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सावन के पहले सोमवार पर कानपुर के शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, 'हर-हर महादेव' से गूंजा शहर

anjali kumari अगस्त 3, 2026 0
Sawan First Monday
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कानपुर। सावन के पहले सोमवार के मौके पर कानपुर के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। रविवार देर रात मंदिरों के कपाट खुलते ही शिवभक्तों ने ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से माहौल भक्तिमय कर दिया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित किए और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

 

रात से ही मंदिरों में लगी भक्तों की कतार

 

सावन सोमवार पर बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालु देर रात से ही मंदिरों के बाहर पहुंचने लगे थे। शहर के प्रमुख शिवालयों में लंबी कतारें देखने को मिलीं। कानपुर के साथ-साथ शुक्लागंज, उन्नाव और कानपुर देहात से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आनंदेश्वर महादेव मंदिर, खेरेश्वर, वनखंडेश्वर, जागेश्वर और सिद्धनाथ मंदिर पहुंचे।

 

आनंदेश्वर मंदिर में उमड़ी सबसे ज्यादा भीड़

 

कानपुर के प्रसिद्ध बाबा आनंदेश्वर महादेव मंदिर में रविवार रात 12 बजे से ही भक्तों की कतार लगनी शुरू हो गई थी। रात करीब दो बजे मंदिर के कपाट दर्शन के लिए खोले गए। इसके बाद पूरी रात भजन-कीर्तन और शिव नाम के जयघोष के बीच भक्तों ने बाबा का जलाभिषेक किया।

 

सिद्धनाथ और वनखंडेश्वर मंदिर में भी दिखा उत्साह

 

सिद्धनाथ महादेव मंदिर में तड़के तीन बजे मंगला आरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू किए गए। यहां भक्तों ने सिद्धनाथ बाबा के साथ बुद्धेश्वर बाबा के भी दर्शन किए। वहीं, पीरोड स्थित वनखंडेश्वर महादेव मंदिर में भी रात से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई थी। भोर चार बजे कपाट खुलते ही भक्तों ने जलाभिषेक किया।

 

जागेश्वर मंदिर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम

 

नवाबगंज स्थित जागेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं। मंगला आरती के बाद दर्शन शुरू हुए। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए नागरिक सुरक्षा कोर के करीब 300 स्वयंसेवक तैनात रहे, जिन्होंने बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं की मदद की।

 

प्रशासन ने संभाली सुरक्षा और यातायात व्यवस्था

 

सावन सोमवार को देखते हुए शहर के प्रमुख मंदिरों और आसपास के क्षेत्रों में प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। नागेश्वर मंदिर, भोलेश्वर मंदिर और कैलाश मंदिर समेत अन्य शिवालयों में भी दिनभर श्रद्धालुओं का दर्शन और जलाभिषेक का सिलसिला जारी रहा।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Kunal Kamra Bengaluru show cancelled
विरोध के बीच कुणाल कामरा ने रद्द किए बेंगलुरु के स्टैंड-अप शो

बेंगलुरु, एजेंसियां। स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड में प्रस्तावित अपने स्टैंड-अप शो रद्द कर दिए हैं। पुलिस के अनुसार, हिंदुत्ववादी संगठनों के विरोध के बाद कामरा ने स्वयं व्हाइटफील्ड थाने पहुंचकर अधिकारियों को कार्यक्रम रद्द करने की जानकारी दी।   शिकायत में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई गई थी   पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं के विरोध को देखते हुए कुणाल कामरा ने शो आयोजित नहीं करने का फैसला किया। इससे पहले हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति ने बेंगलुरु पुलिस को शिकायत देकर तीन अगस्त को यूआरयू व्हाइटफील्ड में प्रस्तावित कार्यक्रम रद्द करने की मांग की थी।   धार्मिक भावनाएं आहत करने का लगाया आरोप   समिति ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि कुणाल कामरा ने अपने कार्यक्रमों में हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया है। संगठन ने दावा किया कि शो होने की स्थिति में कानून-व्यवस्था और धार्मिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। इसी विरोध के बीच कॉमेडियन ने अपना कार्यक्रम रद्द करने का निर्णय लिया।

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नौ साल बाद भी एनटीए का अपना परीक्षा केंद्र नहीं बना

