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हिमाचल के चंबा में बारिश का कहर, भूस्खलन से 12 से अधिक वाहन दबे

anjali kumari जुलाई 28, 2026 0
Chamba landslide
Chamba landslide

चंबा, एजेंसियां। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में सोमवार रात हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा दी। तेज बारिश के चलते कई इलाकों में भूस्खलन हुआ और उफनते नालों से भारी मात्रा में मलबा रिहायशी क्षेत्रों में घुस गया। राहत की बात यह रही कि इस प्राकृतिक आपदा में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन कई घरों, दुकानों और वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है।

 

उदयपुर, घोलटी और भरियाड में सबसे ज्यादा नुकसान

 

उदयपुर, घोलटी, नवोदय मार्ग और भरियाड क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहे। भूस्खलन के कारण 12 से अधिक वाहन मलबे में दब गए, जिनमें कारें, ट्रक, बाइक और स्कूटी शामिल हैं। वहीं भरमौर-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित तडोली नाला उफान पर आ गया, जिससे बड़े-बड़े पत्थर और मलबा आसपास के इलाकों में पहुंच गया।

 

नालों के उफान से घरों और दुकानों में घुसा मलबा

 

तडोली नाले के तेज बहाव से एक स्टोर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि कई घरों में मलबा घुसने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुल्तानपुर नाले के उफान में कई दोपहिया वाहन बह गए। भरियाड गांव में पानी का रुख बदलने से कई मकानों तक मलबा पहुंच गया, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।

 

सुरक्षा के लिए लोगों ने खाली किए घर

 

हालात बिगड़ते देख कई परिवारों ने एहतियातन अपने घर खाली कर दिए और पड़ोसियों के घरों में शरण ली। अचानक आई इस आपदा के कारण लोगों को रातभर सुरक्षित स्थानों पर रहना पड़ा।

 

प्रशासन ने शुरू किया नुकसान का आकलन

 

लगातार बारिश और भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य के साथ नुकसान का आकलन कर रहा है, जबकि मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

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राहुल-प्रियंका का शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर हमला, बोले- 'बलात्कारियों का बचाव करने वाले को बनाया मंत्री'

संसद के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर तीखा हमला बोला। दोनों नेताओं ने बिलकीस बानो मामले का जिक्र करते हुए जोशी पर गंभीर आरोप लगाए। वहीं सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कांग्रेस से माफी की मांग की है। राहुल गांधी ने साधा निशाना लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया है, जो कथित तौर पर बलात्कारियों का बचाव करता है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास कई अन्य विकल्प थे, लेकिन शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को देना हैरान करने वाला फैसला है। प्रियंका गांधी ने भी उठाया बिलकीस बानो का मुद्दा लोकसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी बिलकीस बानो मामले से जुड़ी एक अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर टिप्पणी की। हालांकि, उनकी इस टिप्पणी पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन में कुछ समय तक हंगामा हुआ। बाद में लोकसभा अध्यक्ष ने संबंधित टिप्पणी को कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए। सरकार ने बताया निराधार आरोप संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बिना किसी सत्यापन के किसी मंत्री के चरित्र पर इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस सांसद अपने आरोपों को साबित नहीं कर सकतीं तो उन्हें सदन से माफी मांगनी चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कहा कि संसद में तथ्यों के आधार पर ही बयान दिए जाने चाहिए और बिना प्रमाण के किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं है। प्रह्लाद जोशी ने की कार्रवाई की मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि प्रियंका गांधी इस तरह निराधार आरोप लगाकर बच नहीं सकतीं। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस सांसद सदन से माफी मांगें और उनके खिलाफ संसदीय नियमों के तहत कार्रवाई की जाए। वहीं प्रियंका गांधी ने कहा कि वह अपने आरोपों के समर्थन में उचित माध्यम से तथ्यों को सदन के सामने रखेंगी। संसद में इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।  

