गोड्डा। गोड्डा में एक प्रेम कहानी की खूब चर्चा हो रही है। 26 साल की एक विवाहित महिला आरती देवी को 19 साल के सचिन से प्यार हो गया। सचिन के साथ रहने के लिए आरती ने पति और 3 बच्चों को छोड़ दिया। इधर, सचिन के घरवालों ने आरती को अपनाने से इनकार कर दिया और सचिन उससे मुंह मोड़ लिया। अब आरती का पति भी उसे वापस रखने को तैयार नहीं है। आरती अब पुलिस की शरण में पहुंच कर न्याय मांग रही है।
यह मामला गोड्डा जिले के बलबड्डा थानाक्षेत्र अंतर्गत घोरीकित्ता गांव का है। स्थानीय लोग भी इश्क और बेवफाई की इस सच्ची कहानी से हैरान हैं।
बिहार के भागलपुर जिला स्थित गौराडीह थानाक्षेत्र की रहने वाली आरती की शादी 8 साल पहले झारखंड के गोड्डा जिला में हनवारा थानाक्षेत्र अंतर्गत रामकोल गांव के नकुल तांती से हुई थी। दंपति को 3 बच्चे हुए। कुछ साल पहले नकुल तांती, पत्नी आरती और बच्चों को लेकर काम की तलाश में हरियाणा गया था। आरती भी घर-परिवार के लिए कमाने के इरादे से रिलायंस ब्यूटी पार्लर में काम करने लगी। यहीं उसकी मुलाकात रिलायंस मॉल में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम करने वाले 19 साल के सचिन से हुई।
एक ही जगह काम करने की वजह से दोनों में बातचीत होने लगी और फिर मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया। मुलाकातें, प्रेम में बदली तो आरती और सचिन ने साथ रहने का फैसला किया।
जानकारी के अनुसार आरती, पति और 3 बच्चों को छोड़कर सचिन के साथ दिल्ली चली गई। यहां, सचिन ने आरती को अपनी चाची के घर पर रखा और उसकी मांग में सिंदूर भरकर पत्नी बना लिया। दिल्ली में शादी करने के बाद दोनों हरियाणा गए और वहीं मॉल में नौकरी करने लगे। सचिन और आरती 1 महीने तक साथ रहे।
समय के साथ आरती और सचिन के रिश्तों में खटास आने लगी। दरअसल, सचिन के घरवालों को आरती, बहू के रूप में स्वीकार्य नहीं है। वहीं, नकुल तांती भी अब उसे पत्नी के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं है। महिला अब बलबड्डा थाने में गुहार लगा रही है कि उसे, उसके प्रेमी के साथ रहने दिया जाए। थाना प्रभारी पंकज सिंह ने कहा कि लड़के को पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
लड़की पक्ष की ओर से अभी कोई लिखित आवेदन नहीं मिला है। लड़का, महिला को रखना चाहता है, लेकिन घरवाले तैयार नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
बीआरएलएफ (BRLF) की पहल से झारखंड के एक दिहाड़ी मज़दूर की ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई है। वैज्ञानिक खेती और पशुपालन के दम पर आज यह परिवार न सिर्फ आत्मनिर्भर है, बल्कि अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूल में शिक्षा भी दिला रहा है। किसी समय परिवार की रोजी-रोटी चलाने के लिए दूसरों के यहां दिहाड़ी मज़दूरी करना और ताड़ी निकालकर गुजारा करना इस परिवार की नियति थी। घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि खाने के लिए चावल भी खरीद कर लाना पड़ता था। लेकिन, दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन ने झारखंड के पथरगामा में रहने वाले इस किसान परिवार की तकदीर बदल कर रख दी है। आज यह परिवार अपने खेत की उपज और पशुपालन के जरिए लाखों की कमाई कर रहा है और इलाके के अन्य किसानों के लिए एक बड़ी मिसाल बन गया है। बंजर ज़मीन बनी आय का ज़रिया इस बदलाव की शुरुआत एक खाली पड़े बंजर मैदान और एक कुएं से हुई। शुरुआत में किसान को खेती का कोई खास अनुभव नहीं था। लेकिन, बीआरएलएफ (BRLF - भारत रूरल लाइवलीहुड्स फाउंडेशन) के प्रतिनिधियों (जिन्हें स्थानीय लोग 'दादा' कहते हैं) ने इलाके में दस्तक दी। संस्था के लोगों ने न सिर्फ बीज उपलब्ध