झारखंड

Dimna Lake Gets National Recognition from Red Fort

लाल किले से गूंजा जमशेदपुर का नाम, डिमना लेक को मिला राष्ट्रीय सम्मान

kalpana अगस्त 18, 2026 0
Dimna Lake in Jamshedpur receives national recognition during Independence Day celebrations
Jamshedpur’s Dimna Lake Honoured Among India’s Historic Water Reservoirs

जमशेदपुर: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान दिल्ली के लाल किले से जमशेदपुर का नाम भी चर्चा में आया. शहर की पहचान बन चुकी डिमना लेक को देश के प्रमुख और ऐतिहासिक जलाशयों की सूची में शामिल करते हुए विशेष सम्मान दिया गया. इस उपलब्धि के बाद जमशेदपुर समेत पूरे झारखंड में गर्व का माहौल है.

केंद्र सरकार की ओर से 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान देश के 25 प्रमुख और ऐतिहासिक जलाशयों के नाम पर लाल किले की दर्शक दीर्घाओं का नामकरण किया गया. इसी सूची में जमशेदपुर की डिमना लेक को भी स्थान मिला. यह सम्मान डिमना लेक के ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ जल संरक्षण और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर की गयी योजना की पहचान के तौर पर देखा जा रहा है.

80 साल पहले रखी गयी थी जल संरक्षण की नींव

डिमना लेक का इतिहास टाटा स्टील की दूरदर्शी योजना से जुड़ा हुआ है. शहर की बढ़ती आबादी और भविष्य में पानी की बढ़ती जरूरत को देखते हुए करीब आठ दशक पहले इस जलाशय की योजना तैयार की गयी थी.

इस परियोजना की परिकल्पना प्रसिद्ध इंजीनियर डॉ. एम. विश्वेश्वरैया की सोच से जुड़ी रही. फरवरी 1940 में डिमना लेक के निर्माण का काम शुरू हुआ और करीब चार साल बाद 17 अप्रैल 1944 से जमशेदपुर शहर को यहां से पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गयी.

आज भी जमशेदपुर की जलापूर्ति में अहम भूमिका

करीब 7500 मिलियन गैलन जल भंडारण क्षमता वाला डिमना लेक आज भी जमशेदपुर के लिए बेहद महत्वपूर्ण जलस्रोत है. पिछले करीब आठ दशकों से यह शहर की पानी की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहा है.

डिमना लेक सिर्फ पेयजल का स्रोत नहीं है, बल्कि यह जमशेदपुर की पर्यावरणीय और प्राकृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. जलाशय की देखरेख और निगरानी के लिए संबंधित संस्थाओं की ओर से लगातार काम किया जाता है.

पर्यटकों के लिए भी खास आकर्षण

दलमा पहाड़ियों की खूबसूरत वादियों के बीच स्थित डिमना लेक जमशेदपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में भी शामिल है. शहर और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग यहां घूमने, पिकनिक मनाने और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने पहुंचते हैं.

डिमना लेक पर नौकायन समेत कई मनोरंजक गतिविधियां भी लोगों को आकर्षित करती हैं. बारिश के मौसम में जलाशय और आसपास का प्राकृतिक नजारा पर्यटकों के लिए और भी खास हो जाता है.

लाल किले से सम्मान ने बढ़ाया गौरव

डिमना लेक को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से मिली राष्ट्रीय पहचान जमशेदपुर के लिए गौरव की बात है. करीब आठ दशक पहले भविष्य की जल जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गयी यह परियोजना आज भी शहर के लिए उपयोगी बनी हुई है.

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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देवघर AIIMS में ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी और IVUS से हृदय रोग का इलाज
Deoghar AIIMS: हृदय चिकित्सा में बड़ी उपलब्धि, 65 वर्षीय मरीज का पहली बार ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी से सफल इलाज

