Sheikh Hasina Program: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करने को लेकर भारत ने अपना रुख साफ कर दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम का भारत सरकार से कोई संबंध नहीं है और यह पूरी तरह एक निजी आयोजन है।
मंगलवार (4 अगस्त) को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि शेख हसीना जिस कार्यक्रम को संबोधित करने जा रही हैं, उसका आयोजन FCC South Asia नामक एक निजी मीडिया संस्था कर रही है।
उन्होंने कहा, "यह भारत सरकार का कार्यक्रम नहीं है। इसका आयोजन एक निजी संस्था कर रही है और सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है।"
भारत की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत से अनुरोध किया था कि शेख हसीना और अवामी लीग के नेताओं को भारतीय भूमि से राजनीतिक भाषण देने की अनुमति न दी जाए।
अंतरिम सरकार का कहना था कि ऐसे कार्यक्रमों से बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।
शेख हसीना अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद सत्ता से हटने के बाद से भारत में रह रही हैं। अब वह करीब दो साल बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से लोगों को संबोधित करेंगी।
वह 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के सर मार्क टली ऑडिटोरियम में आयोजित FCC South Asia के कार्यक्रम में ऑनलाइन शामिल होकर अपना संबोधन देंगी।
शेख हसीना के इस संबोधन पर बांग्लादेश और भारत दोनों की नजरें टिकी हैं। हालांकि भारत ने साफ कर दिया है कि यह निजी कार्यक्रम है और इसे किसी भी तरह से भारत सरकार का आधिकारिक समर्थन या मंजूरी नहीं माना जाना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
संसद के मानसून सत्र का 13वां दिन भी हंगामेदार रहने के आसार हैं। मंगलवार को हुए तीखे विरोध-प्रदर्शन के बाद बुधवार (5 अगस्त) को भी विपक्ष केंद्र सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने संसद परिसर में मार्च निकालकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर चढ़ावा मामले और अन्य मुद्दों पर सरकार जवाब देने से बच रही है। राहुल-प्रियंका समेत विपक्ष का संसद परिसर में मार्च संसद परिसर में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई विपक्षी सांसदों ने प्रेरणा स्थल स्थित गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च निकाला। इस दौरान विपक्ष ने 20 जुलाई को छात्र संगठन CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा में कथित गड़बड़ी और अन्य मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। विपक्षी नेताओं ने इन मामलों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की और सरकार से सदन में जवाब देने की मांग की। जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर चर्चा की मांग कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए और गृह मंत्री अमित शाह को सदन में विस्तृत बयान देना चाहिए। दल-बदल कानून पर नई बहस की मांग कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। उन्होंने अवसरवाद से प्रेरित बड़े पैमाने पर होने वाले राजनीतिक दल-बदल पर चिंता जताते हुए नए और अधिक प्रभावी दल-बदल विरोधी कानून पर चर्चा कराने की मांग की। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है। E20 पेट्रोल के मुद्दे पर राज्यसभा में नोटिस आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने नियम 267 के तहत नोटिस देकर E20 पेट्रोल को अनिवार्य रूप से लागू किए जाने के मुद्दे पर चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि इस फैसले से उपभोक्ताओं के अधिकार, वाहन मालिकों की चिंताएं और आम जनता पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव जैसे गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिन पर सरकार को सदन में जवाब देना चाहिए। आज भी हंगामे के आसार मानसून सत्र के दौरान विपक्ष लगातार सरकार को कई मुद्दों पर घेर रहा है। ऐसे में बुधवार को भी लोकसभा और राज्यसभा में तीखी नोकझोंक और हंगामे की संभावना बनी हुई है। विपक्ष छात्र आंदोलन, राम मंदिर चढ़ावा मामले, E20 पेट्रोल नीति और दल-बदल कानून जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है, जबकि सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी।
Rashtrapati Bhavan At Home Invitation: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले पारंपरिक 'एट होम' (At Home) समारोह के लिए इस बार तैयार किए गए निमंत्रण पत्र अपनी अनूठी थीम और भारतीय लोक कला के शानदार प्रदर्शन के कारण चर्चा का विषय बने हुए हैं। इस वर्ष राष्ट्रपति भवन ने निमंत्रण पत्र और स्मृति-उपहारों के जरिए छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कला और हस्तशिल्प को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने का प्रयास किया है। इस पहल का उद्देश्य भारत की विविध सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करने के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को प्रोत्साहन देना भी है। निमंत्रण पत्र में दिखी भारतीय संस्कृति की झलक राष्ट्रपति भवन की ओर से तैयार की गई इस विशेष निमंत्रण किट को भारतीय संस्कृति और पारंपरिक कला को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। किट में राष्ट्रपति भवन की आकृति वाला विशेष निमंत्रण कार्ड, पारंपरिक कलाकृतियों से सजा आकर्षक फोल्डर, हस्तनिर्मित सजावटी प्लेटें, कलात्मक शोपीस, स्थानीय बुनकरों द्वारा तैयार किया गया पारंपरिक गमछा और राष्ट्रपति भवन की नक्काशी वाली लकड़ी की स्मृति पट्टिका शामिल है। निमंत्रण पत्र में छत्तीसगढ़ की जनजातीय कला, गोवा की नीले-सफेद सिरेमिक शैली, मध्य प्रदेश की पारंपरिक लोक चित्रकला और महाराष्ट्र की हस्तशिल्प कला को बेहद आकर्षक तरीके से उकेरा गया है। हर कलाकृति अपने राज्य की सांस्कृतिक पहचान और लोक परंपरा की कहानी बयां करती है। 