Vande Bharat Donor Heart Transport: गुजरात में वंदे भारत एक्सप्रेस ने एक बार फिर समय के खिलाफ चल रही जिंदगी की जंग में अहम भूमिका निभाई है। पहली बार अंकलेश्वर रेलवे स्टेशन पर वंदे भारत एक्सप्रेस को विशेष रूप से रोका गया, ताकि एक डोनर हार्ट को बिना देरी के अहमदाबाद स्थित यूएन मेहता अस्पताल पहुंचाया जा सके। ग्रीन कॉरिडोर और हाई-स्पीड रेल नेटवर्क की मदद से यह महत्वपूर्ण अंग तय समय के भीतर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां मरीज का हार्ट ट्रांसप्लांट किया जाएगा।
डोनर हार्ट अंकलेश्वर के स्मृति जयाबेन मोदी मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल से प्राप्त किया गया। हार्ट ट्रांसप्लांट में हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है, इसलिए प्रशासन और पुलिस ने अस्पताल से रेलवे स्टेशन तक विशेष ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया।
एम्बुलेंस बिना किसी ट्रैफिक बाधा के सीधे स्टेशन पहुंची, जहां डॉक्टरों की विशेष टीम पहले से वंदे भारत एक्सप्रेस में मौजूद थी। इसके बाद ट्रेन निर्धारित गति से अहमदाबाद के लिए रवाना हुई, जिससे डोनर हार्ट को सुरक्षित और समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सका।
यह लगातार तीन दिनों में दूसरी बार है जब वंदे भारत एक्सप्रेस ने अंग प्रत्यारोपण मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे पहले सूरत से अहमदाबाद तक भी एक डोनर हार्ट इसी ट्रेन के जरिए पहुंचाया गया था।
भारतीय रेलवे के इतिहास में हाल के दिनों में पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस का इस तरह अंग प्रत्यारोपण के लिए लगातार उपयोग किया जा रहा है, जिससे आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में रेलवे की नई भूमिका सामने आई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी डोनर का हृदय शरीर से निकालने के बाद उसे सीमित समय के भीतर दूसरे मरीज तक पहुंचाना बेहद जरूरी होता है। ऐसे मामलों में समय की थोड़ी-सी देरी भी ट्रांसप्लांट की सफलता को प्रभावित कर सकती है।
ऐसे में वंदे भारत एक्सप्रेस की तेज रफ्तार, समय की पाबंदी और प्रशासन की त्वरित व्यवस्था ने इस मिशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
डॉक्टरों के अनुसार, अहमदाबाद के यूएन मेहता अस्पताल में इस डोनर हार्ट से 78वां हार्ट ट्रांसप्लांट किया जाएगा। अस्पताल की विशेषज्ञ टीम पूरे प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को अंजाम देगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीन कॉरिडोर, आधुनिक परिवहन व्यवस्था और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय से अंग प्रत्यारोपण की सफलता की संभावना बढ़ती है। वंदे भारत एक्सप्रेस का इस तरह उपयोग भविष्य में भी आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए एक प्रभावी मॉडल साबित हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
कानपुर। सावन के पहले सोमवार के मौके पर कानपुर के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। रविवार देर रात मंदिरों के कपाट खुलते ही शिवभक्तों ने ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से माहौल भक्तिमय कर दिया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित किए और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। रात से ही मंदिरों में लगी भक्तों की कतार सावन सोमवार पर बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालु देर रात से ही मंदिरों के बाहर पहुंचने लगे थे। शहर के प्रमुख शिवालयों में लंबी कतारें देखने को मिलीं। कानपुर के साथ-साथ शुक्लागंज, उन्नाव और कानपुर देहात से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आनंदेश्वर महादेव मंदिर, खेरेश्वर, वनखंडेश्वर, जागेश्वर और सिद्धनाथ मंदिर पहुंचे। आनंदेश्वर मंदिर में उमड़ी सबसे ज्यादा भीड़ कानपुर के प्रसिद्ध बाबा आनंदेश्वर महादेव मंदिर में रविवार रात 12 बजे से ही भक्तों