देवघर। झारखंड के देवघर स्थित एम्स ने हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में पहली बार ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी और IVUS (Intravascular Ultrasound) गाइडेड कोरोनरी इंटरवेंशन के जरिए एक 65 वर्षीय मरीज का सफल इलाज किया गया। इस उपलब्धि के साथ एम्स देवघर में जटिल हृदय रोगों के इलाज की सुविधाओं का विस्तार हुआ है।   65 वर्षीय मरीज की जटिल थी बीमारी     जिस मरीज का इलाज किया गया, उसे पहले गंभीर हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद उसकी आपातकालीन एंजियोप्लास्टी की गई थी। बाद में नियोजित उपचार के दौरान हृदय की एक अन्य रक्त वाहिका में अत्यधिक कैल्शियम जमा होने के कारण गंभीर रुकावट पाई गई।   रुकावट इतनी कठोर थी कि सामान्य बैलून कैथेटर भी उस हिस्से तक नहीं पहुंच पा रहा था। ऐसी जटिल स्थिति में सामान्य एंजियोप्लास्टी करना चुनौतीपूर्ण था।   IVUS और ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी ने आसान किया इलाज     डॉक्टरों ने इस जटिल रुकावट के उपचार के लिए अत्याधुनिक IVUS और ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी तकनीक का इस्तेमाल किया।   IVUS की मदद से डॉक्टर रक्त वाहिका के अंदर मौजूद रुकावट और कैल्शियम की स्थिति को विस्तार से देख सके। वहीं ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी तकनीक के जरिए रक्त वाहिका में जमा कठोर कैल्शियम को संशोधित किया गया, जिससे रुकावट को एंजियोप्लास्टी के लिए तैयार किया जा सका। दोनों तकनीकों की मदद से मरीज की जटिल कोरोनरी रुकावट का सफलतापूर्वक उपचार किया गया।   कैथ लैब शुरू होने के बाद 200 हृदय प्रक्रियाएं पूरी     एम्स देवघर के हृदय रोग विभाग ने अक्टूबर 2025 में कैथ लैब शुरू होने के बाद 200 हृदय संबंधी प्रक्रियाएं पूरी करने का महत्वपूर्ण पड़ाव भी हासिल किया है।   यह प्रक्रिया हृदय रोग विभाग के डॉक्टर सीबी पांडे और डॉक्टर स्मारक के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने की।   झारखंड में चुनिंदा केंद्रों में शामिल हुआ एम्स देवघर     इन अत्याधुनिक तकनीकों की उपलब्धता के बाद एम्स देवघर झारखंड के उन चुनिंदा केंद्रों में शामिल हो गया है, जहां जटिल हृदय रोगों के इलाज की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।   अब यहां मरीजों को Complex PCI, Calcium Modification, Intravascular Imaging, Conduction System Pacing (CSP) और Structural Heart Intervention (SHI) जैसी उन्नत प्रक्रियाओं की सुविधा मिल सकेगी। एम्स देवघर की इस उपलब्धि से झारखंड और आसपास के राज्यों के मरीजों को गंभीर हृदय रोगों का आधुनिक उपचार अपने क्षेत्र के नजदीक मिल सकेगा।

ranjan kumar tiwari अगस्त 18, 2026 0
गुमला में JJMP के उग्रवादियों की गिरफ्तारी और हथियार बरामदगी

Gumla: JJMP के सब-जोनल कमांडर समेत 4 उग्रवादी गिरफ्तार, AK-56 और SLR समेत हथियार बरामद

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16 दिन की भूख हड़ताल के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने अनशन खत्म किया, सरकार के फैसले का किया स्वागत

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धनबाद में पुलिस का एनकाउंटर, प्रिंस खान गिरोह के दो कथित गुर्गों को लगी गोली

JSSC-JPSC Student Protest
छात्रों की CBI जांच की मांग पर अब भी अड़चन, आंदोलनकारी बोले- मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी

रांची। झारखंड में JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आंदोलनकारी छात्र अब कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि केवल परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं है। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जांच की मांग पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।    JSSC-CGL समेत TDPL की परीक्षाएं रद्द   मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के साथ TDPL द्वारा 2014 से आयोजित परीक्षाओं, उनके परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को भी रद्द करने का फैसला लिया है। सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में संभावित गड़बड़ियों की व्यापक जांच कराने की बात कही है।   सरकार के इस फैसले को आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक की पूर्ति माना जा रहा है। हालांकि, छात्रों का कहना है कि मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है।   CBI जांच के बिना आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं छात्र   छात्र नेताओं का कहना है कि परीक्षा रद्द होने के बावजूद CBI जांच की उनकी मुख्य मांग अभी पूरी नहीं हुई है। इसी वजह से आंदोलन को पूरी तरह समाप्त करने को लेकर सहमति नहीं बनी है। छात्रों की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि परीक्षा व्यवस्था में भविष्य में ऐसी गड़बड़ियां दोबारा न हों, इसके लिए जवाबदेही तय करना जरूरी है। कुछ प्रदर्शनकारियों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की चेतावनी भी दी है, हालांकि आंदोलन की आगे की रणनीति सरकार के अगले कदम पर निर्भर करेगी।   देवेंद्र नाथ महतो ने खत्म किया अनशन   इस बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 16 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। सरकार द्वारा JSSC-CGL समेत TDPL से जुड़ी परीक्षाएं रद्द किए जाने के बाद उन्होंने फैसले का स्वागत किया और इसे छात्रों के संघर्ष की बड़ी उपलब्धि बताया।   हालांकि, अनशन खत्म होने के बावजूद आंदोलन से जुड़े अन्य छात्र CBI जांच और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की मांग को लेकर अपना रुख बनाए हुए हैं।   आगे की रणनीति पर छात्रों की नजर   अब छात्र सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं कि कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच किस एजेंसी से और किस समयसीमा में कराई जाएगी। दूसरी ओर, सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए समिति बनाने का फैसला भी किया है।   ऐसे में JSSC-CGL विवाद का अगला चरण CBI जांच की मांग और रद्द हुई परीक्षाओं से प्रभावित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर केंद्रित हो सकता है। खासकर चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर पड़े असर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

