रांची। आखिरकार पांच साल के लंबे इंतजार के बाद झारखंड को लोकाउक्त मिल ही गया। झारखंड हाईकोर्ट के रिटायर जज जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने मंगलवार को लोकभवन में पद और गोपनीयता की शपथ ली। उन्हें संतोष कुमार गंगवार ने शपथ दिलाई। इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मौजूद रहे।
जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता 1997 से न्यायिक सेवा में रहे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे बहुचर्चित चारा घोटाला मामले की सुनवाई से भी जुड़े रहे हैं। इसके अलावा वे झारखंड विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष जैसे अहम पद पर भी कार्य कर चुके हैं।
पदभारः
शपथ ग्रहण के तुरंत बाद जस्टिस गुप्ता ने लोकायुक्त के का पदभार संभाले लिया। उनके कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही लोकायुक्त कार्यालय में लंबे समय से पसरा सन्नाटा भी खत्म हो गया है।
माना जा रहा है कि नए लोकायुक्त के आने से भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच में तेजी आएगी और कार्यालय में फिर से न्यायिक सक्रियता देखने को मिलेगी। पांच साल बाद इस नियुक्ति को प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Main 2026 का परिणाम NTA ने जारी कर दिया है। इस बार सेशन-1 और सेशन-2 को मिलाकर कुल 16,04,854 छात्रों ने परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच 26 छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल हासिल कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया। दक्षिण भारत का दबदबा बरकरार टॉप परफॉर्मर्स में दक्षिण भारत का दबदबा एक बार फिर देखने को मिला। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से 5-5 छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल हासिल किया। वहीं राजस्थान के 4 छात्रों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। इससे साफ है कि इस बार भी दक्षिणी राज्यों के छात्रों ने बेहतरीन तैयारी का प्रदर्शन किया है। रांची की वैष्णवी बनीं झारखंड टॉपर रांची की वैष्णवी कुमारी ने 99.977 पर्सेंटाइल के साथ झारखंड में टॉप किया है। उनकी ऑल इंडिया रैंक 426 रही। खास बात यह है कि उन्होंने केवल पहले सेशन के आधार पर यह सफलता हासिल की और दूसरे सेशन में शामिल नहीं हुईं। झारखंड के छात्रों का शानदार प्रदर्शन राज्य के अन्य छात्रों ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। जमशेदपुर और धनबाद के कई छात्रों ने टॉप 10 में जगह बनाई, जिससे झारखंड की मजबूत उपस्थिति दर्ज हुई। यह परिणाम राज्य में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और तैयारी के स्तर को दर्शाता है। कटऑफ और चयनित छात्रों का आंकड़ा इस वर्ष कुल 2,50,182 छात्रों को योग्य घोषित किया गया। सामान्य वर्ग की कटऑफ 93.41 पर्सेंटाइल रही, जबकि ईडब्ल्यूएस के लिए 82.41, ओबीसी के लिए 80.92, एससी के लिए 63.91 और एसटी के लिए 52.01 पर्सेंटाइल तय की गई। कड़ी प्रतिस्पर्धा का संकेत 16 लाख से अधिक छात्रों में केवल 26 का 100 पर्सेंटाइल हासिल करना इस परीक्षा की कठिनाई और उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। वहीं, झारखंड के छात्रों के प्रदर्शन ने राज्य का गौरव बढ़ाया है।
धनबाद। झारखंड के आतंक का पर्याय बन चुके गैंगस्टर प्रिंस खान के सबसे करीबी गुर्गे शैफी उर्फ मेजर को इंटरपोल की मदद से गिरफ्तार किया गया है। उसकी गिरफ्तारी कोलकाता नहीं बल्कि दुबई में हुई है। दुबई में उसे गिरफ्तार कर कोलकाता लाया गया। मेजर की गिरफ्तारी झारखंड पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। उसे विदेश से भारत लाने के बाद कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचाया गया, जहां से झारखंड पुलिस की एक विशेष टीम उसे कड़ी सुरक्षा के बीच धनबाद लेकर आई। प्रिंस खान को लेकर बड़े खुलासों की उम्मीद पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड पर पूछताछ के दौरान गिरोह के नेटवर्क, फंडिंग और प्रिंस खान के ठिकानों के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। झारखंड के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर प्रिंस खान को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सूचना मिली है। करीब चार