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पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस पर पीएम मोदी का दो दिवसीय दौरा, किसानों को देंगे पीएम-किसान की किस्त

anjali kumari जून 20, 2026 0
West Bengal visit
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कोलकाता, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 और 21 जून को पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। दौरे के पहले दिन वह हुगली जिले के तारकेश्वर में आयोजित पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस समारोह में शामिल होंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री राज्य की जनता को संबोधित करेंगे और कई महत्वपूर्ण विकास एवं कृषि योजनाओं की शुरुआत करेंगे। इसके साथ ही वह प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की अगली किस्त भी किसानों के खातों में जारी करेंगे।

 

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी  साझा की 


प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपने दौरे की जानकारी साझा करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल दिवस का आयोजन राज्य की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि तारकेश्वर का संबंध भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों और बंगाल की सांस्कृतिक अस्मिता से भी जुड़ा रहा है।

प्रधानमंत्री इस दौरान कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से कई केंद्रीय योजनाओं की शुरुआत करेंगे। इनमें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत एग्री स्टैक, नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग और प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन पहलों से किसानों की आय बढ़ाने, खेती को तकनीक से जोड़ने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

 

प्रधानमंत्री कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम


दौरे के दूसरे दिन, 21 जून को प्रधानमंत्री कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके बाद वह भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी डिजाइन से तैयार तीन युद्धपोतों आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रे को औपचारिक रूप से कमीशन करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन युद्धपोतों के नौसेना में शामिल होने से भारत की समुद्री सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी। यह दौरा कृषि, संस्कृति, स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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लखनऊ की कोचिंग में आग, पहली मंजिल से कूदे स्टूडेंट, कई झुलसे; अभी 12 लोगों के फंसे होने की आशंका

लखनऊ, एजेंसियां। यूपी की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार दोपहर एक तीन मंजिला बिल्डिंग में आग लग गई। यहां दूसरे फ्लोर पर चल रही कोचिंग में छात्र आग में फंस गए। एक बच्चे ने पहले फ्लोर से कूद कर जान बचाई। लेकिन वह नीचे ग्रिल पर गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया। लोगों ने युवक को उठाकर सड़क की दूसरी तरफ किया। फायर ब्रिगेड की 10 गाड़ियां पहुंची फायर ब्रिगेड की करीब 10 गाड़ियां मौके पर हैं। एक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म आग बुझाने में लगी है। फायरकर्मियों ने बिल्डिंग के पीछे की दीवार को तोड़ा है। 12 लोग अंदर फंसे एक पुलिस अधिकारी ने बताया, 10-12 लोग अंदर फंसे हुए हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक मौके पर पहुंचे हैं। करीब 14 एम्बुलेंस मंगवाई गई हैं। बिल्डिंग में ग्राउंड और पहले फ्लोर पर पेट शॉप और क्लीनिक है। दूसरे फ्लोर पर लर्निंग स्पेस नाम की लाइब्रेरी (कोचिंग) और हेड हॉपर स्टूडियो है, जिसमें 3D आर्ट प्रोडक्शन और गेम एसेट आउटसोर्सिंग का काम होता है। अभिभावक परेशान आलमबाग से आए प्रभजोत सिंह ने कहा- मेरा बेटा एनिमेशन आर्टिस्ट है। वह यहीं पर काम करता है। उसने सवा दो बजे फोन कर बताया कि पापा बचा लीजिए, यहां पर आग लग गई है। मैं दौड़कर यहां आया। अभी मेरा बेटा मिला नहीं है।

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हिमाचल में मिड-डे मील वर्कर्स की प्रदेशव्यापी हड़ताल, स्कूलों में नहीं बना भोजन

