झारखंड

बुचा घाटी में ट्रक ने कार और तीन बाइक को रौंदा, दो की मौत

पिठोरिया की बुचा घाटी में रफ्तार का कहर, ट्रक ने कार और तीन बाइक को रौंदा; दो की मौत

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
पिठोरिया की बुचा घाटी में ट्रक हादसे की तस्वीर
बुचा घाटी में ट्रक की टक्कर से दो लोगों की मौत

रांची। पिठोरिया थाना क्षेत्र की बुचा घाटी में रविवार को तेज रफ्तार ट्रक ने कार और तीन मोटरसाइकिलों को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए रिम्स भेजा गया है, जहां कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है।

 

ट्रक में फंसकर काफी दूर तक घिसटती रही बाइक

 

 

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रक की टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि एक मोटरसाइकिल उसके अगले हिस्से में फंस गई। हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन लेकर भागने की कोशिश कर रहा था। इस दौरान बाइक ट्रक में फंसी रही और काफी दूर तक सड़क पर घिसटती चली गई।

 

मृतकों की पहचान 18 वर्षीय अंकित कुमार और 58 वर्षीय गोपाल राम के रूप में हुई है। दुर्घटना में चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल इलाज के लिए रिम्स भेजा।

 

पुलिस ने ट्रक और तीन बाइक जब्त की

 

 

घटना की सूचना मिलते ही पिठोरिया थाना प्रभारी सतीश कुमार पांडेय पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया है।

 

थाना प्रभारी ने बताया कि घटनास्थल से ट्रक और तीनों मोटरसाइकिलों को जब्त कर लिया गया है। हादसा ट्रक में तकनीकी खराबी के कारण हुआ या चालक की लापरवाही से, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस ट्रक चालक की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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Election officials reviewing the Special Intensive Revision of voter lists in Jharkhand
SIR की समीक्षा में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी का निर्देश, कहा- भारतीय का नाम न छूटे, विदेशी का नाम न जुड़े

रांची: झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर निर्वाचन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं. राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रविकुमार ने रांची स्थित निर्वाचन सदन में SIR की प्रगति की समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मतदाता सूची शुद्ध, त्रुटिरहित और समावेशी होनी चाहिए. किसी भी पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं छूटना चाहिए और किसी विदेशी नागरिक का नाम इसमें शामिल नहीं होना चाहिए. एक परिवार के सभी सदस्यों का नाम एक ही बूथ पर हो समीक्षा बैठक के दौरान के. रविकुमार ने अधिकारियों को निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करने को कहा. उन्होंने निर्देश दिया कि एक परिवार या घर में रहने वाले सभी पात्र मतदाताओं का नाम यथासंभव एक ही मतदान केंद्र की सूची में दर्ज हो. इसके लिए ईआरओ को नजरी नक्शे का सही तरीके से सत्यापन करने के साथ गृह संख्या और नोशनल नंबर की भी सावधानीपूर्वक जांच करने को कहा गया. आवेदन और दस्तावेजों की होगी गहन जांच मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि SIR के दौरान प्राप्त प्रत्येक आवेदन, दावा-आपत्ति, नोटिस और संबंधित दस्तावेजों की नियमानुसार जांच की जानी चाहिए. बीएलओ द्वारा किये जा रहे कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी बीएलओ सुपरवाइजर की होगी. यदि सुपरवाइजर के स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो ईआरओ कार्रवाई करते हुए इसकी सूचना जिला निर्वाचन पदाधिकारी को देंगे. अधिकारियों को लंबित मामलों का भी निर्धारित समय-सीमा के भीतर निपटारा करने का निर्देश दिया गया है. नोटिस मिलने पर मिलेगा 14 दिन का समय SIR के तहत नो-मैपिंग, तार्किक विसंगति और अन्य श्रेणियों में आने वाले मतदाताओं के मामलों की सुनवाई 24 अगस्त से शुरू होगी. ऐसे मतदाताओं को ईआरओ स्तर से नोटिस जारी किया जाएगा. नोटिस मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति को दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए पहले सात दिन का समय मिलेगा. इस अवधि में दस्तावेज जमा नहीं करने पर बीएलओ दोबारा संपर्क करेंगे और फिर नोटिस जारी किया जाएगा. इसके बाद दस्तावेज जमा करने के लिए सात दिन का अतिरिक्त समय दिया जाएगा. यानी जरूरत पड़ने पर कुल 14 दिन का अवसर मिलेगा. 5 अगस्त से 15 सितंबर तक दावा-आपत्ति SIR के तहत दावा-आपत्ति दाखिल करने की अवधि 5 अगस्त से 15 सितंबर 2026 तक निर्धारित की गयी है. प्राप्त दावे और आपत्तियों का निष्पादन संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी द्वारा 14 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा. विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र मतदाताओं का नाम हटाना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है. नये मतदाताओं के नाम जोड़ने का काम भी जारी SIR के साथ राज्य में नये पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने और मतदाता सूची में दर्ज विवरण में सुधार का काम भी जारी है. दूसरे राज्य की मतदाता सूची में दर्ज ऐसे लोग, जो झारखंड में अपना नाम स्थानांतरित कराना चाहते हैं, उनसे फॉर्म-8 और घोषणा पत्र प्राप्त कर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है. इसके अलावा एक ही परिवार के सदस्यों को एक मतदान केंद्र की सूची में शामिल करने तथा आंकड़ों में मौजूद त्रुटियों और विसंगतियों को दूर करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. विदेशी नागरिक के नाम पर फॉर्म-7 से करें आपत्ति मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रविकुमार ने संविधान के अनुच्छेद 326 का हवाला देते हुए कहा कि केवल भारत के नागरिक ही मतदाता सूची में पंजीकरण के पात्र हैं. उन्होंने राजनीतिक दलों, बीएलए-2 और आम नागरिकों से अपील की कि यदि किसी विदेशी नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज है या नाम शामिल कराने का प्रयास किया जा रहा है, तो फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्ति दर्ज करायी जा सकती है. मदद के लिए 1950 पर करें संपर्क मतदाता SIR या मतदाता सूची से संबंधित किसी जानकारी और सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1950 पर संपर्क कर सकते हैं. निर्वाचन विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों और उपलब्ध आंकड़ों का विधिसम्मत सत्यापन किया जाएगा और योग्य मतदाताओं को अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा.  

