पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित सप्लाई के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की रूस के शीर्ष नेतृत्व के साथ अहम बैठक के बाद रूस ने भारत को तेल और गैस आपूर्ति बढ़ाने का भरोसा दिया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है और भारत जैसे बड़े आयातक देशों की चिंता बढ़ गई थी।
रूस के उप-प्रधानमंत्री Denis Manturov ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और विदेश मंत्री जयशंकर के साथ बैठक में स्पष्ट किया कि रूसी कंपनियां भारत को कच्चा तेल और एलएनजी (LNG) की सप्लाई बढ़ाने में सक्षम हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च 2026 में रूस से भारत को तेल सप्लाई में करीब 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो इस संकट के समय भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ऊर्जा के साथ-साथ रूस ने उर्वरकों की सप्लाई बढ़ाने का भी भरोसा दिया है। 2025 के अंत तक भारत को खनिज उर्वरकों की आपूर्ति में 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। दोनों देशों के बीच यूरिया उत्पादन को लेकर संयुक्त परियोजनाएं भी प्रगति पर हैं, जो भारत के कृषि क्षेत्र को मजबूती देंगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति बनी है। वहीं विदेश मंत्री जयशंकर ने ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, उद्योग और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही।
इसके अलावा, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
हाल के समय में भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से मजबूत हुआ है। प्रतिबंधों में आंशिक ढील के बाद रूस एक बार फिर भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है।
इसके साथ ही परमाणु ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है, जो रणनीतिक साझेदारी को और गहरा बना रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
334 – ईसा पूर्व सिकंदर महान की सेना ने पार्शिया के राजा को हटाया। 1498 – वास्कोडिगामा कालीकट के तट पर जमोरिन से पहली बार मिले। 1570 – थियेट्रम आर्बिस टेर्राम नाम से पहला एटलस प्रकाशित हुआ, इसमें कुल 70 नक्शे थे। 1712 - सम्राट कैरेल छठी को हंगरी के राजा का ताज पहनाया गया। 1735 - जॉर्ज हेडली ने "ट्रेड विंड" का पहली व्याख्या प्रकाशित की। 1746 - रूस और ऑस्ट्रिया सहयोग की संधि पर हस्ताक्षर किये। 1761 – अमेरिका के फिलाडेल्फिया में पहली जीवन बीमा पॉलिसी जारी की गयी। 1762 - स्वीडन और प्रशिया ने शांति संधि पर हस्ताक्षर किये। 1799 – नेपोलियन बेनापार्ट ने येरूशलम में यहूदियों के राज्य की स्थापना का समर्थन किया। 1805- गवर्नर जनरल लॉर्ड वेलेजली ने एक आदेश के तहत दिल्ली के मुग़ल बादशाह के लिए एक स्थायी प्रावधान की व्यवस्था की। 1841 - गुरिआ में विद्रोह: जॉर्जिया प्रांत गुरिया ने रूसी साम्राज्य के खिलाफ विद्रोह आरम्भ किया। 1843 - 700 -1000 प्रवासियों के साथ पहली वैगन ट्रेन स्वतंत्रता ओरेगन को मिसौरी भेजा गया। 1855 - विक्टोरिया के प्रांत को न्यूसाउथ वेल्स से प्रशासनिक रूप से अलग किया गया। 1856 – मास्को के व्यापारी त्रेतिकोफ़ ने पहली बार दो पेण्टिंगें ख़रीदकर अपना चित्र-संग्रह बनाना शुरू किया था। 1871 – अमेरिकी सेना ने नेब्रास्का में केर्नी के किले का परित्याग करने का आदेश जारी किया। 1892 – डॉक्टर वाशिंगटन शेफ़्फ़िल्ड ने टूथपेस्ट के लिए ट्यूब का आविष्कार किया था। 