शगुन शर्मा ने यह बात ‘फिल्मीज्ञान’ को दिए एक इंटरव्यू में शो के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए कही। हालांकि, गौरव खन्ना की ओर से इन आरोपों पर उनकी प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में सामने नहीं आई है। इसलिए शगुन के दावों को उनके पक्ष के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
शगुन शर्मा के मुताबिक, गौरव खन्ना उन लोगों में से हैं जिनसे वह दोबारा मिलना नहीं चाहेंगी। उन्होंने दावा किया कि शो के दौरान गौरव उन्हें काफी परेशान करते थे।
शगुन ने अपने अनुभव को बताते हुए कहा कि जब कुछ कंटेस्टेंट किसी टास्क या काम को बीच में छोड़ देते थे, तब भी गौरव कथित तौर पर उन्हें ज्यादा टारगेट करते थे। उनके अनुसार, गौरव उन्हें ‘कमजोर’ कहकर ऐसी चीजें नहीं छोड़ने के लिए कहते थे।
शगुन ने यह भी कहा कि उनके लिए यह व्यवहार इतना असहज था कि वह भविष्य में गौरव से मिलना नहीं चाहेंगी।
हालांकि, शगुन शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि शो के दौरान किसी व्यक्ति के व्यवहार को देखकर वह उसकी पूरी निजी जिंदगी के बारे में फैसला नहीं देना चाहतीं।
उन्होंने कहा कि असल जिंदगी में किसी इंसान का रूप अलग हो सकता है और वह यह नहीं कहेंगी कि गौरव वास्तविक जीवन में भी बिल्कुल वैसे ही हैं, जैसे उन्होंने शो के दौरान उनके साथ व्यवहार किया।
यानी शगुन ने अपने अनुभव को शो के सेट तक सीमित रखते हुए गौरव के निजी व्यक्तित्व पर कोई सीधा निष्कर्ष देने से परहेज किया।
शगुन शर्मा के बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसको लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ यूजर्स ने शगुन के बयान पर सवाल उठाए और गौरव खन्ना का बचाव किया।
कुछ लोगों ने यह भी टिप्पणी की कि गौरव के खिलाफ बोलना जैसे एक ट्रेंड बन गया है। इस तरह शगुन के आरोपों के बाद मामला सिर्फ दोनों कलाकारों के बीच के अनुभव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर फैंस के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।
गौरव खन्ना पिछले कुछ समय से अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी सुर्खियों में रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी पत्नी आकांक्षा ने हाल ही ‘लॉकअप 2’ में अपने रिश्ते को लेकर खुलासा किया था और दावा किया था कि दोनों तलाक लेने वाले हैं तथा करीब एक साल से अलग रह रहे हैं।
इसके बाद गौरव खन्ना को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हुईं। अब शगुन शर्मा के सेट से जुड़े आरोपों ने एक बार फिर अभिनेता को चर्चा में ला दिया है।
हालांकि, दोनों मामलों को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है और किसी भी आरोप को संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया के बिना अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।
शगुन शर्मा टीवी इंडस्ट्री की जानी-पहचानी अभिनेत्री हैं। उन्होंने साल 2015 में ‘कुछ तो है तेरे मेरे दरमियां’ से अभिनय की शुरुआत की थी। इसके बाद वह ‘कुछ रंग प्यार के ऐसे भी’, ‘गंगा’, ‘इस प्यार को क्या नाम दूं 3’ और ‘तू आशिकी’ जैसे टीवी शोज में नजर आईं।
उन्हें 2021 में ‘इश्क पर जोर नहीं’ से खास पहचान मिली, जिसमें उन्होंने सोनाली सोनू मल्होत्रा का किरदार निभाया था। इसके बाद उन्होंने ‘ससुराल गेंदा फूल 2’ और ‘हरफूल मोहिनी’ जैसे शोज में काम किया।
फिलहाल वह ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ में परिधि विरानी के किरदार में नजर आ रही हैं। अब ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ में उनके और गौरव खन्ना के बीच कथित विवाद ने शो के प्रसारण से पहले ही दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है।
