पटना, एजेंसियां। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने स्कूल शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4.0 के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत बिहार के सरकारी स्कूलों में कुल 32,388 शिक्षक पदों को भरा जाएगा। इच्छुक और पात्र अभ्यर्थी 1 सितंबर 2026 से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।
TRE-4.0 के तहत प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। उपलब्ध विवरण के अनुसार कुल रिक्तियों में कक्षा 1 से 5 के लिए 3,847, कक्षा 6 से 8 के लिए 8,563, कक्षा 9 से 10 के लिए 3,877 और कक्षा 11 से 12 के लिए 16,101 पद शामिल हैं।
इस तरह सबसे अधिक 16,101 पद उच्च माध्यमिक शिक्षकों के लिए हैं। अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता संबंधित पद और विषय के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है।
BPSC के अनुसार TRE-4.0 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 सितंबर 2026 से शुरू होगी। अभ्यर्थियों को निर्धारित शुल्क का भुगतान 29 सितंबर तक करना होगा, जबकि ऑनलाइन आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 है।
आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों को One Time Registration (OTR) पूरा करना होगा। आवेदन प्रक्रिया आयोग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाएगी।
BPSC TRE-4.0 में 32,388 पदों की घोषणा बिहार में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है। भर्ती में प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक के पद शामिल होने के कारण बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को अवसर मिलने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने शिप ड्राफ्ट्समैन ट्रेनी भर्ती 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती के जरिए मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल विभाग में कुल 60 पद भरे जाएंगे। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 19 अगस्त से 4 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल में इतनी वैकेंसी CSL भर्ती के तहत शिप ड्राफ्ट्समैन ट्रेनी के मैकेनिकल विभाग में 47 पद और इलेक्ट्रिकल विभाग में 13 पद हैं। कुल 60 रिक्तियों में 36 पद अनारक्षित, 13 ओबीसी, 5 एससी, 1 एसटी और 5 ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए निर्धारित हैं। शैक्षणिक योग्यता क्या है? मैकेनिकल पद: उम्मीदवार का एसएसएलसी यानी 10वीं पास होना जरूरी है। इसके साथ राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में तीन वर्षीय डिप्लोमा कम से कम 60 प्रतिशत अंकों के साथ होना चाहिए। CAD सॉफ्टवेयर का ज्ञान और ड्राफ्टिंग में रुचि भी आवश्यक है। इलेक्ट्रिकल पद: 10वीं पास होने के साथ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में तीन वर्षीय डिप्लोमा न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों के साथ होना चाहिए। उम्मीदवार को ड्राफ्टिंग और CAD सॉफ्टवेयर की जानकारी होनी चाहिए। 25 साल है अधिकतम आयु सीमा उम्मीदवार की अधिकतम आयु 4 सितंबर 2026 को 25 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। यानी अभ्यर्थी का जन्म 5 सितंबर 2001 या उसके बाद हुआ होना चाहिए। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी। ओबीसी (नॉन-क्रीमी लेयर) उम्मीदवारों को 3 वर्ष और एससी/एसटी उम्मीदवारों को 5 वर्ष की छूट दी जाएगी। कितना देना होगा आवेदन शुल्क? आवेदन के दौरान सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को 300 रुपये प्लस बैंक शुल्क देना होगा। वहीं एससी और एसटी वर्ग के उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क से पूरी छूट दी गई है। लिखित परीक्षा नहीं, प्रैक्टिकल टेस्ट से होगा चयन इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन 100 अंकों के प्रैक्टिकल टेस्ट के आधार पर किया जाएगा। कोई लिखित परीक्षा नहीं होगी। प्रैक्टिकल टेस्ट कोच्चि स्थित CSL में आयोजित किया जाएगा, जिसमें उम्मीदवारों को CAD सॉफ्टवेयर की मदद से ड्राइंग तैयार करनी होगी। यूआर वर्ग के उम्मीदवारों को न्यूनतम 50 प्रतिशत, ओबीसी को 45 प्रतिशत और एससी/एसटी वर्ग को 40 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे। आवेदनों की संख्या ज्यादा होने पर CSL प्रमाणपत्रों के आधार पर उम्मीदवारों को प्रैक्टिकल टेस्ट के लिए शॉर्टलिस्ट कर सकता है। इस तारीख तक करें आवेदन योग्य उम्मीदवार 19 अगस्त 2026 से 4 सितंबर 2026 तक CSL की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को आधिकारिक भर्ती अधिसूचना में अपनी शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और अन्य पात्रता शर्तों को ध्यान से जांच लेना चाहिए।
