1360 – अंग्रेजों और फ्रांसीसियों ने ब्रिटिग्नी समझौते पर हस्ताक्षर किये।
1541 – हरनांदो डे सोटो ने मिसीसिपी नदी की खोज की।
1713 – मस्क्वा की जगह साँक्त पितेरबुर्ग (सेण्ट पीटर्सबर्ग) को रूस की राजधानी बनाया गया था।
1736 - फ्रेडरिक जो के वेल्स के राजकुमार थे, ने सक्से-गोथ की राजकुमारी अगस्ता से शादी की।
1741 – फ्रांस और बावरिया न्यूम्पेनबर्ग प्रसंविदा पर हस्ताक्षर किये।
1773 - मिस्र में, ओट्टोमैन विद्रोहियों ने विद्रोह किया, मिस्र के मल्लुक सुल्तान अली बे की हत्या कर दी।
1794 – नवीन आधुनिक शास्त्र के संस्थापक माने जाने वाले फ़्रांस के वैज्ञानिक एन्टोनिए लावाज़िए को फ़्रांस की क्रान्ति के बाद ग्यूटीन से मृत्यू दंड दिया गया।
1842 – वार्सा से पेरिस जा रही ट्रेन में आग लगने से 50 व्यक्तियों की मौत हुई।
1847 – रबर टायर को रॉबर्ट डब्ल्यू. थॉम्पसन ने पेटेंट करवाया।
1871 – ब्रिटेन और अमेंरिका के मध्य समझौते के बाद अलबामा विवाद समाप्त हुआ।
1874 – आधुनिक शायरी का पहला कवि सम्मेलन आरंभ हुआ। इसका सुझाव मौलाना मुहम्मद हुसैन आज़ाद ने पेश किया।
1886 – डॉक्टर जॉन पेम्बेरटन द्वारा निर्मित कोल्ड-ड्रिंक कोकाकोला का उत्पादन शुरू हुआ था।
1898 – इटालियन फुटबाल लीग का पहला मैच खेला गया।
1901 – आस्ट्रेलियाई लेबर पार्टी की स्थापना की गई।
1903 – दुनिया के पहले जेप्लिन वायुपोत ‘लेबोदी’ ने 37 किलोमीटर की अपनी पहली उड़ान भरी।
1921 – स्वीडन ने फांसी की सजा को खत्म कर दिया।
1933 – महात्मा गांधी ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ 21 दिन का व्रत रखा।
1945 – जर्मनी के हथियार डाल देने के साथ ही दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हो गया।
1954 – केंद्र सरकार ने चंद्रनगर को पश्चिम बंगाल राज्य में शामिल किया।
1962 – रबिन्द्र भारती विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।
1963 – भारतीय रेडक्रास सोसायटी का शताब्दी समारोह मनाया गया।
1980 – विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेचक (स्मॉलपॉक्स) के उन्मूलन की घोषणा की।
1984 – फ्रांस ने आईलेंड पर न्यूक्लियर टेस्ट किया।
1984 – लॉस एंजेलेस में शुरू होने वाले ओलंपिक खेलों से केवल 12 हफ़्ते पहले सोवियत संघ ने ये घोषणा की कि वो इन खेलों का बहिष्कार करेगा।
1997 – चीन की सादर्न एयरलाइंस फ्लाइट 3456 क्रेश हो गई जिसमें 35 लोग मारे गए।
1999 - बेलग्राद स्थित चीनी दूतावास पर नाटो द्वारा प्रक्षेपास्त्रों से हमला।
2000 - भारतीय मूल के 69 वर्षीय लॉर्ड स्वराजपाल ब्रिटेन के चौथे सबसे बड़े विश्वविद्यालय ब्रिटिश यूनीवर्सिटी के कुलपति नियुक्त।
2001 - अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय मादक द्रव्य नियंत्रण बोर्ड से भी बाहर।
2002 - पाकिस्तान दौरा रद्द कर न्यूजीलैंड की टीम स्वदेश लौटी।
2004 - श्रीलंका के मुरलीधरन ने 521 विकेट लेकर सर्वाधिक टेस्ट विकेट लेने का रिकार्ड बनाया।
2006 - संयुक्त राज्य अमेरिका पाकिस्तान को आधुनिकतम पारम्परिक शस्त्र प्रणाली देने पर सहमत।
2010 - छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने दंतेबाड़ा में टाड़मेटला हमले के एक माह बाद बीजापुर- भोपालपट्टनम राष्ट्रीय राजमार्ग-16 पर सीआरपीएफ के बख्तरबंद वाहन को बारूदी सुरंग विस्फोट कर उड़ा दिया। इस घटना में आठ जवान शहीद हो गए। विस्फोट में वहाँ से गुज़र रहे दो नागरिक भी घायल हो गए।
2019 - पाकिस्तान मेन सूफी दरगाह के बाहर आत्मघाती हमला , 10 की मौत।
2019 - बिजनौर में डाकू सुल्ताना के इलाके में दुर्लभ सिक्के मिले।
2020 - भारत और एआईआईबी ने 50 करोड डॉलर की कोविड-19 आपात कार्रवाई और स्वास्थ्य प्रणाली तैयारी परियोजना पर हस्ताक्षर किये।
2020 - वंदे भारत मिशन के अंतर्गत ढाका से 168 भारतीय विद्यार्थियों का पहला दल श्रीनगर पहुंचा, सऊदी अरब से 152 यात्रियों को लेकर एक विमान रात कोजिकोड पहुंचा व आई. एन. एस जलाश्व लगभग साढे सात सौ भारतीयों को लेकर मालदीव से आज कोच्चि के लिए रवाना हुआ।