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JSSC candidates waiting for recruitment results and appointments in Jharkhand
जेएसएससी का हाल: नियुक्ति में लग रहे 3-4 साल, टुकड़ों में रिजल्ट से बढ़ी अभ्यर्थियों की परेशानी

रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की नियुक्ति प्रक्रियाओं में देरी और रिजल्ट जारी करने के तरीके को लेकर अभ्यर्थियों के बीच लगातार असंतोष बढ़ रहा है. राज्य में हजारों अभ्यर्थी एक साथ आवेदन करते हैं, परीक्षा देते हैं और परिणाम का इंतजार करते हैं, लेकिन नियुक्ति की प्रक्रिया कई मामलों में वर्षों तक पूरी नहीं हो पाती. कहीं रिजल्ट कई चरणों में जारी होता है, तो कहीं नियुक्ति पत्र मिलने के बाद भी अतिरिक्त परिणाम और कटऑफ का इंतजार जारी रहता है. प्रभात खबर की पड़ताल में जेएसएससी की पांच प्रमुख नियुक्ति परीक्षाओं की टाइमलाइन सामने आयी है. इससे पता चलता है कि कई नियुक्तियों में विज्ञापन से लेकर नियुक्ति तक तीन से चार वर्ष या उससे अधिक समय लग रहा है. कई मामलों में अभ्यर्थी योगदान भी दे चुके हैं, लेकिन पूरी चयन प्रक्रिया अभी तक अंतिम रूप नहीं ले पायी है. रिजल्ट के साथ कटऑफ नहीं होने से बढ़ी परेशानी जेएसएससी की कई परीक्षाओं में रिजल्ट जारी होने के साथ कटऑफ और अभ्यर्थियों के प्राप्तांक सार्वजनिक नहीं किये जा रहे हैं. इसके बाद सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा कर दी जाती है और विभाग की ओर से नियुक्ति पत्र भी बांटे जाते हैं. ऐसे में अभ्यर्थियों के बीच चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. कई मामलों में नियुक्ति के बाद भी कटऑफ का इंतजार बना रहता है. वहीं, परीक्षा प्रक्रिया के दौरान अदालत में याचिकाएं दाखिल होने से भी नियुक्ति प्रक्रिया लंबी खिंच जाती है. आयोग की ओर से रिजल्ट जारी करते समय कई बार यह जानकारी दी जाती है कि अनिवार्य प्रमाण पत्र या अभिलेख उपलब्ध नहीं होने, दस्तावेजों में अस्पष्टता अथवा बायोमीट्रिक मिलान की पुष्टि नहीं होने के कारण कुछ अभ्यर्थियों का रिजल्ट लंबित रखा गया है. संबंधित दस्तावेज मिलने और विभागीय मार्गदर्शन के बाद आयोग के निर्णय के आधार पर रिजल्ट में संशोधन संभव बताया जाता है. महिला पर्यवेक्षिका: रिजल्ट के एक साल बाद भी कटऑफ का इंतजार महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति परीक्षा का रिजल्ट 14 अगस्त 2025 को जारी किया गया था. इसके बाद 313 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा समाज कल्याण विभाग से की गयी. इनमें 61 अभ्यर्थी जांच के दायरे में हैं, जबकि 131 पदों का रिजल्ट अभी लंबित बताया गया है. टाइमलाइन: विज्ञापन : सितंबर 2023 परीक्षा : सितंबर 2024 प्रमाण पत्र सत्यापन : मई-जून 2025 रिजल्ट : अगस्त 2025 नियुक्ति पत्र वितरण : अप्रैल-मई 2026 स्थिति : नियुक्ति प्रक्रिया अभी अंतिम रूप से बंद नहीं हुई रिजल्ट जारी होने के करीब एक साल बाद भी कटऑफ जारी नहीं होने से अभ्यर्थियों के बीच सवाल बने हुए हैं. जूनियर इंजीनियर: प्रश्न पत्र लीक से रद्द हुई परीक्षा जूनियर इंजीनियर नियुक्ति की प्रक्रिया भी लंबे समय से चल रही है. जेएसएससी ने वर्ष 2021 में झारखंड डिप्लोमा स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा की प्रक्रिया शुरू की थी. वर्ष 2022 में परीक्षा हुई, लेकिन प्रश्न पत्र लीक होने के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी. इसके बाद वर्ष 2023 में 1562 पदों के लिए