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Army Captain’s Viral Proposal Moment

पासिंग आउट परेड के बाद कैप्टन का प्रपोजल बना चर्चा का विषय, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

Deepshikha जून 6, 2026 0
Indian Army captain proposes to his fiancée after pilot training graduation parade in Nashik.
Army Captain Proposal After Passing Out Parade

 

नासिक: महाराष्ट्र के नासिक स्थित कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल में पासिंग आउट परेड के बाद एक भावुक और यादगार पल देखने को मिला। भारतीय सेना के कैप्टन भारत भारद्वाज ने पायलट के रूप में अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अपनी मंगेतर को सबके सामने शादी के लिए प्रपोज किया। इस खास मौके का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

जहां कई लोगों ने इस पल को प्यार और समर्पण की खूबसूरत मिसाल बताया, वहीं कुछ लोगों ने सेना की वर्दी और पासिंग आउट परेड जैसे औपचारिक कार्यक्रम के दौरान ऐसा करने को लेकर अनुशासन संबंधी सवाल भी उठाए।

पासिंग आउट परेड के बाद किया प्रपोज

समाचार एजेंसी ANI द्वारा जारी वीडियो में कैप्टन भारत भारद्वाज अपनी वर्दी में घुटनों के बल बैठकर अपनी मंगेतर को प्रपोज करते दिखाई दे रहे हैं। उनकी मंगेतर साड़ी में मौजूद थीं और दोनों के चेहरे पर खुशी साफ नजर आ रही थी।

प्रपोजल स्वीकार किए जाने के बाद साथी अधिकारियों और दोस्तों ने दोनों को बधाई दी। यह पूरा दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भी यादगार बन गया।

"इस दिन को और खास बनाना चाहता था"

ANI से बातचीत में कैप्टन भारत भारद्वाज ने बताया कि पायलट और इंस्ट्रक्टर बनने का दिन उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन था।

उन्होंने कहा, "आज हमारी वर्षों की मेहनत सफल हुई है। मेरे परिवार, खासकर मेरी मां और नाना-नानी के लिए भी यह बेहद खास अवसर था। मैं इस दिन को और यादगार बनाना चाहता था।"

कैप्टन भारत ने बताया कि वह और उनकी मंगेतर पिछले पांच वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं। उनके अनुसार, शादी का प्रस्ताव रखने के लिए इससे बेहतर अवसर उन्हें नहीं लगा।

सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या सैन्य समारोह के तुरंत बाद इस तरह का निजी आयोजन उचित था। वहीं कई लोगों ने इसे एक व्यक्तिगत और भावनात्मक क्षण बताते हुए समर्थन किया।

बहस का केंद्र यह रहा कि क्या ऐसे अवसर पर व्यक्तिगत भावनाओं का सार्वजनिक प्रदर्शन सैन्य परंपराओं और अनुशासन के अनुरूप है या नहीं।

सेना के पूर्व अधिकारियों ने किया समर्थन

कई पूर्व सैन्य अधिकारियों और रक्षा विशेषज्ञों ने कैप्टन भारत का समर्थन किया है। उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी की पेशेवर क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा पर कोई सवाल नहीं है, तो ऐसे मानवीय और सकारात्मक क्षणों को अनावश्यक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।

पूर्व सेना अधिकारी K. J. S. Dhillon ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि युवाओं के जीवन के ऐसे खूबसूरत पलों की सराहना की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्यार और अपनापन व्यक्त करने के ऐसे अवसरों पर अनावश्यक आलोचना से बचना चाहिए।

यादगार पल बना वायरल वीडियो

कैप्टन भारत भारद्वाज का यह प्रपोजल वीडियो अब सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। कई लोग इसे देश सेवा और निजी जीवन के बीच संतुलन का खूबसूरत उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे सैन्य परंपराओं के संदर्भ में देख रहे हैं।

फिलहाल यह वीडियो लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और इंटरनेट पर लाखों बार देखा जा चुका है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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क्या E20 पेट्रोल से इंश्योरेंस बंद हो जाएगा? सरकार ने दिया जवाब

नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली में E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। कई वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि पुरानी या गैर-संगत गाड़ियों में E20 ईंधन डालने पर वाहन बीमा पॉलिसी रद्द हो सकती है या बीमा क्लेम खारिज हो सकता है। सरकार ने इन दावों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है।   PIB ने अफवाहों को बताया फर्जी प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने स्पष्ट किया है कि E20 ईंधन (80% पेट्रोल और 20% इथेनॉल मिश्रण) के इस्तेमाल से वाहन बीमा की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता। सरकार ने कहा कि मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी पूरी तरह वैध रहती है और E20 पेट्रोल डालने के कारण किसी भी प्रकार का क्लेम रिजेक्ट नहीं किया जाएगा।   PIB ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं पर भरोसा न करें और किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित करें।   इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम तेजी से बढ़ रहा भारत में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम तेजी से विस्तार कर रहा है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में E20 ईंधन का उपयोग बड़े पैमाने पर लागू हो चुका है। सरकार का उद्देश्य कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करना है।   E85 ईंधन की ओर बढ़ रहा कदम सरकार अब E20 से आगे बढ़कर E85 ईंधन को भी बढ़ावा दे रही है। हाल ही में विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर इंडियन ऑयल के कुछ आउटलेट्स पर E85 ईंधन की शुरुआत की गई है। फिलहाल यह 48 केंद्रों पर उपलब्ध है और इसे दिसंबर 2026 तक 500 तथा दिसंबर 2027 तक लगभग 5,000 आउटलेट्स तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।   वाहन मालिकों के लिए जरूरी सलाह हालांकि E20 ईंधन का उपयोग सामान्य वाहनों में सुरक्षित माना जा रहा है, लेकिन E85 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का उपयोग केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में ही किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य वाहनों में इसका उपयोग इंजन को नुकसान पहुंचा सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बीमा पर इसका कोई असर नहीं होगा, लेकिन वाहन की तकनीकी संगतता का ध्यान रखना जरूरी है।

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अब बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेगा कफ सिरप

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने कफ सिरप और अन्य औषधीय सिरप की बिक्री को लेकर बड़ा फैसला लिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 (Drugs Rules, 1945) में संशोधन करते हुए कई कफ सिरप की ओवर-द-काउंटर (OTC) बिक्री पर रोक लगा दी है। अब ऐसे कफ सिरप खरीदने के लिए मरीजों को पंजीकृत डॉक्टर द्वारा जारी प्रिस्क्रिप्शन दिखाना अनिवार्य होगा। यह नियम देशभर में लागू होगा और गांवों से लेकर शहरों तक सभी मेडिकल स्टोरों पर इसका पालन करना होगा।   दवाओं के दुरुपयोग पर सख्ती मंत्रालय के अनुसार, यह कदम कफ सिरप के दुरुपयोग को रोकने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। पिछले कुछ वर्षों में कफ सिरप के गलत इस्तेमाल और उससे जुड़ी गंभीर घटनाओं ने सरकार की चिंता बढ़ाई थी। इन्हीं मामलों को देखते हुए नियमों को और सख्त किया गया है।   औषधि नियम 1945 में अहम संशोधन नए संशोधन के तहत अनुसूची ‘के’ (Schedule K) में शामिल दवाओं की सूची से ‘सिरप’ शब्द हटा दिया गया है। पहले इस श्रेणी के तहत कुछ क्षेत्रों, विशेषकर छोटे गांवों में, सिरप दवाओं की बिक्री के लिए लाइसेंस संबंधी छूट उपलब्ध थी। अब यह छूट समाप्त कर दी गई है। इसके बाद कफ सिरप और संबंधित औषधीय सिरप केवल लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर या फार्मेसी से ही बेचे जा सकेंगे।   देशभर में लागू होंगे नए नियम सरकार ने स्पष्ट किया है कि 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में भी बिना लाइसेंस और बिना डॉक्टर की पर्ची के कफ सिरप की बिक्री नहीं होगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवा कंपनियों, वितरकों और मेडिकल स्टोर संचालकों को सभी नियामकीय प्रावधानों और लाइसेंस संबंधी नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि इस फैसले से कफ सिरप की बिक्री अधिक पारदर्शी होगी, दवाओं का गलत उपयोग कम होगा और जनस्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। नीट (यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के निर्देश के अनुसार, भारत में टेलीग्राम की सेवाओं पर 22 जून 2026 तक रोक रहेगी। यह फैसला 21 जून को आयोजित होने वाली नीट पुनर्परीक्षा की निष्पक्षता, पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।   पेपर लीक और अफवाहों पर रोक लगाने की कोशिश राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि परीक्षा से जुड़े कथित प्रश्नपत्रों, अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोकने में यह कदम प्रभावी साबित हो सकता है। एजेंसी के अनुसार, हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए फर्जी जानकारी और कथित परीक्षा सामग्री प्रसारित होने की घटनाएं सामने आई थीं। ऐसे में यह निर्णय एहतियाती उपाय के रूप में लिया गया है।   एनटीए ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे परीक्षा से संबंधित किसी भी सूचना के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत माध्यमों पर ही भरोसा करें तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट जानकारी से बचें।   मैसेज एडिट करने की सुविधा भी रहेगी बंद एनटीए के मुताबिक, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत यह अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा, एक अलग आदेश के तहत टेलीग्राम को भारत में पहले से भेजे गए संदेशों को संपादित (एडिट) करने की सुविधा 30 जून 2026 तक बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि इस सुविधा का दुरुपयोग कर परीक्षा के बाद फर्जी पेपर लीक के सबूत तैयार किए जा सकते हैं। इन कदमों का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित रखना, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और अभ्यर्थियों को गुमराह करने वाले संगठित नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाना है।

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