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) लगातार परीक्षा सुधारों के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई फैसले अब भी अधूरे पड़े हैं। एनटीए के गठन के करीब नौ साल बाद भी एजेंसी अपना एक भी स्थायी परीक्षा केंद्र नहीं बना पाई है और आज भी परीक्षाओं के लिए किराये के केंद्रों पर निर्भर है।   2017 में 500 परीक्षा केंद्र बनाने का हुआ था फैसला   केंद्र सरकार ने वर्ष 2017 में एनटीए के गठन को मंजूरी देते समय देशभर में परीक्षार्थियों की संख्या को देखते हुए करीब 500 कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र बनाने की योजना बनाई थी। इन केंद्रों को तहसील और जिला स्तर तक विकसित किया जाना था, ताकि ग्रामीण और दूरदराज के छात्रों को भी बेहतर सुविधा मिल सके। हालांकि, करीब नौ साल बाद भी यह योजना जमीन पर नहीं उतर सकी है।   नीट विवाद के बाद उठे थे सुधारों पर सवाल   नीट पेपर लीक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के बाद एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थायी परीक्षा केंद्र और बेहतर निगरानी व्यवस्था पहले से होती तो पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती थी। इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति ने भी परीक्षा केंद्रों के निर्माण की सिफारिश की थी, लेकिन यह प्रस्ताव अभी तक लागू नहीं हो पाया है।   कई अन्य सुधार भी अब तक अधूरे   एनटीए को मजबूत बनाने के लिए कैबिनेट ने कई अन्य योजनाओं को भी मंजूरी दी थी, जिनमें शासी मंडल, अलग-अलग वर्टिकल की स्थापना, सरकारी स्कूल-कॉलेजों में परीक्षा भवन तैयार करना और मोबाइल टेस्ट सेंटर जैसी योजनाएं शामिल थीं। इनमें से कई प्रस्ताव अभी भी लंबित हैं।   जेईई मेन को छोड़ किसी परीक्षा में नहीं लागू हुआ दो बार आयोजन   कैबिनेट की योजना के अनुसार सभी प्रमुख परीक्षाएं साल में दो बार ऑनलाइन मोड में आयोजित की जानी थीं, ताकि छात्रों का तनाव कम हो सके। हालांकि, वर्तमान में यह व्यवस्था मुख्य रूप से जेईई मेन तक ही सीमित है।   सीबीआई जांच के 158 मामले अब भी लंबित   भर्ती और परीक्षा से जुड़े 158 मामलों की सीबीआई जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन कई मामलों में अदालतों में सुनवाई शुरू नहीं हो पाई है। इनमें कुछ मामले दो दशक से भी ज्यादा पुराने हैं। अब इन्हें पेपर लीक रोधी कानून के तहत बनाए जा रहे फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजने की तैयारी की जा रही है।   एनटीए की आय में लगातार बढ़ोतरी   एनटीए की आय में भी पिछले वर्षों में बड़ा इजाफा हुआ है। वर्ष 2019-20 में एजेंसी की आय करीब 504 करोड़ रुपये थी, जो 2023-24 में बढ़कर 1117 करोड़ रुपये हो गई। इसके बावजूद परीक्षा व्यवस्था को लेकर स्थायी ढांचे और सुधारों के अधूरे रहने पर सवाल उठ रहे हैं।

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हैदराबाद हादसा: बेकाबू कार ने आठ बाइक रौंदी, बुजुर्ग की मौत; नाबालिग चालक जुवेनाइल होम भेजा गया

हैदराबाद, एजेंसियां। तेलंगाना के हैदराबाद में रविवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया, जहां एक बेकाबू कार ने सड़क किनारे खड़ी आठ मोटरसाइकिलों को टक्कर मार दी। हादसे में 65 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। पुलिस ने कार चला रहे 17 वर्षीय नाबालिग को जुवेनाइल होम भेज दिया है।   ब्रेक की जगह एक्सीलेटर दबाने से हुआ हादसा   यह घटना मधुरानगर पुलिस थाना क्षेत्र के कर्मिका नगर इलाके की है। पुलिस के मुताबिक, 17 वर्षीय नाबालिग किराए की कार चला रहा था। इसी दौरान उसने कथित तौर पर ब्रेक की जगह एक्सीलेटर दबा दिया, जिससे कार अचानक तेज रफ्तार में अनियंत्रित हो गई।   दो लोगों को टक्कर मारने के बाद आठ बाइक से भिड़ी कार   हादसे के समय 65 वर्षीय राजेंद्र कुमार और उनके भतीजे प्रभाकर सड़क किनारे अपनी दोपहिया गाड़ी खड़ी कर रहे थे। तेज रफ्तार कार ने दोनों को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि प्रभाकर उछलकर दूर जा गिरे और घायल हो गए, जबकि राजेंद्र कुमार कार की चपेट में आ गए।   इसके बाद कार आगे बढ़ते हुए सड़क किनारे खड़ी करीब आठ मोटरसाइकिलों से टकराई और आखिरकार जाकर रुकी।   इलाज के दौरान बुजुर्ग की मौत   हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर कार के नीचे फंसे राजेंद्र कुमार को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं, घायल प्रभाकर का इलाज जारी है।   पुलिस ने शुरू की जांच   मधुरानगर पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए नाबालिग कार चालक को जुवेनाइल होम भेज दिया है। जिस व्यक्ति के नाम पर कार किराए पर ली गई थी, उसे भी हिरासत में लिया गया है। घटना के समय कार में मौजूद एक अन्य नाबालिग को भी जुवेनाइल होम भेजा गया है।   पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के कारणों व जिम्मेदार लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

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