साल पहले दुबई भागने और इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बावजूद वह अब तक पुलिस की पहुंच से बाहर है। प्रिंस खान से जुड़ी कुछ अहम जानकारिया धनबाद में कई सालों से प्रिंस खान ने दहशत फैला रखी है अर्से से झारखंड पुलिस को प्रिंस खान की तलाश है 2021 में प्रिंस खान पुलिस से बचने के लिए दुबई भाग गया अब वह दुबई से पाकिस्तान भाग गया है प्रिंस खान, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में छिपा है पुलिस प्रिंस खान को आतंकवादी घोषित कराने की कोशिश में है राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा ताजा खुफिया इनपुट के अनुसार, प्रिंस खान ने अपना ठिकाना दुबई से बदलकर अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बना लिया है। वह वहीं से रांची, धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर के बड़े कारोबारियों को वर्चुअल नंबरों के जरिए रंगदारी के लिए धमकाता है। कभी वासेपुर की गलियों से अपराध शुरू करने वाला प्रिंस खान अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है। प्रिंस खान को घोषित किया जाएगा आतंकवादी पाकिस्तान से गतिविधियों को अंजाम देने की सूचना के बाद झारखंड पुलिस अब उसे 'आतंकवादी' घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि प्रिंस खान के सिंडिकेट को न केवल अपराधी, बल्कि कई 'व्हाइट कॉलर' लोग और जमीन कारोबारी भी हथियार और धन की आपूर्ति कर समर्थन दे रहे हैं। इतना ही नहीं, प्रिंस ने दुबई में एक आंतकी संगठन की मदद से पनाह ली है। और वह झारखंड से वसूले गये रंगदारी के पैसे में उस आतंकी संगठन को कमीशन भी दे रहा है। मेजर की गिरफ्तारी प्रिंस खान के अंत की शुरुआत मेजर की गिरफ्तारी को प्रिंस खान के साम्राज्य के अंत की शुरुआत माना जा रहा है। धनबाद पुलिस के साथ-साथ राज्य के अन्य जिलों की पुलिस भी मेजर को रिमांड पर लेने की तैयारी में है, जहां-जहां उसके खिलाफ मामले दर्ज हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि प्रिंस खान के नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में यह सबसे बड़ी कार्रवाई है।
रांची। अगर आप JPSC JET 2026 की तैयारी कर रहे हैं, तो एडमिट कार्ड डाउनलोड करना अभी आपकी सबसे पहली ज़िम्मेदारी है। यहां जानिए - कहाँ से, कैसे और किन दस्तावेज़ों के साथ परीक्षा केंद्र जाएं। JPSC JET 2026 का एडमिट कार्ड का आधिकारिक वेबसाइटः jpsc.gov.in पर परीक्षा से 7 से 10 दिन पहले जारी होगा। परीक्षा तारीख: 26 अप्रैल 2026 (रविवार)। वेबसाइट पर नियमित नज़र रखें। यह परीक्षा क्या है और आपके लिए क्यों ज़रूरी है? झारखंड में अगर आप किसी सरकारी कॉलेज या विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर बनना चाहते हैं, तो आपके लिए एक अनिवार्य परीक्षा है – JET यानी Jharkhand Eligibility Test। इसे Jharkhand Public Service Commission (JPSC) आयोजित करता है। यह परीक्षा राष्ट्रीय स्तर की NET परीक्षा की तरह ही होती है, लेकिन यह झारखंड राज्य के सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए विशेष रूप से होती है। जो अभ्यर्थी पोस्टग्रेजुएशन कर चुके हैं और झारखंड में पढ़ाना चाहते हैं – उनके लिए JET क्वालीफाई करना पहली शर्त है। यह परीक्षा Advertisement No. 08/2025 के तहत आयोजित हो रही है। आवेदन 16 सितंबर 2025 से शुरू हुए थे और 30 अक्टूबर 2025 तक चले। अब परीक्षा 26 अप्रैल 2026 को होनी है – और इसके लिए सबसे पहला काम है अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड करना। महत्वपूर्ण तारीखेः JET 2026 — सभी ज़रूरी तारीखें एक नज़र मेः आवेदन शुरू-16 सितंबर 2025 आवेदन की अंतिम तिथि-30 अक्टूबर 2025 शुल्क जमा अंतिम तिथि-31 अक्टूबर 2025 करेक्शन विंडो- 11–17 दिसंबर 2025 एडमिट कार्ड जारी- परीक्षा से 7–10 दिन पहले परीक्षा तिथि- 26 अप्रैल 2026 (रविवार) पहले निर्धारित तिथि- 29 मार्च 2026 (स्थगित) आधिकारिक वेबसाइट -jpsc.gov.in महत्वपूर्ण: परीक्षा पहले 29 मार्च 2026 को निर्धारित थी, लेकिन JPSC ने 21 मार्च 2026 को आधिकारिक नोटिस जारी करके प्रशासनिक कारणों से इसे 26 अप्रैल 2026 कर दिया है। हमेशा jpsc.gov.in से ही जानकारी लें। कौन दे सकता है JET परीक्षा? परीक्षा देने से पहले यह जांचना ज़रूरी है कि आप पात्र हैं या नहीं। नीचे दी गई शर्तें पूरी