राष्ट्रीय

मॉनसून सत्र 2026: आज लोकसभा में पेश होगा एंटी-पेपर लीक बिल, परीक्षा प्रणाली को और सख्त बनाने की तैयारी

ranjan kumar tiwari जुलाई 27, 2026 0
संसद में एंटी-पेपर लीक बिल और मॉनसून सत्र पर चर्चा
Anti Paper Leak Bill Lok Sabha Monsoon Session

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मॉनसून सत्र का आज छठा दिन महत्वपूर्ण रहने वाला है। केंद्र सरकार आज लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (गलत तरीकों से बचाव) अमेंडमेंट बिल, 2026' पेश करेगी। इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए मौजूदा कानूनी प्रावधानों को और मजबूत बनाना है।

 

लोकसभा की कार्यसूची के अनुसार, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह पब्लिक एग्जामिनेशन (गलत तरीकों से बचाव) अधिनियम, 2024 में संशोधन के लिए सदन से अनुमति मांगेंगे। इसके बाद सरकार विधेयक पर चर्चा और उसे पारित कराने का प्रस्ताव भी रखेगी। सरकार का मानना है कि इस संशोधन से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता को और मजबूती मिलेगी।

 

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का विधेयक भी होगा पेश

 

आज के एजेंडे में 'सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अमेंडमेंट बिल, 2026' भी शामिल है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल इस विधेयक को सदन में विचार और पारित कराने के लिए पेश करेंगे। हालांकि, इस पर विपक्ष के विरोध के आसार हैं। सांसद सौगत रे, एन.के. प्रेमचंद्रन और डीन कुरियाकोस राष्ट्रपति द्वारा मई 2026 में जारी अध्यादेश को निरस्त करने संबंधी वैधानिक प्रस्ताव भी पेश कर सकते हैं।

 

एंटी-पेपर लीक बिल पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

 

समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान करे। वहीं, तृणमूल कांग्रेस की सांसद सायोनी घोष ने उम्मीद जताई कि एंटी-पेपर लीक बिल पर सदन में सार्थक और विस्तृत चर्चा होगी।

 

विपक्ष ने उठाए अन्य अहम मुद्दे

 

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने राजनीतिक दलबदल पर नए कानून की आवश्यकता को लेकर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। वहीं, डीएमके सांसद टी.आर. बालू ने नीट परीक्षा पर तत्काल प्रतिबंध लगाने और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग की जांच की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया है।

 

संसद के आज के सत्र में परीक्षा सुधार, न्यायपालिका से जुड़े विधेयकों और विपक्ष द्वारा उठाए गए विभिन्न मुद्दों को लेकर तीखी बहस होने की संभावना है।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

राष्ट्रीय

View more
Supreme Court of India hearing petitions on police action during Jantar Mantar student protests
Jantar Mantar Protest: छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई के मामलों पर SC करेगा सुनवाई, पूरे देश के लिए SOP बनाने पर विचार

Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सोमवार (27 जुलाई) को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मंगलवार (28 जुलाई) को इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में पूरे देश में विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure-SOP) तैयार करने पर विचार किया जाएगा। दिल्ली से बिहार तक के मामलों पर होगी संयुक्त सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष दिल्ली के जंतर-मंतर छात्र आंदोलन में पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं का उल्लेख किया गया। इस दौरान वकीलों ने बताया कि बिहार समेत अन्य राज्यों में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले भी अदालत के समक्ष लाए गए हैं। याचिकाओं में दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज के अलावा बिहार के सिवान में कथित तौर पर AK-47 के इस्तेमाल जैसे मामलों का भी जिक्र किया गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों को एक साथ सूचीबद्ध कर संयुक्त सुनवाई करने का निर्देश दिया। पूरे देश के लिए SOP बनाने पर सुप्रीम कोर्ट का संकेत सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए पूरे देश में एक समान SOP की आवश्यकता पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि सभी राज्यों से जुड़े मामलों पर विचार करने के बाद यह देखा जाएगा कि भविष्य में ऐसे हालात से निपटने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं या नहीं। 'शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार' मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का एक मूल अधिकार है और नागरिकों को इसके लिए उचित स्थान और अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल विरोध प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस की कठोर कार्रवाई या आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग को उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत इस बात की भी जांच करेगी कि पुलिस द्वारा अपनाए गए कदम कानून और संविधान के अनुरूप थे या नहीं। पुलिसकर्मियों की सुरक्षा पर भी होगी सुनवाई सुनवाई के दौरान घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की ओर से भी पक्ष रखा गया। उनके वकील ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया, जिससे कई जवान घायल हुए। उन्होंने मांग की कि अदालत पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर भी विचार करे। इस पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि "हर जीवन महत्वपूर्ण है।" उन्होंने कहा कि अदालत प्रदर्शनकारियों के अधिकारों के साथ-साथ ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था और उनके संरक्षण से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा करेगी। मंगलवार को होगी अहम सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित याचिकाओं को एक साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। मंगलवार (28 जुलाई) को होने वाली सुनवाई में अदालत प्रदर्शनकारियों के अधिकार, पुलिस की जवाबदेही, कानून-व्यवस्था बनाए रखने की प्रक्रिया और भविष्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर SOP तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार करेगी। यह सुनवाई देशभर में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई के लिए भविष्य की कानूनी रूपरेखा तय करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।  

