भारत ने अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने 975 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत भारतीय सेना के लिए TRAWL सिस्टम खरीदे जाएंगे।
यह समझौता 21 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में हुआ, जहां रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इस डील को अंतिम रूप दिया गया।
इस सौदे के तहत TRAWL सिस्टम को भारतीय सेना के T-72 और T-90 टैंकों में लगाया जाएगा।
इस उपकरण की आपूर्ति Bharat Earth Movers Limited और Electro Pneumatics and Hydraulics (India) Private Limited द्वारा की जाएगी।
TRAWL सिस्टम को Defence Research and Development Organisation द्वारा विकसित किया गया है। यह तकनीक युद्ध के दौरान माइनफील्ड को पार करने में मदद करती है।
इसकी मदद से टैंक और अन्य बख्तरबंद वाहन बारूदी सुरंगों वाले इलाकों में सुरक्षित रास्ता बना सकते हैं। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां एंटी-टैंक माइंस लगी होती हैं, यह सिस्टम बेहद कारगर साबित होगा।
यह सौदा “Buy (Indian–Indigenously Designed, Developed and Manufactured)” श्रेणी के तहत किया गया है, जो सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देता है।
इससे देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और घरेलू कंपनियों को नए अवसर मिलेंगे।
इस परियोजना से न सिर्फ सेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि देश के MSME सेक्टर को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
TRAWL सिस्टम के निर्माण में कई छोटे और मध्यम उद्योग शामिल होंगे, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री व्यवस्था में बदलाव किया है। इससे इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और संस्थागत उपभोक्ता प्रभावित होंगे। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 11 जून को जारी आदेश में कहा है कि अब ऐसे बड़े उपभोक्ता सीधे रिटेल पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल नहीं खरीद सकेंगे। उन्हें ईंधन की खरीद केवल अधिकृत बल्क सेल पॉइंट्स से करनी होगी। सरकार द्वारा जारी “मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (रिटेल आउटलेट्स के जरिए सप्लाई का अस्थायी नियमन) आदेश, 2026” के तहत यह व्यवस्था फिलहाल 90 दिनों के लिए लागू की गई है। आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि आगे भी बढ़ाई जा सकती है। कई राज्यों में असामान्य बिक्रीः पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देश के कुछ हिस्सों में हाल के दिनों में पेट्रोल और डीजल की रिटेल बिक्री में असामान्य बढ़ोतरी देखी गई है। जांच में पता चला कि कई औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ता बल्क और रिटेल कीमतों के बीच अंतर का फायदा उठाने के लिए पेट्रोल पंपों से ही बड़ी मात्रा में ईंधन खरीद रहे थे। मंत्रालय का कहना है कि इससे आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई थी। इसी को देखते हुए यह अस्थायी नियमन लागू किया गया है। अंतरराष्ट्रीय हालात ठीक नही सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि दुनिया के कुछ हिस्सों में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और संकट का असर अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम सप्लाई चेन, शिपिंग लॉजिस्टिक्स और पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर पड़ रहा है। इससे कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की लागत में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद आम लोगों को राहत देने के लिए सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल पंपों पर खुदरा कीमतों को अपेक्षाकृत नियंत्रित रखा है। इसी कारण रिटेल और बल्क बिक्री की कीमतों में अंतर और बढ़ गया।
रांची। देश को साल 2047 तक महाशक्ति बनाने के संकल्प के साथ आज 11 जून को राजधानी दिल्ली में नीति आयोग की 11वीं गवर्निग काउंसिल की बैठक शुरू हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हो रही हाई-प्रोफाइल बैठक में बदलते राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य की एक नई तस्वीर दिखी। इस बार की बैठक बेहद खास रही, क्योंकि इसमें देश के तीन प्रमुख राज्यों के मुख्यमंत्रियों कर्नाटक के डी.के. शिवकुमार, पश्चिम बंगाल के सुवेंदु अधिकारी और तमिलनाडु के विजय ने पहली बार शिरकत की। विपक्षी खेमे से झारखंड के CM हेमंत सोरेन की मौजूदगी ने इस बात को रेखांकित किया कि जब बात राष्ट्र निर्माण की हो, तो संघवाद की भावना राजनीतिक मतभेदों से ऊपर खड़ी होती है। भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, गवर्नर्स और केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में देश के भविष्य का एजेंडा टेबल पर रखा गया। एजेंडे पर डिजिटल गवर्नेंस और कौशल विकास इस बार की बैठक का मुख्य विज़न बेहद स्पष्ट है- आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाना। ‘विकसित भारत @2047 के लिए समावेशी मानव विकास’ की थीम पर केंद्रित इस महामंथन में कई अहम रणनीतियों पर विचार किया जा रहा है। समान अवसर और पोषण: हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ने के मौके देना। रोजगार और कौशल: युवाओं को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करना ताकि वैश्विक स्तर पर भारत का डंका बजे। डिजिटल गवर्नेंस: सरकारी सेवाओं को पूरी तरह पारदर्शी और आम जनता के लिए सुलभ बनाना। बैठक का मूल मंत्र 2047 तक देश के हर नागरिक को, चाहे उसका सामाजिक-आर्थिक बैकग्राउंड, लिंग, उम्र या क्षेत्र कुछ भी हो, मुख्यधारा के विकास से जोड़ना है। नीति आयोग की यह बैठक केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि नए भारत की नींव रखने का एक ठोस ब्लूप्रिंट है।
नई दिल्ली,एजेंसियां। केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 22% से 30% तक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह खत्म करने का फैसला किया है। इस निर्णय का उद्देश्य देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है। हालांकि, वर्तमान में देशभर के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल मिश्रण) पर इस छूट का कोई लाभ नहीं मिलेगा। E22 से E30 तक के नए ईंधन होंगे टैक्स फ्री सरकार की नई अधिसूचना के तहत E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल वेरिएंट्स को एक्साइज ड्यूटी से मुक्त किया गया है। यह पहली बार है जब E20 से ऊपर के एथेनॉल ब्लेंड्स को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय राहत दी गई है। इससे तेल कंपनियों को अधिक एथेनॉल मिश्रण अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। क्या है एथेनॉल और क्यों है अहम? एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे गन्ना, मक्का, सड़े आलू और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है, जिससे प्रदूषण कम होता है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटती है। भारत सरकार लंबे समय से एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को बढ़ावा दे रही है। आयात बिल घटाने और किसानों को लाभ देने की योजना भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। सरकार का मानना है कि अधिक एथेनॉल मिश्रण से विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी और गन्ना किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलेगा। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी। कीमतों में राहत की उम्मीद नहीं हालांकि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन आम उपभोक्ताओं को फिलहाल पेट्रोल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना नहीं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एथेनॉल की खरीद लागत अभी भी कई मामलों में रिफाइंड पेट्रोल से अधिक है। इसलिए उच्च एथेनॉल मिश्रण के बावजूद खुदरा कीमतों में कमी लाना आसान नहीं होगा। माइलेज और इंजन पर क्या असर? ऑटोमोबाइल उद्योग के अनुसार E20 ईंधन से कुछ पुरानी गाड़ियों में माइलेज में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन इससे वाहन की सुरक्षा या इंजन पर कोई बड़ा खतरा नहीं है। सरकार का मानना है कि भविष्य में अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन भारत की हरित ऊर्जा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेंगे।