झारखंड

Jamshedpur: Meat, Fish and Chicken Shops to Remain Closed on August 15

15 अगस्त को जमशेदपुर में मांस-मछली की दुकानें रहेंगी बंद, उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई

kalpana अगस्त 14, 2026 0
Meat and fish shops in Jamshedpur to remain closed on Independence Day
Jamshedpur Orders Closure of Meat and Fish Shops on August 15

जमशेदपुर: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रीय पर्व की गरिमा और शहर में स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने के लिए 15 अगस्त को जमशेदपुर में मांस, मछली और चिकन की बिक्री पर पूरी तरह रोक रहेगी। पूर्वी सिंहभूम जिले के नगर निकायों ने बूचड़खानों, मीट-मछली की दुकानों और पोल्ट्री सेंटरों को बंद रखने का आदेश जारी किया है। प्रशासन ने सभी दुकानदारों से आदेश का पालन करने और स्वतंत्रता दिवस के आयोजन में सहयोग करने की अपील की है।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शहर में विभिन्न जगहों पर झंडोत्तोलन, प्रभात फेरी, तिरंगा यात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए मांस-मछली की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है।

15 अगस्त को क्यों बंद रहेंगी मीट-मछली की दुकानें?

राष्ट्रीय पर्व के दौरान शहर में बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। कई इलाकों में स्कूली बच्चे प्रभात फेरी और देशभक्ति कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं। प्रशासन का मानना है कि खुले में मांस की कटाई और बिक्री से गंदगी फैलने के साथ सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता प्रभावित हो सकती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर मांस-मछली की दुकानों को बंद रखने की व्यवस्था लागू की जाती है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय पर्व के दौरान शहर में स्वच्छ, शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखना है।

आदेश नहीं माना तो दुकान हो सकती है सील

नगर निकायों ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध के बावजूद यदि कोई दुकानदार दुकान खोलकर मांस, मछली या चिकन की बिक्री करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।

कार्रवाई के तहत संबंधित दुकान को मौके पर ही सील किया जा सकता है। इसके अलावा दुकान में मौजूद मांस-मछली को जब्त करने और जुर्माना लगाने की कार्रवाई भी की जा सकती है। गंभीर स्थिति में सरकारी आदेश का उल्लंघन करने वाले दुकानदार के खिलाफ संबंधित थाने में प्राथमिकी भी दर्ज करायी जा सकती है।

निगरानी के लिए विशेष टीमों की तैनाती

जमशेदपुर के अलग-अलग नगर निकाय क्षेत्रों में आदेश का पालन कराने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को निगरानी की जिम्मेदारी दी गयी है। खासकर मानगो क्षेत्र में विशेष एनफोर्समेंट टीमों की तैनाती की गयी है, जो सुबह से ही इलाके में गश्त कर दुकानों की निगरानी करेंगी।

जेएनएसी की ओर से भी दुकानदारों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि 15 अगस्त को सभी संबंधित दुकानें बंद रखें और प्रशासन के साथ सहयोग करें।

दुकानदारों से स्वेच्छा से सहयोग की अपील

प्रशासन ने मीट-मछली कारोबार से जुड़े सभी व्यवसायियों से अपील की है कि वे स्वतंत्रता दिवस की गरिमा को देखते हुए खुद अपनी दुकानें बंद रखें। अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय पर्व के दौरान नियमों का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है।

इसलिए 15 अगस्त को जमशेदपुर में मांस, मछली और चिकन खरीदने या बेचने की योजना बना रहे लोगों को ध्यान रखना होगा कि संबंधित दुकानें बंद रहेंगी। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर नगर निकाय की टीम कार्रवाई कर सकती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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झारखंड के 8 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, कई जिलों में वज्रपात की चेतावनी

