झारखंड

JSSC CGL के चयनित अभ्यर्थियों में आक्रोश, परीक्षा रद्द होने के खिलाफ प्रदर्शन तेज

abhishek singh अगस्त 19, 2026 0
JSSC CGL Protest
Outrage among selected JSSC CGL candidates

रांची। झारखंड सरकार द्वारा JSSC CGL परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द किए जाने के फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों का आक्रोश बढ़ गया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में चयनित और नवनियुक्त अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन किया और सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। 

 

नौकरी बचाने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे अभ्यर्थी

 

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत के बाद JSSC CGL परीक्षा पास की और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई लोगों को सरकारी नौकरी भी मिल चुकी है। अब परीक्षा रद्द होने से उनकी नियुक्तियों पर संकट खड़ा हो गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 2,000 चयनित अभ्यर्थियों के सामने नौकरी जाने का डर है।

 

अभ्यर्थियों ने सरकार से सवाल किया कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, लेकिन मेहनत से परीक्षा पास करने वाले सभी अभ्यर्थियों को इसका खामियाजा क्यों भुगतना पड़े।

 

प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक विरोध मार्च

 

चयनित अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन से बिरसा चौक तक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर भी विरोध दर्ज कराया। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी नियुक्तियां बहाल करने की मांग उठाई।

 

कई अभ्यर्थियों ने अपनी व्यक्तिगत परेशानियों का भी जिक्र किया। कुछ ने बताया कि नौकरी मिलने के भरोसे उन्होंने दूसरे रोजगार छोड़े, जबकि कुछ अभ्यर्थी शादी, परिवार और आर्थिक जिम्मेदारियों के बीच अब भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

 

सरकार के फैसले के बाद दोहरा आंदोलन

 

JSSC CGL को लेकर झारखंड में अब स्थिति जटिल हो गई है। एक तरफ परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्र निष्पक्ष जांच और CBI जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ परीक्षा पास कर नौकरी हासिल करने वाले अभ्यर्थी परीक्षा और नियुक्तियां रद्द किए जाने का विरोध कर रहे हैं।

 

राज्य सरकार ने JSSC CGL समेत कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के साथ पुरानी भर्ती परीक्षाओं की जांच का फैसला लिया है। ऐसे में अब चयनित अभ्यर्थियों की नजर सरकार के अगले कदम और संभावित कानूनी कार्रवाई पर है।

 

अभ्यर्थियों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

 

प्रदर्शन कर रहे चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि वे अपनी नौकरी बचाने के लिए आंदोलन जारी रखेंगे। कुछ अभ्यर्थियों ने भूख हड़ताल और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। वहीं सरकार की ओर से सफल अभ्यर्थियों को न्यायिक रास्ता अपनाने की बात कही गई है।

 

फिलहाल JSSC CGL चयनित अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग यही है कि नियुक्त अभ्यर्थियों की नौकरी सुरक्षित रखी जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

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Old Boundary Wall Collapses
धनबाद में भारी बारिश के बीच पुरानी चारदीवारी गिरी, चार दोपहिया वाहन मलबे में दबे

धनबाद। लगातार हो रही बारिश के बीच धनबाद में दीनबंधु स्कूल के पास एक जर्जर पुरानी चारदीवारी अचानक भरभराकर गिर गई। दीवार के मलबे की चपेट में वहां खड़े कई दोपहिया वाहन आ गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों में चार बाइक के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है।    बारिश के बीच अचानक गिरी दीवार   घटना दीनबंधु स्कूल के आसपास की बताई जा रही है। लगातार बारिश के कारण पहले से जर्जर चारदीवारी कमजोर हो गई थी। अचानक दीवार का बड़ा हिस्सा गिरने से आसपास मौजूद लोगों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।   मलबे में दबे दोपहिया वाहन   दीवार के पास खड़े दोपहिया वाहन मलबे की चपेट में आ गए। घटनास्थल की तस्वीरों और स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक कई बाइक क्षतिग्रस्त हुई हैं। एक रिपोर्ट में चार बाइक के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी दी गई है।   बड़ा हादसा टला   दीवार गिरने के समय आसपास लोगों की आवाजाही रहती है, लेकिन घटना में किसी व्यक्ति के दबने या गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है। इससे एक बड़ा हादसा टल गया। बारिश के कारण शहर में पहले से ही कई जगह जलजमाव और जर्जर निर्माण को लेकर खतरा बना हुआ है।   जर्जर दीवारों को लेकर उठे सवाल   घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जर्जर और कमजोर दीवारों की स्थिति की जांच कराने की मांग की है। लगातार बारिश के दौरान ऐसी पुरानी संरचनाओं के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन से संवेदनशील स्थानों की पहचान कर आवश्यक सुरक्षा कदम उठाने की मांग की जा रही है।

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गुमला में 12 दिनों से लापता छात्र अर्पित सुरीन की तलाश
स्कूल से छुट्टी लेकर घर के लिए निकला छात्र 12 दिनों से लापता, परिजनों ने पुलिस से लगाई मदद की गुहार

