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Weather Alert: देशभर में अगले 2-3 दिन भारी बारिश का अलर्ट, हिमाचल में बादल फटा; असम की बाढ़ से 68 की मौत

ranjan kumar tiwari जुलाई 27, 2026 0
देशभर में भारी बारिश का अलर्ट, हिमाचल में बादल फटने और असम में बाढ़ की स्थिति
India Weather Alert Heavy Rain Himachal Cloudburst Assam Flood

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश के कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। हिमाचल प्रदेश में बादल फटने, असम में भीषण बाढ़ और गुजरात समेत कई राज्यों में जलभराव की स्थिति के बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले दो से तीन दिनों तक उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

 

हिमाचल में बादल फटने से सात गांवों का संपर्क टूटा

 

हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले की मयाड़ घाटी में शनिवार रात बादल फटने से भारी तबाही हुई। तेज बहाव में एक पुल और सड़क बह गई, जिससे सात गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट गया। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बहाली का काम शुरू कर दिया है।

 

असम में बाढ़ से 68 लोगों की मौत

 

असम में बाढ़ की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। राज्य में बाढ़ से अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लाखों लोग प्रभावित हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से फोन पर बात कर बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली। सोनोवाल फिलहाल राज्य के दौरे पर राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।

 

गुजरात और दादरा नगर हवेली में सेना संभाल रही मोर्चा

 

गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली में लगातार बारिश के कारण कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। राहत और बचाव कार्यों के लिए सेना को तैनात किया गया है। अब तक 790 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।

 

आईएमडी ने जारी किया भारी बारिश का अलर्ट

 

मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों तक उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। विभाग ने निचले इलाकों में जलभराव, भूस्खलन और नदियों के जलस्तर बढ़ने की आशंका जताते हुए लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की है।

 

प्रशासन अलर्ट मोड पर

 

लगातार खराब मौसम को देखते हुए कई राज्यों में आपदा प्रबंधन दल, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने का अभियान लगातार जारी है।

 

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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Nandan Nilekani leading a high-powered task force for Indian exam system reforms
Indian Exam System Reform: परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी, नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में बनी 6 सदस्यीय टास्क फोर्स

Exam Reform Task Force: देश में लगातार सामने आए पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली पर उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए 6 सदस्यीय हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के गठन का ऐलान किया है। इस समिति की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक और आधार परियोजना के प्रमुख वास्तुकार नंदन नीलेकणी करेंगे। सरकार का कहना है कि समिति परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों का रोडमैप तैयार करेगी और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को अधिक मजबूत बनाने के लिए सुझाव देगी। नंदन नीलेकणी को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी डिजिटल गवर्नेंस और बड़े तकनीकी प्रोजेक्ट्स का लंबा अनुभव रखने वाले नंदन नीलेकणी इस टास्क फोर्स का नेतृत्व करेंगे। आधार जैसी दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान परियोजना को सफलतापूर्वक लागू करने का अनुभव उनके पास है। सरकार चाहती है कि भविष्य की परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, उम्मीदवारों की पहचान, परीक्षा संचालन, डेटा सुरक्षा और परिणाम प्रक्रिया में आधुनिक तकनीकों का अधिक उपयोग किया जाए, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। समिति में शामिल हैं देश के शीर्ष विशेषज्ञ सरकार ने इस टास्क फोर्स में तकनीक, सुरक्षा, शिक्षा और प्रशासन से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया है। समिति के प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं— नंदन नीलेकणी – अध्यक्ष, इंफोसिस के सह-संस्थापक और आधार परियोजना के प्रमुख। डॉ. एस. सोमनाथ – इसरो (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष, जिन्हें बड़े तकनीकी और वैज्ञानिक प्रोजेक्ट्स का व्यापक अनुभव है। तपन डेका – पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) निदेशक, जो परीक्षा सुरक्षा और पेपर लीक रोकने के उपायों पर सुझाव देंगे। प्रो. वी. कामकोटी – निदेशक, IIT मद्रास, जो साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर सिस्टम के विशेषज्ञ हैं। अनीता करवाल – पूर्व CBSE अध्यक्ष और पूर्व स्कूल शिक्षा सचिव, जिन्होंने नई शिक्षा नीति (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे (NCF) के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमृत लाल मीणा – वरिष्ठ IAS अधिकारी और बिहार के पूर्व मुख्य सचिव, जिन्हें बड़े प्रशासनिक ढांचे के संचालन का लंबा अनुभव है। क्या होंगे टास्क फोर्स के प्रमुख कार्य? सरकार के अनुसार यह समिति परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक, प्रशासनिक और तकनीकी सुधारों पर काम करेगी। टास्क फोर्स निम्नलिखित पहलुओं पर अपनी सिफारिशें देगी— प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को और मजबूत बनाना। पेपर लीक रोकने के लिए नई तकनीकों का उपयोग। उम्मीदवारों की डिजिटल पहचान सत्यापन प्रणाली विकसित करना। परीक्षा संचालन को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना। साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा के मानकों को मजबूत करना। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार और संस्थागत क्षमता बढ़ाना। परीक्षा प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक डिजिटल तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं पर सुझाव देना। पेपर लीक के बाद सरकार की बड़ी पहल पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़े असर को देखते हुए सरकार अब परीक्षा व्यवस्था में दीर्घकालिक और संस्थागत सुधार लागू करने की तैयारी कर रही है। सरकार का मानना है कि केवल सख्त कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से इतना मजबूत बनाना होगा कि प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, डिजिटल सुरक्षा और परीक्षा संचालन में किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना न्यूनतम हो। भविष्य की परीक्षा प्रणाली तय करेगी समिति सरकार ने संकेत दिए हैं कि टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर भविष्य की परीक्षा प्रणाली, सुरक्षा मानकों और संचालन से जुड़े नए नियम तैयार किए जाएंगे। उम्मीद की जा रही है कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद NTA सहित देश की प्रमुख परीक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा।  

