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Assam Flood Death Toll Reaches 80

असम में बाढ़ का कहर जारी: 80 लोगों की मौत, 379 गांव जलमग्न; 1.92 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

kalpana अगस्त 1, 2026 0
Flood-affected villages in Assam with rescue teams assisting stranded residents
Assam Floods Leave 80 Dead, Nearly 1.93 Lakh People Affected

Assam Floods: असम में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण राज्य के कई हिस्से अब भी जलमग्न हैं। डिजास्टर रिपोर्टिंग एंड इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (DRIMS) की 31 जुलाई तक की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है। वहीं, पांच जिलों के 1,92,799 लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा है, जबकि हजारों हेक्टेयर फसल भी पानी में डूब गई है।

379 गांव और 17 राजस्व सर्किल बाढ़ की चपेट में

रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 17 रेवेन्यू सर्किल और 379 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। सबसे ज्यादा असर चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट, गोलाघाट और नगांव जिलों में देखा गया है।

सबसे अधिक प्रभावित चराइदेव जिला है, जहां 77,456 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बाद शिवसागर में 63,492 और जोरहाट में 34,067 लोग प्रभावित हुए हैं। कई गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी मुश्किलें आ रही हैं।

दो और लोगों की मौत, आंकड़ा पहुंचा 80

DRIMS की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ से दो और लोगों की मौत दर्ज की गई है। इनमें एक व्यक्ति की मौत शिवसागर और दूसरे की चराइदेव जिले में हुई। इससे पहले 30 जुलाई तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 78 थी, जो अब बढ़कर 80 हो गई है।

कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान

बाढ़ का असर केवल जनजीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार, 15,430 हेक्टेयर फसल क्षेत्र अब भी पानी में डूबा हुआ है। इससे किसानों को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।

राहत कार्य जारी, कई लोगों ने बढ़ाया मदद का हाथ

बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए सरकार के साथ-साथ कई सामाजिक संगठन और उद्योग जगत के लोग भी आगे आए हैं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि उद्योगपति गौतम अडानी ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 11 करोड़ रुपये का ऑनलाइन योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने उनके सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि यह राशि बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद और पुनर्वास कार्यों में उपयोग की जाएगी।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि राहत कोष में मिलने वाली हर राशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ प्रभावित लोगों के पुनर्वास और राहत कार्यों पर किया जाएगा।

कार्तिक आर्यन ने दिए 1 करोड़ रुपये

बाढ़ राहत अभियान में बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन ने भी सहयोग किया है। उन्होंने असम मुख्यमंत्री राहत कोष में 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इससे राहत कार्यों को और मजबूती मिलेगी।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने भी की सहायता की घोषणा

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) ने भी असम बाढ़ पीड़ितों के लिए आर्थिक सहयोग देने का ऐलान किया है। संगठन के राष्ट्रीय संयोजक शाहिद सईद ने बताया कि कोर टीम की बैठक में मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान देने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने का निर्णय लिया गया है।

प्रशासन अलर्ट पर

राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। मौसम विभाग ने भी कुछ इलाकों में बारिश जारी रहने की संभावना जताई है, जिससे आने वाले दिनों में बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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PM MOdi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्र प्रदर्शनकारियों को माफ करने की बात कही, बोले- गाली देने से समस्या का समाधान नहीं होगा

नई दिल्ली, एजेंसियां। जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक नारे लगाए जाने के मामले के बीच प्रधानमंत्री ने शुक्रवार देर रात प्रतिक्रिया दी। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में मोदी ने कहा कि अपशब्द किसी समस्या का समाधान नहीं करते। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल युवाओं को ‘भटके हुए बच्चे’ बताते हुए उन्हें माफ करने और सही दिशा दिखाने की बात कही।   जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर पीएम मोदी की प्रतिक्रिया   यह मामला 23 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे थे। इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का मामला सामने आया, जिसके बाद राजनीतिक स्तर पर भी विवाद बढ़ गया।   ‘गलत राह पर गए युवाओं को रास्ता दिखाना हमारा काम’   प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि युवाओं से गलतियां हो सकती हैं और ऐसी गलतियों को सुधारने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन युवाओं को सजा दिलाने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाने और समझाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने समाज से भी संयम बरतने की अपील की।   प्रधानमंत्री की मां के खिलाफ भी आपत्तिजनक भाषा का जिक्र   मोदी ने कहा कि जंतर-मंतर की घटना में उनके खिलाफ ही नहीं, बल्कि उनकी दिवंगत मां के लिए भी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इस पर दुख जताया, लेकिन इसके बावजूद युवाओं को माफ करने की बात कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि अपशब्दों और टकराव से किसी समस्या का समाधान नहीं निकलता।   प्रदर्शन से जुड़े कुछ लोगों ने जताया खेद   प्रधानमंत्री के संदेश के बाद प्रदर्शन से जुड़े कुछ लोगों की ओर से माफी मांगने के वीडियो भी सामने आए हैं। एक नाबालिग लड़की ने कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर माफी मांगते हुए इसे अपनी गलती बताया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है।