2020 - मनमाड को जा रही एक मालगाड़ी ने पटरियों पर सो रहे लोगों के एक समूह को टक्कर मारी।19 लोगों में से 14 की घटना स्थल पर ही मौत और गंभीर रूप से घायल 2 लोगों ने बाद में दम तोड़ दिया।
2021- अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के सैयद उल-शुहदा हाई स्कूल के पास हुए धमाके में करीब 90 लोगों की मौत हुई।
2021 - पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मोहमंद जिले में पानी की टंकी ढहने से 7 बच्चों की मौत व एक घायल हुआ।
2021 - भारतीय और इंडोनेशियाई नौसेना ने अरब सागर में युद्धाभ्यास किया।
2021 - भारत-यूरोपीय संघ शिखर बैठक हुई जिसमें पीएम मोदी समेत 27 देशों के नेता शामिल हुए।
2021 - महिला सैन्य पुलिस का पहला बैच भारतीय सेना में शामिल हुआ।
2022 - राजस्थान 10 गीगावॉट सौर क्षमता को पार करने वाला पहला राज्य बना।
2022 - राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट नागपुर (IIM Nagpur) के नए कैंपस का उद्घाटन किया।
2022 - अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी जिल बाइडन युद्ध के बीच अचानक यूक्रेन पहुंची व राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की पत्नी ओलेना जेलेंस्की से मुलाकात की।
2022 - मध्यप्रदेश सरकार ने लाड़ली लक्ष्मी योजना के द्वितीय चरण का शुभारम्भ किया।
2023 - रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने चंडीगढ़ में भारत के प्रथम भारतीय वायु सेना विरासत केंद्र (हेरिटेज सेंटर) का उद्घाटन किया।
2023 - राजस्थान के हनुमानगढ़ में मकान की छत पर मिग-21 गिरने से तीन लोगों की मौत हुई पायलट सुरक्षित रहा।
2023 - भारत के जीवंत राज्य गोवा में भारत की अध्यक्षता में तीसरी जी20 विकास कार्य समूह की बैठक (8 से 11 मई) शुरू हुई।
2023 - कांगो के कालेहे में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या 400 से अधिक होने से राष्ट्रपति फेलिक्स त्सेसीकेदी ने राष्ट्रीय शोक दिवस की घोषणा की।
2024 - हैदराबाद में दर्दनाक हादसा, बारिश में दीवार गिरने से 9 लोगों की मौत हुई।
2025 - पाकिस्तान ने रात में भारत के 15 सैन्य ठिकानों पर हमला किया, भारत ने S400 डिफेंस सिस्टम से नाकाम किया; सुबह हार्पी ड्रोन से पाकिस्तानी डिफेंस सिस्टम तबाह हुआ।
2025 - उत्तराखंड के उत्तरकाशी में गनगनानी के पास एक निजी हेलीकॉप्टर के 200-250 मीटर गहरी खाई में गिरने से बरेली की मां-बेटी सहित 6 लोगों की मौत हुई।
1828 - जीन हेनरी डयूनेन्ट - मानव सेवा के कार्यों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त व्यक्ति।
1895 - गोपबन्धु चौधरी - उड़ीसा के प्रसिद्ध क्रांतिकारी तथा गाँधीवादी कार्यकर्ता।
1916 - स्वामी चिन्मयानंद - भारत के प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक तथा वेदान्त दर्शन के विश्व प्रसिद्ध विद्वान।
1926 - तपन राय चौधरी - प्रसिद्ध इतिहासकार।
1929 - गिरिजा देवी - भारत की प्रसिद्ध ठुमरी गायिका।
1777 - मीर क़ासिम - बंगाल का नवाब।
1899 - वासुदेव चापेकर - भारतीय इतिहास में प्रसिद्ध चापेकर बन्धुओं में से एक थे।
1915 - अमीर चन्द - भारत के स्वतंत्रता सेनानी थे।
1915 - भाई बालमुकुंद - भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले क्रांतिकारियों में से एक थे।
1972 - दामोदरम संजिवैय्या - आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री (08 मई का भी वर्णन मिलता है)।
1982 - आत्माराम रावजी देशपांडे - प्रसिद्ध मराठी साहित्यकार।
1993 - देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय - भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार थे।
2013 - ज़िया फ़रीदुद्दीन डागर - भारत के मशहूर ध्रुपद गायक।
2021 - प्रसिद्ध योग गुरू स्वामी आध्यात्मानंद (77) का कोविड-19 से निधन हुआ।
2021 - मॉस्को ओलंपिक के गोल्ड मेडलिस्ट और पूर्व कोच एम के कौशिक (66) का कोरोना से निधन हुआ।
2021 - मॉस्को ओलिंपिक स्वर्ण पदक विजेता हॉकी खिलाड़ी रविंदर पाल सिंह (60) का कोरोना से निधन हुआ।
2022 - ओडिया साहित्यकार पद्मश्री से सम्मानित रजत कुमार कार (88) का निधन हुआ।