होनी चाहिए: अभ्यर्थी ने किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में पोस्टग्रेजुएशन (MA / M.Sc / M.Com आदि) पूरी की हो। पोस्टग्रेजुएशन में न्यूनतम 55% अंक होने चाहिए (SC/ST/PH अभ्यर्थियों के लिए 50%)। JPSC द्वारा जारी 43 विषयों की सूची में से किसी एक विषय में आवेदन किया हो। झारखंड राज्य के उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ाने की इच्छुक हों। PhD करने के इच्छुक अभ्यर्थी भी इस परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन शुल्कः परीक्षा शुल्क – किस श्रेणी को कितना देना था श्रेणी आवेदन शुल्क भुगतान माध्यम सामान्य (General) ₹575 ऑनलाइन (Debit/Credit Card, Net Banking) BC / EWS ₹300 ऑनलाइन SC / ST / PH / तृतीय लिंग ₹150 ऑनलाइन एडमिट कार्ड डाउनलोड JET Jharkhand Admit Card 2026 – स्टेप बाय स्टेप डाउनलोड करें....... एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की प्रक्रिया बिल्कुल आसान है। नीचे दिए गए चरण ध्यान से फॉलो करें आधिकारिक वेबसाइट खोलें — अपने मोबाइल या कंप्यूटर में ब्राउज़र खोलकर jpsc.gov.in टाइप करें। किसी और वेबसाइट से डाउनलोड करने की कोशिश न करें — फर्जी वेबसाइटें आपकी जानकारी चुरा सकती हैं। लिंक खोजें — होमपेज पर “Latest Updates” या “Flash News” सेक्शन में जाएं। “Download Admit Card for Jharkhand Eligibility Test (JET)-2024, Advt. No. 08/2025” लिंक पर क्लिक करें। लॉगिन करें — लॉगिन पेज पर अपना Registration Number / Application Number और जन्मतिथि (Date of Birth) दर्ज करें। अगर आपने OTR (One Time Registration) के ज़रिए आवेदन किया है, तो OTR पासवर्ड से लॉगिन करें। Submit बटन दबाएं — सभी जानकारी भरने के बाद Submit या Login बटन पर क्लिक करें। आपका एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखने लगेगा। जानकारी जाँचें — एडमिट कार्ड खुलने पर सबसे पहले यह जांचें: आपका नाम, फोटो, परीक्षा केंद्र का पता, परीक्षा तिथि, और रिपोर्टिंग समय सही हैं या नहीं। PDF डाउनलोड करें और प्रिंट निकालें – एडमिट कार्ड को PDF में सेव करें और कम से कम 2 प्रिंटआउट निकालें। एक परीक्षा के दिन साथ ले जाएं, एक बैकअप के लिए रखें। मोबाइल पर स्क्रीनशॉट स्वीकार नहीं किया जाएगा। एडमिट कार्ड डाउनलोड के लिए क्या-क्या चाहिए? रजिस्ट्रेशन नंबर आवेदन करते समय मिला Application / Registration Number जन्मतिथि DD/MM/YYYY फॉर्मेट में अपनी जन्मतिथि दर्ज करें OTR पासवर्ड अगर OTR के ज़रिए आवेदन किया था, तो वही पासवर्ड काम करेगा रजिस्ट्रेशन भूल गए? JPSC वेबसाइट पर “Forgot Registration Number” विकल्प उपयोग करें या हेल्पडेस्क से संपर्क करें परीक्षा केंद्र पर ले जाने वाले दस्तावेज़ यह दस्तावेज़ भूले तो परीक्षा नहीं दे पाएंगे सिर्फ एडमिट कार्ड लेकर जाना काफी नहीं है। परीक्षा केंद्र पर गेट पर ही आपके दस्तावेज़ों की जाँच होगी। नीचे दिए गए सभी दस्तावेज़ अनिवार्य रूप से साथ ले जाएं: प्रिंटेड एडमिट कार्डब्लैक एंड व्हाइट भी चलेगा, लेकिन साफ होना ज़रूरी है मूल फोटो आईडी आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट फोटो आईडी की फोटोकॉपीओरिजिनल के साथ एक फोटोकॉपी भी अनिवार्य पासपोर्ट साइज़ फोटोहाल की खींची गई फोटो – कम से कम 2 लेकर जाएं याद रखें: मोबाइल पर एडमिट कार्ड की फोटो या स्क्रीनशॉट दिखाने की अनुमति नहीं होगी। केवल प्रिंटेड हार्ड कॉपी मान्य होगी। एडमिट कार्ड डाउनलोड करते ही इन सभी विवरणों को ध्यान से देखें। अगर कोई गलती हो तो तुरंत JPSC हेल्पडेस्क से संपर्क करें: अभ्यर्थी का नाम आवेदन में दर्ज नाम से मिलान करें फोटोग्राफ आपकी पहचान के लिए स्पष्ट फोटो होना ज़रूरी रजिस्ट्रेशन नंबर आपका यूनीक Application ID परीक्षा केंद्रः केंद्र का पूरा नाम और पता परीक्षा तिथि और समय 26 अप्रैल 2026 — शिफ्ट और रिपोर्टिंग टाइम विषय और पेपर कोड आपने जो विषय चुना था उसका कोड परीक्षा पैटर्न JET परीक्षा का पैटर्न — क्या आता है पेपर में? JPSC JET परीक्षा UGC NET की तर्ज़ पर होती है। अभ्यर्थियों को दो पेपर देने होते हैं: पेपर विषय प्रश्नों की संख्या अंक पेपर, शिक्षण और अनुसंधान अभिरुचि (Teaching & Research Aptitude) 50 प्रश्न 100 अंक पेपर II चुने हुए विषय पर आधारित (Subject Specific) 100 प्रश्न 200 अंक।