1906 – राइट बंधुओं ने अपने फ्लाइंग मशीन के लिए अमेरिका से पेटेंट पाया। 1936 – भारत के पहले स्टेडियम ब्रेबोर्न स्टेडियम का बॉम्बे में शिलान्यास। 1939 – द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी और इटली के बीच स्टील की संधि पर हस्ताक्षर। 1943 – पहले लड़ाकू जेट विमान का परीक्षण किया गया। 1946 – पहली बार अमेरिका रॉकेट (डब्ल्यूएसी कार्पोल) को अंतरिक्ष तक पहुंचाने में कामयाब हुआ। 1961 – ज्ञानपीठ पुरस्कार शुरु किया गया और 1965 में पहला पुरस्कार दिया गया। 1963 – भारत की पहली ग्लाइडर रोहिणी ने उड़ान भरी। 1972 – रूस की यात्रा पर जाने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने निक्सन। उन्होंने सोवियत नेता लियोनिद ब्रेजनेव के साथ मुलाकात की। 1972 - पाकिस्तान द्वारा राष्ट्रमंडल की सदस्यता से त्यागपत्र। 1987 - भारत के मेरठ में हाशिमपूरा नरसंहार हुआ। 1988 – भारत ने अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र अग्नि का सफल परीक्षण किया। 1990 - उत्तरी एवं दक्षिणी यमन के विलय के साथ संयुक्त यमन गणराज्य का अभ्युदय। 1992 – बोस्निया और हर्जेगोविना, क्रोएशिया और स्लोवेनिया संयुक्त राष्ट्र में शामिल हुए। 1996 - माइकल कैमडेसस तीसरी बार अगले पांच वर्षों तक के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का प्रबंध निदेशक चुने गये। 2001 - दलाई लामा ने तिब्बत की आज़ादी की मांग छोड़ी। 2002 - नेपाल में संसद भंग। 2003 - अल्जीरिया में आये विनाशकारी भूकम्प में दो हज़ार से भी अधिक लोग मारे गये। 2007 - गणितज्ञ श्रीनिवास वर्धन को नार्वे का अबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। 2008 - केन्द्रीय उच्च शिक्षण संस्थानो में ओबीसी छात्रों को 27% कोटा देने का आधारभूत ढाँचा खड़ा करने के लिए सरकार ने 10 हज़ार 328 करोड़ रुपये दिए। 2008 - कर्नाटक विधान सभा का तीसरा व अन्तिम चरण सम्पन्न। 2008 - मुंशी प्रेमचन्द की अमर कृति 'निर्मला' सहित हिन्दी की पाँच रचनाओं के अनुवादक वर्ष 2007 के साहित्य अकादमी पुरस्कार हेतु चुने गये। 2008 - केन्द्र सरकार ने गुजरात दंगा पीड़ितों के लिए आर्थिक पैकेज देने की घोषणा की। 2008 - संयुक्त राष्ट्र संघ की 47 सदस्यीय मानवाधिकार समिति में पाकिस्तान को शामिल किया गया। 2010 – एयर इंडिया एक्सप्रेस बोइंग 737 मंगलौर में उतरते वक्त दुर्घटनाग्रस्त हुआ। जिसमें 158 लोगों की मौत हुई। 2012 – जापान में टोक्यो स्काईट्री टावर को खोला गया। दुबई के बुर्ज खलीफा और चीन के कैंटन टावर के बाद जापान ने अपनी इस सबसे ऊंची इमारत टोक्यो स्काई ट्री तैयार की थी। 2019 - फ्लाइट लेफ्टिनेंट भावना कंठ ने युद्ध मिशन में शामिल होने की योग्यता हासिल करने वाली पहली महिला फाइटर पायलट बन कर इतिहास रच दिया। 2019 - भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार को रिसेट-2बी उपग्रह का सफल प्रक्षेपण कर एक बार फिर सुनहरा इतिहास रच डाला। 2019 - भारतीय वायुसेना ने सुपर सोनिक मिसाइल ब्रह्मोस का सफल परीक्षण किया , वायुसेना के अनुसार लड़ाकू विमान सुखोई 30 एमकेआई से दागी गई ब्रह्मोस ने सफलतापूर्वक लक्ष्य को निशाना बनाया। 2020 - पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) का एक यात्री विमान जिन्ना अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के पास घनी आबादी वाले रिहाइशी इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिससे उसमें सवार 107 लोगों में से 97 की मौत हो गई। बुरी तरह जले शवों की डीएनए जांच से की पहचान। 