पटना, एजेंसियां। BPSC TRE-4 शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जारी करने की मांग को लेकर शिक्षक अभ्यर्थी मंगलवार, 18 अगस्त से पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन में अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में देरी पर नाराजगी जताई है। उनकी प्रमुख मांग TRE-4 का विज्ञापन तत्काल जारी करना है। विज्ञापन जारी करने की मांग पर अड़े अभ्यर्थी अभ्यर्थियों का कहना है कि TRE-4 भर्ती को लेकर लंबे समय से इंतजार किया जा रहा है, लेकिन अब तक आधिकारिक विज्ञापन जारी नहीं हुआ है। इससे अभ्यर्थियों की तैयारी और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आंदोलनकारियों ने सरकार और BPSC से भर्ती प्रक्रिया का स्पष्ट कार्यक्रम जारी करने की मांग की है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। उनका आरोप है कि TRE-4 की प्रक्रिया में लगातार देरी के बावजूद सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाया गया। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। पांच दिन का अल्टीमेटम, विधानसभा घेराव की चेतावनी अभ्यर्थियों ने सरकार को पांच दिन का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि इस अवधि में TRE-4 का विज्ञापन जारी नहीं हुआ तो बिहार विधानसभा के घेराव की तैयारी की जाएगी। गर्दनीबाग में अनशन शुरू होने के साथ ही प्रशासन की नजर भी आंदोलन पर बनी हुई है। 32,388 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव TRE-4 के तहत बिहार में 32,388 शिक्षकों की नियुक्ति का प्रस्ताव है। इनमें कक्षा 11वीं-12वीं के लिए सबसे अधिक पद शामिल हैं। BPSC को भर्ती प्रक्रिया के लिए अधियाचना भेजे जाने की जानकारी पहले ही सामने आ चुकी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए जरूरी खबर है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाली CERT-In ने Scientist B के 133 पदों पर भर्ती निकाली है। इस भर्ती के लिए आवेदन की आज यानी 17 अगस्त 2026 आखिरी तारीख है। खास बात यह है कि उम्मीदवारों के लिए कार्य अनुभव अनिवार्य नहीं है। 133 Scientist B पदों पर होगी भर्ती CERT-In की इस भर्ती के तहत कुल 133 पद भरे जाएंगे। इनमें कंप्यूटर साइंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी के 83, डेटा साइंस एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के 25 और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के 25 पद शामिल हैं। विषय पद कंप्यूटर साइंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी 83 डेटा साइंस एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस 25 इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग 25 कुल 133 GATE स्कोर जरूरी, अनुभव की बाध्यता नहीं Scientist B पदों के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय का वैध GATE स्कोर होना जरूरी है। भर्ती में GATE 2024, 2025 और 2026 के स्कोर स्वीकार किए जाएंगे। नए स्नातकों के लिए यह खास मौका है, क्योंकि आवेदन के लिए कार्य अनुभव अनिवार्य नहीं रखा गया है। कंप्यूटर साइंस एवं आईटी के लिए GATE पेपर CS डेटा साइंस एवं एआई के लिए GATE पेपर DA इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन के लिए GATE पेपर EC शैक्षणिक योग्यता कंप्यूटर साइंस एवं आईटी पदों के लिए संबंधित क्षेत्र में स्नातक या विज्ञान में परास्नातक डिग्री वाले उम्मीदवार पात्र हैं। MCA उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं। डेटा साइंस एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पद के लिए संबंधित विषय में BTech डिग्री जरूरी है। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग पद के लिए संबंधित शाखा में स्नातक डिग्री मांगी गई है। उम्र सीमा आवेदन की अंतिम तारीख के आधार पर अधिकतम आयु सीमा इस प्रकार है: सामान्य/EWS: 30 वर्ष OBC-NCL: 33 वर्ष SC/ST: 35 वर्ष दिव्यांग उम्मीदवार: 40 वर्ष आरक्षित वर्गों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी। GATE और इंटरव्यू से होगा चयन उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग GATE स्कोर के आधार पर होगी। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। अंतिम चयन में GATE स्कोर का 60 प्रतिशत और इंटरव्यू का 40 प्रतिशत वेटेज रहेगा। Level-10 के तहत मिलेगी सैलरी चयनित उम्मीदवारों को लेवल-10 के तहत वेतन दिया जाएगा। वेतनमान ₹56,100 से ₹1,77,500 तक है। इसके अलावा नियमानुसार विभिन्न भत्ते भी मिलेंगे। आवेदन शुल्क नहीं इस भर्ती की एक खास बात यह है कि उम्मीदवारों को कोई आवेदन शुल्क नहीं देना होगा। जिन योग्य अभ्यर्थियों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है, उन्हें 17 अगस्त 2026 की निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना आवेदन पूरा करना होगा।