रांची। रांची यूनिवर्सिटी (आरयू) प्रशासन ने अपने अंतर्गत आने वाले 24 अंगीभूत कॉलेजों की 43,530 सीटों पर स्नातक (UG) एडमिशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह प्रक्रिया शैक्षणिक सत्र 2026-30 (चार वर्षीय रेगुलर कोर्स) और वोकेशनल कोर्स सत्र 2026-29 के लिए शुरू की गई है। इच्छुक छात्र चांसलर पोर्टल के माध्यम से 12 जून से 29 जून तक ऑनलाइन आवेदन भर सकेंगे।
स्नातक स्तर पर इस सत्र से एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब बॉटनी और जूलॉजी को अलग-अलग विषय के रूप में हटाकर 'लाइफ साइंस' के तहत शामिल कर दिया गया है। ऐसे में इस वर्ष एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों को बॉटनी या जूलॉजी के बजाय 'लाइफ साइंस' विषय के लिए आवेदन करना होगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत लिए गए इस फैसले का असर सिर्फ अंगीभूत कॉलेजों तक ही सीमित नहीं रहेगा। आरयू से संबद्ध और अल्पसंख्यक कॉलेजों में नामांकन के लिए आवेदन प्रक्रिया पहले से चल रही है, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने पहले ही बॉटनी और जूलॉजी विषय चुनकर आवेदन कर दिया है। अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद, इन पहले से आए आवेदनों को भी नई प्रणाली के अनुरूप लाइफ साइंस में समायोजित किया जाएगा।
आवेदन की शुरुआत: 12 जून
आवेदन की अंतिम तिथि: 29 जून
फर्स्ट सेलेक्शन लिस्ट: 3 जुलाई
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: 4 से 14 जुलाई
1 मारवाड़ी कॉलेज 3700
2 केओ कॉलेज गुमला 3240
3 रांची वीमेंस कॉलेज 3210
4 एसएसएम कॉलेज 3100
5 बीएस कॉलेज लोहरदगा 2940
6 बिरसा कॉलेज खूंटी 2640
7 आरएलएसवाई कॉलेज 2640
8 पीपीके कॉलेज बुंडू 2580
9 डोरंडा कॉलेज 2440
10 मांडर कॉलेज 2100
11 सिमडेगा कॉलेज सिमडेगा 2040
12 जेएन कॉलेज 1740
13 केसीबी कॉलेज बेड़ो 1740
14 बीएन जलान कॉलेज सिसई 1320
15 डिग्री कॉलेज, खिजरी 900
16 डिग्री कॉलेज सिल्ली 900
17 डिग्री कॉलेज विष्णुपुर 900
18 डिग्री कॉलेज तोरपा 900
19 डिग्री कॉलेज कोलेबिरा 900
20 मॉडल कॉलेज गुमला 720
21 वीमेंस कॉलेज गुमला 720
22 वीमेंस कॉलेज खूंटी 720
23 वीमेंस कॉलेज लोहरदगा 720
24 वीमेंस कॉलेज सिमडेगा 720
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के होनहार और प्रतिभावान युवाओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और स्वर्णिम अवसर की घोषणा की है। राज्य सरकार ने झारखंड के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से एक विशेष स्कॉलरशिप योजना के तहत आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस योजना के तहत राज्य के 50 चुनिंदा प्रतिभावान छात्रों को यूनाइटेड किंगडम में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के लिए 100% स्कॉलरशिप दी जाएगी। युवा सपनो को नई उड़ानः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक्स और आधिकारिक माध्यमों से इसकी जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह कदम झारखंड के युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने और वैश्विक मंच पर उन्हें स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। योजना की मुख्य बातें और विशेषताएं.... चयनित 50 छात्रों की पढ़ाई, रहने-खाने और अन्य आवश्यक खर्चों का पूरा बोझ झारखंड सरकार उठाएगी। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए इस योजना में छात्राओं के लिए 30% सीटें आरक्षित की गई हैं। इस योजना का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की आखिरी तारीख 20 जून 2026 तय की गई है। स्कॉलरशिप का उद्देश्य और लाभ इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर, लेकिन प्रतिभावान छात्रों को विदेशों के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पढ़ने का मौका देना है। झारखंड के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, कमी थी तो सिर्फ सही अवसरों की। हमारी सरकार राज्य के होनहारों को दुनिया के सबसे बेहतरीन शिक्षण संस्थानों में भेजने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वे वहां से सीखकर आएं और झारखंड के नवनिर्माण में अपना योगदान दें। 