‘खतरों के खिलाड़ी 15’ की शूटिंग साउथ अफ्रीका के केप टाउन में पूरी हो चुकी है। इस सीजन के साथ रोहित शेट्टी करीब दो साल बाद स्टंट बेस्ड रियलिटी शो में वापसी कर रहे हैं।
शो के प्रसारण से पहले ही कंटेस्टेंट्स के अनुभव और विवादों ने माहौल गर्म कर दिया है। अब देखना होगा कि शो के ऑन एयर होने के बाद शगुन शर्मा और गौरव खन्ना से जुड़ा यह मामला किस तरह सामने आता है और क्या गौरव इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया देते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। शाहरुख खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘किंग’ को लेकर अभिनेता राघव जुयाल ने अपनी भूमिका से जुड़ी चर्चाओं पर सफाई दी है। पिछले कुछ समय से खबरें थीं कि राघव फिल्म में शाहरुख खान के सामने एक युवा खलनायक की भूमिका निभाने वाले हैं। अब राघव ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके किरदार को लेकर सामने आ रही जानकारी पूरी तरह गलत है। विलेन के किरदार की खबर को बताया गलत राघव जुयाल ने हालिया बातचीत में उन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया दी, जिनमें उन्हें ‘किंग’ में युवा विलेन के तौर पर पेश किए जाने की बात कही जा रही थी। अभिनेता ने स्पष्ट किया कि फिल्म में उनके किरदार को लेकर जिस तरह की कहानी सोशल मीडिया और रिपोर्टों में चल रही है, वह सही नहीं है। उन्होंने अपने किरदार के बारे में ज्यादा जानकारी साझा किए बिना इसे दर्शकों के लिए अलग और खास बताया। शाहरुख खान के साथ काम करने का अनुभव बताया खास राघव इससे पहले शाहरुख खान के साथ काम करने के अनुभव को लेकर भी खुलकर बात कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान जब शाहरुख ने पहली बार उनके सामने अपना संवाद बोला तो वह कुछ पल के लिए अपना संवाद भूल गए थे। राघव ने इसे अपने लिए ‘ड्रीम लेवल एक्सपीरियंस’ बताया और कहा कि बचपन में वह शाहरुख की फिल्में बार-बार सिनेमाघरों में देखा करते थे। फिल्म में नजर आएगी बड़ी स्टारकास्ट ‘किंग’ का निर्देशन सिद्धार्थ आनंद कर रहे हैं और फिल्म में शाहरुख खान के साथ सुहाना खान, अभिषेक बच्चन, दीपिका पादुकोण, रानी मुखर्जी, अनिल कपूर, जयदीप अहलावत और राघव जुयाल समेत कई कलाकार नजर आएंगे। फिल्म को एक बड़े स्तर की एक्शन-थ्रिलर के तौर पर तैयार किया जा रहा है। 24 दिसंबर 2026 को रिलीज होगी ‘किंग’ शाहरुख खान की ‘किंग’ को लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही जबरदस्त उत्साह है। फिल्म के निर्माण और कलाकारों से जुड़ी खबरें लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। फिल्म की सिनेमाघरों में रिलीज 24 दिसंबर 2026 को प्रस्तावित है। राघव जुयाल के किरदार को लेकर उनकी सफाई के बाद अब दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है।
हैदराबाद, एजेंसियां। अभिनेत्री रश्मिका मंदाना शूटिंग के दौरान चोटिल हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह एक मुश्किल डांस सीक्वेंस की शूटिंग कर रही थीं, इसी दौरान उनके हिप यानी कूल्हे के हिस्से में चोट लगी। डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह ठीक होने के लिए करीब छह सप्ताह आराम करने की सलाह दी है। चोट के चलते उनकी आगामी फिल्मों की शूटिंग प्रभावित होने की संभावना है। डांस सीक्वेंस की शूटिंग के दौरान लगी चोट रिपोर्ट्स के अनुसार रश्मिका मंदाना हैदराबाद में एक फिल्म के गाने की शूटिंग कर रही