2020 - केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 34-सदस्यीय कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष के रूप कार्यभार संभाला। 2021 - बिहार सरकार ने ब्लैक फंगस यानी म्यूकोरमाइकोसिस को कानून, 1897 के तहत महामारी घोषित किया। 2021 - रिमोट-नियंत्रित और मोटर चालित चीन के रोवर ने पहली बार मंगल की सतह पर ड्राइव किया। जिससे चीन लाल ग्रह पर अपने उद्घाटन मिशन पर एक लैंड व्हीकल की परिक्रमा, लैंड और तैनात करने वाला पहला देश बना। 2021 - कांगो के शहर गोमा के पास स्थित ज्वालामुखी फटा। 2021 - चीन में बर्फीले तूफान के कारण अल्ट्रा मैराथन में हिस्सा लेने वाले 21 धावकों की मौत। 2022 - उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में भीषण सड़क हादसे में 8 लोगों की दर्दनाक मौत हुई। 2022 - विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत की दस लाख महिला आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया। 2023 - श्रीनगर में 22 से 24 मई तक 'जी20 पर्यटन कार्यकारी समूह की तीसरी बैठक' आयोजित हुई। 2023 - पीएम मोदी को "उनके वैश्विक नेतृत्व की मान्यता" में फिजी के सर्वोच्च सम्मान, 'कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी' से सम्मानित किया गया। 2023 - बलिया गंगा में 40 लोगों से भरी नाव डूबने से 3 की मौत। 2023 - अमेरिका और पापुआ न्यू गिनी के द्विपक्षीय रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर हुए। 2024 - अमेरिका ने हमास का खात्मा करने के लिए इजराइल के राफा ऑपरेशन को दी हरी झंडी। 2025 - अमेरिका में रिहायशी इलाके में दुर्घनाग्रस्त विमान गिरने से 6 यात्री जिंदा जले , 10-15 घरों में आग लग गई और कई लोग घायल हुए। 22 मई को जन्मे व्यक्ति 1772 – प्रसिद्ध समाज सुधारक राजाराम मोहन राय का जन्म। इन्होंने ब्रह्म समाज आंदोलन की शुरुआत की और बालविवाह और सती प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। 1859 – स्कॉटिश लेखक और भौतिकशास्त्री सर ऑर्थर कोनन डॉयल का जन्म। यह अपने फिक्शन किरदारों के लिए जाने जाते हैं। 1878 - गामा पहलवान - पेशेवर पहलवान(मतभेद)। 1911 - साहु शांति प्रसाद एक उद्यमी , समाज सेवी व भारतीय ज्ञानपीठ के संस्थापक । 1925 - मदन लाल मधु - हिंदी और रूसी साहित्य के आधुनिक सेतु निर्माताओं में से एक। 1959 - महबूबा मुफ़्ती - एक भारतीय राजनीतिज्ञा तथा जम्मू और कश्मीर की तेरहवीं और एक महिला के रूप में राज्य की प्रथम मुख्यमंत्री। 22 मई को हुए निधन 1545 – पेशावर से कलकत्ता तक देश की सबसे लंबी सड़क का निर्माण करने वाले महान योद्धा सूर वंश के संस्थापक शेरशाह शूरी की मौत। 1991 - श्रीपाद अमृत डांगे - भारत के प्रारम्भिक कम्युनिस्ट नेताओं में से एक। 2011 - गोविन्द चन्द्र पाण्डे - 20वीं सदी के जानेमाने चिंतक, इतिहासवेत्ता, संस्कृतज्ञ तथा सौंदर्यशास्त्री थे। 2012 - फ्लिंडर एंडरसन खोंगलाम - मेघालय के आठवें मुख्यमंत्री। 2020 - चार बार के ग्रैंडस्लैम चैम्पियन एशले कूपर का लंबी बीमारी के बाद हुआ निधन। 2020 - नेपाल सिंह भारत की सोलहवीं लोकसभा के सांसद। 2020 - विख्यात शास्त्रीय संगीत गायिका श्यामला जी भावे का निधन । 2020 - इंटर मिलान के पूर्व कोच गिगी सिमोनी का निधन। 2021 - दिग्गज संगीतकार विजय पाटिल उर्फ़ लक्षमण का दिल को दौरा पड़ने से निधन हुआ। 2021 - चीन के 'हाइब्रिड चावल के जनक' युआन लॉन्गपिंग का निधन। 