झारखंड

CBI Catches Railway Engineer Taking ₹50K Bribe in Dhanbad

Dhanbad: इंजीनियर 50 हजार घूस लेते CBI के हत्थे चढ़े

surbhi मार्च 7, 2026 0
CBI officials arrest railway engineer taking bribe at DRM office in Dhanbad Jharkhand
CBI Bribe Trap Railway Engineer Dhanbad

झारखंड के Dhanbad में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। CBI की टीम ने कार्रवाई में धनबाद रेल मंडल के वरीय मंडल विद्युत अभियंता Sanjeev Kumar को 50 हजार रुपये की घूस लेते हुए पकड़ा।

यह कार्रवाई शुक्रवार शाम डीआरएम कार्यालय में की गई, जिसके बाद पूरे रेलवे महकमे में हड़कंप मच गया। CBI की टीम अभियंता को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई और देर रात तक उनके कार्यालय और आवास पर छापेमारी करती रही।

 

संवेदक की शिकायत पर हुई कार्रवाई

जानकारी के अनुसार यह पूरी कार्रवाई एक रेल संवेदक की शिकायत के आधार पर की गई। संवेदक Avjeet Jha ने रेलवे में इलेक्ट्रिक उपकरणों की आपूर्ति और स्थापना का काम किया था, जिसका कुल बिल लगभग 45 लाख रुपये बताया जा रहा है।

संवेदक का आरोप है कि इस बिल के भुगतान के लिए वरीय मंडल विद्युत अभियंता संजीव कुमार की ओर से लगातार रिश्वत की मांग की जा रही थी। बार-बार पैसे की मांग से परेशान होकर उन्होंने इसकी शिकायत CBI से कर दी।

 

सत्यापन के बाद बिछाया गया ट्रैप

शिकायत मिलने के बाद CBI ने पहले मामले की जांच की और आरोप सही पाए जाने पर ट्रैप बिछाया। तय योजना के तहत जब संवेदक घूस की रकम देने पहुंचे, तभी CBI की टीम ने मौके पर छापा मारकर अभियंता को 50 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।

 

कार्यालय और आवास पर तलाशी

गिरफ्तारी के बाद CBI ने अभियंता के कार्यालय और घर पर भी छापेमारी की। रात करीब 11:30 बजे तक चली तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और एक प्रिंटर जब्त किया गया।

CBI के डीएसपी Vikas Pathak ने बताया कि शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। मामले में औपचारिक एफआईआर दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

 

रेलवे विभाग में मचा हड़कंप

ईस्ट सेंट्रल रेलवे का East Central Railway के तहत आने वाला धनबाद रेल मंडल देश के सबसे व्यस्त और कमाई वाले रेल मंडलों में से एक माना जाता है। ऐसे में एक वरिष्ठ अभियंता की रिश्वत लेते गिरफ्तारी से रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Drug Crackdown
ब्राउन शुगर के खिलाफ पुलिस का बड़ा एक्शन, तीन युवक गिरफ्तार

दुमका। झारखंड के दुमका जिले में नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हंसडीहा थाना क्षेत्र से तीन युवकों को ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से करीब 11 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद की है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने इस अवैध कारोबार से जुड़े कई अन्य लोगों के नाम भी बताए हैं, जिसके आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई में जुट गई है।   गुप्त सूचना पर स्टेडियम में हुई छापेमारी पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि हंसडीहा के प्लस-2 हाई स्कूल स्टेडियम परिसर में कुछ युवक ब्राउन शुगर की खरीद-बिक्री और सेवन कर रहे हैं। सूचना मिलते ही जरमुंडी के एसडीपीओ नवल किशोर सिंह के नेतृत्व में विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया। पुलिस टीम जब मौके पर पहुंची तो तीन युवक एक कमरे में मौजूद थे। पुलिस वाहन देखकर वे भागने लगे, लेकिन जवानों ने पीछा कर तीनों को पकड़ लिया।   तलाशी में मिली ब्राउन शुगर गिरफ्तार युवकों की पहचान शहादत शेख, मोहम्मद बसीर और आर्यन शेख के रूप में हुई है। तीनों दुमका नगर थाना क्षेत्र के दुधानी इलाके के निवासी बताए गए हैं। तलाशी के दौरान उनके पास से छोटे-छोटे पैकेटों में ब्राउन शुगर बरामद हुई। मौके पर इलेक्ट्रॉनिक मशीन से वजन करने पर इसकी मात्रा लगभग 11 ग्राम पाई गई। आरोपियों ने पूछताछ में नशे का सेवन करने की बात भी स्वीकार की।   सरगना तक पहुंचने में जुटी पुलिस एसडीपीओ नवल किशोर सिंह ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में गिरफ्तार युवकों ने ब्राउन शुगर के नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य लोगों और कथित सरगना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। पुलिस अब इन सुरागों के आधार पर पूरे गिरोह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि जिले में नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

