा हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। सुबह की चाय या कॉफी से लेकर दिनभर के स्नैक्स और रात के डेज़र्ट तक, चीनी का सेवन अक्सर हमारी ज़रूरत से कहीं ज्यादा हो जाता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति सिर्फ 30 दिनों के लिए चीनी या अतिरिक्त शुगर का सेवन कम या बंद कर दे, तो उसके शरीर में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यही बात विशेषज्ञ भी मानते हैं कि सीमित समय के लिए शुगर कंट्रोल करने से स्वास्थ्य पर अच्छा असर पड़ता है।   ऊर्जा स्तर में आता है सुधार चीनी छोड़ने के शुरुआती कुछ दिनों में शरीर थोड़ा अलग प्रतिक्रिया दे सकता है। व्यक्ति को थकान, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द या मीठा खाने की तीव्र इच्छा महसूस हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर बार-बार मिलने वाली शुगर की आदत का आदी हो चुका होता है। हालांकि, करीब एक हफ्ते बाद शरीर इस बदलाव को स्वीकारने लगता है। ब्लड शुगर लेवल अधिक स्थिर होने लगता है, जिससे दिनभर की सुस्ती कम होती है और ऊर्जा अधिक संतुलित महसूस होती है।   वजन कंट्रोल करने में मिलती है मदद चीनी कम करने का सबसे जल्दी दिखने वाला असर वजन पर पड़ सकता है। अतिरिक्त शुगर अक्सर अनावश्यक कैलोरी के रूप में शरीर में जमा होती है। जब इसे कम किया जाता है, तो कुल कैलोरी सेवन घटता है और शरीर धीरे-धीरे अतिरिक्त फैट को कम करने लगता है। खासतौर पर पेट के आसपास जमा चर्बी पर इसका असर देखने को मिल सकता है। यदि इसके साथ संतुलित खानपान और हल्का व्यायाम भी जोड़ा जाए, तो परिणाम और बेहतर हो सकते हैं।   त्वचा दिख सकती है ज्यादा साफ और हेल्दी बहुत अधिक मीठा खाने का असर त्वचा पर भी पड़ता है। इससे स्किन डल दिख सकती है, एक्ने बढ़ सकते हैं और समय से पहले एजिंग के संकेत भी उभर सकते हैं। चीनी कम करने पर शरीर में सूजन कम हो सकती है, जिसका असर चेहरे पर भी दिखाई देता है। कुछ ही हफ्तों में त्वचा ज्यादा साफ, फ्रेश और ग्लोइंग महसूस हो सकती है।   दिल, लिवर और मानसिक स्वास्थ्य को भी फायदा ज्यादा शुगर का सेवन फैटी लिवर, ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ने और दिल की बीमारियों के जोखिम से जुड़ा माना जाता है। 30 दिनों तक शुगर से दूरी बनाने पर इन जोखिमों में कमी आ सकती है। साथ ही, मूड स्विंग्स, बेचैनी और खराब नींद जैसी समस्याओं में भी सुधार महसूस हो सकता है।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Fresh iron-rich green leafy vegetables including curry leaves, spinach, fenugreek, moringa, amaranth and mustard greens arranged in bowls on a wooden kitchen table

आयरन की कमी से बचने के लिए खाएं ये 6 हरी चीजें

Close-up of papaya seeds beside fresh papaya slices on a wooden table

पपीते के बीज के फायदे: जानकर आप फेंकना बंद कर देंगे!

Healthy roti for summer

गर्मियों में सेहतमंद रहने के लिए खाएं ये 5 रोटियां

0 Comments

Top week

Thick smoke rising near Tehran university after gas station attack causing panic in campus area
दुनिया

तेहरान में गैस स्टेशन पर हमला, यूनिवर्सिटी परिसर में मचा हड़कंप

surbhi अप्रैल 6, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?