anjali kumari अगस्त 18, 2026 0
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Road construction and strengthening work underway in rural areas of Madhupur, Jharkhand
मधुपुर में सड़कों की बदलेगी तस्वीर, 11 करोड़ से 7 प्रमुख मार्गों का होगा कायाकल्प

मधुपुर: मधुपुर विधानसभा क्षेत्र में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. मुख्यमंत्री ग्राम सड़क सुदृढ़ीकरण योजना के तहत करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से सात महत्वपूर्ण सड़कों के सुदृढ़ीकरण कार्य का शिलान्यास किया गया. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होने के साथ लोगों को जर्जर सड़कों से राहत मिलने की उम्मीद है. प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से योजनाओं का शिलान्यास किया. वहीं, फौजी मोड़ स्थित शिलापट्ट का अनावरण विधायक प्रतिनिधि शब्बीर हसन ने किया. ग्रामीण इलाकों में बेहतर होगा सड़क संपर्क शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि मधुपुर विधानसभा क्षेत्र में सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. ग्रामीण इलाकों में अच्छी सड़कें होने से लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और बाजार, स्कूल, अस्पताल समेत अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंच आसान होगी. उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान ग्रामीणों से सड़क निर्माण और सुदृढ़ीकरण को लेकर जो वादे किये गये थे, उन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है. आने वाले समय में विधानसभा क्षेत्र के अन्य मार्गों को भी बेहतर करने की दिशा में काम किया जायेगा. इन सात सड़कों का होगा सुदृढ़ीकरण मुख्यमंत्री ग्राम सड़क सुदृढ़ीकरण योजना के तहत मधुपुर विधानसभा क्षेत्र की सात प्रमुख सड़कों को शामिल किया गया है. फौजी मोड़ से करीकादो: पटवाबाद मुख्य सड़क से करीकादो तक करीब 5 किलोमीटर सड़क का सुदृढ़ीकरण होगा. मीना बाजार मार्ग: पीडब्ल्यूडी सड़क से मीना बाजार, भाया टिटहियाटांड़ तक सड़क को बेहतर किया जायेगा. लालगढ़ से देन: करीब 1.52 किलोमीटर सड़क का सुदृढ़ीकरण किया जायेगा. कानो मदरसा मोड़ से धावाटांड़: मारनी मोड़ से इस मार्ग तक करीब 1.260 किलोमीटर सड़क का काम होगा. मदनकट्टा से बुड़ीकुरा मोड़: करीब 5 किलोमीटर सड़क का सुदृढ़ीकरण किया जायेगा. करौं से चोरबदिया: पीडब्ल्यूडी पथ के इस हिस्से में करीब 2.18 किलोमीटर सड़क को बेहतर किया जायेगा. तारापुर मोड़ से दुमरबाद सीमा: जौत नीच टोला होते हुए करीब 2 किलोमीटर सड़क का सुदृढ़ीकरण होगा. ग्रामीणों को मिलेगी जर्जर सड़कों से राहत इन सड़कों के सुदृढ़ीकरण के बाद मधुपुर विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों के लोगों को सीधे तौर पर फायदा मिलने की उम्मीद है. खासकर बारिश के मौसम में खराब सड़क और आवागमन की परेशानी झेलने वाले ग्रामीणों को राहत मिल सकती है. बेहतर सड़क बनने से रोजाना आने-जाने वाले लोगों के साथ किसानों, व्यापारियों और विद्यार्थियों को भी सुविधा होगी. कार्यक्रम में मौजूद रहे जनप्रतिनिधि शिलान्यास कार्यक्रम में जिला परिषद सदस्य फारूक अंसारी, जिला परिषद उपाध्यक्ष प्रतिनिधि इमरान अंसारी, दिनेश्वर किस्कू, प्रकाश मंडल, अबूतालिब अंसारी, गुलाम अशरफ, पवन यादव, रौशन झा, नेमूल रबीउल्लाह, करौं जिला परिषद सदस्य ललन सिंह, भागीरथ गोस्वामी, मुन्ना रवानी, प्रहलाद दास, मिट्ठू सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे.  

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