झारखंड

पलामू का ढोढराही बना ‘विधवाओं का गांव’, टीबी ने उजाड़ दिए 20 से अधिक परिवार

anjali kumari जून 11, 2026 0
medical emergency
medical emergency

पलामू। झारखंड के पलामू जिले के रामगढ़ प्रखंड स्थित ढोढराही गांव आज एक दर्दनाक पहचान के साथ चर्चा में है। अनुसूचित जाति बहुल इस गांव में टीबी (क्षय रोग) ने पिछले एक दशक में 20 से अधिक पुरुषों की जान ले ली है, जिसके कारण गांव को अब ‘विधवाओं का गांव’ कहा जाने लगा है। गांव में लगभग 25 परिवार रहते हैं, जिनमें से 20 से अधिक परिवारों की महिलाएं विधवा हो चुकी हैं।

 

मजदूरी के लिए जाते थे बाहर, बीमारी बन गई मौत की वजह


ग्रामीणों के अनुसार, गांव के अधिकांश पुरुष बिहार के रोहतास जिले के करवंदिया क्षेत्र में स्टोन माइंस में मजदूरी करने जाते थे। वहीं काम करने के दौरान कई लोग बीमार पड़े और बाद में उनकी मौत हो गई। वर्ष 2016-17 के बाद से टीबी के मामलों में तेजी आई और एक-एक कर कई परिवारों के कमाने वाले सदस्य काल के गाल में समा गए।

 

महिलाओं पर परिवार की जिम्मेदारी


पति की मौत के बाद गांव की महिलाएं अब मजदूरी, महुआ चुनने और ईंट-भट्ठों में काम कर परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। कई बच्चों को भी कम उम्र में मजदूरी करनी पड़ रही है। कुछ परिवार गांव छोड़कर अन्य स्थानों पर पलायन कर चुके हैं, जिसके कारण कई घरों में ताले लटके हुए हैं।

 

सवालों के घेरे में बीमारी का कारण


ग्रामीणों का कहना है कि टीबी से सबसे ज्यादा पुरुषों की मौत हुई है, जबकि महिलाओं और बच्चों में ऐसे मामले सामने नहीं आए हैं। वर्ष 2022 में हुए स्वास्थ्य सर्वे में गांव में तीन टीबी मरीज मिले थे, लेकिन इसके बाद कोई बड़ा मेडिकल कैंप नहीं लगाया गया।

 

स्वास्थ्य विभाग करेगा विशेष जांच


पलामू के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने कहा है कि गांव में विशेष मेडिकल कैंप लगाया जाएगा। एक्स-रे और स्क्रीनिंग के जरिए सभी ग्रामीणों की जांच होगी। विभाग यह भी पता लगाएगा कि मौतें केवल टीबी से हुईं या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी जिम्मेदार है। गांव की स्थिति ने स्वास्थ्य व्यवस्था और ग्रामीण जीवन की चुनौतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

झारखंड

View more
Dhanbad Renu Devi
60 साल की उम्र में भी नहीं टूटा आस्था का संकल्प, 1998 से हर सावन सोमवार डाक बम बनती हैं रेणु देवी