Jharkhand Weather News: बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के असर से झारखंड में बारिश का दौर जारी है. मौसम विभाग ने शुक्रवार को रांची समेत राज्य के आठ जिलों में भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है. वहीं, छह जिलों में बारिश और वज्रपात को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इन 8 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार शुक्रवार को रांची, चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, खूंटी, सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंहभूम में भारी बारिश हो सकती है. वहीं पलामू, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला और सिमडेगा में बारिश के साथ वज्रपात की आशंका को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. 15 अगस्त को भी कई जिलों में भारी बारिश स्वतंत्रता दिवस के दिन भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा. गढ़वा, पलामू, चतरा, गुमला, खूंटी, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम और पूर्वी सिंहभूम में भारी बारिश और वज्रपात की संभावना है. इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. रांची समेत राज्य के अन्य जिलों में आसमान में बादल छाये रहने और कुछ जगहों पर मध्यम बारिश होने की संभावना जतायी गयी है. 16 अगस्त तक जारी रहेगा बारिश का दौर मौसम विभाग के अनुसार 16 अगस्त को गढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला और सिमडेगा में भारी बारिश हो सकती है. रांची समेत अन्य जिलों में बादल छाये रहेंगे और कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है. खूंटी में सबसे ज्यादा बारिश गुरुवार को राज्य में सबसे अधिक 52 मिमी बारिश खूंटी में दर्ज की गयी. वहीं रांची में 12 मिमी बारिश हुई. राजधानी में देर रात तक बारिश होती रही. बारिश के बीच लातेहार के चंदवा थाना क्षेत्र के चीरो गांव में वज्रपात की घटना में खेत में धनरोपनी के लिए गयी 25 वर्षीय कलतिया देवी की मौत हो गयी. राज्य में अब भी 21 फीसदी कम बारिश मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक झारखंड में अब तक सामान्य से 21 प्रतिशत कम बारिश हुई है. रांची में भी बारिश सामान्य से 10 प्रतिशत कम है. हालांकि पश्चिमी सिंहभूम में सामान्य से 26 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गयी है. मौसम विभाग ने भारी बारिश और वज्रपात की संभावना को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने और खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ और बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की है.  

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रांची: स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह को देखते हुए राजधानी रांची में 15 अगस्त को ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है. मोरहाबादी मैदान में आयोजित समारोह को लेकर सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी. शहर के अलग-अलग हिस्सों में ड्रॉप गेट और पार्किंग की व्यवस्था भी की गयी है. इन रास्तों पर भारी वाहन रोके जाएंगे बड़े वाहनों को शहर में प्रवेश से पहले अलग-अलग स्थानों पर रोका जायेगा. कांके-बोड़ेया मार्ग : बोड़ेया चाईबासा-खूंटी मार्ग : बिरसा चौक गुमला-सिमडेगा-अरगोड़ा मार्ग : अरगोड़ा गुमला-सिमडेगा मार्ग : आईटीआई पड़ाव जमशेदपुर-रांची मार्ग : दुर्गा सोरेन चौक, नामकुम जमशेदपुर-सदाबहार चौक मार्ग : सदाबहार चौक कांके-पतरातू मार्ग : लॉ यूनिवर्सिटी बूटी मोड़-बरियातू मार्ग : बूटी मोड़ बूटी मोड़-खेलगांव मार्ग : खेलगांव चौक पासधारियों के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था मुख्य समारोह स्थल पर प्रवेश के लिए कई ड्रॉप गेट बनाये गये हैं. ड्रॉप गेट संख्या 1, 3, 7, 9, 18, 20 और 23 से मुख्यमंत्री, वीवीआईपी, मीडियाकर्मी और वैध पासधारियों के वाहनों को प्रवेश की अनुमति होगी. अतिथियों के लिए तय हुआ विशेष रूट मुख्यमंत्री, हाईकोर्ट के न्यायाधीश, सांसद और विधायक एटीआई मोड़, सिदो-कान्हू पार्क मोड़, डीएसपीएमयू मोड़ और राजकीय गेस्ट हाउस होते हुए वीवीआईपी प्रवेश द्वार से मंच तक पहुंचेंगे. वहीं केंद्र और राज्य सरकार के पदाधिकारी हॉटलिप्स चौक, एटीआई मोड़, रणधीर वर्मा चौक और उपायुक्त आवास चौक होते हुए समारोह स्थल पहुंचेंगे. किसके वाहन कहां होंगे पार्क? सीएम कारकेड और वीवीआईपी वाहन: मुख्य मंच के पीछे अन्य वाहन: मुख्य मंच के पश्चिम और बापू वाटिका के सामने पदाधिकारियों के वाहन: ऑक्सीजन पार्क के बगल में मीडिया वाहन: बापू वाटिका के सामने नारंगी और हरे पास वाले वाहन: निर्धारित पार्किंग स्थल सामान्य वाहन: टीआरआई के सामने मैदान इन जगहों पर पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित उपायुक्त आवास मोड़ से हॉकी स्टेडियम तक और रांची कॉलेज मोड़ से वीवीआईपी एंट्री गेट तक किसी भी वाहन की पार्किंग नहीं की जा सकेगी. इसलिए 15 अगस्त को मोरहाबादी और आसपास के इलाकों में जाने वाले लोगों को घर से निकलने से पहले बदली हुई ट्रैफिक व्यवस्था और निर्धारित पार्किंग स्थलों का ध्यान रखना होगा।  