2023 - प्रख्यात बंगला साहित्यकार समरेश मजूमदार (79) का निधन हुआ।
2023 - अमेरिकी फुटबॉल खिलाड़ी, कोच और कार्यकारी जोसेफ रॉबर्ट गार्सिया कप्प (85) का निधन हुआ।
2023 - ब्राज़ीलियाई रॉक गायिका, संगीतकार और गीतकार रीटा ली जोन्स (75) का निधन हुआ।
2024 - संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिनिधि सभा के पूर्व सदस्य पीट मैक्कलोस्की (96) का निधन हुआ।
श्री श्रेयांसनाथ जी गर्भकल्याणक (जैन , ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी)।
स्वामी श्री चिन्मयानंद सरस्वती जयन्ती।
जीन हेनरी डयूनेन्ट (नोबेल शांति पुरस्कार सम्मानित) जयन्ती।
श्री दामोदरम संजिवैय्या स्मृति दिवस (08 मई का भी वर्णन)।
क्रान्तिकारी भाई बालमुकुंद शहीदी दिवस।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जान गंवाने वालों की स्मृति और सम्मान दिवस (8 और 9 मई)।
अन्तर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस दिवस और रेड क्रीसेंट डे।
विश्व थैलेसीमिया दिवस (World Thalassaemia Day)।
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यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
भारत सरकार ने सशस्त्र बलों के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए N S Raja Subramani को देश का नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किया है. वहीं Krishna Swaminathan को भारतीय नौसेना का अगला प्रमुख चुना गया है. दोनों नियुक्तियों को रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. 30 मई के बाद संभालेंगे CDS की जिम्मेदारी सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि मौजूदा CDS Anil Chauhan का कार्यकाल पूरा होने के बाद पद संभालेंगे. जनरल अनिल चौहान 30 मई 2026 को रिटायर हो रहे हैं. CDS बनने के साथ ही एन एस राजा सुब्रमणि सैन्य मामलों के विभाग (Department of Military Affairs) में भारत सरकार के सचिव की जिम्मेदारी भी निभाएंगे. सैन्य नेतृत्व का लंबा अनुभव एन एस राजा सुब्रमणि फिलहाल नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट में मिलिट्री एडवाइजर के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने 1 सितंबर 2025 को यह जिम्मेदारी संभाली थी. इससे पहले वे भारतीय सेना में कई अहम पदों पर रह चुके हैं. जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक उन्होंने आर्मी के वाइस चीफ के रूप में काम किया. वहीं मार्च 2023 से जून 2024 तक वे सेंट्रल कमांड के जीओसी-इन-चीफ रहे. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा सुरक्षा, सामरिक योजना और सैन्य संचालन का उनका अनुभव उन्हें इस पद के लिए मजबूत विकल्प बनाता है. कृष्णा स्वामीनाथन होंगे नए नौसेना प्रमुख सरकार ने वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को भारतीय नौसेना का नया चीफ ऑफ नेवल स्टाफ नियुक्त किया है. वे 31 मई 2026 को अपना नया कार्यभार संभालेंगे. फिलहाल वे मुंबई स्थित वेस्टर्न नेवल कमांड के प्रमुख हैं. उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा. इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के विशेषज्ञ माने जाते हैं स्वामीनाथन कृष्णा स्वामीनाथन 1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे. उन्हें कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का विशेषज्ञ माना जाता है. उन्होंने National Defence Academy, ब्रिटेन के जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, करंजा के कॉलेज ऑफ नेवल वॉरफेयर और अमेरिका के यूएस नेवल वॉर कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से सैन्य शिक्षा प्राप्त की है. रक्षा नेतृत्व में बड़े बदलाव का संकेत रक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार, इन नियुक्तियों से भारत की सैन्य रणनीति और तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन को नई दिशा मिल सकती है. आने वाले समय में सीमा सुरक्षा, समुद्री रणनीति और आधुनिक युद्ध तकनीक पर सरकार का फोकस और मजबूत होने की उम्मीद है.
