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Kerala, Assam Floods: 25 Dead, Red Alert Issued

केरल और असम में बारिश-बाढ़ का कहर, 25 लोगों की मौत, हजारों बेघर; कई जिलों में रेड अलर्ट

kalpana अगस्त 5, 2026 0
People stranded in flood-affected areas of Kerala and Assam as heavy monsoon rains trigger widespread flooding and relief operations.
Kerala and Assam Flood Crisis: Heavy Rains Leave 25 Dead, Thousands Displaced

देश के दक्षिण और पूर्वोत्तर हिस्सों में मानसून का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। केरल और असम में भारी बारिश तथा बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (KSDMA) के अनुसार, बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार लोग लापता हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण हजारों परिवारों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। दूसरी ओर, असम में भी कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं, जहां राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है।

केरल में बाढ़ की भयावह तस्वीर

केरल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं और कई निचले इलाकों में पानी भर गया है। राज्यभर में 418 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां 18,434 से अधिक लोग शरण लिए हुए हैं। बाढ़ की वजह से 52 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 565 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।

सबसे ज्यादा प्रभावित पथनमथिट्टा जिला है, जहां अकेले 133 राहत शिविरों में 6,400 से अधिक लोग रह रहे हैं। कई इलाकों में अब भी पानी नहीं उतरा है, जिससे लोगों की मुश्किलें बनी हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने किया प्रभावित इलाकों का दौरा

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने पथनमथिट्टा जिले का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर निर्देश दिए कि राहत और पुनर्वास कार्यों में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन को सभी आवश्यक प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार दे दिए गए हैं, ताकि प्रभावित लोगों तक तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।

उन्होंने घोषणा की कि हर प्रभावित परिवार को तत्काल 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं, पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 6 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों, किसानों और व्यापारियों को हुए नुकसान के मुआवजे पर राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला लिया जाएगा।

बार-बार बाढ़ आने की वजह भी बताई

मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा कि 2018 और 2019 की विनाशकारी बाढ़ के बाद दीर्घकालिक समाधान पूरी तरह लागू नहीं हो पाए। लगातार बाढ़ आने से नदियों में गाद जमा होती गई, जिससे उनकी जलधारण क्षमता कम हो गई। उन्होंने नदियों की ड्रेजिंग (गाद हटाने) और बेहतर जल निकासी व्यवस्था विकसित करने का आश्वासन दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि कई बार मौसम अचानक बिगड़ जाता है और आधिकारिक चेतावनी जारी होने से पहले ही तेज बारिश शुरू हो जाती है, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। राज्य सरकार अब देश की सबसे बेहतर मौसम पूर्वानुमान प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।

पंबा नदी खतरे के निशान से ऊपर

पथनमथिट्टा जिले में पंबा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मूझियार बांध के जलग्रहण क्षेत्र में रेड अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जलस्तर बढ़ने पर बांध के गेट कभी भी खोले जा सकते हैं। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

आठ जिलों में रेड अलर्ट

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पथनमथिट्टा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, इडुक्की, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड में रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं अलप्पुझा, त्रिशूर, पलक्कड़ और मलप्पुरम में ऑरेंज अलर्ट लागू किया गया है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।

कोट्टायम में घरों और दुकानों में घुसा पानी

कोट्टायम जिले में लगातार बारिश के कारण कोडिमथा, थाझाथंगडी और इल्लीकल समेत कई इलाकों में गंभीर जलभराव हो गया है। पानी घरों और दुकानों में घुस गया है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। खराब मौसम को देखते हुए कई शिक्षण संस्थानों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।

असम में भी बाढ़ से हालात गंभीर

असम में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों में बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पांच दिवसीय दौरे पर बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा ले रहे हैं। उन्होंने शिवसागर में राहत शिविरों का निरीक्षण कर अधिकारियों को भोजन, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गों के लिए सभी जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

शिवसागर स्थित राहत शिविर में 162 परिवारों के 563 लोग रह रहे हैं। इनमें 35 बच्चे, 267 पुरुष और 261 महिलाएं शामिल हैं।

मृतकों के परिजनों को 9 लाख रुपये की सहायता

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बाढ़ में जान गंवाने वाले 10 लोगों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 5-5 लाख रुपये के चेक सौंपे। इससे पहले राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) से 4-4 लाख रुपये की सहायता दी जा चुकी थी। इस तरह प्रत्येक प्रभावित परिवार को कुल 9 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है।

