1540 – तुर्की ने जानोस सिगीसमंद जपोलयाइ को हंगरी के राजा के रूप में मान्यता दी।
1555 – हुमायूं ने सरहिंद में सिकंदर सूरी पर विजय प्राप्त करने के बाद दिल्ली में प्रवेश किया।
1726 - बेंजामिन फ्रैंकलिन फिलाडेल्फिया के लिए वापस रवाना हुए।
1764 - जेम्स ओटिस ने बिना प्रतिनिधित्व के कराधान पर अपने विचार प्रकाशित किये।
1798 – नेपोलियन ने मिस्र के अलेक्जेंड्रिया पर कब्जा किया।
1829 – अमेरिका के विलियम ऑस्टिन बर्ट ने टाइपोग्राफ का पेटेंट कराया था, जिसने टाइपराइटर की नींव रखी।
1840 - कनाडा के प्रांत संघ के अधिनियम द्वारा बनाए गए।
1863 - उत्तरी लंदन में एलेक्जेंड्रा पार्क खोला गया।
1877 – अमेरिका के हवाई प्रांत में पहली टेलीफोन और टेलीग्राफ लाइन का काम पूरा हुआ।
1903 – फोर्ड मोटर कंपनी ने अपनी पहली कार बेची।
1905 - अल्फ्रेड डीकीन दूसरी बार ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री बने।
1920 – ब्रिटेन के कब्जे वाले पूर्वी अफ्रीका का नाम केन्या रखा गया और इसे ब्रिटिश उपनिवेश बना दिया गया।
1927 – बंबई में नियमित रुप से रेडियो प्रसारण शुरू हुआ।
1929 – फांसीवादी सरकार ने इटली में विदेशी शब्दों पर पाबंदी लगाई।
1952 - यूरोपीय कोयला और इस्पात समुदाय की स्थापना की गयी।
1952 - मिस्र की क्रांति मिस्र की थलसेना के कुछ अधिकारियों के समूह द्वारा की गयी।
1960 - यूसुफ बिन इशक ने सिंगापुर में सेंट जॉन एम्बुलेंस का मुख्यालय का उद्घाटन किया।
1972 - संयुक्त राज्य अमेरिका ने लैंडसैट १, की शुरूआत की जो की पहला पृथ्वी-संसाधन उपग्रह है।
1974 - ग्रीस के सैन्य शासक को ग्रीस में सात साल के सैन्य शासन के समापन के बाद नागरिक सरकार द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।
1983 - जापान के पश्चिमी शिमन प्रान्त में भारी बारिश से 117 लोग मरे।
1983 – तमिल टाइगर्स के नाम से विख्यात एलटीटीई विद्रोहियों और श्रीलंका सरकार के बीच पहला युद्ध शुरू हुआ।
1984 – वनेसा विलियम्स 'मिस अमेरिका' के इतिहास में अपना खिताब छोड़ने वाली पहली महिला बनी। एक नग्न तस्वीर के कारण उन्हें खिताब छोड़ने को मजबूर किया गया।
1985 - कमोडोर ने न्यूयॉर्क के लिंकन सेंटर में अमिगा निजी कंप्यूटर की शुरुआत की।
1989 - गिउलिओ अंडरटी इटली के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।
1998 – संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने सात भारतीय वैज्ञानिकों को देश छोड़ने के लिए आदेश दिया।
2000 - व्यापक घोषणाओं के साथ नागो में हुए समूह-8 का 26वाँ शिखर सम्मेलन सम्पन्न।
2001 - मेघावती सुकर्णोपूत्री इंडोनेशिया की राष्ट्रपति बनीं।
2005 - मिस्र के शर्म अल-शेख़ और नामा बे के कुछ होटलों में बम विस्फोटों से लगभग 100 लोग मारे गये।
2008 - नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला ने नवृ निर्वाचित राष्ट्रपति रामबरन यादव को अपना इस्तीफ़ा सौंपा।
2011 – नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में बम विस्फोट और शहर के बाहर गोलीबारी की घटनाओं में 92 लोगों की मौत।
2014 – ट्रांस एशिया एयरवेज विमान के ताइवान में दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से 44 लोगों की मौत और 222 घायल हुए।
2019 - आंध्र प्रदेश स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों को आरक्षित करने वाला देश का पहला राज्य बना।
2019 - कर्नाटक की कुमारस्वामी सरकार गिर गई ।
2019 - बोरिस जॉनसन को ब्रिटेन का नया प्रधानमंत्री चुना गया ।
2019 - दुनियाभर में अपनी सफेदी के लिए प्रसिद्ध राजस्थान के मकराना के मार्बल को ग्लोबल हेरिटेज की सूची में शामिल किया गया।
2020 - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मणिपुर के लिये एक जलापूर्ति परियोजना (Water Supply Project) की आधारशिला रखी।
2020 - चीन अपना पहला मंगल मिशन (रॉकेट तियानवेन-1) सफलतापूर्वक लांच कर मंगल पर अपना रोवर भेजने वाले देशों की सूची में शामिल हो गया।
2021 - रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में भारतीय सेना स्कीइंग अभियान, आर्मेक्स-21 का समापन किया।
