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Choksi Extradition to India Cleared

मेहुल चोकसी प्रत्यर्पण केस: भारत वापसी का रास्ता हुआ साफ, बेल्जियम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Mehul Choksi in Belgium court as extradition to India clears major legal hurdle
Mehul Choksi India Extradition Update

पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को भारत लाने की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। बेल्जियम की एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील ने स्पष्ट संकेत दिया है कि चोकसी को भारत प्रत्यर्पित किया जा सकता है।

एंटवर्प कोर्ट ने क्या कहा?

बेल्जियम के एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील ने 3 अप्रैल को दिए अपने फैसले में:

  • चोकसी के भारत प्रत्यर्पण की सिफारिश न्याय मंत्रालय से की
  • कहा कि उस पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे आरोप प्रथम दृष्टया सही बनते हैं
  • उसके “अपहरण” के दावे को खारिज कर दिया

हालांकि, सबूत नष्ट करने से जुड़े एक आरोप को स्थानीय कानून के आधार पर हटा दिया गया।

शरण की मांग भी ठुकराई गई

चोकसी ने बेल्जियम में शरण लेने की कोशिश की थी, लेकिन अदालत ने उसकी इस याचिका को भी खारिज कर दिया। इससे उसके बचाव के विकल्प और सीमित हो गए हैं।

अब आगे क्या?

अब अंतिम फैसला बेल्जियम के न्याय मंत्रालय को लेना है।

  • मंत्रालय आने वाले महीनों में तय करेगा कि चोकसी को भारत भेजा जाए या नहीं
  • भारत सरकार पहले से ही उसके प्रत्यर्पण के लिए प्रयासरत है

गिरफ्तारी और कानूनी प्रक्रिया

  • अप्रैल 2025 में बेल्जियम पुलिस ने चोकसी को एंटवर्प में गिरफ्तार किया था
  • दिसंबर 2025 में बेल्जियम की शीर्ष अदालत ने भी उसकी याचिका खारिज कर दी थी

नीरव मोदी को भी झटका

इस केस से जुड़े एक और आरोपी नीरव मोदी को भी हाल ही में बड़ा झटका लगा है। ब्रिटेन की अदालत ने उसकी प्रत्यर्पण प्रक्रिया को चुनौती देने वाली अपील खारिज कर दी।

क्या मतलब है इस फैसले का?

यह फैसला भारत के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। अगर अंतिम मंजूरी मिलती है, तो चोकसी को भारत लाकर PNB घोटाले में कानूनी कार्रवाई तेज हो सकती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Security personnel patrolling Nepal's Sunsari district after communal violence as curfew remains in force near the India-Nepal border
नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा: भारत सीमा से सटे सुनसरी में कर्फ्यू बढ़ा, पुलिस फायरिंग में 1 की मौत

Nepal Communal Violence: भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के सुनसरी जिले में सांप्रदायिक तनाव के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। दो धार्मिक समुदायों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए फायरिंग की। इस दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि सुरक्षाकर्मियों समेत 12 से अधिक लोग घायल हुए हैं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में अनिश्चितकाल के लिए कर्फ्यू बढ़ा दिया है। कैसे भड़की हिंसा? पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सुनसरी जिले के कप्तानगंज इलाके में दो धार्मिक समुदायों के जुलूस और उत्सव के दौरान विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच झड़प होने लगी। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोली चलाई। स्थानीय मीडिया काठमांडू पोस्ट के अनुसार, फायरिंग में ओम प्रकाश मेहता नामक व्यक्ति की मौत हुई है। कई लोग घायल हिंसा और पुलिस कार्रवाई में सुरक्षाकर्मियों सहित 12 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। प्रधानमंत्री ने जताया दुख नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस की गोली से किसी नागरिक की मौत होना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने मृतक के परिजनों को न्याय और मुआवजा देने का भरोसा दिलाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि घटना की जांच शुरू कर दी गई है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। शांति बनाए रखने की अपील प्रधानमंत्री ने लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी अफवाह, उकसावे या भड़काऊ संदेश पर ध्यान न दें और सामाजिक सौहार्द बनाए रखें। सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और स्थिति सामान्य करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी सुनसरी जिले में सोमवार से लागू कर्फ्यू को अब अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से बिना अनुमति घरों से बाहर नहीं निकलने की अपील की गई है। भारत-नेपाल सीमा से सटे इस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी और कड़ी कर दी गई है।  

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NEET प्रदर्शन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी

कोलकाता, एजेंसियां। NEET (UG) पेपर लीक विवाद को लेकर चल रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने कहा है कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, हिंसा या आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों पर कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है।   सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लिया गया फैसला   पश्चिम बंगाल सरकार का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आया है। अदालत ने NEET प्रदर्शन से जुड़े मामलों में छात्रों के अधिकारों और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए राज्यों को संयम बरतने का निर्देश दिया था।   छात्रों को मिली बड़ी राहत   सरकार के इस निर्णय से उन छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है जो NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के विरोध में सड़कों पर उतरे थे। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल प्रदर्शन करने के आधार पर छात्रों पर कार्रवाई नहीं की जाएगी।   हिंसा करने वालों पर जारी रहेगी कार्रवाई   सरकार ने यह भी साफ किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और कानून तोड़ने वाली गतिविधियों में अंतर किया जाएगा। जिन लोगों पर हिंसा, तोड़फोड़ या अन्य आपराधिक मामलों के आरोप हैं, उनके खिलाफ जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   NEET पेपर लीक बना राष्ट्रीय मुद्दा   NEET पेपर लीक विवाद के बाद देश के कई राज्यों में छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किए हैं। छात्र परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, दोषियों पर कार्रवाई और भविष्य की परीक्षाओं को सुरक्षित बनाने की मांग कर रहे हैं।

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बुधवार को किसानों का आंदोलन तेज हो गया। किसान क्रांति पैदल यात्रा के तहत बड़ी संख्या में किसान मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने की तैयारी में हैं। प्रदर्शनकारी किसानों की दो प्रमुख मांगें हैं—मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी और खाद वितरण में लागू टोकन सिस्टम को समाप्त करना। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कृषि मंत्री से बातचीत बेनतीजा मंगलवार देर रात कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने किसानों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कर आंदोलन खत्म कराने की कोशिश की, लेकिन वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। इसके बाद किसानों ने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का फैसला किया। प्रदर्शनकारी पूरी रात धरने पर बैठे रहे और बुधवार सुबह भी अपने आंदोलन पर डटे रहे। सरकार पर मूंग खरीदी से पीछे हटने का आरोप किसानों का आरोप है कि सरकार ने पहले मूंग की खेती बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया, लेकिन अब खरीद से पीछे हट रही है। उनका कहना है कि इससे किसानों को प्रति एकड़ 10 से 12 हजार रुपये तक का नुकसान हो रहा है। किसानों ने दावा किया कि केंद्र और राज्य सरकार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रही हैं, जबकि नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। आंदोलन की कमान युवा किसानों के हाथ प्रदर्शन में शामिल किसानों का कहना है कि इस बार आंदोलन की अगुवाई Gen-Z और युवा किसान कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह पारंपरिक किसान आंदोलन नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी के किसान अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो भोपाल में भी बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। 25 दिनों से जारी है आंदोलन किसानों के मुताबिक, राजधानी पहुंचने से पहले वे पिछले 25 दिनों से अलग-अलग जिला मुख्यालयों पर धरना दे रहे थे, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद नर्मदापुरम सहित आसपास के 12 जिलों से किसान भोपाल पहुंचे हैं। आठ मांगें, दो सबसे अहम किसान संगठनों ने सरकार के सामने कुल आठ मांगें रखी हैं, लेकिन बातचीत के लिए दो प्रमुख मांगों को प्राथमिकता दी गई है— मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी सुनिश्चित की जाए। खाद वितरण में टोकन प्रणाली समाप्त कर किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराई जाए। कई स्कूलों में छुट्टी, भारी पुलिस बल तैनात किसान आंदोलन को देखते हुए भोपाल के कई स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। मंगलवार को करीब 500 किसान पुलिस बैरिकेड पार कर भोपाल पहुंचे और होशंगाबाद रोड पर धरने पर बैठ गए। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात किया है और किसानों से लगातार बातचीत की कोशिश की जा रही है। सड़क पर बनाया खाना, आंदोलन जारी रखने का ऐलान धरने पर बैठे किसानों ने सड़क किनारे ही आग जलाकर दाल-बाटी बनाई और वहीं भोजन किया। किसानों का कहना है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे लंबे समय तक आंदोलन जारी रखने के लिए तैयार हैं। उनका दावा है कि जरूरत पड़ने पर वे एक महीने तक के राशन का इंतजाम भी कर लेंगे। ट्रैफिक एडवाइजरी जारी किसान आंदोलन के कारण भोपाल के कई इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है। नर्मदापुरम रोड, एमपी नगर, एम्स और मिसरोद क्षेत्र की ओर जाने वाले वाहनों के लिए रूट डायवर्जन लागू किया गया है ताकि शहर में यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे।  

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Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
राष्ट्रीय

PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0

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