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'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद' के नारों से गूंजा संसद परिसर, NDA सांसदों ने किया जोरदार स्वागत

Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार (27 जुलाई) को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके धर्मेंद्र प्रधान का संसद परिसर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने जोरदार स्वागत किया। मकर द्वार पर पहले से मौजूद सांसदों ने उन्हें पारंपरिक पाग पहनाकर सम्मानित किया और 'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद' के नारों के बीच संसद भवन तक उनके साथ पहुंचे। इस दौरान संसद परिसर में कुछ देर के लिए राजनीतिक उत्साह और शक्ति प्रदर्शन का माहौल देखने को मिला। पारंपरिक सम्मान के साथ संसद पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान न्यूज एजेंसी एएनआई द्वारा जारी वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही धर्मेंद्र प्रधान संसद परिसर पहुंचे, भाजपा और एनडीए के सांसदों ने तालियों और नारों के साथ उनका स्वागत किया। उन्हें पारंपरिक पाग पहनाकर सम्मानित किया गया और सांसदों ने उन्हें घेरकर संसद भवन के अंदर तक पहुंचाया। इस दौरान समर्थक सांसद लगातार 'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद' के नारे लगाते रहे। बताया जा रहा है कि यह स्वागत ऐसे समय हुआ, जब नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बीच दो दिन पहले ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। संसद परिसर में सत्ता और विपक्ष आमने-सामने धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत के तुरंत बाद संसद परिसर में विपक्षी दलों ने भी प्रदर्शन शुरू कर दिया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी सांसद तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। 'शिक्षा चोरी' के नारे, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं ने संसद परिसर में 'शिक्षा चोरी' के नारे लगाए। विपक्ष का आरोप था कि सरकार परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में विफल रही है, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। राहुल गांधी ने छात्रों पर कार्रवाई का उठाया मुद्दा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार के पास प्रदर्शन करते हुए 20 जुलाई को NEET-UG पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों के हाथों में एक बड़ा बैनर था, जिस पर लिखा था— "वोट चोरी, पेपर चोरी, चंदा चोरी" विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह से छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई को लेकर जवाब देने की मांग की। संसद का पहला दिन रहा राजनीतिक टकराव के नाम मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी और विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले। एक ओर एनडीए सांसदों ने धर्मेंद्र प्रधान के समर्थन में एकजुटता दिखाई, वहीं विपक्ष ने NEET पेपर लीक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।  

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Indian Idol 16 Winner
कौन हैं इंडियन आइडल 16 की विनर ज्योतिर्मयी नायक? ओडिशा की बेटी ने रचा इतिहास, कैंसर मरीजों की भी कर चुकी हैं मदद

मुंबई, एजेंसियां। लोकप्रिय सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडल 16 को अपनी नई विजेता मिल गई है। ओडिशा की 24 वर्षीय ज्योतिर्मयी नायक ने शानदार प्रदर्शन के दम पर ट्रॉफी अपने नाम कर इतिहास रच दिया। वह इंडियन आइडल की लगातार दूसरी और कुल दूसरी महिला विजेता बनी हैं। उनसे पहले सीजन 15 का खिताब मानषी घोष ने जीता था।   ज्योतिर्मयी नायक ओडिशा की पहली सिंगर हैं जिन्होंने इंडियन आइडल का खिताब अपने नाम किया है। शो में आने से पहले ही वह ओडिशा के संगीत जगत में अपनी अलग पहचान बना चुकी थीं। वह एक म्यूजिक थेरेपिस्ट भी हैं और संगीत के जरिए कैंसर मरीजों की मदद कर चुकी हैं।   शो जीतने के बाद ज्योतिर्मयी ने कहा कि उनका सपना एक सफल प्लेबैक सिंगर बनने का है। उन्होंने इच्छा जताई कि भविष्य में वह दीपिका पादुकोण और आलिया भट्ट जैसी अभिनेत्रियों के लिए अपनी आवाज देना चाहती हैं।   इंडियन आइडल 16 का खिताब जीतने पर ज्योतिर्मयी को 20 लाख रुपये की प्राइज मनी और ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। उनके यूट्यूब चैनल पर 2 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं, जहां वह अपने गायन के 200 से ज्यादा वीडियो साझा कर चुकी हैं।

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