राष्ट्रीय

बंगाल-तमिलनाडु में वोटिंग के लिए लगी लंबी कतारें, चेन्नई में एक्टर विजय और अजित ने वोट डाला

Anjali Kumari अप्रैल 23, 2026 0
West Bengal elections
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कोलकाता/चेन्नई, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सुबह 7 बजे से वोटिंग जारी है। बंगाल में फर्स्ट फेज की 152 सीटों पर और तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं।


तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में वोटिंग के दौरान कई जगह लंबी लाइन देखने को मिलीं। बंगाल के मालदा, बीरभूम और आसनसोल में सुबह से पोलिंग बूथ पर लंबी कतारें दिख रही हैं। यहां महिलाओं की संख्या ज्यादा है। ऐसा ही हाल तमिलनाडु में देखा जा रहा है।


एक्टर विजय और अजीत को देख भीड़ बेकाबू


चेन्नई में एक्टर अजित कुमार और TVK चीफ विजय वोट डालने पहुंचे। इस दौरान उनकी एक झलक पाने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे बूथ के बाहर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।


बंगाल में वेबकास्टिंग के जरिए मॉनिटरिंग


बंगाल में मुख्य मुकाबला TMC और BJP के बीच है। यहां के बूथों पर वेबकास्टिंग (लाइव मॉनीटरिंग) के जरिए चुनाव आयोग निगरानी कर रहा है। राज्य की बाकी 142 सीटों पर दूसरे फेज में 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। नतीजा 4 मई को आएगा।


तमिलनाडु में DMK, कांग्रेस और AIADMK, BJP गठबंधन के बीच मुकाबला है। तमिल एक्टर थलापति विजय की नई पार्टी TVK इस लड़ाई को त्रिकोणीय बना रही है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

राष्ट्रीय

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Israeli Mossad chief revealing details about undercover agent killed during secret Iran mission in Europe
एक्स गर्लफ्रेंड से बढ़ी नजदीकियां बनीं मौत की वजह: बेंगलुरु में प्रेमिका ने ‘रोल प्ले’ के बहाने बॉयफ्रेंड को जिंदा जलाया

  ‘रोल प्ले’ के नाम पर रची गई खौफनाक साजिश बेंगलुरु से एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है, जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि 29 वर्षीय किरण की हत्या उसकी प्रेमिका प्रेमा ने बेहद सुनियोजित तरीके से की। आरोपी ने ‘रोल प्ले’ का बहाना बनाकर किरण को अपने घर बुलाया, जहां पहले उसे रस्सी से बांधा गया और फिर उस पर केरोसिन डालकर आग लगा दी गई। रिश्ते में दरार और जलन बनी हत्या की वजह पुलिस के अनुसार, किरण और प्रेमा एक मोबाइल सर्विस स्टोर में साथ काम करते थे और दोनों के बीच प्रेम संबंध था। प्रेमा इस रिश्ते को शादी तक ले जाना चाहती थी, लेकिन किरण इससे दूरी बनाने लगा था। मामला तब और बिगड़ गया जब किरण ने अपनी एक्स गर्लफ्रेंड से दोबारा संपर्क किया और उसके साथ जन्मदिन मनाया। यह बात प्रेमा को नागवार गुजरी और इसी से उसके मन में बदले की भावना पैदा हुई। पहले से की थी हत्या की पूरी तैयारी जांच में सामने आया है कि प्रेमा ने इस वारदात को अंजाम देने से पहले पूरी योजना बना ली थी। उसने पेट्रोल, केरोसिन और रस्सी का इंतजाम पहले ही कर लिया था। इसके बाद उसने अकेले में मिलने के बहाने किरण को अपने घर बुलाया और वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद मची अफरा-तफरी घटना के बाद आसपास के लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। सूचना मिलने पर पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। किरण के पिता की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया और पूछताछ में प्रेमा ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस जांच जारी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि रिश्तों में बढ़ती असुरक्षा और भावनात्मक असंतुलन किस तरह खतरनाक रूप ले सकता है।  

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तमिलनाडु में मतदान जारी: 9 बजे तक 17.69% वोटिंग, रजनीकांत-धनुष समेत कई दिग्गजों ने डाला वोट

  तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए गुरुवार सुबह से मतदान जारी है। सुबह 7 बजे शुरू हुई वोटिंग में मतदाताओं का उत्साह साफ नजर आ रहा है। चुनाव आयोग के मुताबिक, सुबह 9 बजे तक राज्यभर में 17.69% मतदान दर्ज किया गया, जबकि राजधानी चेन्नई में यह आंकड़ा 16.51% रहा। शुरुआती रुझानों से संकेत मिल रहे हैं कि इस बार भी मतदाता बड़ी संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। फिल्मी सितारों ने बढ़ाया मतदान का उत्साह साउथ सुपरस्टार Rajinikanth चेन्नई के स्टेला मैरिस कॉलेज स्थित मतदान केंद्र पर पहुंचे और वोट डालने के बाद लोगों से लोकतंत्र के इस पर्व में भाग लेने की अपील की। वहीं अभिनेता Dhanush ने भी कामराजर रोड कॉर्पोरेशन स्कूल बूथ पर मतदान कर युवाओं को खास संदेश दिया कि वे बढ़-चढ़कर वोटिंग करें। इसके अलावा अभिनेता अजित कुमार और गौतम राम कार्तिक जैसे कई अन्य फिल्मी चेहरों ने भी मतदान कर लोगों को प्रेरित किया। राजनीतिक नेताओं ने भी निभाई जिम्मेदारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता P. Chidambaram ने शिवगंगा जिले के कराईकुडी में वोट डाला और लोगों से लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए मतदान करने की अपील की। बीजेपी नेता Khushbu Sundar ने चेन्नई में मतदान के बाद कहा कि जनता को हर सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है, इसलिए घर से बाहर निकलकर वोट जरूर करें। 5.73 करोड़ मतदाता, 4,000 से अधिक उम्मीदवार इस बार राज्य की 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान हो रहा है। करीब 5.73 करोड़ मतदाता 4,023 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। चुनाव प्रचार 21 अप्रैल को समाप्त हो गया था और अब सभी की नजरें मतदान प्रतिशत और नतीजों पर टिकी हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए पूरे राज्य में करीब 1.40 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। मतदान से पहले सभी बूथों पर मॉक पोल के जरिए ईवीएम मशीनों की जांच की गई, ताकि किसी तरह की तकनीकी समस्या न आए। कब आएंगे नतीजे? तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की मतगणना 4 मई को होगी। इसके बाद यह साफ हो जाएगा कि राज्य की सत्ता किसके हाथों में जाएगी। फिलहाल, शुरुआती मतदान रुझान लोकतंत्र के प्रति लोगों की जागरूकता और उत्साह को दर्शा रहे हैं।  

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बंगाल चुनाव 2026: EVM गड़बड़ी और हिंसा के बीच वोटिंग

  पहले चरण में मतदान जारी, कई जगह EVM ने रोकी रफ्तार West Bengal विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में गुरुवार सुबह मतदान शुरू होते ही कई इलाकों से Electronic Voting Machine में खराबी की खबरें सामने आईं। अधिकारियों के मुताबिक, मुर्शिदाबाद, नंदीग्राम, कूचबिहार, मालदा और सिलीगुड़ी समेत कई स्थानों पर ईवीएम में तकनीकी दिक्कत के कारण मतदान प्रभावित हुआ और कुछ बूथों पर देरी भी हुई। पहले चरण में 18.76% वोटिंग, मिदनापुर सबसे आगे Election Commission of India के आंकड़ों के अनुसार सुबह 9 बजे तक पहले चरण में 18.76% मतदान दर्ज किया गया। पश्चिम मिदनापुर में सबसे ज्यादा 20.51% मतदान हुआ, जबकि मालदा में सबसे कम 16.96% वोटिंग दर्ज की गई। मुर्शिदाबाद में बमबाजी, कई घायल मतदान के बीच Murshidabad के नवदा इलाके में अज्ञात लोगों द्वारा देसी बम फेंके जाने की घटना सामने आई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। घटना के बाद चुनाव आयोग ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है और सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। 152 सीटों पर कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान पहले चरण में राज्य की 152 विधानसभा सीटों पर वोटिंग हो रही है। चुनाव आयोग ने करीब 2.5 लाख केंद्रीय बलों की तैनाती की है ताकि शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित किया जा सके। कुछ जगहों पर मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें भी देखी गईं, जबकि कई जगह “पिंक बूथ” भी बनाए गए हैं, जिन्हें पूरी तरह महिला स्टाफ द्वारा संचालित किया जा रहा है। दिग्गज नेताओं की अपील, सियासी बयानबाजी तेज बीजेपी नेता Suvendu Adhikari और अन्य नेताओं ने शांतिपूर्ण मतदान की अपील की है, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं, जिससे चुनावी माहौल और गर्म हो गया है। 2 चरणों में हो रहे चुनाव, 4 मई को आएंगे नतीजे पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में कराए जा रहे हैं। पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा। मतगणना 4 मई को की जाएगी, जिसके बाद राज्य की नई सरकार का फैसला होगा।  

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