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केरल में भारी बारिश और भूस्खलन से हालात बिगड़े, कई इलाकों में बाढ़ का खतरा

तिरुवनंतपुरम, एजेंसियां। केरल में लगातार हो रही भारी बारिश ने कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित कर दिया है। इडुक्की, कोट्टायम, वायनाड, कन्नूर और अन्य जिलों में बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। इडुक्की में भूस्खलन की चपेट में आने से एक महिला की मौत की खबर है, जबकि कई मकानों और सड़कों को नुकसान पहुंचा है।   इडुक्की में भूस्खलन से महिला की मौत   इडुक्की जिले के कुडयाथूर के पास अडूरमाला इलाके में शनिवार सुबह भूस्खलन ने एक मकान को अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में एक महिला की मौत हो गई। लगातार बारिश के कारण जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है।   कई जिलों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति   भारी बारिश के कारण केरल के कई हिस्सों में नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। निचले इलाकों में पानी भरने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। वायनाड, कन्नूर और कोट्टायम समेत कई जिलों में प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।   मौसम विभाग ने जारी किया रेड अलर्ट   भारत मौसम विज्ञान विभाग ने केरल के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। भूस्खलन और अचानक बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा अधिक बताया गया है।   राहत और बचाव कार्यों पर प्रशासन की नजर   लगातार बारिश के बीच प्रशासन और राहत एजेंसियां संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं। सड़कें बाधित होने और जलभराव की स्थिति में राहत एवं बचाव अभियान चलाने की तैयारी रखी गई है। लोगों को खराब मौसम के दौरान नदी, निचले इलाकों और भूस्खलन संभावित पहाड़ी क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर फिलहाल सुरक्षा कारणों से बंद रहेगा। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए कॉरिडोर को दोबारा खोलने का फैसला अभी नहीं लिया गया है।   सुरक्षा स्थिति को देखते हुए जारी रहेगा निलंबन   सरकार के मुताबिक, भारत-पाकिस्तान सीमा पर मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए करतारपुर साहिब कॉरिडोर की सेवाएं निलंबित रखी गई हैं। कॉरिडोर के जरिए भारतीय श्रद्धालु बिना वीजा पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब, करतारपुर में दर्शन के लिए जाते हैं।   सिख संगठनों ने जल्द खोलने की मांग की   केंद्र सरकार को कई सिख धार्मिक संगठनों और संस्थाओं की ओर से कॉरिडोर को जल्द दोबारा खोलने के अनुरोध मिले हैं। सरकार ने इन मांगों को संज्ञान में लिया है, लेकिन मौजूदा सुरक्षा स्थिति के कारण फिलहाल इसे खोलने की अनुमति नहीं दी गई है।   श्रद्धालुओं की यात्रा पर पड़ा असर   कॉरिडोर बंद रहने से भारत से करतारपुर साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा प्रभावित हुई है। यह कॉरिडोर डेरा बाबा नानक, गुरदासपुर (पंजाब) को पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित करतारपुर साहिब से जोड़ता है। वर्ष 2019 में शुरू हुए इस मार्ग के जरिए श्रद्धालु वीजा-मुक्त यात्रा कर गुरुद्वारा दरबार साहिब पहुंचते हैं।   सुरक्षा सामान्य होने पर खुलने की उम्मीद   केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल कॉरिडोर को दोबारा खोलने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है। सरकार की प्राथमिकता सुरक्षा स्थिति को देखते हुए निर्णय लेना है। परिस्थितियों में सुधार होने के बाद कॉरिडोर को फिर से खोलने पर विचार किया जा सकता है।  

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