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President's At Home Invite Showcases Folk Art

15 अगस्त के 'एट होम' समारोह का अनोखा निमंत्रण पत्र, चार राज्यों की लोक कला और हस्तशिल्प की दिखी खूबसूरत झलक

kalpana अगस्त 5, 2026 0
President's 'At Home' Independence Day invitation featuring folk art and handicrafts from four Indian states
Rashtrapati Bhavan's At Home Invitation Celebrates India's Folk Art

Rashtrapati Bhavan At Home Invitation: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले पारंपरिक 'एट होम' (At Home) समारोह के लिए इस बार तैयार किए गए निमंत्रण पत्र अपनी अनूठी थीम और भारतीय लोक कला के शानदार प्रदर्शन के कारण चर्चा का विषय बने हुए हैं। इस वर्ष राष्ट्रपति भवन ने निमंत्रण पत्र और स्मृति-उपहारों के जरिए छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कला और हस्तशिल्प को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने का प्रयास किया है। इस पहल का उद्देश्य भारत की विविध सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करने के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को प्रोत्साहन देना भी है।

निमंत्रण पत्र में दिखी भारतीय संस्कृति की झलक

राष्ट्रपति भवन की ओर से तैयार की गई इस विशेष निमंत्रण किट को भारतीय संस्कृति और पारंपरिक कला को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। किट में राष्ट्रपति भवन की आकृति वाला विशेष निमंत्रण कार्ड, पारंपरिक कलाकृतियों से सजा आकर्षक फोल्डर, हस्तनिर्मित सजावटी प्लेटें, कलात्मक शोपीस, स्थानीय बुनकरों द्वारा तैयार किया गया पारंपरिक गमछा और राष्ट्रपति भवन की नक्काशी वाली लकड़ी की स्मृति पट्टिका शामिल है।

निमंत्रण पत्र में छत्तीसगढ़ की जनजातीय कला, गोवा की नीले-सफेद सिरेमिक शैली, मध्य प्रदेश की पारंपरिक लोक चित्रकला और महाराष्ट्र की हस्तशिल्प कला को बेहद आकर्षक तरीके से उकेरा गया है। हर कलाकृति अपने राज्य की सांस्कृतिक पहचान और लोक परंपरा की कहानी बयां करती है।

'वोकल फॉर लोकल' और 'मेक इन इंडिया' को मिलेगा बढ़ावा

राष्ट्रपति भवन हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस के 'एट होम' समारोह के लिए किसी न किसी भारतीय कला, संस्कृति या हस्तशिल्प को थीम बनाता है। इस बार चार राज्यों की लोक कला को शामिल कर 'वोकल फॉर लोकल' और 'मेक इन इंडिया' की सोच को भी बढ़ावा दिया गया है।

इस पहल के जरिए स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और हस्तशिल्प कलाकारों की कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया गया है। राष्ट्रपति भवन का मानना है कि भारत की सांस्कृतिक विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और ऐसे आयोजनों के माध्यम से देश की पारंपरिक कलाओं को नई पहचान मिलती है।

किन-किन राज्यों की कला को मिली जगह?

इस वर्ष के निमंत्रण पत्र और स्मृति किट में जिन चार राज्यों की कला को प्रमुखता दी गई है, उनमें—

  • छत्तीसगढ़ की जनजातीय और पारंपरिक लोक कला,
  • गोवा की प्रसिद्ध नीले-सफेद सिरेमिक शैली,
  • मध्य प्रदेश की पारंपरिक लोक चित्रकारी,
  • महाराष्ट्र की हस्तनिर्मित शिल्प कला और पारंपरिक डिजाइनों

को विशेष रूप से शामिल किया गया है। इन कलाओं के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता और हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा को प्रदर्शित किया गया है।

किन लोगों को मिलता है 'एट होम' समारोह का निमंत्रण?

राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाला 'एट होम' समारोह देश के सबसे प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक माना जाता है। इस समारोह में देश की विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट हस्तियों को आमंत्रित किया जाता है। इनमें—

  • उपराष्ट्रपति,
  • प्रधानमंत्री,
  • केंद्रीय मंत्री,
  • सांसद,
  • भारत के मुख्य न्यायाधीश,
  • राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री,
  • वरिष्ठ प्रशासनिक एवं सैन्य अधिकारी,
  • विभिन्न देशों के राजदूत और उच्चायुक्त,
  • पद्म पुरस्कार विजेता,
  • वैज्ञानिक, खिलाड़ी, कलाकार और साहित्यकार,
  • सामाजिक कार्यकर्ता,
  • पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोग,
  • पारंपरिक कारीगर,
  • जनजातीय समाज के प्रतिनिधि,
  • 'अनसंग हीरोज' और
  • स्वतंत्रता सेनानियों एवं उनके परिवारों