शिमला। हिमाचल प्रदेश में मिड-डे मील वर्कर्स ने सोमवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल की, जिसके चलते सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए मिड-डे मील तैयार नहीं हो सका। सीटू (CITU) से संबद्ध मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन के बैनर तले हजारों कर्मचारियों ने शिमला में टालैंड से सचिवालय तक रोष रैली निकालकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कई स्कूलों में शिक्षकों ने अपने स्तर पर बच्चों के भोजन की व्यवस्था की।   12 महीने वेतन और हरियाणा मॉडल लागू करने की मांग हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पूरे वर्ष काम करने के बावजूद केवल सीमित अवधि का भुगतान मिलता है। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले के अनुरूप 12 महीने का वेतन देने, हरियाणा की तर्ज पर 7,000 रुपये मासिक मानदेय, ग्रेच्युटी, पेंशन और नियमित सेवा नीति लागू करने की मांग उठाई। साथ ही आंगनबाड़ी कर्मचारियों की तरह अवकाश सुविधा देने की भी मांग की गई।   वेतन में बढ़ोतरी नहीं, महीनों तक भुगतान का इंतजार यूनियन का आरोप है कि पिछले 17 वर्षों में केंद्र सरकार ने उनके मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की। वहीं राज्य सरकार भी कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर नहीं है। उनका कहना है कि कई बार तीन-तीन महीने तक वेतन नहीं मिलता और भुगतान भी किस्तों में किया जाता है। इसके अलावा साल में तीन बार अनिवार्य मेडिकल जांच का खर्च भी कर्मचारियों को स्वयं वहन करना पड़ता है।   25 बच्चों की शर्त हटाने की मांग मिड-डे मील वर्कर्स ने 25 विद्यार्थियों की न्यूनतम संख्या की शर्त समाप्त करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि छात्र संख्या कम होने पर कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी जाती हैं, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होती है।   यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र किया जाएगा।

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कैश फॉर जॉब स्कैम: अभिषेक बनर्जी के पीए सुमित रॉय पर FIR, CID ने जारी किया लुकआउट नोटिस; कालीघाट आवास पर छापेमारी

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले के बाद अब सरकारी नौकरियों के नाम पर कथित वसूली और धोखाधड़ी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। इस बार जांच की आंच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee के निजी सहायक (PA) सुमित रॉय तक पहुंच गई है। मेदिनीपुर के पूर्व विधायक Sujay Hazra से पूछताछ के बाद डेबरा थाने में सुमित रॉय के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की कथित ठगी मामला डेबरा निवासी प्रसेनजीत रॉय की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विभिन्न सरकारी विभागों में 12 पदों पर नौकरी दिलाने के नाम पर प्रति उम्मीदवार साढ़े तीन लाख रुपये की मांग की गई थी। पीड़ितों का दावा है कि विश्वास जीतने के लिए उन्हें एक होटल में ‘आशिक’ नामक व्यक्ति से मिलवाया गया, जिसने खुद को राज्य सचिवालय नबान्न का कर्मचारी बताया। इसके बाद उम्मीदवारों को कथित तौर पर विकास भवन और खाद्य भवन ले जाकर मेडिकल परीक्षण भी कराया गया। 'अभिषेक बनर्जी के पीए को पैसे देने होंगे' कहकर मांगी गई अतिरिक्त रकम शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बाद में उनसे यह कहकर और धन की मांग की गई कि रकम अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय तक पहुंचानी है। इसके बाद उम्मीदवारों को कथित तौर पर असली नियुक्ति पत्र के बजाय रंगीन जेरॉक्स प्रतियां थमा दी गईं। जब अभ्यर्थियों को नौकरी नहीं मिली और उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं। CID ने जारी किया लुकआउट सर्कुलर मामले की गंभीरता को देखते हुए Criminal Investigation Department, West Bengal (CID) ने सुमित रॉय के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी कर दिया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सुमित रॉय के मोबाइल फोन की आखिरी टावर लोकेशन Kalighat स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास के आसपास मिली थी। इसके बाद सालबनी थाने की पुलिस केंद्रीय बलों के साथ कालीघाट स्थित आवास पर पहुंची और लंबी प्रतीक्षा के बाद ताला तोड़कर परिसर के भीतर प्रवेश किया। सुमित रॉय वहां नहीं मिला। ससुराल में भी छापेमारी, आरोपी अब भी फरार पुलिस ने हुगली जिले के Serampore स्थित सुमित रॉय की ससुराल में भी छापेमारी की, लेकिन वहां भी उसका कोई सुराग नहीं मिला। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित नौकरी घोटाले में कितने लोगों से धन वसूला गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल सुमित रॉय के खिलाफ FIR और CID की कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष ने मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया है, जबकि पार्टी की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी की तलाश जारी है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।  

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