देवघर। भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था और संकल्प की मिसाल पेश कर रही हैं धनबाद की 60 वर्षीय रेणु देवी। वह वर्ष 1998 से लगातार हर सावन सोमवार डाक बम बनकर सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचती हैं और बाबा का जलाभिषेक करती हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी श्रद्धा और उत्साह में कोई कमी नहीं आई है।   28 वर्षों से निभा रही हैं डाक बम का संकल्प   रेणु देवी ने वर्ष 1998 में पहली बार सावन के प्रत्येक सोमवार डाक बम बनकर बाबा बैद्यनाथ धाम में जल चढ़ाने का संकल्प लिया था। इसके बाद उन्होंने इस परंपरा को लगातार जारी रखा। उनके लिए यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि वर्षों से निभाया जा रहा आस्था और संकल्प है। रेणु देवी का कहना है कि जब तक बाबा भोलेनाथ की कृपा और बुलावा रहेगा, तब तक वह इसी तरह अपनी यात्रा जारी रखेंगी।   लंबी यात्रा में नहीं महसूस होती थकान   डाक बम की कठिन यात्रा के बावजूद रेणु देवी के उत्साह में कमी नहीं आती। उनका कहना है कि डाक बम की वेशभूषा धारण करते ही उन्हें एक अलग तरह की ऊर्जा महसूस होती है। यात्रा के दौरान उनके साथ श्रद्धालुओं का जत्था भी रहता है, जो जरूरत के समय उनका सहयोग करता है।   ‘बाबा ने भक्त बनाया, यही सबसे बड़ा आशीर्वाद’   जब रेणु देवी से उनकी मनोकामना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बाबा भोलेनाथ ने उन्हें अपना भक्त बनाया, इससे बड़ा आशीर्वाद उनके लिए कुछ नहीं हो सकता। वह अपने परिवार के सुखी और स्वस्थ होने को ही बाबा का आशीर्वाद मानती हैं। उनकी प्रार्थना है कि बाबा बैद्यनाथ की कृपा हर व्यक्ति और हर परिवार पर बनी रहे और सभी लोग सुख, शांति और समृद्धि के साथ जीवन बिताएं।   पति भी वर्षों से कर रहे हैं देवघर की यात्रा   रेणु देवी की शिवभक्ति में उनके पति भी साथ हैं। उनके पति के अनुसार, वह स्वयं 1986 से देवघर जाकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते आ रहे हैं। दोनों के लिए बाबा बैद्यनाथ की आराधना अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा बन चुकी है। 60 वर्ष की उम्र में भी हर सावन सोमवार डाक बम बनकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचने वाली रेणु देवी की आस्था लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है।

abhishek singh अगस्त 2, 2026 0
Sakhua Mahotsav in Ranchi

रांची में 8 अगस्त को होगा 'सखुआ महोत्सव', 10 हजार पौधे लगाए जाएंगे; मेयर ने तैयारियों की समीक्षा की

Morning Walk Murder

धनबाद में मॉर्निंग वॉक पर निकले युवक की हत्या, पुरानी रंजिश का आरोप; तीन हिरासत में

Albert Ekka Chowk

रांची के सबसे महंगे बाजार की 35 दुकानों का 13 साल से नहीं लिया गया किराया, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

Indian Railways
रेलवे ट्रैक पर मिले शवों की अंत्येष्टि के लिए अब मिलेंगे 7 हजार रुपये, आठ साल बाद बढ़ी राशि

रांची। रेलवे ट्रैक पर दुर्घटना या अन्य परिस्थितियों में मिले लावारिस शवों की अंत्येष्टि के लिए दी जाने वाली सहायता राशि में बढ़ोतरी की गई है। अब ऐसे शवों के अंतिम संस्कार के लिए 7,000 रुपये की राशि दी जाएगी। करीब आठ साल बाद अंत्येष्टि सहायता राशि में संशोधन किया गया है। नई व्यवस्था से पुलिस और प्रशासन को लावारिस शवों के अंतिम संस्कार में मदद मिलेगी।   पहले मिलते थे 3 हजार रुपये   नई व्यवस्था से पहले रेलवे ट्रैक या रेलवे क्षेत्र में मिले लावारिस शवों की अंत्येष्टि के लिए 3,000 रुपये की सहायता राशि निर्धारित थी। लंबे समय से राशि में बदलाव नहीं होने के कारण अंतिम संस्कार की बढ़ती लागत को देखते हुए इसे बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही थी।   अब राशि बढ़ाकर 7,000 रुपये कर दी गई है। इससे लकड़ी, कफन और अंतिम संस्कार से जुड़ी अन्य आवश्यक सामग्रियों की व्यवस्था करने में सहायता मिलेगी।   आठ साल बाद हुआ संशोधन   अंत्येष्टि सहायता राशि में यह बदलाव करीब आठ साल बाद किया गया है। इस दौरान अंतिम संस्कार से जुड़ी सामग्री और अन्य खर्चों में बढ़ोतरी हुई है। नई राशि को मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप किया गया है, ताकि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार में आर्थिक समस्या कम हो।   लावारिस शवों की अंत्येष्टि में मिलेगी मदद   रेलवे ट्रैक पर मिले शवों की पहचान नहीं होने या परिजनों के तत्काल सामने नहीं आने की स्थिति में पुलिस और प्रशासन को अंतिम संस्कार की व्यवस्था करनी पड़ती है। ऐसे मामलों में नई सहायता राशि से अंत्येष्टि की प्रक्रिया को पूरा करने में आर्थिक मदद मिलेगी।   पहचान और परिजनों की तलाश भी जारी रहेगी   लावारिस शव मिलने के बाद पुलिस की ओर से उसकी पहचान कराने और परिजनों का पता लगाने की प्रक्रिया जारी रहती है। पहचान नहीं होने की स्थिति में निर्धारित नियमों के अनुसार अंतिम संस्कार कराया जाता है। सहायता राशि बढ़ाए जाने से ऐसी परिस्थितियों में प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरा करने में सुविधा होगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य लावारिस शवों की सम्मानजनक अंत्येष्टि सुनिश्चित करना और इसके लिए उपलब्ध सरकारी सहायता को मौजूदा खर्च के अनुरूप बनाना है।