को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है।

भारतीय विरासत को सम्मान देने की पहल

राष्ट्रपति भवन की यह पहल केवल एक निमंत्रण पत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध लोक कला, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का एक प्रयास है। इस वर्ष का 'एट होम' निमंत्रण पत्र देश की विविध संस्कृति, पारंपरिक शिल्पकला और स्थानीय कलाकारों के योगदान को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करता है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि आधुनिक भारत अपनी जड़ों, संस्कृति और लोक परंपराओं को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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15 अगस्त को दिल्ली में हल्की बारिश की संभावना और बादलों वाला मौसम
स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में हल्की बारिश की संभावना, सुबह 4 से 6 बजे के बीच 70% बारिश का अनुमान

नई दिल्ली, एजेंसियां। स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त 2026 को दिल्ली में मौसम सुहावना रहने के साथ हल्की बारिश की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, राजधानी में पूरे दिन आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है और सुबह के समय हल्की बारिश के कुछ दौर हो सकते हैं।   सुबह बारिश की सबसे ज्यादा संभावना   IMD के अनुसार, सुबह 4 से 6 बजे के बीच करीब 5 मिमी बहुत हल्की से हल्की बारिश होने की 70 प्रतिशत संभावना है। इसके बाद सुबह 6 से 9 बजे के बीच भी लगभग 2-3 मिमी बारिश होने की 60 प्रतिशत संभावना जताई गई है।   दोपहर और शाम को भी हो सकती है बूंदाबांदी   मौसम विभाग ने 15 अगस्त की दोपहर से शाम के बीच भी करीब 3 मिमी हल्की बारिश की 60 प्रतिशत संभावना बताई है। ऐसे में लाल किले पर होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान मौसम पूरी तरह साफ रहने की उम्मीद कम है।   तापमान 32 से 34 डिग्री के बीच रहने का अनुमान   दिल्ली में 15 अगस्त को अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। दक्षिण-पश्चिमी हवाएं करीब 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं।   स्वतंत्रता दिवस समारोह पर मौसम की नजर   दिल्ली में 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करेंगे। ऐसे में सुबह होने वाली बारिश पर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की भी नजर रहेगी। फिलहाल IMD का अनुमान बहुत हल्की से हल्की बारिश का है, इसलिए भारी बारिश जैसी स्थिति का पूर्वानुमान नहीं है।

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एसिड अटैक पीड़ितों के लिए रेलवे किराया रियायत की नीति बनाएगा केंद्र, सुप्रीम कोर्ट में दी सहमति

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए रेलवे यात्रा में किराया रियायत देने की नीति बनाने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत है। यह सुविधा खास तौर पर उन पीड़ितों को इलाज के लिए दूसरे शहरों में स्थित बेहतर अस्पतालों तक पहुंचने में मदद करेगी।   मरीज श्रेणी के तहत देने की तैयारी   रेलवे की ओर से केंद्र ने बताया कि सरकार फिलहाल इस सुविधा को अलग से दिव्यांग श्रेणी में शामिल करने के बजाय मौजूदा ‘पेशेंट कैटेगरी’ के तहत देने पर विचार कर रही है। केंद्र ने दिव्यांग श्रेणी में अलग लाभ देने को लेकर कुछ व्यावहारिक चिंताएं भी सामने रखीं।   सुप्रीम कोर्ट ने उदारता से विचार करने को कहा   मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि एसिड अटैक सर्वाइवर्स को नियमित चिकित्सा उपचार और पुनर्वास की जरूरत होती है। अदालत ने केंद्र से इस मामले में उदार दृष्टिकोण अपनाने को कहा।   याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि कई पीड़ितों को अलग-अलग राज्यों में कई बार सर्जरी और उपचार के लिए यात्रा करनी पड़ती है। इसलिए उन्हें ऐसी व्यवस्था चाहिए जिससे इलाज के लिए लंबी दूरी की यात्रा का आर्थिक बोझ कम हो सके।   छह सप्ताह में ड्राफ्ट नीति पेश करने का निर्देश   सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को प्रस्तावित नीति का ड्राफ्ट छह सप्ताह के भीतर अदालत के सामने रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि रियायत को इलाज की अवधि से जोड़कर समयबद्ध तरीके से लागू करने की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।   यह मामला Atijeevan Society की याचिका से जुड़ा है, जिसमें एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए रेलवे किराया रियायत, आरक्षण और आपातकालीन यात्रा जैसी सुविधाओं की मांग की गई है।

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