गुमला। जिले के बसिया क्षेत्र से एक 18 वर्षीय छात्र के लापता होने का मामला सामने आया है। संत पात्रिक स्कूल में पढ़ने वाला अर्पित सुरीन पिछले 12 दिनों से लापता है। परिजनों के मुताबिक, वह स्कूल से छुट्टी लेकर घर के लिए निकला था, लेकिन अब तक न तो घर पहुंचा और न ही स्कूल वापस लौटा। काफी तलाश के बाद परिजनों ने पुलिस से छात्र को खोजने की गुहार लगाई है।   7 अगस्त को स्कूल से निकला था छात्र     जानकारी के अनुसार, तुरबुंगा पंचायत के किनिरकेला निवासी अलेक्सियुस सुरीन का बेटा अर्पित सुरीन गुमला के संत पात्रिक स्कूल के छात्रावास में रहकर पढ़ाई करता है। 7 अगस्त को उसने चेचक होने की बात बताते हुए स्कूल में छुट्टी का आवेदन दिया था। इसके बाद वह घर जाने के लिए स्कूल से निकल गया।   हालांकि, इसके बाद अर्पित अपने घर नहीं पहुंचा। स्कूल में भी उसके वापस आने की जानकारी नहीं मिली।   दोस्तों से मिली छुट्टी की जानकारी     परिजनों को अर्पित के स्कूल से छुट्टी लेने की जानकारी उसके दोस्तों के माध्यम से मिली। जब काफी समय बीतने के बाद भी अर्पित घर नहीं पहुंचा, तो परिवार के लोगों ने अपने स्तर पर उसकी तलाश शुरू की।   रिश्तेदारों और संभावित स्थानों पर तलाश के बावजूद छात्र का कोई सुराग नहीं मिला।   12 दिन बाद थाने में दी सूचना     लगातार तलाश के बाद परेशान परिजनों ने गुमला सदर थाना में आवेदन देकर अर्पित के लापता होने की सूचना दी। उन्होंने पुलिस से छात्र की जल्द तलाश करने की गुहार लगाई है।   फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और छात्र की तलाश के लिए संभावित स्थानों पर जानकारी जुटाई जा रही है। परिवार अर्पित के सुरक्षित वापस लौटने का इंतजार कर रहा है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
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बाबाधाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, ‘बोल बम’ के जयघोष से गूंजा कांवरिया पथ

देवघर: राजकीय श्रावणी मेले के 21वें दिन बुधवार को बाबा बैद्यनाथ धाम में आस्था का सैलाब देखने को मिला. कांवरियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से पूरा कांवरिया पथ ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंजता रहा. सुबह से ही कांवरियों का जत्था लगातार बाबा बैद्यनाथ के दरबार की ओर बढ़ता रहा. मंदिर में सुबह 5 बजे से जलार्पण शुरू हुआ, जिसके बाद श्रद्धालु कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आये. कांवरियों के उत्साह से भक्तिमय हुआ बाबाधाम श्रावणी मेले के दौरान दूर-दराज से पहुंचे कांवरियों में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलार्पण को लेकर खासा उत्साह दिखा. कांवरिया पथ पर श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही बनी रही. कोई पैदल कांवर लेकर बाबा धाम की ओर बढ़ रहा था, तो कोई भक्ति गीतों और जयघोष के साथ अपनी यात्रा पूरी कर रहा था. बाबाधाम पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित कर पूजा-अर्चना की. मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भी पूरे दिन भक्तिमय माहौल बना रहा. डीसी-एसपी ने संभाली व्यवस्था की कमान श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा. डीसी सौरभ कुमार भुवानियां और एसपी प्रवीण पुष्कर ने पूरे मेला क्षेत्र की व्यवस्थाओं की लगातार मॉनिटरिंग की. अधिकारियों ने रूटलाइन, बाबा मंदिर परिसर और भीड़ वाले प्रमुख स्थानों का जायजा लिया. उन्होंने मौके पर तैनात अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों से श्रद्धालुओं की भीड़ और व्यवस्था से जुड़ी जानकारी ली. प्रशासन की प्राथमिकता श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम तरीके से बाबा बैद्यनाथ पर जलार्पण कराना रही. कतार प्रबंधन पर विशेष नजर कांवरिया पथ और मंदिर परिसर में बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कतार प्रबंधन पर विशेष जोर दिया. रूटलाइन पर त्वरित प्रतिक्रिया टीम यानी QRT, पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की गयी है. भीड़ को नियंत्रित करने के साथ श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है. प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं से भी व्यवस्था में सहयोग करने और निर्धारित मार्ग से ही आगे बढ़ने की अपील की गयी. 20वें दिन 2.39 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किया जलार्पण श्रावणी मेले के 20वें दिन बाबा बैद्यनाथ पर 2,39,407 श्रद्धालुओं ने जलार्पण किया था. इनमें 13,029 श्रद्धालुओं ने शीघ्र दर्शनम कूपन के माध्यम से बाबा का दर्शन किया. वहीं, 1,09,789 श्रद्धालुओं ने बाह्य अर्घा और 1,16,589 श्रद्धालुओं ने आंतरिक अर्घा के माध्यम से बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित किया. भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क श्रावणी मेले के 21वें दिन भी कांवरियों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष सतर्कता बरती. कांवरिया पथ से लेकर बाबा मंदिर परिसर तक अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती रही. श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के बीच प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी श्रद्धालु को परेशानी न हो और सभी सुरक्षित एवं व्यवस्थित तरीके से बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक कर सकें.  

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Investigation into an alleged examination scam network linked to JPSC and JSSC exams in Jharkhand
झारखंड

JPSC नियुक्ति घोटाला: अभय तिवारी से जुड़े सिंडिकेट का नेटवर्क कई राज्यों तक, दर्जनों परीक्षाएं जांच के घेरे में

kalpana अगस्त 13, 2026 0

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