2023 - साउथ फिल्मों के स्टार सरथ बाबू (71) का बीमारी के बाद निधन हुआ। 2024 - अमेरिकी अभिनेता डैरिल हिकमैन (92) का निधन हुआ। 22 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव श्री राजाराम मोहनराय जयन्ती (254वीं)। श्री फ्लिंडर एंडरसन खोंगलाम स्मृति दिवस। विश्व गोथ दिवस। विश्व जैव विविधता संरक्षण दिवस। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनूष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु में कांग्रेस 59 साल बाद सरकार का हिस्सा बन गई। कांग्रेस विधायक एस राजेश कुमार और पी विश्वनाथन आज 21 मई को विजय की कैबिनेट में शामिल हुए। राजेश कुमार किलियूर और विश्वनाथन मेलूर सीट से विधायक हैं। शपथ ग्रहण समारोह गुरुवार सुबह 10 बजे हुआ। इस दौरान TVK से 21 मंत्री और कांग्रेस से 2 मंत्रियों ने शपथ ली। IUML और VCK को बाहर से समर्थन देंगे। 1952 से 1967 तक तमिलनाडु में कांग्रेस की सरकार दरअसल, 1952 से 1967 तक तमिलनाडु (तब मद्रास राज्य) में कांग्रेस की सरकार रही थी। सी. राजगोपालाचारी, के. कामराज और एम. भक्तवत्सलम इस दौरान मुख्यमंत्री रहे। 1967 में DMK के सत्ता में आने के बाद कांग्रेस ने DMK और AIADMK दोनों के साथ गठबंधन किया, लेकिन सरकार का हिस्सा नहीं बनी। VCK और IUML को भी कैबिनेट में जगह मिल सकती है पार्टी सूत्रों के मुताबिक, विदुथलाई चिरुथइगल काची (VCK) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के प्रतिनिधियों को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। वहीं, AIADMK के बागी नेताओं को कैबिनेट में जगह मिलने की संभावना नहीं है। TVK के सीनियर नेता और मंत्री आधव अर्जुना ने कांग्रेस, VCK और IUML से सरकार में शामिल होने की अपील की। उन्होंने इसे सीएम विजय की जीत बताई। DMK से अलग होने के बाद सत्ता में हिस्सेदारी मिली कांग्रेस लंबे समय से तमिलनाडु में सत्ता में हिस्सेदारी की मांग कर रही थी। पार्टी के कुछ नेताओं ने विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन सरकार की वकालत भी की थी। कांग्रेस का पहले DMK के साथ गठबंधन था। हालांकि, DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन ने चुनाव से पहले साफ कहा था कि तमिलनाडु में सत्ता साझेदारी का फॉर्मूला काम नहीं करेगा। विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद 4 मई को कांग्रेस ने DMK गठबंधन छोड़कर विजय की अगुआई वाली सरकार को समर्थन देने का फैसला किया। कांग्रेस के पास फिलहाल 5 विधायक हैं। विजय के साथ 9 मंत्रियों ने शपथ लिया था विजय ने 10 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ 9 विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली थी। तमिमनाडु चुनाव में विजय की पार्टी को 108 सीटें मिली थी।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी मदरसों में 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य कर दिया है। 19 मई को जारी आदेश के मुताबिक, यह नियम सरकारी मॉडल मदरसों, सरकारी सहायता प्राप्त और बिना सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त मदरसों पर तुरंत लागू होगा। नए आदेश के बाद अब क्लास शुरू होने से पहले सुबह की प्रार्थना सभा (असेंबली) में वंदे मातरम गाना जरूरी होगा। इससे पहले मदरसों में सुबह की प्रार्थना के दौरान राष्ट्रगान 'जन गण मन' और कवि गुलाम मुस्तफा की 'अनंत असीम प्रेममय तुमी' (बांग्ला गीत) गाई जाती थी। अब सभी मदरसों को इस आदेश को लागू करने के बाद इसकी रिपोर्ट भी विभाग को सौंपनी होगी।