kalpana जुलाई 27, 2026 0
Nandan Nilekani leading a high-powered task force for Indian exam system reforms

Indian Exam System Reform: परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी, नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में बनी 6 सदस्यीय टास्क फोर्स

Indian students protesting peacefully at Jantar Mantar during a youth movement

जंतर-मंतर ने दुनिया को दिखाया नया भारत, भारतीय Gen-Z ने विरोध की बदल दी परिभाषा

Rahul Gandhi raises questions in Parliament over alleged police action during CJP march

CJP मार्च विवाद: राहुल गांधी ने अमित शाह से पूछा- छात्रों पर कार्रवाई का आदेश किसने दिया?

Opposition MPs protest in Parliament during Monsoon Session over NEET paper leak issue
Parliament Session: हंगामे के बीच लोकसभा-राज्यसभा दोपहर 12 बजे तक स्थगित, पेपर लीक बिल पर आज होगी अहम चर्चा

Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मानसून सत्र में सोमवार (27 जुलाई) को शुरुआत से ही भारी हंगामा देखने को मिला। NEET-UG पेपर लीक मामले, छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और जंतर-मंतर लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। दूसरी ओर, केंद्र सरकार आज पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने जा रही है, जिसका उद्देश्य पेपर लीक पर और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन संसद के मकर द्वार पर कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन के सांसदों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए। विपक्ष ने 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई को मुद्दा बनाते हुए गृह मंत्री से जवाब और पूरे मामले पर संसद में चर्चा की मांग की। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस तथा पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की। पवन खेड़ा ने सरकार से मांगी माफी कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि यदि छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ है तो सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने परीक्षा सुधारों के लिए गठित नई टास्क फोर्स पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पुराने सुझावों को लागू करने के बजाय नई समितियां बनाकर समय बिता रही है। राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट पर सरकार से सवाल सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने सरकार से पूछा कि दो वर्ष पहले गठित राधाकृष्णन समिति की 184 पन्नों की रिपोर्ट का क्या हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नई टास्क फोर्स बनाकर मूल मुद्दों से ध्यान भटका रही है, जबकि जरूरत परीक्षा प्रणाली में वास्तविक सुधार लागू करने की है। पेपर लीक विधेयक पर सरकार का जोर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि आज संसद में पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून वाला विधेयक पेश किया जाएगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि हंगामे की बजाय इस महत्वपूर्ण कानून पर गंभीर चर्चा करें ताकि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके। TMC और अन्य दलों की प्रतिक्रिया टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का स्वागत किया, लेकिन कहा कि विपक्ष की सभी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से माफी और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के मामले में जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई। वहीं, टीएमसी सांसद महुआ माजी ने कहा कि नया कानून पूरी तरह दोषमुक्त होना चाहिए ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और निर्दोष छात्रों को परेशानी का सामना न करना पड़े। बीजेपी ने विधेयक का किया समर्थन बीजेपी सांसद अभिजीत गांगुली ने पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) विधेयक, 2026 का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने तेजी से सही कदम उठाया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सदन में इस पर सकारात्मक चर्चा होगी और देश को मजबूत परीक्षा व्यवस्था देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाएगा। आज संसद में पेश होंगे दो अहम विधेयक आज के संसदीय कार्यसूची में दो महत्वपूर्ण विधेयक शामिल हैं— लोकसभा: पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) विधेयक, 2026, जिसे केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह पेश करेंगे। राज्यसभा: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राष्ट्रीय सम्मान का अपमान (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करेंगे, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान से जुड़े कानून को और प्रभावी बनाना है। संसद में टकराव के आसार बरकरार हालांकि CJP ने अपनी प्रमुख मांगें स्वीकार होने के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया है, लेकिन कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे NEET विवाद, छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और परीक्षा सुधारों के मुद्दे पर सरकार को संसद के भीतर और बाहर घेरते रहेंगे। ऐसे में दिनभर संसद में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव जारी रहने के आसार हैं।  