'वोकल फॉर लोकल' और 'मेक इन इंडिया' को मिलेगा बढ़ावा राष्ट्रपति भवन हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस के 'एट होम' समारोह के लिए किसी न किसी भारतीय कला, संस्कृति या हस्तशिल्प को थीम बनाता है। इस बार चार राज्यों की लोक कला को शामिल कर 'वोकल फॉर लोकल' और 'मेक इन इंडिया' की सोच को भी बढ़ावा दिया गया है। इस पहल के जरिए स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और हस्तशिल्प कलाकारों की कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया गया है। राष्ट्रपति भवन का मानना है कि भारत की सांस्कृतिक विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और ऐसे आयोजनों के माध्यम से देश की पारंपरिक कलाओं को नई पहचान मिलती है। किन-किन राज्यों की कला को मिली जगह? इस वर्ष के निमंत्रण पत्र और स्मृति किट में जिन चार राज्यों की कला को प्रमुखता दी गई है, उनमें— छत्तीसगढ़ की जनजातीय और पारंपरिक लोक कला, गोवा की प्रसिद्ध नीले-सफेद सिरेमिक शैली, मध्य प्रदेश की पारंपरिक लोक चित्रकारी, महाराष्ट्र की हस्तनिर्मित शिल्प कला और पारंपरिक डिजाइनों को विशेष रूप से शामिल किया गया है। इन कलाओं के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता और हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा को प्रदर्शित किया गया है। किन लोगों को मिलता है 'एट होम' समारोह का निमंत्रण? राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाला 'एट होम' समारोह देश के सबसे प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक माना जाता है। इस समारोह में देश की विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट हस्तियों को आमंत्रित किया जाता है। इनमें— उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, भारत के मुख्य न्यायाधीश, राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक एवं सैन्य अधिकारी, विभिन्न देशों के राजदूत और उच्चायुक्त, पद्म पुरस्कार विजेता, वैज्ञानिक, खिलाड़ी, कलाकार और साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोग, पारंपरिक कारीगर, जनजातीय समाज के प्रतिनिधि, 'अनसंग हीरोज' और स्वतंत्रता सेनानियों एवं उनके परिवारों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है। भारतीय विरासत को सम्मान देने की पहल राष्ट्रपति भवन की यह पहल केवल एक निमंत्रण पत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध लोक कला, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का एक प्रयास है। इस वर्ष का 'एट होम' निमंत्रण पत्र देश की विविध संस्कृति, पारंपरिक शिल्पकला और स्थानीय कलाकारों के योगदान को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करता है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि आधुनिक भारत अपनी जड़ों, संस्कृति और लोक परंपराओं को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।
Rain Alert: देशभर में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और कई राज्यों में भारी बारिश जनजीवन पर भारी पड़ रही है। पश्चिम बंगाल में आकाशीय बिजली गिरने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि उत्तराखंड के चमोली में भूस्खलन के कारण करीब 200 यात्री फंस गए हैं। वहीं, केरल और तटीय कर्नाटक में लगातार मूसलाधार बारिश के चलते रेड अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश, तेज हवाओं और बिजली गिरने की चेतावनी दी है। बंगाल में बिजली गिरने से 4 की मौत पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में अलग-अलग स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने की अपील की है। उत्तराखंड में भूस्खलन से चारधाम यात्रा प्रभावित उत्तराखंड के चमोली जिले में बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन के बाद पहाड़ी से मलबा और बड़े पत्थर सड़क पर आ गिरे, जिससे करीब 200 यात्री रास्ते में फंस गए। सड़क साफ करने का काम जारी है। इसके अलावा: यमुनोत्री मार्ग पर स्यानाचट्टी के पास विशाल बोल्डर गिरने से यातायात प्रभावित हुआ। गंगोत्री हाईवे पर जमीन धंसने और सड़क में दरारें आने की सूचना है। ऋषिकेश में गंगा नदी चेतावनी स्तर के करीब पहुंचने पर SDRF को तैनात किया गया है। केरल में सामान्य से 181% अधिक बारिश केरल में 1 से 4 अगस्त के बीच 205.8 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 181 प्रतिशत अधिक है। लगातार बारिश के कारण कई निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं और लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए: खोए हुए दस्तावेज दोबारा जारी करने, स्कूली बच्चों को नई पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने, राहत और पुनर्वास कार्य तेज करने की घोषणा की है। कर्नाटक में रेड अलर्ट तटीय कर्नाटक के उडुपी जिले में 189 मिमी बारिश दर्ज की गई है। नेत्रावती समेत कई नदियां खतरे के निशान के करीब बह रही हैं। मौसम विभाग ने तटीय और पहाड़ी जिलों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश में जलभराव लगातार बारिश के कारण: हरियाणा के अंबाला और झज्जर में सड़कें जलमग्न हो गईं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी, मथुरा और मुजफ्फरनगर सहित कई शहरों में जलभराव से जनजीवन प्रभावित हुआ। आगरा में खराब मौसम के चलते कुछ स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई, जबकि वृंदावन के कई इलाकों में चार फीट तक पानी भर गया। असम में बाढ़ का संकट जारी असम में बाढ़ की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। दो और लोगों की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 89 हो गई है। राज्य में करीब 1.22 लाख लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। IMD की चेतावनी भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने केरल, कर्नाटक, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई है। लोगों को मौसम विभाग की सलाह का पालन करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है।