दोबारा प्रक्रिया शुरू की गयी. सितंबर-अक्तूबर 2023 में परीक्षा हुई. पहला रिजल्ट मार्च 2024 में जारी हुआ और इसके बाद भी अतिरिक्त रिजल्ट जारी किये गये. नियुक्ति पत्र का वितरण भी कई चरणों में हुआ. वहीं, कुछ अभ्यर्थियों ने नियुक्ति को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है. स्थिति: नियुक्ति प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है. माध्यमिक सहायक आचार्य: 850 नियुक्तियों की अनुशंसा, कटऑफ अब भी जारी नहीं राज्य के प्लस टू स्कूलों में माध्यमिक सहायक आचार्य के 1373 पदों पर नियुक्ति के लिए परीक्षा आयोजित की गयी थी. इस वर्ष जून से विषयवार रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया शुरू हुई. अब तक करीब 850 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा शिक्षा विभाग से की जा चुकी है. हालांकि, विषयवार कटऑफ अभी जारी नहीं हुआ है. 500 से अधिक पदों का रिजल्ट भी लंबित बताया जा रहा है और नियुक्ति पत्र वितरण की प्रक्रिया जारी है. टाइमलाइन: आवेदन : 18 जून 2025 से लिखित परीक्षा : जनवरी 2026 विषयवार रिजल्ट : जून-जुलाई 2026 स्थिति : कई पदों का रिजल्ट लंबित 26 हजार सहायक आचार्य: एक साल से चरणों में जारी हो रहा रिजल्ट 26 हजार सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा का रिजल्ट भी लंबे समय से अलग-अलग चरणों में जारी किया जा रहा है. वर्ष 2023 में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई और 2024 में परीक्षा आयोजित हुई. जुलाई 2025 से परिणाम जारी होने शुरू हुए. इसके बाद भी रिजल्ट में कई बार संशोधन और अतिरिक्त परिणाम जारी किये गये. 1 अगस्त 2025, 30 अगस्त 2025, 7 नवंबर 2025 और 12 दिसंबर 2025 को अलग-अलग चरणों में संशोधित या अतिरिक्त रिजल्ट जारी हुए. मार्च 2026 में अभ्यर्थियों का प्रमाण पत्र सत्यापन भी हुआ. नियुक्ति और योगदान की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी चयन प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई. जनवरी 2026 में कोर्ट के आदेश के बाद कटऑफ जारी किया गया. उत्पाद सिपाही: तीन साल बाद भी फाइनल रिजल्ट का इंतजार राज्य में 583 उत्पाद सिपाही पदों पर नियुक्ति के लिए वर्ष 2023 में प्रक्रिया शुरू हुई थी. इसके बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा 2024 में हुई और उसका रिजल्ट 2025 में जारी किया गया. लिखित परीक्षा 12 अप्रैल 2026 को हुई. इसके बाद जुलाई 2026 में मेडिकल जांच की प्रक्रिया पूरी की गयी, लेकिन अभी तक फाइनल रिजल्ट जारी नहीं हुआ है. टाइमलाइन: विज्ञापन : 2023 शारीरिक दक्षता परीक्षा : 2024 शारीरिक दक्षता का रिजल्ट : 2025 लिखित परीक्षा : 12 अप्रैल 2026 मेडिकल जांच : जुलाई 2026 फाइनल रिजल्ट : अभी जारी नहीं अभ्यर्थियों के सामने सबसे बड़ा सवाल—कब पूरी होगी नियुक्ति? जेएसएससी की इन नियुक्ति प्रक्रियाओं की स्थिति से साफ है कि कई परीक्षाओं में आवेदन से लेकर अंतिम नियुक्ति तक लंबा समय लग रहा है. अभ्यर्थियों को परीक्षा के बाद रिजल्ट, फिर संशोधित रिजल्ट, अतिरिक्त रिजल्ट, प्रमाण पत्र सत्यापन, कटऑफ और नियुक्ति पत्र के लिए अलग-अलग चरणों में इंतजार करना पड़ रहा है. इस पूरी प्रक्रिया के कारण अभ्यर्थियों के सामने नौकरी कब मिलेगी और चयन प्रक्रिया कब पूरी होगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है. वहीं, रिजल्ट और कटऑफ को लेकर स्पष्टता नहीं होने से परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं.  

