लोहरदगा। झारखंड के लोहरदगा जिले के कुड़ू थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोप है कि जंगल से लकड़ी लेकर घर लौट रही नाबालिग को दो युवकों ने रास्ते में जबरन जंगल के अंदर ले जाकर वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद दोनों आरोपी फरार हैं। पुलिस ने नाबालिग की मां की शिकायत पर दोनों के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस को दिए आवेदन के मुताबिक, नाबालिग जंगल से लकड़ी लेकर घर लौट रही थी। इसी दौरान रास्ते में दो युवकों ने उसे रोक लिया और कथित तौर पर जबरन जंगल के अंदर करीब आधा किलोमीटर दूर ले गए। वहां दोनों ने उसके साथ दुष्कर्म किया।
आरोपियों ने नाबालिग को घटना के बारे में किसी को बताने पर परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के बाद डरी-सहमी नाबालिग किसी तरह अपने घर पहुंची और परिजनों को पूरी जानकारी दी।
घटना की जानकारी मिलने के बाद नाबालिग अपनी मां के साथ कुड़ू थाना पहुंची और पुलिस को लिखित शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने नाबालिग का मेडिकल परीक्षण भी कराया है।
घटना के बाद पीड़िता और उसका परिवार भय के माहौल में है। परिजनों ने पुलिस पर भरोसा जताते हुए दोनों आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।
कुड़ू थाना प्रभारी अजीत कुमार ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची: JPSC-JSSC छात्र आंदोलन को लेकर झारखंड में सियासी हलचल तेज हो गयी है. 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की घोषणा के बीच राज्य सरकार ने एक बार फिर आंदोलनरत छात्रों को बातचीत के लिए बुलाया है. वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजे जाने के बाद इस मामले में राजनीतिक सक्रियता और बढ़ गयी है. आज दोपहर 2 बजे होगी छात्रों से वार्ता राज्य सरकार की ओर से आंदोलन कर रहे छात्रों को सोमवार को दोपहर 2 बजे मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में वार्ता के लिए बुलाया गया है. जिला प्रशासन के माध्यम से देर रात छात्रों तक बैठक की जानकारी पहुंचायी गयी. इस बैठक में सरकार की ओर से चार मंत्री छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे. इनमें उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, कल्याण मंत्री चमरा लिंडा, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव शामिल हैं. खास बात यह है कि इस बार सरकार ने छात्रों को अपने विधिक सलाहकारों के साथ बैठक में शामिल होने का भी प्रस्ताव दिया है. 20 अगस्त को सीएम आवास घेराव का ऐलान JPSC-JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं. छात्रों ने सरकार को 18 अगस्त तक का समय दिया है. उनका कहना है कि यदि इस अवधि में उनकी मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकला, तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा. ऐसे में आज होने वाली वार्ता को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यदि बातचीत में सहमति बनती है, तो आंदोलन को लेकर स्थिति बदल सकती है, जबकि गतिरोध कायम रहने पर छात्रों के अगले आंदोलन की राह साफ हो सकती है. राहुल गांधी ने CM हेमंत सोरेन को भेजा पत्र छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता भी बढ़ गयी है. कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजा है. रविवार देर शाम यह पत्र सीलबंद लिफाफे में कांग्रेस महानगर अध्यक्ष डॉ. कुमार राजा ने मुख्यमंत्री आवास पहुंचाया. पत्र में क्या लिखा गया है, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गयी है. हालांकि, राजनीतिक हलकों में इसे छात्र आंदोलन के समाधान की दिशा में कांग्रेस की सक्रिय पहल के तौर पर देखा जा रहा है. कांग्रेस की 18 अगस्त को अहम बैठक छात्र आंदोलन को लेकर कांग्रेस ने 18 अगस्त को प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की बैठक भी बुलायी है. प्रदेश प्रभारी के. राजू और सह-प्रभारी श्रीबेला प्रसाद की मौजूदगी में प्रदेश पदाधिकारियों के साथ मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और छात्र आंदोलन पर चर्चा होगी. बैठक में यह तय किया जा सकता है कि छात्रों की मांगों को लेकर पार्टी आगे किस तरह की भूमिका निभायेगी और सरकार तथा आंदोलनकारियों के बीच जारी गतिरोध को कैसे खत्म किया जाए. 'पूरी पार्टी छात्रों के साथ', बोले के. राजू कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के. राजू ने कहा है कि पूरी पार्टी छात्रों के साथ है. उन्होंने राहुल गांधी के पत्र की सामग्री की जानकारी होने से इनकार किया, लेकिन संभावना जतायी कि उसमें छात्रों से संवाद कर गतिरोध खत्म करने का सुझाव दिया गया होगा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि मामले का जल्द समाधान निकले और छात्रों की जायज मांगों को पूरा किया जाए. इस बीच छात्रों से जुड़े अन्य मुद्दों के साथ एमएमडीआर संशोधन विधेयक पर भी चर्चा होने की संभावना है.
