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अनुच्छेद 370 के 7 साल, राज्य दर्जे की मांग

अनुच्छेद 370 हटने के सात साल पूरे, जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग फिर तेज

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के सात साल पूरे होने पर राजनीतिक चर्चा
अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर राज्य का दर्जा

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के सात साल पूरे, राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग फिर चर्चा में

श्रीनगर, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान हटाए जाने के आज सात साल पूरे हो गए हैं। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया था। इसके साथ ही तत्कालीन राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नाम के दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित किया गया था।

 

राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग तेज

 

 

सात साल पूरे होने के मौके पर जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। क्षेत्रीय राजनीतिक दल लंबे समय से केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने की मांग करते रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के बाद निर्वाचित सरकार बनने के बावजूद राज्य का दर्जा बहाल नहीं होने का मुद्दा राजनीतिक बहस में बना हुआ है।

 

 

5 अगस्त 2019 को हुआ था बड़ा संवैधानिक बदलाव

 

 

5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष संवैधानिक प्रावधानों को प्रभावी रूप से समाप्त करने का निर्णय लिया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटा गया। इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश बना, जहां विधानसभा का प्रावधान है, जबकि लद्दाख को बिना विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया।

 

 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य का दर्जा महत्वपूर्ण मुद्दा

 

 

अनुच्छेद 370 से जुड़े मामले में सुप्रीम Court ने दिसंबर 2023 में केंद्र के फैसले को बरकरार रखा था। अदालत ने जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने और 30 सितंबर 2024 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए और निर्वाचित सरकार का गठन हुआ। अब राजनीतिक दलों की प्रमुख मांगों में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना शामिल है।

 

 

केंद्र के फैसले पर राजनीतिक बहस जारी

 

 

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के सात साल बाद भी इस फैसले को लेकर राजनीतिक मतभेद कायम हैं। केंद्र सरकार इसे जम्मू-कश्मीर को देश की मुख्यधारा में और मजबूती से जोड़ने वाला कदम बताती रही है, जबकि कई क्षेत्रीय दल राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं।

 

ऐसे में 5 अगस्त की तारीख जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बनी हुई है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी
पश्चिम बंगाल सरकार ने DA में 20% बढ़ोतरी की, 1 अक्टूबर 2026 से कर्मचारियों को मिलेगा 38% महंगाई भत्ता

पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, DA में 20% बढ़ोतरी; 1 अक्टूबर से मिलेगा लाभ कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ते (DA) में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी का नोटिफिकेशन जारी किया है। नई दर 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। बढ़ोतरी के बाद कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलने वाला कुल DA 38 प्रतिशत हो जाएगा।   अक्टूबर से बढ़ेगा महंगाई भत्ता     राज्य सरकार के नए आदेश के मुताबिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अक्टूबर 2026 से संशोधित दर पर महंगाई भत्ते का भुगतान किया जाएगा। DA में इस बढ़ोतरी से बड़ी संख्या में राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को फायदा मिलेगा।   महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का उद्देश्य बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों की आय में राहत देना है। नई दर लागू होने के बाद कर्मचारियों की मासिक आय में भी बढ़ोतरी होगी।   कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगा लाभ     DA बढ़ोतरी का लाभ केवल सेवारत कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य सरकार के पात्र पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशन पाने वालों को भी संशोधित दर के अनुसार लाभ मिलेगा।   हालांकि, वास्तविक अतिरिक्त राशि कर्मचारी के मूल वेतन या पेंशन के आधार पर अलग-अलग होगी। यानी हर कर्मचारी को मिलने वाली बढ़ी हुई रकम समान नहीं होगी।   राज्य सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन     DA बढ़ोतरी को लागू करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। इसमें नई दर और इसके लागू होने की तारीख से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।   सरकार के इस फैसले के बाद लंबे समय से महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की मांग कर रहे कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।   कर्मचारियों की बढ़ेगी मासिक आय     नई DA दर लागू होने के बाद कर्मचारियों के वेतन में महंगाई भत्ते के रूप में मिलने वाली राशि बढ़ जाएगी। पेंशनभोगियों को भी संशोधित दर के अनुसार अधिक पेंशन मिलेगी।   1 अक्टूबर 2026 से 38 प्रतिशत DA लागू होने के बाद राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की आर्थिक स्थिति में कुछ राहत आने की उम्मीद है। सरकार के इस फैसले को कर्मचारियों के लिए बड़ा वित्तीय लाभ माना जा रहा है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
Pakistan's Interior Minister Mohsin Naqvi addresses the media, sparking political debate amid speculation over the country's political future.

पाकिस्तान में तख्तापलट की अटकलें तेज? गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बयान से बढ़ी सियासी हलचल

Heavy Rains North Bengal

उत्तर बंगाल में भारी बारिश का कहर, नदियां उफान पर; कई इलाके जलमग्न, प्रशासन अलर्ट

Opposition leaders, including Rahul Gandhi and Priyanka Gandhi, march inside Parliament premises demanding Amit Shah's resignation during the Monsoon Session.

संसद परिसर में विपक्ष का मार्च, अमित शाह के इस्तीफे की मांग; कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

People stranded in flood-affected areas of Kerala and Assam as heavy monsoon rains trigger widespread flooding and relief operations.
केरल और असम में बारिश-बाढ़ का कहर, 25 लोगों की मौत, हजारों बेघर; कई जिलों में रेड अलर्ट

देश के दक्षिण और पूर्वोत्तर हिस्सों में मानसून का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। केरल और असम में भारी बारिश तथा बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (KSDMA) के अनुसार, बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार लोग लापता हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण हजारों परिवारों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। दूसरी ओर, असम में भी कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं, जहां राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। केरल में बाढ़ की भयावह तस्वीर केरल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं और कई निचले इलाकों में पानी भर गया है। राज्यभर में 418 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां 18,434 से अधिक लोग शरण लिए हुए हैं। बाढ़ की वजह से 52 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 565 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा प्रभावित पथनमथिट्टा जिला है, जहां अकेले 133 राहत शिविरों में 6,400 से अधिक लोग रह रहे हैं। कई इलाकों में अब भी पानी नहीं उतरा है, जिससे लोगों की मुश्किलें बनी हुई हैं। मुख्यमंत्री ने किया प्रभावित इलाकों का दौरा केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने पथनमथिट्टा जिले का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर निर्देश दिए कि राहत और पुनर्वास कार्यों में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन को सभी आवश्यक प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार दे दिए गए हैं, ताकि प्रभावित लोगों तक तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। उन्होंने घोषणा की कि हर प्रभावित परिवार को तत्काल 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं, पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 6 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों, किसानों और व्यापारियों को हुए नुकसान के मुआवजे पर राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला लिया जाएगा। बार-बार बाढ़ आने की वजह भी बताई मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा कि 2018 और 2019 की विनाशकारी बाढ़ के बाद दीर्घकालिक समाधान पूरी तरह लागू नहीं हो पाए। लगातार बाढ़ आने से नदियों में गाद जमा होती गई, जिससे उनकी जलधारण क्षमता कम हो गई। उन्होंने नदियों की ड्रेजिंग (गाद हटाने) और बेहतर जल निकासी व्यवस्था विकसित करने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार मौसम अचानक बिगड़ जाता है और आधिकारिक चेतावनी जारी होने से पहले ही तेज बारिश शुरू हो जाती है, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। राज्य सरकार अब देश की सबसे बेहतर मौसम पूर्वानुमान प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। पंबा नदी खतरे के निशान से ऊपर पथनमथिट्टा जिले में पंबा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मूझियार बांध के जलग्रहण क्षेत्र में रेड अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जलस्तर बढ़ने पर बांध के गेट कभी भी खोले जा सकते हैं। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। आठ जिलों में रेड अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पथनमथिट्टा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, इडुक्की, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड में रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं अलप्पुझा, त्रिशूर, पलक्कड़ और मलप्पुरम में ऑरेंज अलर्ट लागू किया गया है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। कोट्टायम में घरों और दुकानों में घुसा पानी कोट्टायम जिले में लगातार बारिश के कारण कोडिमथा, थाझाथंगडी और इल्लीकल समेत कई इलाकों में गंभीर जलभराव हो गया है। पानी घरों और दुकानों में घुस गया है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। खराब मौसम को देखते हुए कई शिक्षण संस्थानों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। असम में भी बाढ़ से हालात गंभीर असम में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों में बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पांच दिवसीय दौरे पर बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा ले रहे हैं। उन्होंने शिवसागर में राहत शिविरों का निरीक्षण कर अधिकारियों को भोजन, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गों के लिए सभी जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शिवसागर स्थित राहत शिविर में 162 परिवारों के 563 लोग रह रहे हैं। इनमें 35 बच्चे, 267 पुरुष और 261 महिलाएं शामिल हैं। मृतकों के परिजनों को 9 लाख रुपये की सहायता मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बाढ़ में जान गंवाने वाले 10 लोगों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 5-5 लाख रुपये के चेक सौंपे। इससे पहले राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) से 4-4 लाख रुपये की सहायता दी जा चुकी थी। इस तरह प्रत्येक प्रभावित परिवार को कुल 9 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है। 9 अगस्त से शुरू होगा नुकसान का सर्वे असम सरकार ने घोषणा की है कि 9 अगस्त से बाढ़ प्रभावित चार जिलों में नुकसान का विस्तृत सर्वे शुरू किया जाएगा। सर्वे के आधार पर घरों, फसलों, दुकानों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ट्रैक्टर और रबर की नाव से कई जलमग्न गांवों का दौरा कर लोगों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और प्रभावित लोगों तक हर जरूरी सुविधा समय पर पहुंचे। स्कूल-कॉलेज भी हुए प्रभावित बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। मुख्यमंत्री ने शिवसागर गर्ल्स कॉलेज और फुलेश्वरी गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल के बाढ़ प्रभावित परिसरों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को जल्द से जल्द शिक्षण संस्थानों में सामान्य स्थिति बहाल करने और भविष्य में जलभराव की समस्या रोकने के लिए स्थायी उपाय करने के निर्देश दिए। लगातार सक्रिय मानसून को देखते हुए मौसम विभाग ने दोनों राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, नदी किनारे और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा केवल आधिकारिक मौसम संबंधी चेतावनियों पर भरोसा करने की अपील की है।  

kalpana अगस्त 5, 2026 0
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Six NEET UG 2026 candidates file a petition in the Supreme Court alleging discrepancies in their OMR answer sheets
NEET UG 2026: OMR शीट में गड़बड़ी का आरोप, छह अभ्यर्थी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

NEET UG 2026: नीट-यूजी 2026 परीक्षा एक बार फिर विवादों में है। छह अभ्यर्थियों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर OMR शीट की स्कैन कॉपी में उत्तर बदलने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने काउंसिलिंग शुरू होने से पहले मामले की जल्द सुनवाई पर सहमति जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई को दी मंजूरी प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की उस मांग को स्वीकार किया, जिसमें काउंसिलिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले मामले की शीघ्र सुनवाई की अपील की गई थी। क्या है छात्रों का आरोप? याचिकाकर्ता छात्रों का कहना है कि परीक्षा के दौरान उन्होंने OMR शीट में जो उत्तर भरे थे, NTA की वेबसाइट पर अपलोड की गई स्कैन कॉपी में वे उत्तर अलग दिखाई दे रहे हैं। छात्रों के अनुसार: कई प्रश्नों के उत्तर बदले हुए या गलत दर्ज किए गए हैं। इससे उनके वास्तविक अंक प्रभावित हुए हैं। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो उनकी मेरिट रैंक और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पर असर पड़ सकता है। 600 से अधिक अंक पाने वाले छात्रों का दावा अदालत में छात्रों के वकील ने बताया कि याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा में 600 से 650 से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। उनका कहना है कि OMR शीट में कथित गड़बड़ी के कारण उन्हें नुकसान हुआ है और मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। NTA से संपर्क के बावजूद नहीं मिला समाधान याचिका के मुताबिक, छात्रों ने OMR शीट में कथित विसंगतियों को लेकर NTA को कई ईमेल भेजे और कुछ अभ्यर्थी व्यक्तिगत रूप से एजेंसी के कार्यालय भी पहुंचे। हालांकि, उनका आरोप है कि NTA की ओर से कोई संतोषजनक जवाब या समाधान नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल NEET-UG 2026 में OMR शीट और परिणामों को लेकर इससे पहले भी कई कानूनी विवाद सामने आ चुके हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट, झारखंड हाईकोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में भी अभ्यर्थियों ने OMR शीट और घोषित अंकों में अंतर का आरोप लगाते हुए याचिकाएं दायर की थीं। पेपर लीक के बाद दोबारा हुई थी परीक्षा गौरतलब है कि NEET-UG 2026 की परीक्षा पहले 3 मई को आयोजित की गई थी। प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई। अब OMR शीट में कथित गड़बड़ी को लेकर परीक्षा एक बार फिर विवादों में आ गई है।  

kalpana अगस्त 5, 2026 0
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kalpana जुलाई 30, 2026 0

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