रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तारियों के साथ ही मामले में अब तक पकड़े गए आरोपियों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है। सीआईडी ने रांची और उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक साथ छापेमारी कर यह कार्रवाई की।
सीआईडी थाना कांड संख्या-16/2026 (22 जुलाई 2026) की जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर रांची और लखनऊ में छापेमारी की गई। गिरफ्तार आरोपियों में लोहरदगा निवासी उमाकांत उरांव, रांची के रोशन केरकेट्टा, मनोज कुमार, धर्मेंद्र कुमार तथा लखनऊ निवासी रक्षक सिंह शामिल हैं।
सीआईडी के अनुसार, उमाकांत उरांव पर 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में कथित रूप से धोखाधड़ी और अनुचित साधनों का उपयोग कर सफल होने के साथ-साथ अन्य अभ्यर्थियों को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एजेंट के रूप में काम करने का आरोप है।
वहीं, रोशन केरकेट्टा और मनोज कुमार पर भी 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में कथित तौर पर अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर परीक्षा पास करने के आरोप लगाए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में लखनऊ निवासी रक्षक सिंह भी शामिल है, जो जेपीएससी परीक्षा संचालित करने वाली कंपनी TDPL में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत है। सीआईडी का आरोप है कि वह भी परीक्षा में कथित धांधली और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा था।
सीआईडी ने छापेमारी के दौरान कई डिजिटल उपकरण और महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य भी जब्त किए हैं। विभाग का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले नए साक्ष्यों के आधार पर आगे भी विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा आंदोलन के दौरान छात्रों की मदद को लेकर चर्चा में आए मोहम्मद जुनैद उर्फ ‘जुनैद भाई’ गुरुवार को रांची पहुंचे। उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचकर JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात की और उनके आंदोलन को समर्थन दिया। छात्रों से मुलाकात, आंदोलन की जानकारी ली धरना स्थल पर पहुंचने के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने मोहम्मद जुनैद का स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उनकी मांगों और आंदोलन की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। 'जहां छात्र आंदोलन करेंगे, वहां मेरा समर्थन रहेगा' मीडिया से बातचीत में मोहम्मद जुनैद ने कहा कि देश में जहां भी छात्र शिक्षा और अपने अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे, वह उनके समर्थन में पहुंचने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी सरकार के पक्ष या विपक्ष में बोलना नहीं, बल्कि छात्रों की आवाज को मजबूत करना है। उन्होंने कहा, "मैं यहां किसी सरकार के समर्थन या विरोध में नहीं आया हूं। मैं सिर्फ छात्रों के मुद्दों पर बात करने आया हूं। छात्र अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और मेरा समर्थन उनके साथ है।" 'जंतर-मंतर से पहले भी छात्र हितों के लिए करता रहा हूं काम' मोहम्मद जुनैद ने कहा कि लोग उन्हें जंतर-मंतर आंदोलन के बाद पहचानने लगे, लेकिन छात्र हितों के लिए उनका संघर्ष नया नहीं है। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से कॉलेज स्तर पर छात्रों की समस्याओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की वकालत उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है। यदि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, तो समाज और सरकार दोनों को उनकी बात सुननी चाहिए और समाधान निकालना चाहिए। 'प्रताड़ना झेली, फिर भी छात्रों के साथ खड़ा रहूंगा' दिल्ली आंदोलन के दौरान अपने साथ हुई कथित प्रताड़ना पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि वह इस मंच पर केवल छात्रों के मुद्दों पर बात करना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि छात्र हितों के लिए आवाज उठाने की वजह से उन्हें व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है, लेकिन इससे वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। छात्रों में बढ़ा उत्साह मोहम्मद जुनैद के रांची पहुंचने से आंदोलनकारी छात्रों में उत्साह देखने को मिला। छात्रों ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से मिल रहा समर्थन उनके आंदोलन को और मजबूती दे रहा है। वहीं, जुनैद की मौजूदगी को छात्र राष्ट्रीय स्तर पर मिल रहे समर्थन और एकजुटता का प्रतीक मान रहे हैं।
झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार (6 अगस्त) से शुरू हो रहा है। 12 अगस्त तक चलने वाले पांच कार्यदिवसीय इस सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना है। विपक्ष, विशेषकर भाजपा, JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता, कानून-व्यवस्था और जनहित के अन्य मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं सत्तापक्ष भी केंद्र सरकार से जुड़े मुद्दों को उठाकर पलटवार करने की रणनीति बना चुका है। पहले दिन होगी सामान्य कार्यवाही सत्र के पहले दिन सदन में शोक प्रस्ताव के साथ सामान्य कार्यवाही होगी। इसके अलावा बजट सत्र के दौरान सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों पर हुई कार्रवाई की एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) भी सदन में पेश की जाएगी। हालांकि, JPSC-JSSC विवाद को लेकर विपक्ष के सदन के बाहर प्रदर्शन करने की संभावना है। वहीं शुक्रवार से इस मुद्दे को विधानसभा के भीतर भी प्रमुखता से उठाए जाने के संकेत हैं। JPSC-JSSC और कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरेगा विपक्ष भाजपा और अन्य विपक्षी दल JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, राज्य की कानून-व्यवस्था और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेंगे। दूसरी ओर, सत्तापक्ष NEET पेपर लीक, छात्रवृत्ति और जल जीवन मिशन की राशि जैसे मुद्दों को उठाकर केंद्र सरकार पर सवाल खड़े करने की तैयारी में है। दोनों पक्षों ने बनाई रणनीति मानसून सत्र से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष ने अलग-अलग विधायक दल की बैठक कर अपनी रणनीति तय की। विधायकों को सदन में तथ्यों के साथ मुद्दे उठाने और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सत्र के दौरान प्रश्नकाल के अलावा चालू वित्तीय वर्ष के पहले अनुपूरक बजट पर चर्चा होगी। साथ ही विधानसभा समितियों की रिपोर्ट और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की दो महत्वपूर्ण रिपोर्ट भी सदन में पेश की जाएंगी। इनमें मनरेगा और जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन से जुड़ी रिपोर्ट शामिल हैं। आधा दर्जन विधेयक होंगे पेश सरकार मानसून सत्र के दौरान करीब छह विधेयक पेश कर सकती है। इनमें झारखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 समेत अन्य महत्वपूर्ण विधेयक शामिल हैं। जानिए सत्र का संभावित कार्यक्रम 6 अगस्त: शोक प्रस्ताव, राज्यपाल से स्वीकृत विधेयकों की जानकारी और सामान्य कार्यवाही। 7 अगस्त: प्रश्नकाल के बाद चालू वित्तीय वर्ष का पहला अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। 10 अगस्त: अनुपूरक बजट पर चर्चा और विनियोग विधेयक पारित कराया जाएगा। 11 अगस्त: प्रश्नकाल के बाद विभिन्न राजकीय विधेयक पेश होंगे। 12 अगस्त: राजकीय विधेयकों के साथ गैर-सरकारी संकल्प सदन में प्रस्तुत किए जाएंगे। हंगामेदार रहने के आसार JPSC-JSSC भर्ती विवाद, कानून-व्यवस्था, CAG रिपोर्ट और अनुपूरक बजट जैसे अहम मुद्दों के कारण इस बार झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर ली है, जिससे सदन में तीखी बहस और हंगामे के आसार हैं।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले में अंधविश्वास ने एक परिवार को उजाड़ दिया। उंटारी रोड थाना क्षेत्र के लकड़ही टोला में एक व्यक्ति ने अंधविश्वास के चलते अपने ही भतीजे की टांगी से हमला कर हत्या कर दी। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी चाचा को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। बेटी की मौत के बाद अंधविश्वास में घिरा था आरोपी पुलिस के अनुसार, लकड़ही टोला निवासी प्रभु रजवार की बेटी लंबे समय से बीमार थी और कुछ दिन पहले उसकी मौत हो गई थी। प्रभु रजवार को शक था कि उसके छोटे भाई की पत्नी और भतीजे की पत्नी ने किसी तरह की तंत्र-मंत्र या जादू-टोना किया है, जिसकी वजह से उसकी बेटी की जान गई। इसी अंधविश्वास के कारण वह लगातार झाड़-फूंक का सहारा ले रहा था। बहस के बाद टांगी से किया हमला बताया जा रहा है कि बुधवार देर रात किसी बात को लेकर प्रभु रजवार और उसके भतीजे चनका रजवार के बीच विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि प्रभु रजवार ने घर में रखी टांगी उठाकर भतीजे पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। गंभीर चोट लगने से चनका रजवार की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही पहुंची पुलिस घटना की जानकारी मिलते ही उंटारी रोड थाना प्रभारी संतोष कुमार गिरि के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने आरोपी प्रभु रजवार को गिरफ्तार कर लिया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अंधविश्वास बना हत्या की वजह थाना प्रभारी संतोष कुमार गिरि ने बताया कि शुरुआती जांच में मामला अंधविश्वास से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आरोपी से पूछताछ के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।