2021 - टोकियो में 32वें ओलिम्पिक खेलों का शुभारंभ सादगीपूर्ण उदघाटन समारोह के साथ हुआ।
2021 - अफगानिस्तान में तालिबान के ठिकानों पर हवाई हमले में 20 आतंकवादी मारे गए हैं व 8 आतंकवादी घायल हुए।
2021 - रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सुबह 11:45 बजे ओडिशा के तट पर एकीकृत परीक्षण रेंज, चांदीपुर से नई पीढ़ी की आकाश (आकाश-एनजी) मिसाइल का तीन दिन में दूसरा सफल उड़ान परीक्षण किया।
2021 - महाराष्ट्र में भूस्खलन और इमारत गिरने से 49 लोगों की मौत व 70 से ज्यादा लापता हुए।
2022 - भारतीय मूल गुजरात की हुमैरा गरासिया इतिहास रचते हुए लंदन में सबसे कम उम्र (25) में स्पीकर बनीं।
2022 - उत्तर पश्चिमी चीन में पहाड़ का एक हिस्सा गिरने से 10 लोगों की मौत हुई व 7 अन्य घायल हुए।
2022 - पाकिस्तान की विदेशों में देश की संपत्ति की आपातकालीन बिक्री के लिए नियामक जांच को समाप्त कर दिया , अध्यादेश को मंजूरी दी।
2022 - राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद का विदाई समारोह संसद भवन में आयोजित हुआ।
2023 - दक्षिण - पश्चिमी नाइजीरिया में ईंधन ट्रक में विस्फोट से लगभग 8 लोगों की मौत हुई।
2023 - कांगो में एक सैनिक द्वारा अंधाधुंध गोलीबारी में लगभग 13 लोगों की मौत हुई।
2023 - कैमरून के डौआला में इमारत गिरने से 33 लोग मारे गए व 21 अन्य घायल हुए।
2023 - ग्रीक द्वीप रोड्स में लगी भीषण आग के कारण हजारों पर्यटकों को अपने होटलों से भागना पड़ा , यह देश के इतिहास में सबसे बड़ा निकासी अभियान रहा।
2023 - सूडान में नागरिक विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से 4 सैन्य कर्मियों सहित 9 लोगों की मौत हुई।
2023 - चीन के हेइलोंगजियांग के किकिहार में एक स्कूल की छत गिरने से 11 लोगों की मौत हुई व और 3 घायल हुए।
2023 - कंबोडिया के लंबे समय से प्रधानमंत्री रहे हुन सेन की सत्तारूढ़ पार्टी ने रविवार के आम चुनाव में भारी जीत का दावा किया।
2024 - केंद्रीय बजट 2024-2025 पेश किया गया।
2024 - प्रधानमंत्री पैकेज के तहत 5वीं योजना के रूप में शीर्ष कंपनियों में इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करने की योजना शुरू की गई।
2025 - पीएम मोदी ब्रिटेन दौरे पर पहुंचे।
2025 - पाकिस्तान अपनी ही मिसाइल द्वारा भयानक तबाही से बचा !शाहीन-3 टेस्ट दौरान हवा में फट गई ।
1856 – गणितज्ञ, दार्शनिक और महान स्वतन्त्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक का जन्म हुआ।
1898 - ताराशंकर बंद्योपाध्याय, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध बांग्ला साहित्यकार ।
1906 – हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के संस्थापक महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का जन्म हुआ।
1934 - कवियत्रि निर्मला जोशी।
1947 - डॉ लक्ष्मीनारायण सुब्रह्मण्यम भारत के प्रसिद्ध वायलिनवादक।
1953 – इंग्लैंड के दिग्गज क्रिकेटर ग्राहम गूच का जन्म हुआ।
1961 - मिलिंद गुनाजी - एक भारतीय अभिनेता ।
1993 - लक्ष्मण प्रसाद दुबे - छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता सेनानियों में से एक।
1999 - मोरक्को के शाह हसन का निधन।
2004 – हिन्दी फिल्मों के कामेडी के बादशाह महमूद अली का निधन हुआ।
2007 - अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति मुहम्मद जहीरशाह का निधन।
2012 - लक्ष्मी सहगल - स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेविका ।
2016 - एस. एच. रज़ा - भारत में जन्में प्रसिद्ध चित्रकर थे।
2019 - चीन की राजधानी बीजिंग स्थित थ्येनआनमन चौक पर हुए नरसंहार के दौरान चीन के प्रधानमंत्री रहे ली पेंग का निधन हो गया।
2021 - 105 साल की उम्र में साक्षरता परीक्षा पास करने वाली केरल की भगीरथी अम्मा का 107 साल की उम्र में निधन हुआ।
2022 - लेखक - फिल्म निर्माता ('द मोंकीज’ के सह-निर्माता और फिल्म ‘फाइव इजी पीसेज’ के निर्देशक) बॉब राफेलसन (89) का निधन हुआ।
2022 - बर्मी राजनीतिक कार्यकर्ता क्यॉ मिन यू (53) का निधन हुआ।
2022 - बर्मी राजनीतिज्ञ और रैपर ज़ायर थाव (41) का निधन हुआ।