kalpana जुलाई 27, 2026 0
NDA MPs welcome former Education Minister Dharmendra Pradhan at Parliament amid NEET controversy

'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद' के नारों से गूंजा संसद परिसर, NDA सांसदों ने किया जोरदार स्वागत

Badaun School Fire

बदायूं के प्राथमिक स्कूल में गैस सिलिंडर में लगी आग, 20 बच्चों को सुरक्षित निकाला; पुलिस की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

CJP Protest

CJP Protest Over: रातभर चला सफाई अभियान, सुबह सामान्य हुई राजधानी दिल्ली

देशभर में भारी बारिश का अलर्ट, हिमाचल में बादल फटने और असम में बाढ़ की स्थिति
Weather Alert: देशभर में अगले 2-3 दिन भारी बारिश का अलर्ट, हिमाचल में बादल फटा; असम की बाढ़ से 68 की मौत

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश के कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। हिमाचल प्रदेश में बादल फटने, असम में भीषण बाढ़ और गुजरात समेत कई राज्यों में जलभराव की स्थिति के बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले दो से तीन दिनों तक उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।   हिमाचल में बादल फटने से सात गांवों का संपर्क टूटा   हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले की मयाड़ घाटी में शनिवार रात बादल फटने से भारी तबाही हुई। तेज बहाव में एक पुल और सड़क बह गई, जिससे सात गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट गया। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बहाली का काम शुरू कर दिया है।   असम में बाढ़ से 68 लोगों की मौत   असम में बाढ़ की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। राज्य में बाढ़ से अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लाखों लोग प्रभावित हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से फोन पर बात कर बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली। सोनोवाल फिलहाल राज्य के दौरे पर राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।   गुजरात और दादरा नगर हवेली में सेना संभाल रही मोर्चा   गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली में लगातार बारिश के कारण कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। राहत और बचाव कार्यों के लिए सेना को तैनात किया गया है। अब तक 790 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।   आईएमडी ने जारी किया भारी बारिश का अलर्ट   मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों तक उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। विभाग ने निचले इलाकों में जलभराव, भूस्खलन और नदियों के जलस्तर बढ़ने की आशंका जताते हुए लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की है।   प्रशासन अलर्ट मोड पर   लगातार खराब मौसम को देखते हुए कई राज्यों में आपदा प्रबंधन दल, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने का अभियान लगातार जारी है।    

ranjan kumar tiwari जुलाई 27, 2026 0
Indian Idol 16 Winner

कौन हैं इंडियन आइडल 16 की विनर ज्योतिर्मयी नायक? ओडिशा की बेटी ने रचा इतिहास, कैंसर मरीजों की भी कर चुकी हैं मदद

जहरीले कफ सिरप मामले में केंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई और दवा इकाइयों का निरीक्षण

जहरीले कफ सिरप पर केंद्र की बड़ी कार्रवाई, 950 से ज्यादा दवा निर्माण इकाइयों पर हुई सख्ती

जौनपुर हत्याकांड में पति की हत्या के आरोप में गिरफ्तार पत्नी वंदना और प्रेमी राजेश

जौनपुर हत्याकांड: पत्नी और प्रेमी ने मिलकर की पति की हत्या, साक्ष्य मिटाने के लिए रची साजिश

0 Comments

Top week

Explosion reported in Iran after US airstrikes near Bandar Abbas
दुनिया

ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी बम, बंदर अब्बास समेत कई शहरों में धमाके; मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 21, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?