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Meat and fish shops in Jamshedpur to remain closed on Independence Day
15 अगस्त को जमशेदपुर में मांस-मछली की दुकानें रहेंगी बंद, उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई

जमशेदपुर: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रीय पर्व की गरिमा और शहर में स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने के लिए 15 अगस्त को जमशेदपुर में मांस, मछली और चिकन की बिक्री पर पूरी तरह रोक रहेगी। पूर्वी सिंहभूम जिले के नगर निकायों ने बूचड़खानों, मीट-मछली की दुकानों और पोल्ट्री सेंटरों को बंद रखने का आदेश जारी किया है। प्रशासन ने सभी दुकानदारों से आदेश का पालन करने और स्वतंत्रता दिवस के आयोजन में सहयोग करने की अपील की है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शहर में विभिन्न जगहों पर झंडोत्तोलन, प्रभात फेरी, तिरंगा यात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए मांस-मछली की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है। 15 अगस्त को क्यों बंद रहेंगी मीट-मछली की दुकानें? राष्ट्रीय पर्व के दौरान शहर में बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। कई इलाकों में स्कूली बच्चे प्रभात फेरी और देशभक्ति कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं। प्रशासन का मानना है कि खुले में मांस की कटाई और बिक्री से गंदगी फैलने के साथ सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता प्रभावित हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर मांस-मछली की दुकानों को बंद रखने की व्यवस्था लागू की जाती है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय पर्व के दौरान शहर में स्वच्छ, शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखना है। आदेश नहीं माना तो दुकान हो सकती है सील नगर निकायों ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध के बावजूद यदि कोई दुकानदार दुकान खोलकर मांस, मछली या चिकन की बिक्री करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। कार्रवाई के तहत संबंधित दुकान को मौके पर ही सील किया जा सकता है। इसके अलावा दुकान में मौजूद मांस-मछली को जब्त करने और जुर्माना लगाने की कार्रवाई भी की जा सकती है। गंभीर स्थिति में सरकारी आदेश का उल्लंघन करने वाले दुकानदार के खिलाफ संबंधित थाने में प्राथमिकी भी दर्ज करायी जा सकती है। निगरानी के लिए विशेष टीमों की तैनाती जमशेदपुर के अलग-अलग नगर निकाय क्षेत्रों में आदेश का पालन कराने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को निगरानी की जिम्मेदारी दी गयी है। खासकर मानगो क्षेत्र में विशेष एनफोर्समेंट टीमों की तैनाती की गयी है, जो सुबह से ही इलाके में गश्त कर दुकानों की निगरानी करेंगी। जेएनएसी की ओर से भी दुकानदारों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि 15 अगस्त को सभी संबंधित दुकानें बंद रखें और प्रशासन के साथ सहयोग करें। दुकानदारों से स्वेच्छा से सहयोग की अपील प्रशासन ने मीट-मछली कारोबार से जुड़े सभी व्यवसायियों से अपील की है कि वे स्वतंत्रता दिवस की गरिमा को देखते हुए खुद अपनी दुकानें बंद रखें। अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय पर्व के दौरान नियमों का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है। इसलिए 15 अगस्त को जमशेदपुर में मांस, मछली और चिकन खरीदने या बेचने की योजना बना रहे लोगों को ध्यान रखना होगा कि संबंधित दुकानें बंद रहेंगी। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर नगर निकाय की टीम कार्रवाई कर सकती है।  

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