देवघर। श्रावणी मेले की तीसरी सोमवारी पर देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम में आस्था का बड़ा सैलाब उमड़ने की संभावना है। इस बार सावन की तीसरी सोमवारी के साथ नाग पंचमी और संक्रांति का विशेष संयोग भी बना है। इसे देखते हुए प्रशासन ने करीब पांच लाख कांवरियों के देवघर पहुंचने का अनुमान लगाया है। बरमसिया तक पहुंची कांवरियों की कतार तीसरी सोमवारी से पहले ही देवघर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी। रविवार शाम तक कांवरियों के लिए बनाए गए पांचों पार्किंग स्थल, टेंट सिटी और ठहरने की निर्धारित जगहें लगभग भर गई थीं। पट खुलने से पहले ही कांवरियों की कतार बरमसिया चौक तक पहुंच गई थी। जलार्पण शुरू होने के बाद कतार कुछ सिमटकर बीएड कॉलेज तक रह गई। प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से बाबा वैद्यनाथ का जलाभिषेक कराने की व्यवस्था की गई। पांच लाख कांवरियों के पहुंचने का अनुमान तीसरी सोमवारी और नाग पंचमी के विशेष संयोग को देखते हुए प्रशासन ने करीब पांच लाख कांवरियों के देवघर पहुंचने का अनुमान लगाया है। इनमें साढ़े तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पैदल कांवरिया पथ से आने की संभावना है। भारी भीड़ को देखते हुए डीसी, एसपी समेत जिले के वरीय अधिकारियों ने मेला क्षेत्र और रूट लाइन का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था और सुगम जलार्पण को लेकर पुलिसकर्मियों एवं दंडाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। सुबह से ही शुरू हुआ जलार्पण रविवार को मंदिर का पट खुलने के बाद पुरोहित समाज की ओर से सबसे पहले कांचा जल पूजा की गई। इसके बाद षोडशोपचार विधि से बाबा भोलेनाथ की सरदारी पूजा कराई गई। सुबह करीब चार बजे के बाद आम कांवरियों के लिए जलार्पण शुरू हुआ। श्रद्धालु कतार में लगकर बाबा वैद्यनाथ को जल अर्पित करते नजर आए। दो दिनों में 4.59 लाख श्रद्धालुओं ने चढ़ाया जल श्रावणी मेले में बाबा वैद्यनाथ के जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंच रही है। शनिवार और रविवार को मिलाकर 4,59,703 कांवरियों ने बाबा पर जल चढ़ाया। शनिवार को 2,27,556 श्रद्धालुओं ने जलार्पण किया, जबकि रविवार को 2,32,147 श्रद्धालुओं ने बाबा वैद्यनाथ का जलाभिषेक किया। कांवरिया पथ पर गूंज रहा ‘बोल बम’ रविवार शाम से ही कांवरिया पथ और शिवगंगा घाट के आसपास श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई। कांवरिये नाचते-गाते और ‘बोल बम’ तथा ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के साथ बाबा नगरी की ओर बढ़ते रहे। तीसरी सोमवारी, नाग पंचमी और संक्रांति के विशेष संयोग को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह है। प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए हैं।
रांची। झारखंड में JPSC-JSSC छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आंदोलनरत छात्रों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का ऐलान किया है। इसी बीच राज्य सरकार ने एक बार फिर छात्रों को बातचीत के लिए बुलाया है। सोमवार दोपहर 2 बजे मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में सरकार और छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता होगी। सरकार की ओर से चार मंत्रियों का प्रतिनिधिमंडल छात्रों से बातचीत करेगा। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, कल्याण मंत्री चमरा लिंडा, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव शामिल होंगे। इस बार सरकार ने छात्रों को अपने विधिक सलाहकारों के साथ बैठक में शामिल होने का प्रस्ताव भी दिया है। 20 अगस्त को CM आवास घेराव का ऐलान JPSC-JSSC की विभिन्न मांगों को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं और अब 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की घोषणा की है। सरकार की ओर से वार्ता का संदेश आंदोलनकारी छात्रों तक रविवार देर रात जिला प्रशासन के माध्यम से पहुंचाया गया। अब सोमवार की बैठक में सरकार और छात्रों के बीच गतिरोध खत्म करने की कोशिश की जाएगी। राहुल गांधी ने CM हेमंत सोरेन को भेजा पत्र छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता भी बढ़ गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार देर शाम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजा। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी के पत्र को कांग्रेस महानगर अध्यक्ष डॉ. कुमार राजा ने सीलबंद लिफाफे में मुख्यमंत्री आवास पहुंचाया। हालांकि पत्र में क्या लिखा गया है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। छात्रों से संवाद चाहती है कांग्रेस कांग्रेस की ओर से छात्रों के साथ संवाद स्थापित कर आंदोलन का समाधान निकालने पर जोर दिया जा रहा है। पार्टी चाहती है कि छात्रों की जायज मांगों पर सरकार अपना रुख स्पष्ट करे और बातचीत के जरिए गतिरोध समाप्त किया जाए। 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव के ऐलान के बाद कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर रणनीति बनाने की कवायद तेज हो गई है। 18 अगस्त को कांग्रेस की अहम बैठक छात्र आंदोलन को लेकर कांग्रेस ने 18 अगस्त को प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई है। प्रदेश प्रभारी के. राजू और सह-प्रभारी श्रीबेला प्रसाद की मौजूदगी में प्रदेश पदाधिकारियों के साथ मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा होगी। बैठक में छात्र आंदोलन को लेकर पार्टी की आगे की रणनीति भी तय की जा सकती है। ‘पूरी पार्टी छात्रों के साथ’, बोले के. राजू प्रदेश प्रभारी के. राजू ने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह छात्रों के साथ है। उन्होंने राहुल गांधी के पत्र की सामग्री की जानकारी होने से इनकार किया, लेकिन संभावना जताई कि पत्र में छात्रों से संवाद कर गतिरोध दूर करने का सुझाव दिया गया होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि मामले का जल्द समाधान हो और छात्रों की जायज मांगों को पूरा किया जाए। सोमवार की वार्ता में एमएमडीआर संशोधन विधेयक समेत छात्रों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।