2022 - अमेरिकी फ़िल्म निर्देशक बॉब राफेलसन (89) का निधन हुआ।
2023 - अमेरिकी अभिनेत्री व गायिका इंगा स्वेनसन (90) का निधन हुआ।
2023 - अमेरिकी अभिनेत्री पामेला ब्लेयर (73) का निधन हुआ।
गुरु श्री हरकिशन जयन्ती (नानकमत)।
लोकमान्य श्री बालगंगाधर तिलक का जन्म दिवस।
अमर शहीद पं. चन्द्रशेखर आजाद का जन्म दिवस।
कैप्टन लक्ष्मी सहगल जी की पुण्यतिथि।
राष्ट्रीय प्रसारण दिवस (National Broadcasting Day)।
मिश्र का क्रान्ति दिवस।
राष्ट्रीय वन संवर्धन दिवस।
कृपया ध्यान दें
यद्यपि शुद्ध राशिफल की पूरी कोशिश रही है फिर भी इन राशिफलों में और आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में कुछ अन्तर हो सकता है। ऐसी स्थिति में आप किसी ज्योतिषी से अवश्य सम्पर्क करें। किसी भी भिन्नता के लिए IDTV इंद्रधनुष उत्तरदायी नहीं हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता राजकुमार राव अपने एक पुराने राजनीतिक गाने 'मोदी है तो मुमकिन है' को लेकर चर्चा में आ गए हैं। दरअसल, NEET और छात्र प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे पर अपनी राय रखने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने उन्हें पुराने गाने में शामिल होने को लेकर सवाल किया। इसके जवाब में राजकुमार राव ने कहा कि लोग किसी व्यक्ति की परिस्थितियों और उस पर पड़ने वाले दबाव को पूरी तरह नहीं जानते। NEET प्रदर्शन पर पोस्ट के बाद शुरू हुआ विवाद राजकुमार राव ने हाल ही में छात्रों के प्रदर्शन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि छात्रों की आवाज को सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए और उनकी परेशानियों को गंभीरता से समझना जरूरी है। इसके बाद कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके पुराने राजनीतिक गाने को लेकर उन्हें निशाने पर लिया। यूजर के सवाल पर दिया जवाब एक यूजर ने राजकुमार राव से सवाल किया कि उन्होंने उस गाने में काम करके अपना सम्मान खो दिया है। इस पर अभिनेता ने जवाब देते हुए कहा कि लोग यह नहीं समझ सकते कि किसी व्यक्ति पर किस तरह का दबाव हो सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक दिन लोग उनके नजरिए को समझेंगे और उनका सम्मान वापस करेंगे। दबाव किस तरह का था, यह साफ नहीं किया राजकुमार राव ने अपने जवाब में "दबाव" का जिक्र जरूर किया, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह दबाव किसकी ओर से था या किस परिस्थिति में था। इसी वजह से सोशल मीडिया पर उनके बयान को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक गाने को लेकर पहले भी हुई थी चर्चा 'मोदी है तो मुमकिन है' गाने में राजकुमार राव के साथ कुछ अन्य कलाकारों के शामिल होने को लेकर पहले भी चर्चा हुई थी। गाना रिलीज होने के बाद इसे लेकर राजनीतिक बहस देखने को मिली थी। बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज राजकुमार राव के ताजा बयान के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स उनसे पुराने गाने को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। फिलहाल अभिनेता का बयान मनोरंजन जगत के साथ-साथ राजनीतिक चर्चा का भी विषय बन गया है।
NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश के युवाओं के भविष्य को सबसे अधिक नुकसान मोदी सरकार ने पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि केवल बयान देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि छात्रों की प्रमुख मांगों को स्वीकार करना होगा। राहुल गांधी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट के कुछ ही देर बाद राहुल गांधी ने X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को कमजोर होने दिया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्र लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है। छात्रों की तीन प्रमुख मांगें राहुल गांधी ने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्रों की तीन मुख्य मांगें हैं— केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए। देशभर के छात्रों से