20 जून तक करें आवेदन योग्य और इच्छुक छात्र झारखंड सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर योजना से जुड़ी गाइडलाइंस पढ़ सकते हैं और अपनी पात्रता की जांच कर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 20 जून है। समय बहुत सीमित है, इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे 20 जून 2026 से पहले अपने सभी जरूरी दस्तावेजों (जैसे आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, शैक्षणिक दस्तावेज आदि) के साथ आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।
धनबाद। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी शनिवार को धनबाद दौरे पर रहीं। इस दौरान उन्होंने हीरापुर हटिया स्थित महावीर मंदिर और काली मंदिर में पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। इसके बाद स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उसकी साफ-सफाई की और हाथ में झाड़ू लेकर स्वच्छता अभियान में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में धनबाद सांसद ढुल्लू महतो, विधायक राज सिन्हा सहित भाजपा के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं, राहुल गांधी पर साधा निशाना मीडिया से बातचीत में अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत ने विकास और वैश्विक प्रतिष्ठा के नए आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं तक पहुंचाना प्राथमिकता रही है। राहुल गांधी के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता विदेशों में भारत की छवि धूमिल करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार राजनीतिक नेतृत्व को देशहित को सर्वोपरि रखना चाहिए।
जमशेदपुर। जमशेदपुर में पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को ठगने वाले शातिर बदमाशों ने शुक्रवार को वरिष्ठ अधिवक्ता विद्या सिंह को अपना निशाना बनाने की कोशिश की। हालांकि अधिवक्ता की सतर्कता और कानूनी समझ के कारण ठग अपनी योजना में सफल नहीं हो सके और पकड़े जाने के डर से मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। कोर्ट से लौटते समय रोका रास्ता जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता विद्या सिंह कोर्ट से काम खत्म कर मोटरसाइकिल से मानगो स्थित अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान मानगो बस स्टैंड गोलचक्कर के पास बुलेट मोटरसाइकिल पर सवार दो युवकों ने उनका पीछा किया और कुछ दूर जाकर उन्हें रोक लिया। आरोपियों में से एक ने खुद को पुलिस इंस्पेक्टर बताते हुए कहा कि आगे हत्या की घटना हुई है और क्षेत्र का माहौल खराब है। इसके बाद उसने अधिवक्ता को डराते हुए सोने की चेन और अंगूठी उतारकर सुरक्षित रखने की सलाह दी, ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके। अधिवक्ता के जवाब से भाग निकले ठग बदमाशों की बात सुनते ही अधिवक्ता विद्या सिंह को उनके इरादों पर शक हो गया। उन्होंने बेखौफ अंदाज में कहा कि वह अधिवक्ता हैं और किसी से डरने वाले नहीं हैं। यह सुनते ही दोनों आरोपी तुरंत बुलेट पर सवार होकर वहां से फरार हो गए। अधिवक्ता ने बताया कि दोनों की वेशभूषा और कद-काठी ऐसी थी कि वे पहली नजर में असली पुलिसकर्मी प्रतीत हो रहे थे। सीसीटीवी के आधार पर जांच, सक्रिय गिरोह पर शक घटना की सूचना मिलते ही साकची और बिष्टुपुर थाना पुलिस जांच में जुट गई। पुलिस ने मानगो पुल, बस स्टैंड गोलचक्कर और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू कर दिए हैं। प्रारंभिक आशंका है कि वारदात के पीछे वही गिरोह सक्रिय है, जिसने हाल के दिनों में पुलिस अधिकारी बनकर शहर के कई बुजुर्गों से लाखों रुपये के गहने और नकदी ठगी थी। पुलिस आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।