anjali kumari अगस्त 1, 2026 0
रांची फ्लाईओवर मास्टर प्लान

रांची में 5 नए फ्लाईओवरों का मास्टर प्लान, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

देवघर दिल्ली फ्लाइट

श्रावणी मेला: देवघर-दिल्ली शाम की उड़ान बहाल, श्रद्धालुओं को मिली बड़ी राहत

जयराम महतो कोर्ट में सरेंडर

डुमरी विधायक जयराम महतो ने कोर्ट में किया सरेंडर, वेदांता स्टील प्लांट आंदोलन मामले में मिली जमानत

रांची के नए सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद
रांची सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार का तबादला, डॉ. अमरेंद्र प्रसाद बने नए सिविल सर्जन

रांची। झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार का तबादला कर दिया है। उनकी जगह डॉ. अमरेंद्र प्रसाद को रांची का नया सिविल सर्जन नियुक्त किया गया है। विभाग की ओर से किए गए इस बदलाव के बाद रांची जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी अब डॉ. अमरेंद्र प्रसाद संभालेंगे।   डॉ. अमरेंद्र प्रसाद को मिली नई जिम्मेदारी   स्वास्थ्य विभाग के आदेश के अनुसार डॉ. अमरेंद्र प्रसाद को रांची के सिविल सर्जन का दायित्व सौंपा गया है। उनके सामने जिले की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर तरीके से संचालित करने और अस्पतालों में व्यवस्थाओं को मजबूत रखने की जिम्मेदारी होगी।   स्वास्थ्य विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल   रांची के सिविल सर्जन के तबादले के साथ झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने कई अन्य चिकित्सा अधिकारियों के स्तर पर भी बदलाव किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक विभाग में बड़े स्तर पर चिकित्सकों और स्वास्थ्य अधिकारियों का तबादला किया गया है।   रांची की स्वास्थ्य व्यवस्था पर रहेगी नजर   नए सिविल सर्जन के सामने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखना अहम चुनौती होगी। सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाएं, स्वास्थ्य योजनाओं का क्रियान्वयन और मरीजों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा.   स्वास्थ्य विभाग के इस फेरबदल के बाद अब डॉ. अमरेंद्र प्रसाद के कार्यभार संभालने और रांची की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर आगे की प्राथमिकताओं पर नजर रहेगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 1, 2026 0
Chirkunda Lottery Racket

चिरकुंडा में अवैध लॉटरी सिंडिकेट का भंडाफोड़, ₹2 करोड़ तक की प्रतिबंधित लॉटरी जब्त

धनबाद फायरिंग घटना

धनबाद में युवक पर फायरिंग, बाल-बाल बची जान; मारपीट विवाद में पक्ष लेने को लेकर हमला

Gaya-Chatra Rail Project

गया-चतरा रेल परियोजना में तेजी, बिहार-झारखंड के बीच रेल कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा फायदा

0 Comments

Top week

Smoke rises after reported airstrikes in Iraq as regional tensions escalate in West Asia
दुनिया

US-Saudi Strike: इराक में अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, 4 IRGC जवानों की मौत का दावा; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 30, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?