की कतार लगनी शुरू हो गई थी। रात करीब दो बजे मंदिर के कपाट दर्शन के लिए खोले गए। इसके बाद पूरी रात भजन-कीर्तन और शिव नाम के जयघोष के बीच भक्तों ने बाबा का जलाभिषेक किया। सिद्धनाथ और वनखंडेश्वर मंदिर में भी दिखा उत्साह सिद्धनाथ महादेव मंदिर में तड़के तीन बजे मंगला आरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू किए गए। यहां भक्तों ने सिद्धनाथ बाबा के साथ बुद्धेश्वर बाबा के भी दर्शन किए। वहीं, पीरोड स्थित वनखंडेश्वर महादेव मंदिर में भी रात से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई थी। भोर चार बजे कपाट खुलते ही भक्तों ने जलाभिषेक किया। जागेश्वर मंदिर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम नवाबगंज स्थित जागेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं। मंगला आरती के बाद दर्शन शुरू हुए। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए नागरिक सुरक्षा कोर के करीब 300 स्वयंसेवक तैनात रहे, जिन्होंने बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं की मदद की। प्रशासन ने संभाली सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सावन सोमवार को देखते हुए शहर के प्रमुख मंदिरों और आसपास के क्षेत्रों में प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। नागेश्वर मंदिर, भोलेश्वर मंदिर और कैलाश मंदिर समेत अन्य शिवालयों में भी दिनभर श्रद्धालुओं का दर्शन और जलाभिषेक का सिलसिला जारी रहा।
CJP Meeting: NEET-UG आंदोलन के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अपने अगले राजनीतिक और संगठनात्मक कदमों की तैयारी में जुट गई है। पार्टी ने 5 अगस्त को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में शीर्ष नेताओं और प्रमुख पदाधिकारियों की अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में जंतर-मंतर पर चले लंबे आंदोलन के बाद संगठन की आगे की रणनीति, विस्तार और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। अभिजीत दीपके के आवास पर होगी बैठक पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैठक CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के आवास पर आयोजित होगी। इसमें पार्टी के शीर्ष नेता, प्रमुख पदाधिकारी और विभिन्न राज्यों से जुड़े प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक का उद्देश्य आंदोलन के अनुभवों की समीक्षा करना और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करना है। जंतर-मंतर आंदोलन के बाद लिया जाएगा फीडबैक दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने तक चले आंदोलन के बाद पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों को कुछ समय परिवार के साथ बिताने की सलाह दी थी। इसी दौरान वरिष्ठ पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई थी कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में छात्रों, युवाओं और स्वयंसेवकों से संवाद कर उनकी राय और सुझाव जुटाएं। बताया जा रहा है कि बैठक में इन्हीं सुझावों के आधार पर संगठन की आगे की दिशा और अभियान तय किए जाएंगे। बैठक के बाद होगी प्रेस कॉन्फ्रेंस 5 अगस्त को बैठक समाप्त होने के तुरंत बाद CJP प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी। इसमें पार्टी नेतृत्व आंदोलन के बाद की रणनीति, आगामी कार्यक्रमों और संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की आधिकारिक घोषणा करेगा। माना जा रहा है कि प्रेस वार्ता में पार्टी के विस्तार और भविष्य के अभियानों को लेकर भी जानकारी दी जा सकती है। फ्रेंडशिप डे पर छात्रों से मिले अभिजीत दीपके बैठक से पहले CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने आवास पर छात्रों, स्थानीय नागरिकों और आसपास के जिलों से आए समर्थकों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बच्चों और युवाओं के साथ 'फ्रेंडशिप डे' भी मनाया और उनसे बातचीत कर आंदोलन से जुड़े अनुभव साझा किए। आंदोलन के बाद संगठनात्मक तैयारी तेज राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NEET आंदोलन के बाद यह बैठक CJP के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी अब आंदोलन के अनुभवों को संगठनात्मक विस्तार और भविष्य की रणनीति में बदलने की कोशिश कर रही है। ऐसे में 5 अगस्त की बैठक और उसके बाद होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