कराए, बल्कि बंजर ज़मीन पर खेती करने की आधुनिक तकनीकें भी सिखाईं। नतीजतन, एक छोटे से ज़मीन के टुकड़े पर मात्र दो से तीन महीने की मेहनत के बाद ही किसान को 30,000 रुपये की शानदार आमदनी हुई। इस शुरुआती सफलता ने किसान का हौसला बढ़ा दिया। अब किसान की योजना अपने बगल में पड़ी दो एकड़ की बंजर भूमि को भी उपजाऊ बनाने की है। उसे उम्मीद है कि सिर्फ मिर्च की खेती से ही आने वाले समय में उसे 2 से ढाई लाख रुपये तक की शानदार कमाई हो सकती है। बकरी पालन और वैज्ञानिक प्रशिक्षण से मिला बूस्टर डोज़ पथरगामा में स्थानीय किसानों को आर्थिक रूप से और मजबूत करने के लिए बीआरएलएफ के तहत एक बकरी प्रजनन केंद्र भी स्थापित किया गया है। यहां किसानों को बकरियों के टीकाकरण (Vaccination), कृमिनाशन (Deworming), पोषण और पशुओं की उचित देखभाल का वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण का फायदा उठाते हुए, इस किसान ने 20 बकरियों के साथ अपना व्यवसाय शुरू किया था। अब तक वह करीब 20 बकरियां बेच चुका है, जिससे उसे 80,000 रुपये का सीधा मुनाफा हुआ है। जानवरों के बेहतर स्वास्थ्य और इस बंपर मुनाफे को देखकर अब गांव के अन्य किसान भी पशुपालन की इन आधुनिक पद्धतियों को अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। 'क्रॉप बास्केट' और नई पीढ़ी का भविष्य इस क्षेत्र में अब पारंपरिक खेती की जगह 'क्रॉप बास्केट' (Crop Basket) मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत खरीफ, रबी और गरमा—तीनों मौसमों में फसलें उगाई जा रही हैं, जिससे साल भर खेती और आमदनी का पहिया घूमता रहता है। साथ ही, ज़मीन की उर्वरता बनाए रखने के लिए जैविक खाद (कम्पोस्ट) और जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस पूरी सफलता के पीछे पति-पत्नी की साझा मेहनत है। दोनों मिलकर खेतों में सब्जियां तोड़ते हैं और फिर स्थानीय हाट-बाज़ार में जाकर उपज बेचते हैं। आर्थिक स्थिति सुधरने का सबसे बड़ा फायदा उनकी अगली पीढ़ी को मिल रहा है। जो शिक्षा कभी इस किसान या उसके पिता-दादा को नसीब नहीं हुई, वही शिक्षा आज वे अपने दोनों बेटों को इंग्लिश मीडियम स्कूल में दिला रहे हैं। दूसरों के लिए बने प्रेरणा आज यह किसान पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुका है। उसे अब खाद बनाने से लेकर, सही समय पर बीज बोने और हार्वेस्टिंग (फसल कटाई) करने की पूरी समझ हो गई है। किसान गर्व से कहता है, "अब मुझे दादा लोगों (संस्था के लोगों) की हर कदम पर ज़रूरत नहीं है। अगर दूसरे किसान भी मुझसे आइडिया लेना चाहेंगे, तो अब मैं उन्हें भी खेती के तरीके बता सकता हूं।" यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि सही दिशा और संसाधनों से बदलते ग्रामीण भारत की एक जीती-जागती तस्वीर है।
गिद्धौर के दवारी गांव में महुआ चुनने निकली सहेली ने राधो देवी को मृत पाया चतरा। किसी भी मां के लिए अपने बच्चों को हमेशा के लिए खो देने से बड़ा दुख इस दुनिया में शायद ही कोई हो। झारखंड के चतरा जिले से एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां इसी असहनीय मानसिक दर्द से गुजर रही एक मां की अब रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई है। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। महुआ चुनने के वक्त हुआ खुलाशा यह दर्दनाक वाकया गिद्धौर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दवारी गांव का है। ग्रामीण इलाकों में सुबह-सुबह जंगलों की तरफ महुआ चुनना दिनचर्या का एक अहम हिस्सा होता है। रोजमर्रा की तरह ही बुधवार सुबह जब एक महिला अपनी सहेली राधो देवी (पति- गांगो भारती) को महुआ चुनने के लिए बुलाने उनके घर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर सन्न रह गई। राधो देवी बेसुध पड़ी थीं और उनकी सांसें थम चुकी थीं। महिला की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सदमे और मौत की अनसुलझी गुत्थी स्थानीय जानकारी के अनुसार, मृतका राधो देवी पिछले कुछ समय से अपने बच्चों की मौत के कारण गहरे सदमे और अवसाद में जी रही थीं। मातृत्व का यह वियोग उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ रहा था। हालांकि, उनकी मौत उसी दुख का परिणाम है या इसके पीछे कोई और वजह छिपी है, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। शव की स्थिति को देखकर मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है, जिसने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिसिया कार्रवाई और आगे की जांच घटना की भनक लगते ही गिद्धौर थाने की पुलिस बिना समय गंवाए मौके पर पहुंची। पुलिस टीम ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए। फिलहाल, मौत के असली कारणों का वैज्ञानिक तरीके से पता लगाने के लिए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए चतरा सदर अस्पताल भेज दिया गया है। प्रशासन अब इस बात की तफ्तीश में जुटा है कि क्या यह मौत महज गहरे सदमे के कारण हुई है, या फिर इस दुखद अंत के पीछे कोई अन्य परिस्थिति जिम्मेदार है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इस रहस्य से पूरी तरह पर्दा उठ सकेगा।
गढ़वा। गढ़वा शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली सरस्वतिया नदी को स्वच्छ और अविरल बनाने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। 'आपन सरस्वतिया' अभियान के तहत नदी की सफाई और संरक्षण कार्य जारी है। अभियान के 22वें दिन सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार ने स्पष्ट चेतावनी दी कि नदी में कचरा फेंकने वालों की पहचान अब सीसीटीवी कैमरों के जरिए की जाएगी और उनके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई होगी। गंदगी फैलाने वालों पर प्रशासन की नजर प्रशासन के अनुसार, नदी की सफाई और गहरीकरण के बावजूद कुछ लोग दोबारा इसमें कचरा डाल रहे हैं। विशेष रूप से गन्ने का रस बेचने वाले ठेला संचालकों और कुछ अन्य व्यवसायियों द्वारा नदी में सीधे कचरा और अपशिष्ट फेंकने की शिकायतें मिली हैं। ऐसे लोगों की पहचान सीसीटीवी कैमरों की मदद से की जाएगी और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। अतिक्रमण हटाने की भी तैयारी एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि नदी के तटीय क्षेत्रों में अवैध कब्जा करने वालों को भी बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन जल्द ही बड़े स्तर पर अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाकर नदी की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करेगा, ताकि सरस्वतिया नदी के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित रखा जा सके। जनसहयोग से जारी है सफाई अभियान मानसून से पहले नदी को अवरोधमुक्त बनाने के उद्देश्य से युद्ध स्तर पर डी-सिल्टिंग (गाद हटाने) का कार्य जारी है। इस अभियान में शहर के कई व्यवसायियों और समाजसेवियों ने जेसीबी मशीनें उपलब्ध कराकर सहयोग किया है। प्रशासन ने कहा कि पिछले 22 दिनों से चल रहा 'आपन सरस्वतिया' अभियान अब जनभागीदारी का रूप ले चुका है। लोगों से सहयोग की अपील प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे नदी में कचरा न फेंकें और स्वच्छता बनाए रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं। अधिकारियों का कहना है कि जनसहयोग से ही सरस्वतिया नदी को उसका पुराना गौरव वापस दिलाया जा सकता है।