थीं। इसी दौरान कठिन डांस मूवमेंट करते समय उन्हें चोट लग गई। मेडिकल जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें आराम और रिकवरी पर ध्यान देने की सलाह दी है। छह सप्ताह आराम की सलाह चोट के बाद रश्मिका को फिलहाल शूटिंग से दूर रहने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें लगभग छह सप्ताह तक आराम और रिकवरी की जरूरत होगी। इसके बाद उनकी स्थिति के आधार पर आगे की शूटिंग और काम से जुड़ा कार्यक्रम तय किया जा सकता है। ‘रानाबली’ और ‘मायसा’ की शूटिंग पर पड़ सकता है असर रश्मिका मंदाना इन दिनों कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम कर रही हैं, जिनमें ‘रानाबली’ और ‘मायसा’ शामिल हैं। चोट के कारण उनके व्यस्त शूटिंग कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ सकता है। अभिनेत्री के प्रशंसक उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। स्वास्थ्य को लेकर रश्मिका ने दिया अपडेट चोट की खबर सामने आने के बाद प्रशंसकों की चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार रश्मिका ने अपनी स्थिति को लेकर बताया कि वह बेहतर हो रही हैं और लोगों की चिंता व शुभकामनाओं के लिए आभार जताया है। अब उनके प्रशंसकों की नजर उनकी अगली स्वास्थ्य जानकारी और शूटिंग पर वापसी पर बनी हुई है।
मुंबई, एजेंसियां। बहुप्रतीक्षित 'मिर्जापुर: द मूवी' की रिलीज से पहले मेकर्स बड़े स्तर पर प्रमोशनल अभियान की तैयारी में हैं। हाल ही में टीजर जारी होने के बाद अब 11 अगस्त को फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया जाएगा। इसके तुरंत बाद फिल्म की स्टारकास्ट देशभर के 7 से 8 शहरों में मल्टी-सिटी प्रमोशनल टूर पर निकलेगी और फैंस के बीच फिल्म का प्रचार करेगी। 11 अगस्त से शुरू होगा प्रमोशनल रोड शो फिल्म से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ट्रेलर रिलीज के बाद पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु शर्मा और अन्य कलाकार अलग-अलग शहरों में जाकर प्रशंसकों से मुलाकात करेंगे। मेकर्स का उद्देश्य सिनेमाघरों में रिलीज से पहले फिल्म को देशभर में बड़े स्तर पर प्रमोट करना और दर्शकों के बीच उत्साह को और बढ़ाना है। टीजर ने बढ़ाई फिल्म को लेकर उत्सुकता हाल ही में रिलीज हुए टीजर में 'मिर्जापुर' की पहचान बन चुके दमदार किरदारों और एक्शन से भरपूर दुनिया की झलक देखने को मिली। बड़े पर्दे के लिए तैयार की गई इस फिल्म में वही गैंगवार, राजनीति, इमोशन और थ्रिल देखने को मिलेगा, जिसने वेब सीरीज को लोकप्रिय बनाया था। दमदार स्टारकास्ट आएगी नजर फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु शर्मा के अलावा अभिषेक बनर्जी, रसिका दुगल, मोहित मलिक, शीबा चड्ढा, राजेश तैलंग, प्रमोद पाठक, श्रिया पिलगांवकर, हर्षिता शेखर गौड़, श्वेता त्रिपाठी और सोनल एस. चौहान भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इनके निर्देशन में बनी है फिल्म 'मिर्जापुर: द मूवी' को Amazon MGM Studios और Excel Entertainment प्रस्तुत कर रहे हैं। फिल्म का निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया है, जबकि इसकी कहानी पुनीत कृष्णा ने लिखी है। फिल्म के निर्माता रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर हैं, वहीं कासिम जगमागिया और विशाल रामचंद्रानी सह-निर्माता हैं। 4 सितंबर को दो भाषाओं में होगी रिलीज 'मिर्जापुर: द मूवी' 4 सितंबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म हिंदी और तेलुगु भाषा में रिलीज की जाएगी, ताकि इसे देशभर के अधिक से अधिक दर्शकों तक पहुंचाया जा सके।