West Bengal में सत्ता परिवर्तन के बीच बड़ा संवैधानिक कदम उठाया गया है. राज्यपाल Ravi Narayan ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी कर दिया. इसके साथ ही निवर्तमान मुख्यमंत्री Mamata Banerjee समेत पूरी मंत्री परिषद को भी बर्खास्त कर दिया गया है. राजभवन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला लिया. मुख्य सचिव दुष्मंत नारियाला ने भी इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी किया. दो दिन तक राज्यपाल संभालेंगे कार्यभार सूत्रों के अनुसार, नई सरकार के शपथ ग्रहण तक अगले दो दिनों के लिए राज्य का प्रशासनिक कार्यभार राज्यपाल के अधीन रहेगा. इस फैसले के साथ ही पश्चिम बंगाल की 17वीं विधानसभा का कार्यकाल औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है. अब नवनिर्वाचित विधायकों के साथ 18वीं विधानसभा के गठन का रास्ता साफ हो गया है. ममता बनर्जी ने जताई नाराजगी सरकार भंग होने से पहले ममता बनर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उनकी पार्टी चुनाव “हारी नहीं”, बल्कि “100 सीटें छीनी गई हैं.” राजनीतिक हलकों में इसे चुनावी नतीजों और सत्ता परिवर्तन पर उनकी नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी इस्तीफे को लेकर भी सहज नहीं थीं और पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर लगातार चर्चा चल रही थी. ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होगा शपथ ग्रहण नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह शनिवार को Brigade Parade Ground में आयोजित किया जाएगा. कार्यक्रम को भव्य बनाने की तैयारी चल रही है. शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के शामिल होने की संभावना है. इसके अलावा भाजपा शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रह सकते हैं. सुरक्षा के कड़े इंतजाम कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं. शपथ ग्रहण समारोह की सुरक्षा की जिम्मेदारी एसपीजी और Kolkata Police के पास होगी, जबकि ब्रिगेड मैदान के बाहर केंद्रीय बल तैनात रहेंगे. राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अब सबकी नजर नई सरकार के गठन और उसके शुरुआती फैसलों पर टिकी हुई है.
समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने एक बार फिर राजनीतिक संकेतों से भरी पोस्ट कर सियासी हलचल तेज कर दी है. अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर M. K. Stalin और Mamata Banerjee के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हुए कांग्रेस पर इशारों में निशाना साधा. उन्होंने पोस्ट में लिखा, “हम वो नहीं जो मुश्किलों में साथ छोड़ दें.” इस एक लाइन को विपक्षी राजनीति और हाल के चुनावी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है. कांग्रेस के फैसले के बाद बढ़ी सियासी चर्चा अखिलेश यादव की यह पोस्ट ऐसे समय आई है जब तमिलनाडु में कांग्रेस ने चुनाव बाद डीएमके से दूरी बनाते हुए टीवीके (TVK) को समर्थन देने का फैसला किया है. कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव डीएमके के साथ मिलकर लड़ा था, लेकिन नतीजों के बाद पार्टी ने अपना रुख बदल लिया. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, हालांकि उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला. इसके बाद सरकार गठन को लेकर लगातार राजनीतिक जोड़तोड़ जारी है. बंगाल के संदर्भ में भी बड़ा संदेश अखिलेश यादव की पोस्ट को पश्चिम बंगाल की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है. हाल ही में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद कांग्रेस नेताओं के कुछ बयानों पर विपक्षी दलों के बीच असहजता देखी गई थी. इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को नसीहत दी थी कि वे तृणमूल कांग्रेस की हार का मजाक न उड़ाएं. विपक्षी एकता पर नया संदेश? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव की यह पोस्ट विपक्षी दलों के बीच भरोसे और साथ निभाने का संदेश देने की कोशिश है. ममता बनर्जी और स्टालिन दोनों ही INDIA गठबंधन के प्रमुख चेहरे माने जाते हैं, ऐसे में अखिलेश का यह बयान कांग्रेस की रणनीति पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है. तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच यह पोस्ट विपक्षी राजनीति में नए समीकरणों की ओर भी इशारा कर रही है.