9 अगस्त से शुरू होगा नुकसान का सर्वे

असम सरकार ने घोषणा की है कि 9 अगस्त से बाढ़ प्रभावित चार जिलों में नुकसान का विस्तृत सर्वे शुरू किया जाएगा। सर्वे के आधार पर घरों, फसलों, दुकानों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने ट्रैक्टर और रबर की नाव से कई जलमग्न गांवों का दौरा कर लोगों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और प्रभावित लोगों तक हर जरूरी सुविधा समय पर पहुंचे।

स्कूल-कॉलेज भी हुए प्रभावित

बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। मुख्यमंत्री ने शिवसागर गर्ल्स कॉलेज और फुलेश्वरी गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल के बाढ़ प्रभावित परिसरों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को जल्द से जल्द शिक्षण संस्थानों में सामान्य स्थिति बहाल करने और भविष्य में जलभराव की समस्या रोकने के लिए स्थायी उपाय करने के निर्देश दिए।

लगातार सक्रिय मानसून को देखते हुए मौसम विभाग ने दोनों राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, नदी किनारे और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा केवल आधिकारिक मौसम संबंधी चेतावनियों पर भरोसा करने की अपील की है।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने सौरव दास को नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने सौरव दास को आपराधिक अवमानना मामले में जारी किया नोटिस, चार सप्ताह में मांगा जवाब

सौरव दास बुरे फंसे, दिल्ली हाईकोर्ट ने आपराधिक अवमानना मामले में जारी किया नोटिस नई दिल्ली, एजेंसियां। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े सौरव दास की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करते हुए नोटिस जारी किया है। मामले में आरोप है कि हाईकोर्ट की एक न्यायाधीश को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाया गया और इससे जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को हटाने की कोशिश की गई।   जज को बदनाम करने के अभियान का आरोप     मामला दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के जरिए एक अभियान चलाया गया। अदालत के सामने इलेक्ट्रॉनिक सामग्री और ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े आरोप भी रखे गए हैं।   अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सौरव दास से अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। उन्हें चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।   इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिटाने का भी आरोप     मामले में सौरव दास पर इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को हटाने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, यह आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुआ है और मामले की न्यायिक प्रक्रिया जारी है।   दास ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी संबंधित पोस्ट को डिलीट नहीं किया है। ऐसे में अब अदालत के सामने दोनों पक्षों के दावों और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी।   चार सप्ताह में देना होगा जवाब     दिल्ली हाईकोर्ट ने सौरव दास को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। आगे की सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि लगाए गए आरोपों और उपलब्ध सामग्री के आधार पर आपराधिक अवमानना की कार्यवाही को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाए।   फिलहाल सौरव दास के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में विचाराधीन हैं। अंतिम फैसला आने तक उन्हें दोषी करार देना उचित नहीं होगा।

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संभल में बुर्के में कांवड़ यात्रा के ऐलान पर विवाद, प्रशासन ने तमन्ना मलिक और अमन त्यागी को भेजा नोटिस

संभल में तमन्ना मलिक की बुर्के में कांवड़ यात्रा पर विवाद, प्रशासन ने भेजा नोटिस; कानून-व्यवस्था को लेकर जताई चिंता संभल, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के संभल में तमन्ना मलिक के बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा करने के ऐलान को लेकर विवाद बढ़ गया है। संभल प्रशासन ने तमन्ना मलिक और उनके पति अमन त्यागी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। प्रशासन की ओर से यह कदम यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए उठाया गया है।   प्रशासन ने क्या कहा?     रिपोर्टों के मुताबिक, तमन्ना मलिक ने सावन के दौरान बुर्के में कांवड़ यात्रा करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद पुलिस ने संभावित तनाव और शांति व्यवस्था को लेकर प्रशासन को रिपोर्ट दी। इसके आधार पर SDM अदालत ने तमन्ना मलिक और उनके पति अमन त्यागी को नोटिस जारी किया। दोनों से इस संबंध में अपना पक्ष रखने को कहा गया है।     छह महीने के बंधपत्र की कार्रवाई     प्रशासन ने एहतियाती कदम के तौर पर दोनों से ₹20,000-₹20,000 के छह महीने के बंधपत्र की कार्रवाई की है। इसका उद्देश्य संभावित विवाद या शांति भंग की स्थिति को रोकना बताया गया है।   महत्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध रिपोर्टों में प्रशासन की कार्रवाई को सिर्फ बुर्का पहनने पर कानूनी प्रतिबंध के रूप में पेश करना सही नहीं है। मामला मुख्य रूप से कानून-व्यवस्था और संभावित तनाव से जुड़ा बताया गया है।   पहले भी चर्चा में रह चुकी हैं तमन्ना मलिक     तमन्ना मलिक इससे पहले भी बुर्का पहनकर कांवड़ लेकर हरिद्वार से लौटने के कारण चर्चा में आई थीं। फरवरी 2026 में उन्होंने अपने पति अमन त्यागी के साथ कांवड़ यात्रा की थी और संभल पहुंचने पर उनका स्वागत भी किया गया था।   तमन्ना मलिक का मामला अब एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। प्रशासन की ओर से जारी नोटिस के बाद आगे की कार्रवाई उनके जवाब और स्थानीय कानून-व्यवस्था की स्थिति पर निर्भर करेगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी

पश्चिम बंगाल सरकार ने DA में 20% बढ़ोतरी की, 1 अक्टूबर 2026 से कर्मचारियों को मिलेगा 38% महंगाई भत्ता

Pakistan's Interior Minister Mohsin Naqvi addresses the media, sparking political debate amid speculation over the country's political future.

पाकिस्तान में तख्तापलट की अटकलें तेज? गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बयान से बढ़ी सियासी हलचल

Heavy Rains North Bengal

उत्तर बंगाल में भारी बारिश का कहर, नदियां उफान पर; कई इलाके जलमग्न, प्रशासन अलर्ट

Opposition leaders, including Rahul Gandhi and Priyanka Gandhi, march inside Parliament premises demanding Amit Shah's resignation during the Monsoon Session.
संसद परिसर में विपक्ष का मार्च, अमित शाह के इस्तीफे की मांग; कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

संसद के मानसून सत्र का 13वां दिन भी हंगामेदार रहने के आसार हैं। मंगलवार को हुए तीखे विरोध-प्रदर्शन के बाद बुधवार (5 अगस्त) को भी विपक्ष केंद्र सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने संसद परिसर में मार्च निकालकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर चढ़ावा मामले और अन्य मुद्दों पर सरकार जवाब देने से बच रही है। राहुल-प्रियंका समेत विपक्ष का संसद परिसर में मार्च संसद परिसर में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई विपक्षी सांसदों ने प्रेरणा स्थल स्थित गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च निकाला। इस दौरान विपक्ष ने 20 जुलाई को छात्र संगठन CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा में कथित गड़बड़ी और अन्य मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। विपक्षी नेताओं ने इन मामलों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की और सरकार से सदन में जवाब देने की मांग की। जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर चर्चा की मांग कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए और गृह मंत्री अमित शाह को सदन में विस्तृत बयान देना चाहिए। दल-बदल कानून पर नई बहस की मांग कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। उन्होंने अवसरवाद से प्रेरित बड़े पैमाने पर होने वाले राजनीतिक दल-बदल पर चिंता जताते हुए नए और अधिक प्रभावी दल-बदल विरोधी कानून पर चर्चा कराने की मांग की। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है। E20 पेट्रोल के मुद्दे पर राज्यसभा में नोटिस आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने नियम 267 के तहत नोटिस देकर E20 पेट्रोल को अनिवार्य रूप से लागू किए जाने के मुद्दे पर चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि इस फैसले से उपभोक्ताओं के अधिकार, वाहन मालिकों की चिंताएं और आम जनता पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव जैसे गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिन पर सरकार को सदन में जवाब देना चाहिए। आज भी हंगामे के आसार मानसून सत्र के दौरान विपक्ष लगातार सरकार को कई मुद्दों पर घेर रहा है। ऐसे में बुधवार को भी लोकसभा और राज्यसभा में तीखी नोकझोंक और हंगामे की संभावना बनी हुई है। विपक्ष छात्र आंदोलन, राम मंदिर चढ़ावा मामले, E20 पेट्रोल नीति और दल-बदल कानून जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है, जबकि सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी।  

kalpana अगस्त 5, 2026 0
People stranded in flood-affected areas of Kerala and Assam as heavy monsoon rains trigger widespread flooding and relief operations.

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