सार्वजनिक माफी मांगी जाए। प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कार्रवाई करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। राहुल गांधी का कहना है कि इन मांगों पर कार्रवाई किए बिना सरकार का कोई भी आश्वासन अधूरा रहेगा। PM मोदी ने क्या कहा था? इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और पेपर लीक के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। जयराम रमेश का भी हमला कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर संसद में चर्चा करने के बजाय सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के बढ़ते दबाव के कारण प्रधानमंत्री को बयान देना पड़ा है। जयराम रमेश ने कहा कि संसद लोकतांत्रिक जवाबदेही का मंच है और प्रधानमंत्री को वहीं आकर विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए। NEET मुद्दे पर जारी है सियासी घमासान NEET पेपर लीक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। एक ओर सरकार फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, जवाबदेही तय करने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग पर अड़ा हुआ है। संसद के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा लगातार हंगामे का कारण बना हुआ है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान 22 जुलाई की रात संसद मार्ग और कनॉट प्लेस क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति पर काबू पाने के लिए भारी पुलिस बल और अर्द्धसैनिक जवानों की तैनाती की गई। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद कर दीं। मुख्य बातें (Key Points) जंतर-मंतर के पास संसद मार्ग पर 22 जुलाई की रात हिंसक झड़प। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पथराव, लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल। झड़प में 2 ACP समेत 5 पुलिसकर्मी घायल। CJP वॉलंटियर्स ने पुलिस बस से प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की। संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल व दंगा-रोधी वाहन तैनात। प्रशासन ने अफवाहों को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कीं। संसद मार्ग पर अचानक भड़की हिंसा 22 जुलाई की रात जंतर-मंतर से सटे संसद मार्ग पर अचानक हालात बिगड़ गए। पार्क होटल के पास बड़ी संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, जिसके बाद कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस बस से वॉलंटियर्स ने की शांति की अपील स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने CJP के स्वयंसेवकों की मदद ली। लाउडस्पीकर लगी पुलिस बस पर सवार होकर वॉलंटियर्स ने प्रदर्शनकारियों से हिंसा रोकने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि पथराव और हिंसा से पूरे आंदोलन की छवि प्रभावित होगी। लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले हालात बेकाबू होने पर पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान दो एसीपी, एक इंस्पेक्टर, एक हेड कॉन्स्टेबल और एक कॉन्स्टेबल सहित कुल पांच पुलिसकर्मी घायल हुए। सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारी, सुरक्षा घेरा और बैरिकेडिंग झड़प के बाद कई प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए। इसके बाद पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल, दंगा-रोधी वाहन और अर्द्धसैनिक जवान तैनात किए गए। जंतर-मंतर से संसद मार्ग की ओर जाने वाले रास्तों को बैरिकेड लगाकर पूरी तरह सील कर दिया गया ताकि हालात दोबारा न बिगड़ें। इंटरनेट सेवाएं बंद, पूरे इलाके में हाई अलर्ट स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने जंतर-मंतर, संसद मार्ग और मध्य दिल्ली के आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दीं। अधिकारियों का कहना था कि यह कदम अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए उठाया गया। पूरे इलाके में सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी बढ़ा दी गई और देर रात तक पुलिस बल तैनात रहा।