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Baba Ramdev on Gen Z Protest: योग गुरु बाबा रामदेव ने जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भारत सड़क पर होने वाले प्रदर्शनों से नहीं, बल्कि संसद और संविधान के अनुसार चलता है। साथ ही उन्होंने आंदोलन के दौरान लगाए गए कुछ नारों पर भी आपत्ति जताई और कहा कि मतभेदों का समाधान लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से होना चाहिए। हरिद्वार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बाबा रामदेव ने कहा कि शिक्षा मंत्री कौन होगा, इसका फैसला प्रदर्शनकारी नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री और संसद करती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और नीतियों को लेकर असहमति जताने का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके लिए संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान जरूरी है। 'ब्राह्मणवाद से आजादी' जैसे नारों पर जताई आपत्ति रामदेव ने आंदोलन के दौरान लगाए गए 'ब्राह्मणवाद से आजादी' और 'आरएसएस से आजादी' जैसे नारों का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी जाति, समुदाय या संगठन के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और समाज को बांटने वाले नारों से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से राष्ट्रवाद की भावना सीखी है तो इसमें आपत्ति की कोई बात नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, समाज में सभी वर्गों के प्रति सम्मान का भाव होना चाहिए। 'Gen Z ने भारत की छवि खराब की' बाबा रामदेव ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं ने ऐसी भाषा और व्यवहार अपनाया, जिससे देश की छवि को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि गाली-गलौज और अपमानजनक शब्द भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं। भारत की परंपरा संवाद, सम्मान और मर्यादा की रही है। संवैधानिक तरीके से दूर हों मतभेद अपने संबोधन में रामदेव ने कहा कि नया भारत समानता और समावेश की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं भी वेद-पुराणों का अध्ययन कर रही हैं, यज्ञोपवीत धारण कर रही हैं और वैदिक परंपराओं में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग धर्म और विचारधाराएं हो सकती हैं, लेकिन देश की एकता और सामाजिक सौहार्द सबसे महत्वपूर्ण हैं। यदि किसी मुद्दे पर मतभेद हैं, तो उन्हें लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।  

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Anti Paper Leak Bill: रिजिजू का विपक्ष पर हमला, बोले- बिल पर चर्चा से बच रही कांग्रेस, राहुल गांधी अभद्र भाषा का कर रहे इस्तेमाल

संसद में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 (Anti Paper Leak Bill) पर चर्चा के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्षी दल विधेयक के प्रावधानों पर चर्चा करने के बजाय केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी पर संसद में अभद्र भाषा के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों की मांगों को ध्यान में रखते हुए पेपर लीक रोकने के लिए यह महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आई है, लेकिन विपक्ष इस पर रचनात्मक चर्चा करने से बच रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सभी दल अपने सुझाव दें ताकि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाया जा सके। 'राहुल गांधी बिल पर बोलें, सुझाव दें' केंद्रीय मंत्री ने कहा, "हमें उम्मीद है कि आज राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेता इस विधेयक पर अपनी बात रखेंगे। यह कानून छात्रों के हित में लाया गया है और प्रधानमंत्री के फैसले से छात्रों में भरोसा बढ़ा है। अगर कांग्रेस के पास परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के सुझाव हैं, तो सरकार उनका स्वागत करेगी।" उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करना उचित नहीं है और विपक्ष को रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। राहुल गांधी की भाषा पर भी जताई आपत्ति किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी की भाषा को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद में लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी जिस तरह की अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह संसदीय लोकतंत्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है। मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन संवाद हमेशा सभ्य भाषा में होना चाहिए। ऐसी भाषा लोकतंत्र और देश दोनों के लिए ठीक नहीं है।" प्रियंका गांधी पर भी साधा निशाना रिजिजू ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने मंगलवार को चर्चा में हिस्सा तो लिया, लेकिन उनका पूरा भाषण विधेयक के दायरे से बाहर के मुद्दों पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा, "विपक्ष के लगभग सभी सांसदों ने बिल के मूल प्रावधानों पर चर्चा करने के बजाय दूसरे विषय उठाए। हमें उम्मीद है कि राहुल गांधी अपने भाषण में कम से कम कुछ समय इस महत्वपूर्ण विधेयक और परीक्षा सुधार के सुझावों पर जरूर बोलेंगे।" क्या है Anti Paper Leak Bill? लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित कानून में पेपर लीक और परीक्षा में धोखाधड़ी के मामलों में कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून से भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा छात्रों का भरोसा मजबूत होगा।  

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Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
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PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0

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