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JPSC पीटी परीक्षा परिणाम पर सियासत तेज, आजसू ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के परिणाम को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। आजसू पार्टी ने परीक्षा परिणाम की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए सरकार और आयोग से तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि जारी किए गए परिणाम में आयोग के किसी अधिकारी या सदस्य के हस्ताक्षर नहीं हैं, जिससे पूरे चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।   लंबोदर महतो ने उठाए गंभीर सवाल पूर्व विधायक और आजसू नेता लंबोदर महतो ने रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि जेपीएससी पहले भी कई बार विवादों में रहा है। ऐसे में इस बार बिना किसी सक्षम अधिकारी या आयोग के सदस्य के हस्ताक्षर के परीक्षा परिणाम जारी होना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया अभ्यर्थियों के बीच भ्रम और अविश्वास पैदा करती है।   सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब लंबोदर महतो ने कहा कि सरकार और जेपीएससी को जल्द से जल्द यह स्पष्ट करना चाहिए कि बिना हस्ताक्षर के परिणाम कैसे जारी किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की कार्यप्रणाली में लगातार कमियां सामने आ रही हैं, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।   आंदोलन की चेतावनी आजसू पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और आयोग जल्द इस मामले पर संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं, तो छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि इस मुद्दे पर पूरे राज्य के अभ्यर्थियों को साथ लेकर उग्र आंदोलन किया जाएगा।   आजसू ने सरकार से मांग की है कि परीक्षा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और अभ्यर्थियों की सभी शंकाओं का समयबद्ध समाधान किया जाए। पार्टी का कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

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'हैप्पी बर्थडे माही': रांची में फैंस ने धूमधाम से मनाया एमएस धोनी का जन्मदिन

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45 के हुए 'कैप्टन कूल' एमएस धोनी

रांची। भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शामिल महेंद्र सिंह धोनी मंगलवार यानी आज अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं। 7 जुलाई 1981 को झारखंड की राजधानी रांची में जन्मे धोनी का सफर भारतीय रेलवे में टिकट कलेक्टर (Ticket Collector) की नौकरी से शुरू होकर विश्व क्रिकेट के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में शामिल होने तक पहुंचा। शांत स्वभाव, बेहतरीन नेतृत्व क्षमता और दबाव में मैच फिनिश करने की कला के कारण उन्हें दुनिया भर में 'कैप्टन कूल' के नाम से जाना जाता है। उनके जन्मदिन पर देश-विदेश से फैंस, पूर्व और वर्तमान क्रिकेटरों ने शुभकामनाएं दीं।   सीएसके ने खास अंदाज में दी बधाई धोनी की आईपीएल टीम चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो साझा करते हुए उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। फ्रेंचाइजी ने लिखा कि धोनी सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक ऐसी विरासत हैं जो हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।   कप्तानी में भारत ने रचा इतिहास धोनी विश्व क्रिकेट के इकलौते कप्तान हैं, जिन्होंने भारत को 2007 टी20 विश्व कप, 2011 वनडे विश्व कप और 2013 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब दिलाया। उनकी कप्तानी में भारत दिसंबर 2009 में पहली बार टेस्ट क्रिकेट की नंबर-1 टीम भी बना। 2007 में युवा टीम के साथ टी20 विश्व कप जीतकर उन्होंने भारतीय क्रिकेट में नए युग की शुरुआत की, जबकि 2011 विश्व कप फाइनल में उनकी विजयी पारी आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार लम्हों में गिनी जाती है।   टिकट कलेक्टर से 'कैप्टन कूल' बनने तक का सफर धोनी ने वर्ष 2004 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। शुरुआती दौर में उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने पहचान दिलाई, लेकिन समय के साथ उन्होंने खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फिनिशरों में स्थापित किया। विकेटकीपर के रूप में उनकी तेज स्टंपिंग, सटीक निर्णय और शांत नेतृत्व शैली ने उन्हें महान खिलाड़ियों की श्रेणी में पहुंचा दिया। 15 अगस्त 2020 को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया, लेकिन आईपीएल में उनका प्रभाव आज भी कायम है।   आईपीएल और कारोबार में भी सफलता धोनी की कप्तानी में चेन्नई सुपर किंग्स ने पांच बार आईपीएल खिताब जीता। आईपीएल में उन्होंने 278 से अधिक मैच खेलकर 5,400 से ज्यादा रन बनाए हैं। क्रिकेट के अलावा वे कई बड़ी कंपनियों के ब्रांड एंबेसडर हैं और कई स्टार्टअप्स में निवेश भी कर चुके हैं। उनकी अनुमानित कुल संपत्ति 1000 करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है। रांची में उनका आलीशान फार्महाउस, होटल और लग्जरी कारों व बाइकों का शानदार कलेक्शन भी चर्चा में रहता है।   आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा महेंद्र सिंह धोनी केवल एक सफल क्रिकेटर नहीं, बल्कि अनुशासन, धैर्य, नेतृत्व और सादगी की मिसाल हैं। सीमित संसाधनों से निकलकर विश्व क्रिकेट के शिखर तक पहुंचने की उनकी कहानी आज भी लाखों युवाओं को अपने सपनों के लिए मेहनत करने की प्रेरणा देती है। उनके नाम दर्ज उपलब्धियां भारतीय क्रिकेट इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेंगी।

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