kalpana अगस्त 17, 2026 0
देवघर बाबा वैद्यनाथ धाम में तीसरी सोमवारी पर कांवरियों की भीड़

देवघर में तीसरी सोमवारी पर आस्था का सैलाब, नाग पंचमी पर लाखों कांवरियों की भीड़

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Nag Panchami 2026: रांची के पहाड़ी मंदिर समेत शिवालयों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, जानें पूजा का महत्व और विधि

रांची। नाग पंचमी और सावन की तीसरी सोमवारी का विशेष संयोग सोमवार, 17 अगस्त को बन रहा है। इस खास अवसर पर रांची के पहाड़ी मंदिर समेत शहर के विभिन्न शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है। भक्त भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा-अर्चना कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना करेंगे।   शाम 6:49 बजे तक रहेगी पंचमी तिथि   पंचमी तिथि सोमवार शाम 6:49 बजे तक रहेगी। पंडित कौशल कुमार मिश्र के अनुसार, सोमवार सुबह 6:45 बजे तक हस्त नक्षत्र रहेगा, इसके बाद चित्रा नक्षत्र शुरू होगा। इस दौरान साध्य और शुभ योग का संयोग भी बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे संयोग में पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है।   शिव के साथ नाग देवता की पूजा का महत्व   धार्मिक मान्यताओं में नाग देवता को भगवान शिव का आभूषण माना गया है। यही वजह है कि नाग पंचमी के दिन नाग देवता के साथ भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है। रांची के पहाड़ी मंदिर में स्थित नाग देवता के मंदिर में श्रद्धालु दूध, लावा, फूल और अन्य प्रसाद अर्पित कर पूजा करेंगे। भक्त परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करेंगे। कई श्रद्धालु नाग देवता की धातु से बनी प्रतिमा का दान भी करते हैं। वहीं, घर के मुख्य द्वार पर नाग की आकृति बनाकर पूजा करने की परंपरा भी कई स्थानों पर है।   घर पर ऐसे करें नाग पंचमी की पूजा   नाग पंचमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शिव और नाग देवता का स्मरण करें। इसके बाद नाग देवता की तस्वीर या प्रतिमा के सामने पूजा की शुरुआत करें। घर के मुख्य द्वार पर गोबर से नाग की आकृति बनाकर भी पूजा की जा सकती है। पूजा के दौरान नाग देवता को दूध, फूल, लावा और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने से कुंडली से जुड़े दोषों की शांति और परिवार में सकारात्मकता की कामना की जाती है। हालांकि, इन मान्यताओं का आधार धार्मिक परंपराएं हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
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