Kerala Rain Alert: केरल में मानसून एक बार फिर जानलेवा साबित हो रहा है। राज्य में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण भूस्खलन (लैंडस्लाइड), बाढ़ और मलबा खिसकने की घटनाओं में अब तक कम से कम छह लोगों की मौत हो चुकी है। कई इलाकों में लोगों के लापता होने की आशंका है, जबकि राहत एवं बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चला रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य के कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। कई इलाके जलमग्न, राहत अभियान जारी भारी बारिश के कारण कन्नूर जिले के चेंगलाई समेत कई निचले इलाके पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ है और कई गांवों का संपर्क टूट गया है। प्रशासन ने एनडीआरएफ, फायर एंड रेस्क्यू और स्थानीय एजेंसियों को राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। इन जिलों में IMD का रेड अलर्ट भारतीय मौसम विभाग ने इडुक्की, कोट्टायम, पथानमथिट्टा, त्रिशूर, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग ने अगले कुछ घंटों में बेहद भारी बारिश, गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है। मौसम विभाग ने लोगों से पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की है। आखिर हर मानसून में क्यों बढ़ जाता है लैंडस्लाइड का खतरा? विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार केवल एक दिन की तेज बारिश नहीं, बल्कि लगातार कई दिनों तक हुई वर्षा ने मिट्टी को पूरी तरह पानी से संतृप्त कर दिया था। इसके बाद अचानक हुई भारी बारिश ने पहाड़ियों की ढलानों को कमजोर कर दिया, जिससे कई स्थानों पर भूस्खलन हो गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब मिट्टी अपनी पानी सोखने की क्षमता से अधिक पानी जमा कर लेती है, तो उसका भार बढ़ जाता है और वह ढलानों पर टिक नहीं पाती। ऐसे में पूरी पहाड़ी का हिस्सा अचानक नीचे खिसक जाता है। पश्चिमी घाट की भौगोलिक बनावट भी बड़ी वजह केरल का अधिकांश पहाड़ी इलाका पश्चिमी घाट में स्थित है, जिसे भूस्खलन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। यहां कठोर चट्टानों के ऊपर ढीली मिट्टी की परत होती है। लगातार बारिश का पानी मिट्टी के भीतर जाकर चट्टानों तक पहुंचता है, जिससे दोनों परतों के बीच पकड़ कमजोर पड़ जाती है और पूरी ढलान खिसक जाती है। इसके अलावा अनियोजित निर्माण, वनों की कटाई, सड़क परियोजनाएं, खनन गतिविधियां और पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ता शहरीकरण भी लैंडस्लाइड के खतरे को बढ़ा रहे हैं। वायनाड त्रासदी के बाद भी बरकरार खतरा साल 2024 में वायनाड में हुए विनाशकारी भूस्खलन ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उस घटना के बाद संवेदनशील इलाकों की पहचान और सुरक्षा उपायों को लेकर कई सिफारिशें की गई थीं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अभी भी जोखिम वाले क्षेत्रों में वैज्ञानिक योजना, निर्माण पर सख्त नियंत्रण, वनों का संरक्षण और आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम को पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। विशेषज्ञों की चेतावनी भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में अनियंत्रित निर्माण और पर्यावरणीय नुकसान पर रोक नहीं लगाई गई, तो हर मानसून के दौरान केरल में इस तरह की त्रासदियां दोहराने का खतरा बना रहेगा। इसलिए मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन, समय पर निकासी और आपदा प्रबंधन की बेहतर तैयारी ही जान-माल के नुकसान को कम कर सकती है।